मूल बरखा श्रृंखला के बारे में बरखा शृंखला एनसीईआरटी के प्रारंभिक शिक्षा विभाग द्वारा मूल रूप से विकसित की गई एक पूरक 'क्रमिक पठन शृंखला' है। यह श्रृंखला आरंभिक वर्षों के दौरान बच्चों में अच्छे पठन कौशल का विकास करने के उद्देश्य से बनाई गई थी। अनुसंधान बताते हैं कि केवल विनिर्दिष्ट पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से पाठ्यक्रम पढ़ाने पर आधारिक ज्ञान से केवल तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त होती है किन्तु पढ़ने की आदत और इच्छा का विकास एक सीमित रूप में ही होता है। अतः यह आवश्यकता महसूस की गई कि पाठ्यपुस्तकों से परे जाकर पूरक पठन के महत्त्व को रेखांकित किया जाए। इसका अवधारणात्मक आधार यह है कि यदि प्रारंभ से ही बच्चे सार्थक और विनोदपूर्ण ढंग से कहानियाँ पढ़ें तो वे अच्छी तरह पढ़ना सीखेंगे और इस प्रक्रिया का आनंद लेंगे और इस तरह सफल पाठक बनेंगे। 'बरखा शृंखला' एक शिक्षा शास्त्रीय उपकरण है जिसका उद्देश्य कक्षा I और II के बच्चों को सार्थक रूप से पढ़ना सिखाने तथा उनमें अधिक पढ़ने की इच्छा को जगाने में सहायता करना है। बरखा श्रृंखला में 40 कहानियाँ हैं जो चार स्तरों (स्तर 1, स्तर 2, स्तर 3, स्तर 4) और पाँच मूल विषयों (संबंधों, पशु-पक्षियों, संगीतमय यंत्रों, खेल और खिलौनों, हमारा परिवेश तथा खाना) में व्याप्त है। ये कहानियाँ बच्चों के सन्दर्भो और उनके दैनिक अनुभवों को लेकर बुनी गई हैं। बरखा के सभी पात्र छोटे बच्चे हैं जिनकी आयु हमारे भावी पाठकों के समान है। शृंखला की प्रत्येक कहानी ऐसी किसी छोटी सी घटना अथवा वस्तु के आसपास घूमती है जो इस आयु वर्ग के बच्चों को बहुत रुचिकर और रोमांचक लगती है। जैसे ही हम स्तरों में और ऊपर बढ़ते हैं वाक्यों की संख्या और कथानक की जटिलता बढ़ती जाती है। प्रत्येक पृष्ठ पर सजीव चित्र दिए गए हैं ताकि बच्चे लिखित पाठ के साथ संबंध स्थापित कर सकें । बरखा श्रृंखला को देखने के लिए क्लिक करें। पहल का विहंगावलोकन एनसीईआरटी का विशेष आवश्यकता समूह शिक्षा विभाग पिछले दो दशकों से विशेष आवश्यकता (सीडब्ल्यूएसएन) वाले बच्चों और सामाजिक रूप से पिछड़े समूहों जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अल्पसंख्यक शामिल हैं, से संबंध रखने वाले बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। शिक्षा की एक समावेशी प्रणाली का कार्यान्वयन सभी शैक्षिक पहलों के केन्द्र में रहा है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि विभाग प्रारंभिक कक्षाओं के बच्चों के लिए ऐसी पठन सामग्री तैयार कर रहा है जो समावेशी परिवेश में विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों सहित 'सभी' बच्चों को सुलभ होगी। इसका उद्देश्य बच्चों के विकास के आरंभिक वर्षों में उनकी विशेष आवश्यकताओं को सम्बोधित करना है। “अडैप्टिंग द बरखा सीरीज़ फॉर वीजुअली चैलेंज्ड चिल्ड्रन एण्ड अदर सीडब्ल्यूएसएन अकार्डिंग टू यूडीएल” नामक मानव संसाधन विकास मंत्रालय की परियोजना के अन्तर्गत सुपुर्द किए गए इस कार्य के द्वारा विभाग उन सभी बच्चों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए पढ़ने की प्रक्रिया में एक समान सुलभता प्रदान करने के लिए प्रयासरत है जो अपनी विशेष आवश्यकताओं के कारण व्यापक रूप से बहिष्कृत कर दिए जाते हैं। बरखा शृंखला' के अनुकूलन की आवश्यकता समावेशी शिक्षा की एक प्रमुख विशेषता एक ऐसी पाठ्यचर्या की व्यवस्था है जिसमें प्रत्येक बच्चे के लिए उपयुक्त शिक्षण अधिगम सामग्री तथा विभिन्न विकासात्मक स्तरों पर विशेष अधिगम आवश्यकताओं, विशिष्टताओं, रुचियों और सामर्यों को शामिल किया जाए। अधिगम अशक्तता, वाक् अथवा भाषा विकार, श्रव्य अथवा दृश्य क्षीणता, शारीरिक विकलांगता, स्वलीनता वर्णक्रम विकास (एएसडी), अटेन्शन डेफिसिट हाइपर एक्टिविटी विकृति (एडीएचडी) अथवा किसी अन्य प्रकार की विकलांगता वाले बच्चों को बहुधा शिक्षण अधिगम सामग्री में विशेष रूप से अपनाते हुए रूपान्तरित और अनुकूलन करने की आवश्यकता होती है। यह शृंखला समावेशन की प्रकृति के अनुसार मूल बरखा शृंखला में यूडीएल के नियमानुसार प्रभावकारी परिवर्तन लाने के लिए प्रयासरत है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पठन प्रक्रिया के प्रति विकलांगता वाले बच्चों को भी आकर्षित किया जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य विविध पठन आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर प्रत्येक बच्चे तक सुविधाजनक रूप से यह पठन सामग्री सुलभ हो सके । मूल 'बरखा' के सार को बनाए रखते हुए इस नए रूपान्तरण में बहुत सी अतिरिक्त विशेषताओं को समाहित किया गया है ताकि सभी' बच्चों की कहानियों तक पूरी पहुँच बन सके और वे उन्हें साथ मिलकर पढ़ सकें। बरखा : एक पठन शृंखला 'सभी के लिए' का उद्देश्य पठन प्रक्रिया में अधिकतम प्रतिभागिता का विकास करने तथा प्रारंभिक वर्षों में प्रत्येक बच्चे के लिए सार्थक एवं विनोदपूर्ण पठन की पहल करना है। बरखा शृंखला' से बरखा : एक पठन शृंखला 'सभी के लिए' तक का सफर बरखा शृंखला' से बरखा : एक पठन शृंखला 'सभी के लिए' के सफर में बहुत से विशेषज्ञों से योगदान प्राप्त हुआ है। विभाग ने संवेदन, बोधन और गति-विषयक विकलांगताओं जिसमें दृश्य और श्रवण क्षीणता, स्वलीनता, अधिगम निशक्तता, बौद्धिक निशक्तता, बहुविकलांगताएं और सैलेब्रल पालसी जैसी विकृतियाँ शामिल हैं, के क्षेत्र में कार्यरत देशभर में से 185 विशेषज्ञों (राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय) के विविध अनुशासनों वाले दल के साथ क्रमिक राष्ट्र स्तरीय कार्यशालाएं आयोजित की हैं। इन कार्यशालाओं में शिक्षक प्रशिक्षकों, विशेष प्रशिक्षकों, विशेष विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, एनसीईआरटी संकाय, यनिसेफ तथा सर्व शिक्षा अभियान के प्रतिनिधि दृष्टि विकारों वाले बच्चों के लिए स्पर्शनीय सामग्री का विकास करने वाले पेशेवर व्यक्तियों, सीआईईटी के निर्माणदल, सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों, साइन कलाकारों, साइन वेटिंग विशेषज्ञों और श्रव्य कलाकारों ने प्रतिभागिता की। मूल बरखा शृंखला के लेखक और चित्रकार भी इन कार्यशालाओं का हिस्सा बने। दो दिवसीय पूर्व योजना कार्यशाला (21 से 22 जुलाई 2015)दृश्य अक्षमता का सामना करने वाले बच्चों के लिए। श्रृंखला के रूपांतरण पर तीन दिवसीय कार्यशाला(22 से 24 सितम्बर 2015)श्रवण अक्षमता, सेलेब्रल पालसी और एक साथ कई अक्षमताओं का सामना करने वाले बच्चों के लिए शृंखला के रूपांतरण पर तीन दिवसीय कार्यशाला - (3 से 5 नवम्बर 2015)बौद्धिक रूप से अक्षम, अपने में डूबे रहने वाले और सीखने में मुश्किलों का सामना कर रहे बच्चों के लिए श्रृंखला के रूपांतरण पर तीन दिवसीय कार्यशाला -(7 से 9 अक्टूबर 2015) इन कार्यशालाओं का उद्देश्य मुख्य रूप से मूल बरखा श्रृंखला की अन्तर्वस्तु तथा चित्रों को स्पर्शनीय, श्रव्य तथा अन्य रूपों में रूपान्तरित करना था ताकि ये यूडीएल के अनुसार विकलांगता वाले बच्चों के लिए सुलभ बन सकें। इन कार्यशालाओं का उद्देश्य अभिभावकों और शिक्षकों के लिए दिशा निर्देशों व सुझावों के लिए एक पुस्तिका का विकास करना भी था । विशेषज्ञ संसाधक व्यक्तियों ने इस कार्यशाला में भाग लेने से पूर्व अपने संबंधित संस्थानों में मूल बरखा का एक पूर्व परीक्षण किया था। कार्यशालाओं के दौरान विशेषज्ञ संसाधक व्यक्तियों ने विविध अशक्तता वाले समूहों की विशिष्ट आवश्यकताओं का चित्रण किया तथा यूडीएल के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए श्रृंखला में अतिरिक्त उपयुक्त विशेषताओं के लिए तद्नुसार सुझाव दिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रत्येक कहानी में 'कहानी का परिचय' जोड़ा जाए ताकि बच्चों में अधिक जिज्ञासा एवं रुचि उत्पन्न हो सके। रूपांतरित श्रृंखला में अतिरिक्त विशेषताओं को सूत्रबद्ध करने के लिए डीईजीएसएन टीम ने इन कार्यशालाओं से प्राप्त आँकड़ों का गहन विश्लेषण किया। एक कार्यशाला मोड के माध्यम से सीआईईटी के सहयोग से 'कहानी के परिचय' की नियमित एवं साइन रूपों में वीडियो रिकार्डिंग की गई। साईन तथा श्रव्य कलाकारों एवं साइन वेटिंग विशेषज्ञों से सुझाव लिए गए। इन वीडियो फिल्मों को डिजीटल रूपान्तरणों के परिचय में शामिल किया गया। कार्यशालाओं से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर सभी 40 पुस्तिकाओं के लिए हिन्दी तथा अंग्रेजी में शिक्षकों एवं अभिभावकों के लिए एक टिप्पणी विकसित की गई। मुद्रक और डिजीटल विशेषज्ञों के साथ कहानी की पुस्तिकाओं के लिए स्पर्शनीय आरेखों और फ्लैशकार्ड्स को अन्तिम रूप देने के लिए परामर्शी बैठकें की गईं। कार्यशालाओं के विश्लेषित आंकड़ों के आधार पर निश्चित एजेंसियों द्वारा बरखाः एक पठन शृंखला 'सभी के लिए' की प्रिंट में चार और डिजिटल में 40 नमूना प्रतियां तैयार की गई -नमूने के रूप में तैयार इन पुस्तिकाओं को दिल्ली, जयपुर, जमशेदपुर और भुवनेश्वर के विभिन्न समावेशी विद्यालयों, विशेष आवश्यकता समूह के बच्चों के साथ परखा गया। इसी संदर्भ में इन सभी शहरों में एक दिन की क्षमता निर्माण कार्यशाला (capacity building workshop) का आयोजन किया गया ताकि अध्यापकों और प्राध्यापकों को इस परीक्षण अभ्यास के बारे में समझाया जा सके। इन संस्थानों के बच्चों से प्राप्त हुए मूल्यवान सुझावों को शामिल करते हुए बरखाः एक पठन शृंखला 'सभी के लिए के प्रिंट और डिजिटल संस्करण को अंतिम रूप दिया गया। बरखा : एक पठन शृंखला 'सभी के लिए' बरखा : एक पठन शृंखला ‘सभी के लिए’ मूल श्रृंखला के समान ही मुद्रित और डिजीटल दोनों रूपों में उपलब्ध है। इसमें चार स्तरों और पाँच मूल विषयों में व्याप्त 40 कहानियों की पुस्तिकाएं हैं जो प्राथमिक स्तर पर सभी बच्चों की पठन आवश्यकताओं को पूरा करती है। इसे प्रारंभिक वर्षों के दौरान 'सभी' बच्चों के लिए पठन प्रक्रिया में अधिकतम प्रतिभागिता को विकसित करने के उद्देश्य से अतिरिक्त विशिष्टताओं के माध्यम से पूरा किया जा रहा है। मुद्रित (प्रिंट) कहानी पुस्तिकाओं और डिजीटल रूपान्तरणों में ये विशिष्टताएं निम्न प्रकार सूचिबद्ध हैं । मुद्रित (प्रिंट) रूपान्तरण की विशेषताएँ मुद्रित (प्रिंट) और ब्रेल में दिया गया पाठ एक ही पृष्ठ पर उपलब्ध है। ब्रेल पाठ को शामिल करने के लिए कोई अतिरिक्त पेज नहीं जोड़ा गया है। इससे यह पाठ सभी बच्चों के लिए सुलभ बन जाता है। यहाँ प्रयोग की गई ब्रेल अदृश्य और टिकाऊ है। दृश्यों की समान संरचना परी कहानी तथा अन्र कहानियों में उपलब्ध करवाई गई है ताकि स्पर्शनीय अनुभवों को सशक्त बनाया जा सके। सभी चारों पावों पर काला बार्डर दिया गया है ताकि पाठ और दृश्यों की ओर ध्यान आकर्षित किया जा सके। प्रत्येक कहानी में प्रमुख शब्दों के फ्लैशकार्ड दिए गए हैं ताकि वास्तविक चित्रों के माध्यम से शब्द को संपुष्ट किया जा सके। यह उसी पृष्ठ परएक विन्डो में दिए गए हैं। काले बार्डर पर तीर के निशान दिए गए हैं जोअगले पृष्ठ की ओर संकेत करते हैं। इससे बच्चों के लिए पुस्तक के पृष्ठों को बदलना आसान हो जाता है। वाक्य की शुरूआत और अंत की ओर संकेत करने के लिए हरा और लाल बिंदु दिया गया है। तीसरे और चौथे स्तर में दो पंक्तियों के बीच जगह छोड़ी गई है ताकि बच्चों को अगली पंक्ति पर जाने में आसानी हो। प्रत्येक कहानी के अंत में शिक्षकों एवं अभिभावकों की सहायता के लिए टिप्पणी को शामिल किया गया है ताकि कक्षा तथा घर पर आरंभिक पठन प्रक्रिया को सुविधाजनक बनायाजा सके। मुद्रित (प्रिंट) पुस्तिका A4 आकार के मोटे कागज 220 जीएसएम में बनाई गई है। ताकि बच्चोंके लिए प्रत्येक पृष्ठ को बदलना आसान हो जाए। पुस्तक में प्रत्येक पृष्ठ पर प्रमुख दृश्य हाई रेजोल्यूशन में बनाए गए हैं। इससे बच्चे को कहानीकी मुख्य घटनाओं पर ध्यान केन्द्रित करने में सहायता मिलती है। पुस्तिका में पृष्ठ अनुक्रम दिया गया है जिससे बच्चों को पृष्ठ बदलने में आसानी होगी। सुरक्षित और टिकाऊ जिल्द ('वायरो' जिल्द) का प्रयोग किया गया है। डिजीटल रूपान्तरण की विशेषताएँ इस डिजीटल रूपान्तरण का प्रयोग कम्प्यूटर, लैपटॉप, मोबाईल फोन और टैबलेट के माध्यम से किया जा सकता है। ये वैकल्पिक डिजीटल फॉर्मेट अधिक सुलभता और संवर्धनीय पठन अनुभव उपलब्ध करवाते हैं। बच्चों की जिज्ञासा बढ़ाने और पठन को रूचिकर बनाने के लिए प्रत्येक कहानी में एक 'कहानी का परिचय' विडियो फॉर्मेट में दिया गया है। यह साइन भाषा विडियो के रूप में भी उपलब्ध है। पुस्तक में प्रत्येक पृष्ठ पर प्रमुख दृश्य हाई रेज़ोल्यूशन में बनाए गए हैं। इससे बच्चे को कहानीकी मुख्य घटनाओं पर ध्यान केन्द्रित करने में सहायता मिलती है। प्रत्येक कहानी में पाठ और पृष्ठभूमि तीन रंगों में दी गई है ताकि बच्चा अपनी दृश्य प्राथमिकता और आवश्यकता के अनुसार विषयवस्तु देख सके। प्रत्येक कहानी में प्रमुख शब्दों के लिए फ्लैशकार्ड दिए गए हैं ताकि शब्द कोवास्तविक चित्रों के माध्यम से संपुष्ट किया जा सके। चारों पार्यों पर काला बार्डर दिया गया है ताकि पाठ और दृश्यों की ओरध्यान आकर्षित किया जा सके। काले बार्डर पर तीर का निशान दिया गया है जो पिछले और अगले पृष्ठ की ओर संकेत करता हैं। इससे बच्चे के लिए पुस्तक के पृष्ठों को बदलना आसान हो जाता है। वाक्य की शुरूआत और अंत की ओर संकेत करने के लिए हरा और लाल बिंदु दिया गया है। तीसरे और चौथे स्तर में दो पंक्तियों के बीच जगह छोड़ी गई है ताकि बच्चों को अगली पंक्ति पर जाने में आसानी हो। प्रत्येक कहानी में शिक्षकों एवं अभिभावकों की सहायता के लिए टिप्पणी को शामिल किया गया है (अंग्रेजी तथा हिंदी में) ताकि कक्षा तथा घर पर आरंभिक पठन प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाया जा सके। इसे एक अनुकूल पैकेजिंग दी गई है ताकि बच्चे पठन का चुनाव अपनी इच्छानुसार कर सकें। चालीस कहानियों की पुस्तक के आवरण पृष्ठ को जिसपर सभी चालीस पुस्तिकाओं के शीर्षक दिए गए हैं, पुस्तक-शेल्फ में दर्शाया गया है। स्त्रोत : विशेष आवश्यकता समूह शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, अरविंदो मार्ग, नई दिल्ली ।