साक्षर भारत मिशन 2012: अवधारणा जैसा कि सभी जानते हैं निरक्षरता एक अभिशाप है। यह गरीबी, बीमारी, बदहाली का एक बड़ा कारक है। इसके कारण अंधविश्वास, पिछड़ापन आदि का बढ़ावा मिलता है। समाज में कई तरह की रूढ़ियों, असमानताओं, लिंग भेद, ठगी तथा शिक्षा के प्रति उदासीनता में निरक्षरता के कारण एक बड़ी आबादी विकास के लाभ से वंचित रह जाती है जिससे समाज पिछड़ापन और बदहाली से बाहर नहीं निकल पाता। यही कारण है कि निरक्षता उन्मूलन के लिए कई कार्यक्रम चलाये गए, कुछ उपलब्धियां भी सामने आई., इसके बावजूद आज भी निरक्षरता राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय है। विशेषकर महिला और पुरुष की साक्षरता दर में भारी अंतर है। महिलाएं साक्षरता के क्षेत्र में काफी पिछड़ी हुई हैं। अनुसूचित जाति, जनजाति तथा अल्पसंख्यक समुदाय में तो महिला साक्षरता दर काफी कम है। इन समुदायों में साक्षरता दर बढ़ाये बिना राष्ट्रीय साक्षरता दर में अपेक्षित वृद्धि नहीं प्राप्त की जा सकती है न ही इनके जीवन स्तर को बेहतर बनाया जा सकता है। वहीं बेहतर साक्षरता दर प्राप्त करने के लिए इन वर्गों के जीवन-स्तर में सुधार के लिए भी कोशिश करनी होगी। अतः साक्षरता के साथ-साथ कौशल विकास पर बल देते हुए “साक्षर-भारत” कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इससे सम्बन्धित उल्लेखनीय तथ्य निम्नांकित है- अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 8 सितम्बर 2009 को “साक्षर-भारत” कार्यकम का शुभारंभ किया गया। “साक्षर-भारत” राष्ट्रीय साक्षरता मिशन का नया कार्यक्रम है। इसके अंतर्गत 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के असाक्षरों को आच्छादित किया जायेगा। राष्ट्रीय स्तर पर 80 प्रतिशत साक्षरता दर प्राप्त की जाएगी। साक्षरता दर में वर्तमान लैंगिक अंतर को कम करते हुए 10 प्रतिशत तक लाया जायेगा। इस कार्यक्रम के केंद्र में महिलाएं हैं। इसका लक्ष्य प्रौढ़ शिक्षा, विशेष रूप से महिलाओं की प्रौढ़ शिक्षा को समुन्नत और सुदृढ़ करना है। इस कार्यक्रम में बुनियादी साक्षरता, उत्तर साक्षरता तथा सतत शिक्षा के चरणों को एक साथ संचालित किया जायेगा। बुनियादी साक्षरता के लिए लचीली प्रक्रिया अपनायी जाएगी। वयस्कों को कार्यात्मक साक्षरता प्रदान की जाएगी। नवसाक्षरों को सतत रूप से सीखने का तथा समकक्षता प्राप्त करने का अवसर दिया जायेगा। नवसाक्षरों को विभिन्न हुनर प्रदान करते हुए उनके जीवन की गुणवत्ता एंव कार्य परिस्थिति में सुधार किया जायेगा। साथ ही आपस में हुनर की आदान-प्रदान का अवसर भी नवसाक्षरों को प्राप्त होगा। हुनर/कौशल विकास कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधन तथा उपलब्ध मास्टर क्राप्टमैन/कुशल व्यक्तियों के आधार पर संचालित होगा। जीवनपर्यन्त सीखने का अवसर प्रदान करते हुए एक अध्ययनशील समाज के निर्माण का आधार तैयार किया जायेगा। महिलाओं/ अनुसूचित जाति/ जनजाति/अल्पसंख्यकों, अन्य वंचित समूहों तथा ग्रामीण क्षेत्रों के किशोरों/किशोरियों पर विशेष ध्यान दिया जायेगा। इसमें स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी भी शामिल है। लोक शिक्षा केद्रों से सम्बंधित प्रौढ़ शिक्षा केन्द्रों तथा साक्षरता कक्षाओं (स्वंयसेवक के माध्यम से) में साक्षरता प्रदान की जायेगी। साक्षरता कक्षाएं असाक्षरों की सुविधानुसार तय स्थान पर आयोजित होंगी। शिक्षा और साक्षरता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ प्राथमिक/बुनियादी शिक्षा के प्रति जन समुदाय को प्रेरित किया जायेगा। साक्षरता कक्षा सिंगल टीचर/(एकल स्वयंसेवक) विद्यालय की तरह है जो टोले-मुहल्ले में समुदाय द्वारा उपलब्ध कराये गये स्थान पर चलेगी। लोक शिक्षा केंद्र ग्राम पंचायत स्तर पर 5,000 (वर्तमान में प्रति पंचायत एक) की आबादी के लिए बहुद्देशीय सतत शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित होंगे, जिसमें दो प्रेरक कार्य करेंगे। पंचायत लोक शिक्षा समिति जन सहयोग से शिक्षा केन्द्रों के लिए भवन की व्यवस्था करेगी। लोक शिक्षा केंद्र साक्षरता कक्षाओं के लिए संस्थागत तथा प्रबंधकीय सहयोग प्रदान करेगा। लोक शिक्षा केंद्र ग्राम पंचायत स्तर पर स्थापित होंगे जो साक्षर भारत कार्यक्रम की गतिविधियों का प्रबंधन तथा समन्वय करेंगे। त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाएँ यथा-ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एंव जिला परिषद साक्षर भारत कार्यक्रम संचालन की मुख्य एजेंसी हैं। साक्षरता के लिए लचीला विधियाँ-स्वयं-सेवक आधारित जन अभियान, लचीली समय सारणी, एक वर्ष की अवधि, आवासीय शिविर, आंशिक आवासीय तथा स्वयंसेवक आधारित प्रक्रिया आदि अपनायी जाएँगी। साक्षर भारत कार्यक्रम का समन्यव एवं पर्यवेक्षण राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण द्वारा किया जायेगा। साक्षर भारत कार्यक्रम वैसे जिलों में चलाया जा रहा है जहाँ महिला साक्षरता (2001 जनगणना) दर 50% से कम है। इस दृष्टिकोण से बिहार राज्य के सभी जिला में साक्षर भारत कार्यक्रम लागू होगा। साक्षर भारत के मुख्यतः चार आयाम निर्धारित किये गए हैं- असाक्षर वयस्कों को कार्यात्मक साक्षरता और गणित की जानकारी देना। नवसाक्षर वयस्कों को उनकी बुनियादी साक्षरता से आगे की शिक्षा जारी रखने तथा औपचारिक शिक्षा व्यवस्था के समतुल्य शिक्षा ग्रहण करने योग्य बनाना। जीवन स्तर तथा आर्थिक स्थिति में सुधार लाने हेतु नवसाक्षरों और असाक्षरों में आवश्यक कौशल विकसित करना। नवसाक्षर वयस्कों के साथ-साथ पंचायत की पूरी आबादी को सतत शिक्षा के लिए अवसर प्रदान करते हुए अध्ययन समाज की ओर अग्रसर करना। उपरोक्त आयामों को ध्यान में रखकर कार्यक्रम की सफलता के लिए निम्नलिखित रणनीति निर्धारित की गई है – पंचायत स्तर पर लोक शिक्षा केंद्र की स्थापना। साक्षरता प्रदान करने के लिए स्वंयसेवक आधारित साक्षरता-केन्द्रों की स्थपना जिसमें 10 असाक्षरों को एक स्वयंसेवक पढ़ाएंगे। साक्षरता हासिल करने में लचीलापन लाते हुए आवासीय साक्षरता शिविर, आंशिक साक्षरता शिविर आदि का आयोजन। लोक शिक्षा केंद्र की अवधारणा लोक शिक्षा केंद्र पंचायत के बहुआयामी विकास का एक महत्वपूर्ण केंद्र होगा। इसके माध्यम से न केवल असाक्षर होंगे बल्कि यह समाज के हर तबके के लोगों को एक मंच से जोड़कर उन्हें अपनी प्रतिभा एंव कौशल दिखाने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगा। छात्र/किसान/व्यवसायी/सरकारी व प्राइवेट सेवक/कलाकार एवं संस्कृतिककर्मी अपने-अपने क्षेत्र में प्राप्त दक्षता को प्रदर्शित एंव विकसित कर सकेंगे। एक ओर जहाँ यह केंद्र सूचना-प्रसार का माध्यम होगा वहीँ दूसरी ओर समुदाय को सरकार द्वारा चलाये जा रहे विभन्न विकासात्मक योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध करायेगा, साथ ही स्वरोजगार को प्रोत्साहन देने के लिए लघु एवं कुटीर उद्योगों को (स्थानीय परिवेश में उपलब्ध संसाधनों एवं कुशल करीगरों के सहयोग से) स्थापित कर बदहाली से त्रस्त समाज/समुदाय के जीवन स्तर को उठाने में मील का पत्थर साबित होगा। यह साक्षर-भारत के कार्यक्रमों की गतिविधियों को संचालित करते हुए ज्ञानमूलक समाज की स्थापना के लिए एक खुला मंच होगा। साक्षर भारत के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रत्येक 5,000 की आबादी (वर्तमान में प्रति पंचायत एक) पर एक लोक शिक्षा केंद्र की स्थपना की जायेगी। केंद्र के संचालन के लिए दो पूर्णकालिक प्रेरक होंगे, जो कार्यक्रम को प्रबंधकीय सहयोग देने के अतिरिक्त आवश्यक संसाधन के उपलब्ध कराने में मदद करेंगे। लोक शिक्षा केंद्र की गतिविधियाँ लोक शिक्षा केंद्र अपनी सजीव उपस्थिति से पंचायत के स्त्री-पुरुष और बच्चों को आकृष्ट करेगा। यहाँ से निम्नलिखित गतिविधियाँ संचालित की जाएँगी जिनमें स्थानीय लोगों की अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। पठन-पाठन केंद्र कौशल विकास प्रशिक्षण पुस्तकालय/वाचनालय सूचना केंद्र चर्चा मंडल मनोरंजन/खेलकूद की गतिविधियाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम समतुल्य कार्यक्रम साक्षरता केन्द्रों का प्रबोधन उपर्युक्त गतिविधियों के माध्यम से लोक शिक्षा केंद्र अंततः ज्ञानमूलक समाज का निर्माण करने की ओर अग्रसर होगा। लोक शिक्षा समिति: गठन, भूमिका एंव कार्य लोक शिक्षा केंद्र एक बहुआयामी केंद्र है। इसकी गतिविधियाँ को संचालित करने के लिए पंचायत स्तर पर एक लोक शिक्षा समिति गठित होगी जिसकी देखरेख में लोक-शिक्षण केंद्र संचालित होगा। समिति का स्वरुप निम्नवत है- अध्यक्ष मुखिया उपाध्यक्ष सरपंच पंचायत द्वारा चुनी गई महिला सदस्य 02 पंचायत मुख्यालय के मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक 01 अनु०जा०/ज०जा०, अ० सं०, पि०जा० समुदाय के प्रतिनिधि (पंचायत में उपलब्ध आबादी को ध्यान में रखकर) 03 ग्राम शिक्षा समिति (विद्यालय की) के सदस्य सचिव 01 स्वयं सहायता समूह के सदस्य 01 लाभुक समूह के सदस्य 02 सामाजिक कार्यकर्त्ता 01 पंचायत के साक्षरताकर्मी/शिक्षाविद/डॉक्टर/ सरकारी सेवक (कार्यरत या सेवा निवृत) 01 सदस्य सचिव वरीय प्रेरक (उपरोक्त समिति में 50% महिलाओं का होना अपेक्षित है) पंचायत लोक शिक्षा समिति की भूमिका एवं कार्य ग्राम पचायत स्तर पर लोक शिक्षा समिति सम्बन्धी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र होगी। इसकी निश्चित भूमिका एवं कार्य होंगे जो निम्नवत हैं_ लोक शिक्षा केंद्र के लिए स्थल का चयन प्रेरक का चयन खाता खोलना प्रेरक प्रशिक्षण के आयोजन में सहयोग सर्वेक्षण स्वयंसेवकों की पहचान असाक्षरों एवं स्वयंसेवकों के बीच मैचिंग-बैचिंग स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण पठन-पाठन सामग्री की उपलब्धता लोक शिक्षा केंद्र एवं साक्षरता केन्द्रों का नियमित प्रबोधन शिशिक्षु मूल्यांकन/परीक्षा समकक्षता परीक्षा की व्यवस्था अपने क्षेत्र के लिए साक्षरता तथा कौशल विकास सम्बन्धी योजनाओं का निर्माण लोक शिक्षा केंद्र पर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन लोक शिक्षा केंद्र पर सामुदायिक भागीदारी हेतु प्रयास करना लोक शिक्षा केंद्र पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना। साक्षर भारत मिशन 2012 के अंतर्गत लोक शिक्षा केंद्र की स्थापना एंव संचालन एक पंचायत में कई गाँव होते हैं। किसी पंचायत की आबादी पांच हजार से दस हजार तक भी है,अच्छा होता कि हर गाँव में लोक शिक्षा केंद्र खुलते परन्तु साक्षर भारत योजना के तहत तत्काल हर पंचायत में केवल एक ही लोक शिक्षा केंद्र खोलने का प्रावधान है, भविष्य में 5000 की आबादी पर एक केंद्र चलाने की योजना है। पंचायत लोक शिक्षा समिति को ही करनी है। लोक शिक्षा केंद्र की गतिविधियों तथा उपयोगिता को ध्यान में रखकर यह कोशिश करनी होगी कि यह केंद्र अच्छी तरह काम करे और अपने उद्देश्यों की वास्तविक रूप में पूर्ति करे। प्रत्येक केंद्र को एक आदर्श केंद्र के रूप में चलाना चाहिए। पंचायत लोक शिक्षा समिति के स्वविवेक, समझ और अथक प्रयास से ही यह संभव है। अतः पूरे पंचायत क्षेत्र के अंदर उपयुक्त स्थान पर उपयुक्त भवन का चयन एवं व्यवस्था करना पहला महत्वपूर्ण कार्य है। लोक शिक्षा केंद्र खोलने हेतु उपयुक्त स्थान एवं स्थान एवं भवन की व्यवस्था के लिए यद्यपि कुछ सुझाव नीचे दिए गए हैं, तथापि पंचायत की पूरी आबादी के लिए सबसे सुलभ एवं सुविधाजनक स्थल, भवन का चयन पंचायत समिति की सार्थक एवं विवेकपूर्ण पहल पर निर्भर करेगा। लोक शिक्षा केंद्र हेतु स्थल का चयन लोक शिक्षा केंद्र स्थापित करने के लिए उपर्युक्त स्थल का चुनाव एक महत्वपूर्ण काम है। इस पर बहुत कुछ केंद्र की सफलता निर्भर करती है। अतः इस मामले में पर्याप्त सावधानी बरतना चाहिए। लोक शिक्षा केंद्र सार्वजनिक भवन, प्रशिक्षण-सह-उत्पादन केंद्र, अनुसूचित जाति दालान आदि में होना अपेक्षित है। शौचालय एवं पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखा जाए। लोक शिक्षा केंद्र का भौगोलिक रूप से अच्छा भवन, परिसर और लगभग 1000 वर्ग फीट की जगह होना अपेक्षित है। लोक शिक्षा केंद्र पंचायत मुख्यालय के आलावा दूसरी जगह भी हो सकता है यदि इसके पर्याप्त कारण और औचित्य हो। लोक शिक्षा केंद्र सार्वजनिक स्थल नहीं मिलने पर निजी भवन में भी चलाया जा सकता है। इसके लिए मकान से केंद्र चलाते हेतु भवन निःशुल्क देने की लिखित सहमति आवश्यक होगी। स्थल का चयन लोक शिक्षा समिति करेगी। लोक शिक्षा केंद्र भवन निर्माण के लिए जमीन (राशि) दान अथवा सहयोग के रूप में स्वीकार्य होगी। लोक शिक्षा केंद्र को स्थल चयन, संचालन से सम्बन्धित सूचनाएँ प्रखंड एवं जिला लोक शिक्षा समिति को देना अनिवार्य होगा। प्रेरकों का चयन योग्य एवं उत्साही प्रेरकों का चयन लोक शिक्षा केंद्र की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रेरकों के चयन में राग-द्वेष तथा पक्षपात से दूर रहना अपेक्षित है। प्रेरकों का चयन सम्बन्धी सूचना विज्ञापन/सूचनापट्ट के माध्यम से प्रकाशित करनी होगी। आवेदन विहित प्रपत्र में स्वीकार्य होगा। प्रेरकों चयन-पत्र पंचायत लोक शिक्षा समिति के द्वारा निर्गत होगा। प्रेरकों के न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक अथवा समकक्ष होगी। प्रेरक चयन में साक्षरता कार्य में अनुभव वाले साक्षरताकर्मी को प्राथमिकता दी जाएगी। प्ररेक उसी पंचायत का निवासी होगा। प्रेरक दो होंगे जिनमें एक अनिवार्य रूप से महिला होगी। प्रेरक चयन में लोक शिक्षा समिति चयन की विहित प्रक्रिया का अनुपालन करेगी। प्रेरकों का कार्य एवं दायित्व प्रेरकों को उनकी भूमिका, एवं कार्य पूरी तरह स्पष्ट होने चाहिए। उन्हें सामुदायिक भावना के साथ अपना काम सबके सहयोग से करना चाहिए। लोक शिक्षा केंद्र का प्रबंधन । लोक शिक्षा केंद्र का वित्तीय प्रबंधन। विभिन्न विकास विभागों/कार्यों के साथ लोक शिक्षा केंद्र के कार्यों का समन्वय साक्षरता केंद्र स्थापित करने/खोलने की पूर्व तैयारी यथा सर्वेक्षण, स्थल चयन, स्वयंसेवकों की पहचान/चयन, तथा डाटाबेस की तैयारी में सहयोग प्रदान करना। लोक शिक्षा केंद्र के शिशिक्षुओं तथा समुदाय को उत्प्रेरित करना एवं वातावरण-निर्माण कार्य करना। लोक शिक्षा केंद्र के उपकरणों एवं संसाधनों का रखरखाव करना। प्रखंड एवं जिला स्तरीय लोक शिक्षा समितियों से समन्वय स्थापित करना तथा बाह्य मोनिटरिंग दल को सहयोग देना। साक्षर भारत के विभिन्न आयामों-बुनियादी साक्षरता/समतुल्यता कार्यक्रम, कौशल विकास एवं सतत शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन में आवश्यक सहयोग देना। समय-समय पर निर्धारत अन्य कार्य। प्रेरकों का प्रशिक्षण प्रेरकों के क्षमतावर्द्धन के लिए नियमित प्रशिक्षण अनिवार्य है। प्रेरक चयन के उपरांत प्रेरकों का प्रशिक्षण अनिवार्य है प्ररेक प्रशिक्षण राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण, राज्य साधन केंद्र, जन शिक्षण संस्थान एवं जिला लोक शिक्षा समिति के तत्वावधान में जिला/प्रखंड स्तर पर आयोजित होंगे। प्रेरक प्रशिक्षण में प्रेरकों की भूमिका, कार्य एवं दायित्व से जुड़े सभी मुद्दे/विषय शामिल होंगे। साथ ही साक्षर भारत की अवधारणा, निति उद्देश्य एवं लक्ष्य आदि की समझ विकसित की जायेगी। लोक शिक्षा केंद्र में प्रेरकों की विशेष भूमिका/नवाचारी क्रियकलाप के लिए प्रशिक्षित किया जायेगा। लोक शिक्षा केंद्र जमीनी स्तर पर साक्षर भारत की संचालक शाखा के रूप में कार्य करेगा एवं विभिन्न गतिविधियों-साक्षरता, बुनियादी शिक्षा, व्यवसायिक शिक्षा, सतत शिक्षा को आगे बढ़ाते हुए एक साक्षर एवं ज्ञानवान समाज की रचना करेगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि इन कार्यों की बदौलत साक्षरता में लैंगिक असमानता की दर को सन 2012 तक 20% तक सिमित करने तथा साक्षरता दर को 80% तक बढ़ाने का लक्ष्य प्राप्त किया जायेगा। प्रेरकों एवं स्वयंसेवकों के साथ-साथ बुद्धिजीवी वर्ग एवं स्थानीय समुदाय को जोड़कर इस लक्ष्य को हासिल किया जायेगा। इसका असर यह होगा कि लक्ष्य समूह की महिलाएं अनुसूचित जाति/जनजाति, अल्पसंख्यक तथा अन्य वंचित वर्ग के लाभार्थी लोक शिक्षा केंद्र के माध्यम से एक बेहतर जीवन जीने की ओर अग्रसर होंगे, जिससे साक्षर भारत का निर्माण होगा। साक्षर भारत कार्यक्रम की सफलता मूलतः लोक शिक्षा केंद्र का स्थल चयन, प्रेरकों के चयन, उनके प्रशिक्षण तथा परिणाम प्राप्त करने के प्रति उनकी तत्परता एवं योग्यता पर निर्भर होगी। अपेक्षा यह है कि उपरोक्त तथ्यों के आलावा ग्राम पंचायत स्तर पर सभी सुविधाओं से लैस लोक शिक्षा समिति यह खुद ही तय करे कि लोक शिक्षा केंद्र का संचालन एवं साक्षर भारत कार्यक्रम को और बेहतर तरीके से कैसे चलाया जा सकता है। लोक शिक्षा केंद्र खोलने के लिए पहल लोक शिक्षा केंद्र खोलने के लिए निम्नलिखित चरण अपनाने होंगे:- पंचायत लोक शिक्षा समिति राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण द्वारा निर्गत दिशा निर्देशों के आलोक में सर्वप्रथम लोक शिक्षा केंद्र के लिए पंचायत में उपयुक्त स्थान तथा भवन को चिन्हित करेगी। इस कार्य हेतु यथा आवश्यक बैठक कर सर्वसम्मति से निर्णय लिया जायेगा। दिशानिर्देशों के अनुसार प्रेरकों का चयन सुनिश्चित किया जायेगा। लोक शिक्षा केंद्र के लिए वित्तीय प्रावधानों के अनुसार उपकरणों को विहित प्रक्रिया द्वारा क्रय किया जायेगा। इसके लिए आवश्यकतानुसार बैठक कर निर्णय लिया जायेगा। क्रय किये गए सामग्रियों को भंडार पंजी में संधारित कर उसका ठीक से रखरखाव एवं उचित उपयोग किया जायेगा। लोक शिक्षा केंद्र की मासिक एवं वार्षिक कार्य योजना प्रेरकों द्वारा दिशानिर्देशों के अनुसार तैयार की जाएगी। केंद्र की दैनिक साप्ताहिक एवं मासिक कार्यक्रम समय सारिणी प्रेरकों द्वारा तैयार की जाएगी। कार्य-योजना एवं समय सारिणी के अनुसार लोक शिक्षा केन्द्रों के विविध क्रियाकलापों का संचालन किया जायेगा। लोक शिक्षा केन्द्रों के गतिविधियों की समय-समय पर समीक्षा तथा मोनिटरिंग की प्रक्रिया का निर्धारण पंचायत लोक शिक्षा समिति तथा नया सम्बन्धित प्रबंधन समितियों द्वारा किया जायेगा। समीक्षा तथा मोनिटरिंग का कार्य अनवरत रूप से चलेगा। पंचायत सहयोग-दान स्वरुप या अन्य वैध स्रोत से भी केंद्र के लिए संसाधन जमा कर सकेगी। लोक शिक्षा केंद्र के लिए बजट लोक शिक्षा केंद्र के लिए दो प्रकार के बजट का प्रावधान है। अनावर्ती (nonrecuring) तथा आवर्ती (recuring) अनावर्ती व्यय में एकमुश्त 60,000/- रु० का प्रावधान है जिससे उस केंद्र को आवश्यक सामग्रियों से सुविधायुक्त करते हुए स्थापित करना है। पुराने जिले (बेगूसराय, भोजपुर एवं खगड़िया) के लिए यह राशि रु० 25,000/- रखी गई है। पुराने जिले में पूर्व से पंचायतों में कई सतत लोक शिक्षा केंद्र चल रहे थे, उन केन्द्रों पर रखी सामग्री एकत्रित कर एक केंद्र में जमा करना है, जहाँ लोक शिक्षा केंद्र अब संचालित होगा। यहाँ उपलब्ध पुरानी सामग्रियों का आकलन कर आवश्यकता चिन्हित करते हुए 25,000/- की राशि से सामग्री क्रय किया जाएगा। अनावर्ती व्यय से शेष नये जिले में रु० 60,000/- की राशि से सामग्री क्रय जाएगी। कौन से सामग्री खरीदना है यह निर्णय पंचायत स्तर पर लिया जायेगा। ध्यान रखना है कि आवश्यकता के अनुरूप सामग्री का क्रय हो एवं क्रय में गुणवत्ता, स्वच्छता एवं पारदर्शिता बरती जाए। सुझाव के लिए एक सूची नीचे दी जा रही है:- अनावर्ती व्यय (60,000/- के लिए) क्र० सं० समाग्री का नाम अनुमानित राशि 1 उपकरण एवं फर्नीचर (टेबुल, कुर्सी, दरी, बाल्टी, जग, कप, ग्लास, झाड़ू, प्राथमिक उपचार बॉक्स, लाईट सिस्टम, बोर्ड, टी० वी०, ट्रांजिस्टर, पंखा, बल्ब, अलमीरा, बुक सेल्फ, बोर्ड मार्कर, डस्टर, आदि जो आवश्यक हो) 20,000/- 2 किताबें (एन० बी०टी०, सी० बी० टी० एवं बिहार सरकार से अनुमोदित नवसाक्षरों के लिए उपयोगी पुस्तकें) 18,000/- 3 नक्शा. चार्ट, ग्लोब, फोटो आदि 15,00/- 4 खेलकूद एवं मनोरंजन हेतु सामग्री (कैरमबोर्ड, बैडमिंटन, शतरंज, लूडो, वॉलीबॉल, नाल, ढोलक, हारमोनियम, झाल, माईक सेट आदि) 15,500/- 5 साईकिल-(2) 5000/- आवर्ती व्यय (रु० 6250/- प्रति माह, में मद एवं राशि निर्धारित है) 1 दो प्रेरकों का मानदेय 2000/- X 2 प्रतिमाह 2 समाचार पत्र, पत्रिकाएँ एवं अन्य अध्ययन सामग्री 400/- प्रतिमाह 3 प्रकाश व्यवस्था 300/- 4 स्टेशनरी, कार्यालय व्यय एवं डाक व्यय 600/- 5 मरम्मती एवं रखरखाव, क्रय, सफाई आदि 500/- 6 सभा, बैठक एवं कार्यक्रम पर व्यय 300/- 7 आकस्मिकता 150/- लोक शिक्षा केंद्र की संचालित करने की गतिविधियाँ लोक शिक्षा केंद्र की समस्त गतिविधियाँ इस प्रकार संयोजित एवं संचालित की जानी चाहिए जिससे कि लक्ष्य समूहों को कार्यक्रम के उद्देश्य एवं लक्ष्य स्पष्ट हो सके और वे उनको हासिल करने के लिए स्वतः प्रेरित और तत्पर हों। इसलिए शैक्षिक एवं कार्यक्रम संचालन सम्बन्धी मूल गतिविधियों के अतिरिक्त रोजगार, स्वास्थ्य एवं स्थानीय संस्कृति से जुडी गतिविधियों पर भी बल देना आवश्यक होगा। लोक शिक्षा केंद्र की गतिविधियाँ ऐसी हों जिससे उनकी सार्थकता, रोचकता एवं उपयोगिता बनी रहे। शैक्षिक गतिविधियाँ बुनियादी साक्षरता केन्द्रों के संचालन की व्यवस्था, नियमित अनुश्रवण और समन्यव। समतुल्यता के लिए उपयुक्त एवं इच्छुक नवसाक्षरों एवं अन्य पढ़ने लिखने वालों की सूची तैयार करना एवं प्रेरित करना। केंद्र संचालित गतिविधियों के माध्यम से यह प्रयास होगा कि गाँव के लोग उसे स्वतः स्वीकार कर लें और यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया का रूप ले ले ताकि समुदाय के लोग निरंतर लाभान्वित होते रहें। अभी मात्र 2 वर्ष के लिए इसकी परिकल्पना की गई है, लेकिन अगर गाँव के लोग इसे अपना लेते हैं तो यह भविष्य में एक स्थायी सामुदायिक संस्था के रूप में उभर सकता है। केंद्र-संचालन सम्बंधी गतिविधियाँ इस कोटि की गतिविधियों के लिए थोड़ी-बहुत प्रबंधीकरण क्षमता का उपयोग करना वांछित है। केंद्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए निम्नलिखित गतिविधियाँ चलाना आवश्यक है। बुनियादी साक्षरता केन्द्रों का नियमित अनुश्रवण और समन्वय समतुल्यता के लिए उपयुक्त एवं उत्सुक नवसाक्षरों एवं अन्य पढ़ने लिखने वाले की सूची तैयार करना एवं उन्हें प्रेरित करना । लोक शिक्षा केंद्र एक पुस्तकालय के सुदृढ़ीकरण के लिए सथानीय स्तर पर भी पुस्तक संग्रह की व्यवस्था की जा सकती है। केंद्र पर पुस्तकों का अध्ययन एवं आदान-प्रदान किया जा सकता है। विविध विषयों पर जागरूकता के लिए चर्चा मंडल का आयोजन किया जायेगा जैसे स्वास्थ्य, भोजन एवं पोषण, शुद्ध पेयजल, जल संरक्षण, स्वच्छता, साक्षरता, सूचना का अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति लक्ष्य समूहों को जागरूक किया जायेगा। जनभागीदारी से विभिन्न राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय दिवसों का आयोजन करना, जैसे साक्षरता दिवस, बाल दिवस, युवा दिवस, महिला दिवस, स्वास्थ्य दिवस आदि। समय-समय पर लोक महत्व के स्थानीय एवं राष्ट्रीय घटनाक्रमों की चर्चा की जाएगी। व्यावसायिक एवं हुनर/कौशल विकास के लिए विचार-विमर्श कर उपयुक्त संस्थाओं एवं विशेषज्ञयों से सम्पर्क किया जायेगा। पुस्तकालय एवं वाचनालय के क्रियाकलाप को संचालित करने के लिए नई पठन-पाठन सामग्री समाचार पत्र एवं पत्रिकाएँ मँगाई जायेगी। पंचायती राज्य व्यवस्था के बारे में लक्ष्य-समूहों को जानकारी दी जाएगी। समाज का अभिवंचित समुदाय जैसे दलित/अल्पसंख्यक टोलों में साक्षर भारत कार्यक्रम को प्राथमिकता के आधार पर संचालित करने के लिए अन्य सहायक गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी एवं करवाई जाएँगी। रोजगारपरक गतिविधियाँ रोजगारपरक गतिविधियाँ चलाकर कार्यक्रम से स्थानीय समुदाय को जोड़ा जा सकता है। यदि शिक्षा के माध्यम से उन्हें कौशल विकास और स्वरोजगार का आवश्वासन मिले तो साक्षर भारत कार्यक्रम लोक शिक्षा केंद्र में उनका आकर्षण बढ़ेगा। स्वयं सहायता समूह के गठन के लिए प्रेरित करना। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के आधार पर स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के आधारित स्वरोजगार के लिए विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों और व्यक्तियों को प्रशिक्षण के लिए प्रेरित किया जायेगा और उसके लिए समन्वय का प्रयास किया जायेगा। सरकारी विकास योजनाओं से जुड़ने और लाभान्वित होने के लिए प्रेरित किया जायेगा। स्थानीय संसाधनों और विशेषज्ञ संस्थाओं एवं व्यक्तियों की सूची बनायी जाएगी, इन विशेषज्ञयों की उप समिति बनायी जायेगी, जिसके माध्यम से गतिविधियाँ संचालित की जाएँगी। समय-समय पर महिला प्रसार पदाधिकारी को बुलाया जायेगा और स्वयं सहायता समूह और स्वरोजगार की जानकारी दी जाएगी। लोक शिक्षा केंद्र एक संसाधन केंद्र और सूचना खिड़की के रूप में काम करेगा। स्वास्थ्य सम्बन्धी गतिविधियाँ स्वास्थ्य ग्रामीण समुदाय के लिए एक गंभीर मामला है जो हर व्यक्ति को स्पर्श करता है। लाभुक समूहों में स्वास्थ्य-चेतना विकसित करना तथा स्वास्थ्य-सेवाओं तक उनकी पहुँच बनाना वास्तव में लोक शिक्षा केंद्र का एक महत्वपूर्ण कार्य है। सुरक्षित पेयजल के सम्बन्ध में जागरूकता प्रदान की जाएगी। स्वच्छता एवं शौचालय के उपयोग के बारे में जागरूकता प्रदान की जाएगी। महिला एवं बाल स्वास्थ्य पर आधारित गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी सुरक्षित प्रसव के बारे में जागरूकता प्रदान की जाएगी। प्राथमिक उपचार की जानकारी दी जाएगी। घरेलू उपचार की जानकारी दी जाएगी। संतुलित आहार ओर पोषण के प्रति जागरूकता प्रदान की जाएगी। समय-समय पर डॉक्टर, नर्स एवं स्वास्थ्यकर्मी को बुलाकर स्वास्थ्य जाँच एवं जागरूकता हेतु गतिविधियाँ की जाएँगी। स्वास्थ्य शिविर का आयोजन (विभिन्न मुद्दों पर, किशोरावस्था सम्बन्धी जागरूकता) सांस्कृतिक गतिविधियाँ लोक शिक्षा केंद्र की गतिविधियों को रोचक, उत्साहवर्द्धक और मनोरंजक बनाये रखने के लिए विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेल-कूद एवं सृजनात्मक तथा कलात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जायेगा। इन कार्यक्रमों के स्थानीय भाषा, लोकोक्तियों, मुहावरों, गाथाओं एवं लोक-व्यवहार को यथासंभव शामिल किया जाएगा। लोकगीत, ग्रामीण गीत, विभिन्न ऋतुओं और पर्व-त्योहारों की गीतों का कार्यक्रम, चित्रकला, वातुकला, पेंटिंग, नृत्यकला आदि से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। सूचना सम्बन्धी गतिविधियाँ /सूचना की खिड़की नयी-नयी जानकारियाँ समय-समय पर दी जाएँगी, इसके लिए दीवार अखबार निकाला जायेगा। सूचना पट्टी पर जानकारियाँ लिखी जाएँगी। नये सरकारी और गैर सरकारी विकास कार्यक्रमों की जानकारी सूचना-पट्टी पर लिख कर दी जाएगी। विभिन्न विकास कार्यक्रमों के प्रपत्र भी उपलब्ध करवाए जा सकते हैं। विकास कार्यक्रमों के बारे में पात्रता और शर्तों के बारे में जो जानकारियाँ अख़बारों में छपती है वे सूचना-पट्ट पर या केंद्र की दीवार पर चिपकायी जाएँगी। लोक शिक्षा केंद्र की गतिविधियों का संचालन लोक शिक्षा केंद्र के संचालन के लिए एक कारगर व्यवस्था बनाई जाएगी जो निम्नलिखित हैं- वरीय प्रेरक एवं प्रेरक लोक शिक्षा केंद्र की गतिविधियों का संचालन करेंगे। वरीय प्रेरक एवं प्रेरक द्वारा ससमय बैठक का आयोजन किया जायेगा एवं समन्वय स्थापित किया जायेगा। लोक शिक्षा समिति एंव उपसमितियों की बैठक वे प्रत्येक महीने में कम से कम एक बार अवश्य आयोजित करेंगे। प्रत्येक महीने में एक बार पंचायत के अधीनस्थ साक्षरता केन्द्रों एवं अन्य आवासीय अथवा गैर आवासीय केन्द्रों के स्वयंसेवकों के साथ वे अवश्य बैठक करेंगे। विद्यायल के छात्र-छात्रा जो स्वयंसेवक का कार्य करना चाहेंगे उन्हें सूचना उपलब्ध कराना, पठन-पाठन सामग्री देना तथा कार्य सम्पादन के बाद प्रमाण-पत्र दिलाना। वरीय प्रेरक एवं प्रेरक पुस्कालय/वाचनालय के लिए पुस्तकों की खरीदारी, संधारण एवं उसका रखरखाव करेंगे। बैठक की कार्यवाही पंजी का रखरखाव वरीय प्रेरक करेंगे। लोक शिक्षा केंद्र से सम्बन्धित सभी दस्तावेजों एवं सामग्रियों का रखरखाव वरीय प्रेरक एवं प्रेरक के द्वारा किया जायेगा। NIOS द्वारा आयोजित समतुल्यता कार्यक्रम में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों का नियमित पंजीकरण एवं ससमय परीक्षा का आयोजन करायेंगे। साक्षरता स्वयंसेवकों की सूची तैयार कर बैचिंग-मैचिंग करेंगे। साक्षर भारत कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों का संचालन जैसे वातावरण निर्माण एवं जन लामबंदी आदि को सम्पादित करेंगे। सामग्री, सूचना, लेखा का संधारण, रखरखाव एवं प्रेषण। लोक शिक्षा केंद्र के पोषक क्षेत्र में चल रहे साक्षरता केन्द्रों का प्रबोधन केंद्र का नियमित भ्रमण एवं प्रबोधन स्थानीय स्तर पर नियमित बैठक एवं उत्साहवर्द्धन (स्वयंसेवकों के साथ 15 दिन के अंतराल पर) लोक शिक्षा केंद्र पर सम्बन्धित समस्याओं का संकलन और स्थानीय स्तर पर समाधान। हर बैठक में नए-नए विषयों का चुनाव करना ताकि बैठक में सार्थकता, उत्साह और जिज्ञासा तथा अभिरुचि बनी रहे एवं उबाऊपन न हो। आपस में अनुभवों का आदान-प्रदान किया जायेगा। मासिक प्रगति प्रतिवेदन के लिए नियमित प्रपत्र भरना, भरवाना और प्रखंड (ऊपर) प्रेषित करना, तथा वेबसाइट में प्रतिवेदन देना। ससमय सूचना प्रेषण (वेब आधारित) नियमित आँकड़ा संग्रह एंव प्रेषण अनुश्रवण प्रपत्र को ससमय भरना एवं डाटा बेस तैयार करना। प्रत्येक साक्षरता केंद्र से सम्बन्धित स्वंयसेवक अपने शिशिक्षुओं की विस्तृत जानकारी लोक शिक्षा केंद्र उपलब्ध करायेंगे। केन्द्रों से सम्बन्धित सूचना क्रम/प्रगति का डाटा इंट्री करना एवं अपने ऊपर के कार्यालयों को सूचित करना। वित्त संचालन खाता खोलना: भारतीय स्टेट बैंक (एस०बी०आई०) में खाता खोला जाएगा। इस सम्बन्ध में जिला इकाई आवश्यक सहयोग करेगी। पंचायत स्तर पर खाता का संचालन उस पंचायत के मध्य विद्यालय के वरीय प्रधानाध्यापक और वरीय प्रेरक के संयुक्त हस्ताक्षर से लोक शिक्षा समिति के निर्णय से किया जायेगा। व्यय का लेखा-जोखा का संधारण वरीय प्रेरक द्वारा किया जायेगा। वरीय प्रेरक द्वारा प्रेरक प्रत्येक बैठक में आय-व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत किया जायेगा। लोक शिक्षा केंद्र पर कार्पस फंड का निर्माण/संग्रह:- सामाजिक सहभागिता.सहयोग के लिए यह कार्य जायेगा। पोषक क्षेत्र के सभी लोग से डब्बा कलेक्शन की प्रक्रिया अपनाई जायेगी। सहयोग राशिदाताओं की सूची तैयार कर प्रदर्शित किया जायेगा। व्यय का हिसाब-किताब रखा जायेगा। विश्वसनीयता बनाये रखने के लिए व्यय के उपरांत नियमित सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) किया जायेगा। लोक शिक्षा केंद्र हेतु भवन अथवा जमीन या अन्य सामग्री (पुस्तकें) दान स्वरुप प्राप्त करने की रणनीति बनाई जा सकती है। इस प्रकार के संग्रह के कार्य पारदर्शिता एवं निधि सम्मत हों यह अनिवार्य है। स्रोत: शिक्षा विभाग, बिहार सरकार