इस योजना के अंतर्गत किसे छात्रवृत्ति प्रदान की जाति है? 12वीं कक्षा के बाद अध्ययनरत अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाति है। किन संस्थाओं में यह योजना लागू है? सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अधिसूचित संस्थानों में यह योजना लागू है। इस योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति के घटक क्या हैं? छात्रवृत्ति निम्नलिखित आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए दी जाति है :- ट्यूशन फीस वापस न किए जाने वाले प्रभार रहने का खर्चा (ठहरने एवं भोजन प्रभार) पुस्तकें एवं लेखन-सामग्री एक कंप्यूटर। शिक्षण शुल्क की दर और अन्य अप्रतिदेय प्रभार क्या हैं? सरकारी संस्थानों के लिए : पूरा या वास्तविक भुगतान के अनुसार। निजी संस्थानों के लिए : वास्तविक भुगतान के अध्यधीन, 2.00 लाख रुपए प्रति वर्ष। निजी क्षेत्र के फ्लाइंग क्लबों के लिए (वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस प्रशिक्षण हेतु) : वास्तविक भुगतान के अध्यधीन, 3.72 लाख रुपए प्रति वर्ष प्रति विद्यार्थी। अन्य घटकों की दरें क्या हैं? रहने का खर्चा : 2220/- रुपए प्रति माह प्रति विद्यार्थी (12 माह के लिए अनुमत्य)। पुस्तकें एवं लेखन-सामग्री : 3000/- रुपए प्रति वर्ष प्रति विद्यार्थी। कंप्यूटर : 45000/- रुपए प्रति विद्यार्थी। (उपर्युक्त दर वास्तविक भुगतान के अध्यधीन हैं।) क्या एक बार छात्रवृत्ति देने के बाद वह पाठ्यक्रम पूरा होने तक जारी रहती है? जी, हां। संतोषजनक निष्पादन के अध्यधीन, छात्रवृत्ति पाठ्यक्रम पूरा होने तक जारी रहेगी। क्या छात्रवृत्ति को समाप्त किया जा सकता है? जी, हां। यदि विद्यार्थी प्रत्येक वर्ष परीक्षा में पास नहीं होता है या किसी निर्धारित आवधिक परीक्षा में असफल रहता है। इस योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति का पात्र कौन है? केवल अनुसूचित जाति के वे विद्यार्थी छात्रवृत्ति के पात्र होते हैं, जिन्होंने अधिसूचित संस्थानों में प्रवेश प्राप्त किया है। एक वर्ष में संस्थानों को कितनी छात्रवृत्तियां दी जाति हैं? जितनी छात्रवृत्तियां संबंधित संस्थान को प्रति वर्ष आवंटित की जाति हैं, उतनी ही छात्रवृत्तियां विद्यार्थियों को प्रति वर्ष प्रदान की जाति हैं। यदि दाखिल किए गए विद्यार्थियों की संख्या अवार्ड की संख्या से अधिक होती है, तो उस स्थिति में क्या किया जाता है? ऐसी स्थिति में, परस्पर योग्यता सूची में जो विद्यार्थी सबसे ऊपर होते हैं, छात्रवृत्ति उन्हीं तक सीमित कर दी जाति है। यदि किसी संस्था में पहले वर्ष में ही पात्र उम्मीदवारों की संख्या उसे आवंटित की गई छात्रवृत्तियों की संख्या से कम होती है, तो उस स्थिति में क्या किया जाता है? ऐसे मामलों में, पिछले वर्ष के परिणाम की परस्पर योग्यता के आधार पर द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ वर्ष, आदि के विद्यार्थियों को शेष छात्रवृत्तियों की पेशकश की जाति है। (प्राथमिकता उन विद्यार्थियों को दी जाति है जिनके पास पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए अधिक वर्ष शेष रहते हैं। उदाहरणार्थ, द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी को तृतीय वर्ष के विद्यार्थी की अपेक्षा प्राथमिकता मिलेगी, तृतीय वर्ष के विद्यार्थी को चतुर्थ वर्ष के विद्यार्थी की अपेक्षा प्राथमिकता मिलेगी और इसी प्रकार क्रम चलता रहेगा)। कुल वार्षिक पारिवारिक आय की सीमा कितनी है? 4.50 लाख रुपए। विद्यार्थियों का चयन करने का मापदंड क्या है? किसी भी संस्थान के पात्र अभ्यर्थियों में सामान्य चयन का मापदंड योग्यता होता है। यदि किसी संस्था में अंतिम उपलब्ध स्लॉट के लिए समान अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या एक से अधिक होती है, तो उस स्थिति में क्या किया जाता है? तरजीह उन विद्यार्थियों को दी जाति है जिनके माता-पिता की आय सबसे कम हो। इस योजना के अंतर्गत संस्थाओं को किस तरह अधिसूचित किया जाता है? संस्थानों की सूची में वृद्धि या लोप, इस योजना के तहत गठित संचालन समिति की सिफारिशों के आधार पर सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत कितनी संस्थाओं को अधिसूचित किया गया है? इस समय, 212 अधिसूचित संस्थान हैं, जिनमें आईटीआई, एनआईटी और आईआईएम शामिल हैं। निधियां किस तरह जारी की जाति हैं? धनराशि संबंधित संस्थान या लाभार्थी विद्यार्थी (डीबीटी संस्थान के मामले में) को सीधे ही – जारी कर दी जाति है। यदि किसी संस्था को अनधिसूचित किया/हटा दिया जाता है, तो उस स्थिति में विद्यार्थियों पर क्या प्रभाव पड़ता है? पहले से ही दाखिल विद्यार्थियों को उनके पाठ्यक्रम पूरा होने तक छात्रवृत्ति मिलती रहेगी। तथापि, ऐसे डिनोटिफाइड संस्थानों को नई सीटों का आवंटन नहीं किया जाएगा और उन्हें धनराशि जारी नहीं की जाएगी। क्या इस योजना के अंतर्गत निधियों का राज्य-वार आवंटन किया जाता है? जी, नहीं। पिछले चार वर्षों के दौरान आवंटित की गई निधियों, जारी की गई निधियों और लाभार्थियों का ब्यौरा दें? वर्ष बजट आवंटन जारी निधि (करोड़ रुपए में) लाभार्थियों की संख्या 2012-13 16.70 16.70 1306 2013-14 21.00 24.18 1574 2014-15 21.00 19.38 1569 2015-16 21.42 29.77 1907 स्त्रोत: सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय