परिचय छात्रावास के निर्माण की योजना एक ऐसी योजना है जिसका उद्देश्य अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए समर्थ बनाना है और उन्हें प्रोत्साहित करना है। बालिकाओं के लिए छात्रावास के निर्माण की योजना तृतीय पंचवर्षीय योजना से लागू है, जबकि बालकों के लिए यह वर्ष 1989-90 में प्रारम्भ की गई थी। अनुसूचित जाति के बालक और बालिकाओं के लिए छात्रावास की पूर्व केंद्रीय प्रायोजित योजना में 01.01.2008 से संशोधन किया गया है और इसका नाम बदलकर "बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना" रखा गया है। उद्देश्य योजना का उद्देश्य मिडिल स्कूल, उच्चतर माध्यमिक स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में अध्ययनरत अ.जा. बालक और बालिकाओं को आवासीय सुविधा प्रदान करना है। कार्यान्वयन एजेंसियां और पात्रता हालांकि, राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों, केन्द्रीय तथा राज्य विश्वविद्यालय/संस्थाओं के लिए छात्रावास भवनों के नये निर्माण तथा मौजूदा छात्रावास के विस्तार दोनों के लिए केन्द्रीय सहायता प्रदान की जाती है, जबकि एनजीओ तथा निजी क्षेत्र में मानित विश्वविद्यालय मौजूदा छात्रावास सुविधाओं के केवल विस्तार के लिए केन्द्रीय सहायता हेतु पात्र हैं। छात्रावास के रखरखाव के संबंध में व्यय संबंधित कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा अपनी स्वयं की निधि से वहन किया जाएगा। बालिका छात्रावास के लिए वित्त पोषण प्रतिमान कार्यान्वयन एजेंसी बालक छात्रावास बालिका छात्रावास राज्य सरकार 50%* 100% संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन 100% 100% केंद्रीय विश्वविद्यालय/संस्थान 90%** 100% राज्य विश्वविद्यालय/संस्थान 45% *** 100% एनजीओ/मानित विश्वविद्यालय 45%**** 90% (शेष 10 प्रतिशत लागत एनजीओ/मानित विश्वविद्यालय द्वारा वहन की जाएगी।) * शेष 50 प्रतिशत का वहन राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। ** शेष 10 प्रतिशत लागत का वहन विश्वविद्यालय/संस्थान द्वारा किया जाएगा। ***शेष 55 प्रतिशत लागत का वहन विश्वविद्यालय/संस्थान और राज्य सरकार द्वारा 10:45 के अनुपात में किया जाएगा। ****शेष 55 प्रतिशत लागत का वहन एनजीओ/मानित विश्वविद्यालय और राज्य सरकार द्वारा 10:45 के अनुपात में किया जाएगा। सामान्य दिशानिर्देश योजना के अंतर्गत ग्राह्य केंद्रीय सहायता के अतिरिक्त, 2500 रुपए प्रति विद्यार्थी का एकबारगी अनुदान प्रत्येक विद्यार्थी के लिए एक चारपाई, एक मेज और एक कुर्सी का प्रावधान करने के लिए प्रदान किया जाएगा। केंद्रीय सहायता सिर्फ छात्रावास भवन की लागत को पूरा करने के लिए प्रदान की जाती है और ऐसे छात्रावास के रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन की होती है। कार्यान्वयन एजेंसी को सहायता अनुदान सीधे जारी किया जाएगा। एनजीओ/मानित विश्वविद्यालय को अनुदान दो किश्तों में जारी किया जाएगा। तथापि, राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन एवं केंद्रीय तथा राज्य विश्वविद्यालय/संस्थान को केंद्रीय सहायता एक ही किश्त में जारी की जाएगी। बालिका छात्रावास के मामले में, छात्रावास कम अनुसूचित जाति महिला साक्षरता वाले क्षेत्रों में अवस्थित होगा। बालिका छात्रावास का निर्माण शैक्षिक संस्थान (जहां तक संभव हो 200 मीटर की परिधि में) के समीप किया जाएगा। प्रत्येक छात्रावास की क्षमता 100 छात्रों के अधिक नहीं होनी चाहिए। तथापि, इसे अपवादस्वरूप मामलों में आवश्यकता और मामले की योग्यता के आधार पर स्वीकार किया जा सकता है और इस पर विचार किया जा सकता है। मिडिल और उच्चतर माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिए नए छात्रावासों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। विद्यमान छात्रावासों के विस्तार के एनजीओ/मानित विश्वविद्यालय के प्रस्ताव को राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के माध्यम के उनकी सिफारिश के साथ सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को भेजा जाएगा। मंत्रालय द्वारा परियोजना की स्वीकृति की तारीख से 2 वर्ष की अवधि के भीतर छात्रावास का निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा। स्त्रोत: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय,भारत सरकार ।