परिचय विद्यालय जाना प्रारंभ करना बच्चों और उनके परिवारों के जीवन का एक प्रमुख बदलाव है। यह एक ऐसा समय है जो एक ही समय में रोमांचक और चुनौतीपूर्ण दोनों हो सकता है। बच्चे और परिवारों को नये वातावारण, नयी अपेक्षाओं, नयी अत:क्रियाओं और संबंधों के साथ तालमेल बैठाना पड़ता है। इस संदर्भ में यह अनिवार्य हो जाता है कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों सहित सभी बच्चों को घर से पूर्व-प्राथमिक विद्यालय और पूर्वप्राथमिक विद्यालय से प्राथमिक विद्यालय में पारगमन की प्रक्रिया में सहायता दी जाए, इसलिए पूर्व-प्राथमिक विद्यालय और प्राथमिक विद्यालय के बीच संबंध स्थापित किए जाने चाहिए। हमारे देश में पूर्व-प्राथमिक सेवाओं में विविधता पाई जाती है, जैसे- आँगनवाड़ी, बालवाड़ी, निजी विद्यालयआदि। इनकी बुनियादी सेवाओं, शिक्षकों की योग्यताओं, पाठ्यक्रम, शिक्षण विधि में विस्तृत विविधता पाई जाती है। बच्चों के पूर्व-प्राथमिक विद्यालय आरंभ करने की आयु में भी विविधता पाई जाती है। इस प्रकार विभिन्न पूर्वप्राथमिक विद्यालयों की प्रकृति और दृष्टिकोण में अंतर है। चार प्रमुख ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ बच्चों को निरंतरता की कमी का अनुभव हो सकता है जो उनके सीखने में बाधा बन सकता है, जैसे1. भौतिक वातावरण में परिवर्तन 2. कक्षा संगठन में अंतर 3. पाठ्यचर्या की विषयवस्तु 4. पूर्व-प्राथमिक और प्रारंभिक कक्षाओं का शिक्षण और पद्धतियाँ कक्षा का परिवेश, कक्षा की व्यवस्था, समय सारणी/ दिनचर्या, पाठ्यचर्या, शैक्षणिक विधियाँ और पद्धतियाँ पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं से संयोजित होनी चाहिए। प्रारंभिक बाल्यावस्था अवधि के दौरान प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षकों का बच्चों की क्षमताओं, रुचियों, संस्कृतियों और योग्यताओं के बारे में ज्ञान बढ़ता जाता है। बच्चों के परिवारों से उनका मज़बूत संबंध विकसित होता है। जब यह जानकारी प्राथमिक विद्यालयों के अन्य शिक्षकों से साझा की जाती है, तब सीखने और विकास के नये अवसरों की योजना इस प्रकार बनाई जा सकती है जो बच्चों की क्षमताओं, रुचियों, संस्कृतियों के अनुरूप हो और बच्चों ने जो पहले सीखा है, उसे बढ़ावा देती हो। पूर्व-प्राथमिक से प्राथमिक कक्षाओं की ओर बढ़ने को बच्चों के समग्र अधिगम की सतत प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। संयोजन के लिए घटक स्थानीक प्राथमिक विद्यालय या आस-पास के परिसर में पूर्वप्राथमिक विद्यालय का प्रावधान २.कार्यक्रम संबंधी समय का तालमेल होना खेलविधि का प्राथमिक कक्षाओं में विस्तार पूर्व प्राथमिक कक्षाओं तक कक्षा I की पाठ्यचर्या में संबंध पूर्व-प्राथमिक और प्राथमिक कक्षाओं के शिक्षकों का संयुक्त प्रशिक्षण सामग्री, उपकरणों और बुनियादी सुविधाओं को साझा करना ३.प्रबंध सामुदायिक सहायताऔर संसाधन जुटाना संयुक्त नियोजन,निगरानी और पर्यवेक्षण बच्चे के लिए सभी सेवाओं, जैसेस्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और शिक्षा के बीच संबंध संयोजन के लाभ बच्चों का सहज पारगमन बच्चों की भागीदारी बढ़ाना नामांकन और प्रतिधारण को बनाए रखना और बढ़ाना सीखने के विभिन्न स्तरों पर उच्च उपलब्धि नीचे की ओर विस्तार की प्रवृत्ति को पलटना बेहतर विद्यालय तत्परता प्रभावी संसाधन उपयोग सहज पारगमन के लिए निरंतरता बनाए रखना बच्चों के अनुभवों की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित कुछ सुझाव दिए गए हैं। पूर्व-प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के सीखने के लिए सीखने के आरंभिक प्रतिफलों को कक्षा 1 के सीखने के प्रतिफलों के साथ जोड़ा जाना चाहिए। पूर्व-प्राथमिक विद्यालय को इस तरह से योजना बनाने की आवश्यकता है कि पाठ्यचर्या के लक्ष्यों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों सहित सभी बच्चों की विकासात्मक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनुकूल बनाया जाए। शिक्षकों को यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त लचीलापन देने की आवश्यकता है कि पूर्व-प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के व्यक्तिगत हितों को पूरा किया जाए। माता-पिता और परिवार को भी पारगमन कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए ताकि बच्चे बेहतर तरीके से समायोजित हो सकें और प्राथमिक स्कूल को सहजतापूर्वक अपना सकें। पूर्व-प्राथमिक और कक्षा 1 और 2 के शिक्षकों को एक साथ प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है। नयी कक्षा और अनुभवों में परिवर्तन अचानक होने के बजाए क्रमिक होना चाहिए। पूर्व-प्राथमिक और प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को नियमित रूप से समन्वय और संवाद करना चाहिए ताकि वे पर्व-प्राथमिक से प्राथमिक विद्यालय तक पारगमन के लिए बच्चों को तैयार कर सकें। पूर्व-प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को कक्षा 1 और 2की कक्षाओं का भ्रमण करना चाहिए ताकि वे वहाँ के आस-पास के भौतिक वातावरण से परिचित हो सकें और शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले बिना किसी भय के परिवेश के आदी हो जाएँ। कक्षा 1 और 2 के भौतिक वातावरण को पूर्व-प्राथमिक की तरह ही नियोजित किया जाना चाहिए (बाल अनुकूलित मेज़ कुर्सियाँ)। गतिविधि क्षेत्रों का इस प्रकार गठन होना चाहिए कि बच्चों को अनुभव साझा करने, समस्या समाधान कौशल, मेधावी कौशल विकसित करने, नियमों का पालन करने में मदद मिलेऔर सामाजिक तथा भावात्मक कल्याण की भावना प्राप्त करने में सहायता मिले। खेल-आधारित गतिविधियाँ कक्षा 1 और 2 का भी एक हिस्सा होनी चाहिए और पूर्व-प्राथमिक I, II और III से संबंधित (जुड़ी हुई) होनी चाहिए। कक्षा 1 के शिक्षकों को पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के पोर्टफोलियों को ध्यान से देखना चाहिए। इससे उन्हें बच्चों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। निष्कर्षत: सभी बच्चों को समग्र रूप से विकसित करने की आवश्यकता है। उन्हें एक सुरक्षित, सकुशल और उत्प्रेरक वातावरण मिलना चाहिए और यह सब तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब छोटे बच्चों की शिक्षा से जुड़े हुए सभी लोगों के बीच पूर्ण समझ, समर्थन और सहयोग हो।