परिचय मोटापा, दरअसल शरीर में अतिरिक्त चर्बी का जमा होना है जिसके परिणामस्वरूप शरीर का वजन बढ़ जाता है | इससे आथ्राइटिस, हृदय रोग, डायबिटीज जैसी समस्याएँ भी पैदा होती है | अत: वजन को सामान्य दायरे में रखने से आप स्वस्थ व सक्रिय बने रहेंगे | वजन कम रखने के लिए कुछ आहार संबंधी सुझाव : ऐसे भोजन की मात्रा कम करें जिसमें अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है | जैसे चावल, चपाती, ब्रेड इत्यादि | चर्बीदार भोजन की मात्रा कम करें | जैसे घी, मक्खन, तेल, तली, चीजों | वसादार दूध की जगह वसारहित दूध प्रयोग करें | ऐसे भोजन से परहेज करें जिनमें अधिक शर्करा होती है | जैसे चाकलेट, मिठाइयाँ, स्वीट्स, कार्बोनेटिड पेय, जैम, जैली इत्यादि | भोजन में ऐसे फलों व सब्जियों को शामिल करें जिनमें रेशा होता है | काफी मात्रा में पत्तेदार हरी सब्जियाँ, गाजर, मूली, बीन्स इत्यादि खाएँ | कोई न कोई शारीरिक गतिविधि नियमित रूप से करें | जैसे घूमना, योग इत्यादि | औषधि प्रबन्धन भले ही कोई भी उम्र हो, लेकिन बीमारी के दौरान ज्यादातर लोग दवाएँ लेते हैं | प्रौड़ व वृद्धों को दवा के मामले में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकी इस उम्र में गुर्दे और लीवर कम सक्रिय हो जाते हैं और दवाओं को अच्छी तरह नहीं निकाल पाते है | इसलिए, डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा से अधिक दवाएँ नहीं लेनी चाहिए | दवाएँ खरीदना दवाओं को दो नामों से जाना जाता है | उनके ‘रासायनिक’ नाम से (जैसे लिसिनोप्रिल) और उनके ‘ट्रेड’ नाम से (जैसे जेस्ट्रिल) | इसके आलवा दो कम्पनियों द्वारा बनाई गई एक ही दवा की गोलियां देखने में भिन्न हो सकती हैं लेकिन उनमें वास्तव में एक ही सामग्री इस्तेमाल की गई होती है | अगर आप अपने डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा के अतिरिक्त कोई अन्य दवा खरीद रहें हैं, तो संभव हा की उनके नाम अलग होने की बावजूद वे एक होन | इस तरह आप निर्धारित से अधिक मात्रा में वह दवा ले रहे होगें, और आपको मालूम भी नहीं हो पाएगा | अत: अगर आप सीधे से कोई दवा खरीद रहे हैं, तो अपना प्रेस्क्रिप्शन यानी डॉक्टर का लिखा पर्चा केमिस्ट को दिखा कर पूंछे की वह दवा बेमल तो नहीं है| सह - प्रभावों को कम करना ऐसी कोई दवा नहीं हा जिसके कुछ संभावित सह-प्रभाव न होते हों | दूसरी ओर, यह भी जरूरी नहीं की सह- प्रभाव जरूरी तौर पर हों | सह – प्रभावों जरूरी तौर पर हो | सह – प्रभावों की संभावना को कम करने के लिए, निम्न उपाय किए जा सकते हैं | पेट की खराबी- अगर दवा को भोजन, स्नैक्स या दूध की साथ लिया जाए, तो पेट ख़राब होने की संभवना कम होती है | अपने स्वास्थ्य की स्थिति को स्वयं जांचना व दर्ज करना – आप कैसा महूसस कर रहे हैं, अगर दवा से कोई विपरीत लक्षण या प्रभाव अनुभव हूआ है, तो उसे भी दर्ज करें | इससे आप और आपके डॉक्टर को आपके स्वास्थ्य की स्थिति की निगरानी करने और यह जानने में सहायता मिलेगी की क्या आपको सर्वश्रेष्ठ उपचार दिया जा रहा है | दवाओं को रखना दवा पर चिपके लेबल या उसके साथ दिए गए निर्देश पत्र पर आपको दवाओं को रखने संबंधी निर्देश मिलेंगे | उनके अनुसार ही दवाओं को ठीक तरीके से स्टोर करें | कुछ दवाओं को फ्रिज में रखने की जरूरत होती है (जैसे इन्सुलिन तथा बैक्टीरिया संक्रमण या ग्लोकोमा के लिए आँखों में डाले जाने वाले आई ड्रॉप्स) | दवाओं पर एक्स्पाइरी की तारीख हमेशा देख लें | अगर दवा के प्रयोग की आवधि समाप्त हो चुकी है, तो उसे सावधानीपूर्वक फेंकें | अन्य सुझाव आँखों में ड्रॉप्स डालते हुए ध्यान रखें की आप आँखों को छू तो नहीं रहे | दवा के रूप में क्रीम लगाने से पहले हाथों को हमेशा धो लें | यह जानने के लिए की आपके डॉक्टर द्वार तय की गई दवाएँ अभी भी ठीक हैं या नहीं, आपको निरंतर आपने डॉक्टर से मिलते रहना चाहिए | इस बात को सुनिश्चित कर लीजिए की आपको डॉक्टर व दवाविक्रेता द्वारा दी गई हिदायतें ठीक से समझ आ गई हैं | डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं के अतिरिक्त कोई अन्य दवा मत लीजिए | अपनी दवाएँ किसी और के साथ न बांटे | स्त्रोत: हेल्पेज इंडिया/ वोलंटरी हेल्थ एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया