स्वास्थ्य की परिभाषा विश्व स्वास्थ्य संगठन स्वास्थ्य को केवल बीमारी और असमर्थता के न होने के रूप में नहीं, बल्कि सम्पूर्ण शारीरिक, मानसिक व सामाजिक खुशहाली की एक अवस्था के रूप में परिभाषित करता है | अच्छे स्वास्थ्य व खुशहाली के साथ वृद्धावस्था की ओर बढ़ने के लिए जीवन भर निजी प्रयासों की जरूरत होती है और साथ ही एक ऐसे वातावरण की जिसमें वे प्रयास सफल हो सकें | वृद्धावस्था में स्वस्थ जीवन व्यतीत करने के लिए इस बात की जानकारी होना बहुत जरूरी है कि बुजुर्गो को कौन से रोग हो सकते हैं: उनसे कैसे बचा जाए और इन रोगों से पीड़ित होने की स्थिति में क्या कुछ किया जाए | विकासशील देशों में वृद्धों के स्वास्थ्य की स्थिति ऐसा अनुमान है की 2020 तक विकासशील देशों में तीन- चौथाई मौतें वृद्धावस्था से संबंधित होगी | इनमें भी सबसे आधिक मौतें रक्तवाही तंत्र के रोगों, कैंसरों तथा मधुमेह जैसे असंक्रामक रोगों से होगी | एशिया के कुछ भागों में होने वाली मौतों के दो बड़े कारण रक्तवाही तंत्र के रोग व कैंसर हैं | भारत, इंडोनेशिया और थाईलैंड में कुल वयस्क आबादी का 15 प्रतिशत हिस्सा उच्च रक्तचाप से प्रभावित पाया गया है शहरी आबादी में मधुमेह से प्रभावित लोगों की संख्या औद्योगिकशत देशों के बराबर है | फ़िलहाल अफ्रीका, एशिया और (लातिन) अमेरिका में वृद्धावस्था में होने वाली विमूढ़ता (डिमेंशिया) से करीब 2 करोड़ 90 लाख लोग प्रभावित हैं | आकलन के अनुसार, 2020 तक इनकी संख्या 5 करोड़ 50 लाख से भी अधिक हो सकती है | उम्र के साथ दृष्टि – दुर्बलता और दृष्टिहीनता तेजी से बढ़ते हैं | इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण मोतियाबिंद है | हालाँकि मोतियाबिंद कई कारणों से हो सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में वह उम्र के बढ़ने की प्रक्रिया से जूडा होता है | वर्तमान में संसार में 4 करोड़ 50 लाख लोग अंधे हैं और 13 करोड़ 50 लाख लोग दृष्टि – दुर्बलता का शिकार हैं | दुनिया भर में मोतियाबिंद के कारण 1 करोड़ 90 लाख लोग दृष्टिहीन हैं | एशिया और अफ्रीका के अधिकांश देशों में 40 प्रतिशत से भी अधिक लोग मोतियाबिंद के कारण दृष्टिहीन है | भारत में बुजुर्गों के स्वास्थय की स्थिति जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, 1995 में ग्रामीण भारत में वृद्धों की मृत्यु के तीन सबसे बड़े कारण श्वासनली – शोथ / दमा (25.8 प्रतिशत), दिल का दौरा (13.2 प्रतिशत) और लकवा (8.5 प्रतिशत) रहे हैं | भारत के कुछ अस्पतालों में वृद्धों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए वृद्ध – चिकित्सालय है | भारत में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्ध विषादग्रस्त हैं और इस आयुवर्ग के 40-50 प्रतिशत लोगों को अपने जीवन की संध्या में कभी न कभी मनोचिकित्सीय या मनोबैज्ञानिक हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है | 52 वें नेशनल सैम्पल सर्वे (1995- 96) के अनुसार उम्रदराज लोगों में दीर्घकालिक रोगी की मौजूदगी बहुत अधिक पाई गई | ग्रामीण क्षेत्रों (25 प्रतिशत) के मुकाबले शहरों इलाकों (55 प्रतिशत) में इस आयुवर्ग के लोगों को ये रोग अधिक थे | वृद्ध लोगों में सबसे गंभीर रोग था – ‘जोड़ों की समस्या’ | इससे ग्रामीण इलाकों में 38 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 43 प्रतिशत उम्रदराज लोग प्रभावित थे | दूसरी अधिक गंभीर और आम बीमारी खाँसी थ| ग्रामीण इलाकों में पुरूषों के मकाबले महिलाएँ ‘जोड़ों के समस्या’ से ज्यादा ग्रस्त पाई गई | शहरी इलाकों में पुरूषों के मुकाबले महिलाएँ ‘जोड़ों के समस्या’ उच्च/कम रक्तचाप और कैंसर से ज्यादा ग्रस्त पाई गई | ग्रामीण इलाकों में 40 और शहरी इलाकों में 35 प्रतिशत उम्रदराज लोग किसी न किसी प्रकार की शारीरिक अक्षमता (दिखने, सुनने व बोलने इत्यादि से संबंधित ) से ग्रस्त पाए गए | वृद्धावस्था की ओर बढ़ना एक ऐसी शारीरिक प्रक्रिया है जिसे उल्टा नहीं जा सकता, जो व्यक्ति के समूचे जीवन में घटित होती रहती है और बिना रुके मृत्यु तक चलती रहती है | स्त्रोत: हेल्पेज इंडिया/ वोलंटरी हेल्थ एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया