भूमिका शशांकासन योग में शरीर का आकार खरगोश के समान होने के कारण इस आसन को 'शशांकासन' और अंग्रेजी में 'हेयर पोज' कहा जाता हैं। पीठ दर्द और गर्दन के दर्द को दूर करने के लिए यह उपयोगी आसन हैं। दमा / अस्थमा रोग, मधुमेह / डायबिटीज और ह्रदय रोग से पीड़ित व्यक्ति के लिए उपयोगी योग हैं। शशांकासन की विधि सबसे पहले एक स्वच्छ और समतल जगह पर एक दरी / चटाई या योग मैट बिछा दे। अब वज्रासन में बैठ जाये। वज्रासन में बैठने के बाद श्वास लेते हुए दोनों हाथों को सिर के ऊपर सीधा ऊपर उठाये। अब धीरे-धीरे श्वास छोड़ते हुए हाथों को बिना मोड़े आगे की ओर तब तक झुके जब तक की आपका मस्तक (फॉरहेड ) जमीन को स्पर्श न करे। हाथ और कुन्हानियो का स्पर्श जमीन से होना चाहिए। क्षमतानुसार कुछ देर श्वास रोककर (कुंभक) इस स्थिति में बने रहे। धीरे-धीरे श्वास लेते हुए आरंभिक स्थिति में लौटें। अपने क्षमतानुसार इस क्रिया को दस बार दोहराए। प्रकारांतर वज्रासन में बैठे। कमर के पीछे दायीं हाथ से बायीं कलाई को पकड़े। लम्बा गहरा श्वास ले और फिर श्वास धीरे-धीरे छोड़ते हुए अपने नितंब (हिप्स) को बिना उठाए सामने की ओर आगे झुके और मस्तक का स्पर्श जमीन से करे। यथाशक्ति श्वास रोके और इस स्थिति में बने रहे। अब धीरे-धीरे श्वास लेते हुए प्रारंभिक स्थिति में लौटें। शशांकासन से लाभ शरीर मजबूत और लचीला बनता हैं। काम विकारों को दूर करता हैं। पाचन प्रणाली सक्रीय होती हैं। कब्ज को दूर करता हैं। पेट पर जमी अतिरिक्त चर्बी कम कर मोटापा दूर करने में सहायक हैं। दमा / अस्थमा रोग, मधुमेह / डायबिटीज और ह्रदय रोग से पीड़ित व्यक्ति के लिए उपयोगी योग हैं। क्रोध, भय, शोक आदि आवेश तथा भावनात्मक असंतुलन को कम करता हैं। शशांकासन में सावधानी पेट और सिर में कोई समस्या होने पर यह योग नहीं करना चाहिए। चक्कर आना, उच्च रक्तचाप, हर्निया और स्लिप डिस्क की तकलीफ होने पर यह योग न करे। यह योग करते समय कोई तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर और योग विशेषज्ञ की राय लेना चाहिए। अभ्यास के साथ इस योग का समय धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए। यह आसन रोजाना करने से आप मनोविकार से दूर रह सकते है और आपकी स्मरणशक्ति अच्छी रह सकती हैं। लेखक: डॉ. परितोष त्रिवेदी स्रोत: निरोगिकाया