भूमिका गोमुखासन यह योग करते समय शरीर का आकार गाय के मुख के समान होने के कारण इसे 'गोमुखासन' कहा जाता हैं। अंग्रेजी में इसे ' द काऊ पोज ' कहा जाता हैं। गोमुखासन महिलाओ के लिए अधिक फायदेमंद माना जाता हैं। गोमुखासन विधि सर्वप्रथम एक स्वच्छ और समतल जगह पर एक दरी / चटाई या योगा मैट बिछा दे। सुखासन या दण्डासन में बैठ जाये। अब बायें (लेफ्ट ) पैर की एडी (एंकल) को दाहिने (राईट) नितम्ब (हिप्स) के पास रखिए। दाहिने पैर को बाई जांघ (लेफ्ट थाई) के ऊपर से क्रोस करते हुए इस प्रकार स्थिर करे की घुटने (नी) एक दुसरे के ऊपर रहने चाहिए। अब बायें (लेफ्ट ) हाथ को पीठ (बैक) के पीछे मोड़कर हथेलियों को ऊपर की ओर ले जाए। दाहिना हाथ (राईट हैण्ड ) को दाहिने कंधे (राईट शोल्डर) पर सीधा उठा ले और पीछे की ओर घुमाते हुए कोहनी (एल्बो) से मोड़कर हाथों को परस्पर बांध ले। अब दोनों हाथो को धीरे से अपनी दिशा में खींचे। अपने मुड़े हुए दाहिने हाथ को ऊपर की और अपने क्षमतानुसार तानकर रखे। शरीर को सीधा रखे। श्वास नियंत्रित रखे और इस अवस्था में यथाशक्ति रुकने का प्रयास करे। इस आसन को हाथ और पैर को बदलकर पांच बार करे। अंत में धीरे-धीरे श्वास छोड़कर क्रमशः फिर से दण्डासन में बैठ जाये। गोमुखासन के लाभ यह आसन करने से शरीर सुड़ोल,लचीला और आकर्षक बनता हैं। वजन कम करने के लिए यह आसन उपयोगी हैं। गोमुखासन मधुमेह रोग में अत्यंत लाभकारी हैं। महिलाओं में स्तनों का आकार बढ़ाने के लिए यह विशेष लाभकर हैं। नीचे दिए हुए रोग में यह लाभकारी हैं गठिया साइटिका अपचन कब्ज धातु रोग मन्दाग्नि पीठदर्द लैंगिक विकार प्रदर रोग बवासीर गोमुखासन में सावधानी कंधे, पीठ, गर्दन, नितम्ब या घुटनों में ज्यादा समस्या होने पर यह योग नहीं करना चाहिए। यह आसन करते समय कोई तकलीफ होने पर तुरंत योग विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेना चाहिए। शुरुआत में पीठ के पीछे दोनों हाथो को आपस में न पकड़ पाने पर जबरदस्ती न करे। गोमुखासन का समय अभ्यास के साथ धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए। लेखक: डॉ. परितोष त्रिवेदी स्रोत: निरोगिकाया