टीकाकरण दशकों से भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीति का केंद्र-बिंदु रहा है, जिससे बीमारी के प्रसार और बाल मृत्यु दर को कम करने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) भारत की सबसे व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों में से एक है, जिसका लक्ष्य हर साल लाखों नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं को जीवन रक्षक टीके उपलब्ध कराना है। 1978 में टीकाकरण के विस्तारित कार्यक्रम के रूप में शुरू किये गए इस अभियान को 1985 में यूआईपी के रूप में पेश किया गया। इसका कवरेज शहरी केंद्रों से ग्रामीण क्षेत्रों तक बढ़ाया गया, जिससे स्वास्थ्य सेवा पहुंच में असमानताओं को दूर किया जा सके। 1992 में, यूआईपी को बाल जीवन रक्षा और सुरक्षित मातृत्व कार्यक्रम में और बाद में, 1997 में राष्ट्रीय प्रजनन और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में शामिल किया गया। 2005 से, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत, यूआईपी भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों का एक केंद्रीय घटक बन गया है, जो यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करता है कि टीके देश के सबसे दूरदराज के हिस्सों में भी हर बच्चे तक पहुँचें। सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) के तहत, भारत गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम संचालित करता है। इसके अंतर्गत प्रति वर्ष 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं और 2.6 करोड़ नवजात शिशुओं का टीकाकरण किया जाता है। यह पोलियो, खसरा, रूबेला, डिप्थीरिया, टेटनस, रोटावायरस डायरिया, हेपेटाइटिस बी जैसी 12 वैक्सीन रोकथाम योग्य बीमारियों (वीपीडी) से सुरक्षा प्रदान करता है। यू-विन डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग टीकाकरण कार्यक्रमों को रिकॉर्ड करने, टीकाकरण प्रमाणपत्र बनाने और पूरे देश में टीकाकरण के लिए अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। सार्वभौमिक टीकाकरण ककार्यक्रम - मुख्य बिंदु: यह कार्यक्रम 12 बीमारियों के खिलाफ़ मुफ़्त टीकाकरण प्रदान करता है, जिसमें देश स्तर पर नौ बीमारियों को शामिल किया गया है, जैसे डिप्थीरिया, टेटनस, पोलियो, खसरा और हेपेटाइटिस बी। इसके अतिरिक्त, यह विशिष्ट क्षेत्रों में रोटावायरस डायरिया, न्यूमोकोकल न्यूमोनिया और जापानी इंसेफेलाइटिस से बचाव के टीके भी प्रदान करता है। इस पहल के तहत, जीवन के पहले वर्ष के भीतर राष्ट्रीय कार्यक्रम के अनुसार सभी टीके प्राप्त करने के बाद एक बच्चे को पूरी तरह से प्रतिरक्षित माना जाता है। टीकाकरण का रिकॉर्ड ANM/ASHA द्वारा रखा जाता है — परिवारों को टीकाकर्ड देना प्राथमिक कार्य है। विशेष सब-राष्ट्रीय अभियान (Mission Indradhanush आदि) से कवरेज सुधारा जाता है। यूआईपी देश में सबसे अधिक लागत प्रभावी स्वास्थ्य कार्यक्रमों में से एक बन गया है, जिसने 2014 में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर को प्रति 1000 जीवित जन्मों में 45 से घटाकर 32 प्रति 1000 जीवित जन्म कर दिया है (एसआरएस 2020)। उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल हैं - 2014 में भारत से पोलियो का उन्मूलन और 2015 में मातृ और नवजात टेटनस का उन्मूलन। ये उपलब्धियां सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा में यूआईपी के प्रभाव को रेखांकित करती हैं। मिशन इंद्रधनुष दिसंबर 2014 में शुरू किया गया मिशन इंद्रधनुष (एमआई), भारत सरकार की एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में बच्चों के लिए पूर्ण टीकाकरण कवरेज को बढ़ाना है और 90% कवरेज लक्ष्य को हासिल करना है। मिशन इंद्रधनुष विशेष रूप से कम टीकाकरण दर वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है, जिसमें दुर्गम क्षेत्र और ऐसे समुदाय शामिल हैं, जहाँ बच्चों को या तो टीका नहीं लगाया गया है या आंशिक रूप से टीका लगाया गया है। यह मिशन एक लक्षित दृष्टिकोण अपनाता है और उन जिलों तथा क्षेत्रों को प्राथमिकता देता है जहाँ टीकाकरण का स्तर कम है। इस प्रकार, टीकाकरण कवरेज में महत्वपूर्ण अंतर को पाटने का प्रयास किया जाता है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी बच्चा असुरक्षित न रहे। अपनी शुरुआत से लेकर अब तक, मिशन इंद्रधनुष के बारह चरण पूरे हो चुके हैं, जिसमें देश भर के 554 जिले शामिल हैं। यू-विन पोर्टल यू-विन पोर्टल भारत के टीकाकरण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं और जन्म से लेकर 17 वर्ष तक के बच्चों के टीकाकरण का पूरी तरह से डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध कराता है। इस डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का उद्देश्य वैक्सीन वितरण और रिकॉर्ड को सुव्यवस्थित करना है तथा यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक व्यक्ति आसानी से अपने टीकाकरण रिकॉर्ड तक पहुँच सके और इसका प्रबंधन कर सके। उपयोगकर्ता के अनुकूल, नागरिक-केंद्रित सेवाओं को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया यू-विन 'किसी भी समय पहुँच' और 'किसी भी जगह' टीकाकरण की सुविधा देता है, जो प्राप्तकर्ताओं के अनुकूल समय-अवधि का विकल्प प्रदान करता है। नागरिक यू-विन वेब पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से स्वयं पंजीकरण कर सकते हैं, जिससे परिवारों के लिए टीकाकरण की तारीख व समय पर नज़र रखना और आगामी खुराक के लिए स्वचालित एसएमएस अलर्ट प्राप्त करना आसान हो जाता है। प्लेटफ़ॉर्म एक सार्वभौमिक क्यूआर-आधारित ई-टीकाकरण प्रमाणपत्र भी तैयार करता है और अपने लिए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (आभा) आईडी और अपने बच्चों के लिए चाइल्ड आभा आईडी बनाने का विकल्प प्रदान करता है, जिससे व्यापक डिजिटल स्वास्थ्य प्रबंधन संभव हो पाता है। सुलभता को ध्यान में रखते हुए, यू-विन पोर्टल हिंदी सहित 11 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है, ताकि विविध भाषाई समुदायों के लिए व्यापक उपयोगिता सुनिश्चित की जा सके। सूचना का स्रोत: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय