जच्चा बच्चा रक्षा कार्ड छः जानलेवा संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए अपने बच्चों को सही समय पर टीके अवश्य लगवाएं। टीकाकरण क्या है? बच्चो के शरीर मे रोग प्रतिरक्षण हेतु टीके लगाए जाते हैं जिससे बच्चो के शरीर की रोग से लडने की शक्ति बढती है। टीकाकरण से बच्चों मे कई सक्रांमक बीमारियों की रोकथाम होती है तथा समुदाय के स्वास्थ्य के स्तर मे सुधार होता है। टीकाकरण से बच्चों मे किंन-किंन रोगो से सुरक्षा संभव है? भारत मे ऐसे छः गम्भीर संक्रामक रोग हैं जो प्रति-दिन हजारों बच्चो की जान ले लेते हैं या उन्हे अंपग बना देते हैं ये रोग हैं 1. खसरा 2. टेटनस (धनुष बाय) 3. पोलियो 4. क्षय रोग 5.गलघोंटू 6.काली खांसी 7. हेपेटाईटिस "बी" इसके अतिरिक्त गर्भवती महिलाओ को टेटनस के टीके लगाकर उन्हे व उनके नवजात शिशुओं को टेटनस से बचाया जाता है। टीके कैसे दिये जाते है? पोलियो के अतिरिक्त सभी रोग प्रति रक्षण टीके इंजेक्शन द्वारा दिये जाते है। पोलियो के टीके की दवा बच्चे को मुंह मे पिलाई जाती है। बच्चे को टीके कब-कब लगवाने चाहिये? भारत में बीमारियों की स्थिति देखते हुए भारत सरकार ने निम्न राष्ट्रीय टीकाकरण सूची तैयार की है जिसके अनुसार समय समय पर टीके लगवाने चाहिएः राष्ट्रीय टीकाकरण सूची गर्भवती महिला एंव गर्भ मे पल रहे बच्चे को टिटेनस की बीमारी से बचाने के लिये गर्भावस्था मे जितनी जल्दी हो सके टिटेनसटाक्साइड प्रथम / बूस्टर टीका द्वितीय टीका एक माह के अन्तराल से नोटः- यदि पिछले तीन वर्ष मे दो टीके लगे हो तो केवल एक ही टीका पर्याप्त है शिशुओ के लिए 11/2 माह की आयु पर बी.सी.जी. का टीका हेपेटाईटिस B का प्रथम टीका डी.पी.टी.का प्रथम टीका पोलियो की प्रथम खुराक 21/2 माह की आयु पर डी.पी.टी. का द्वितीय टीका हेपेटाईटिस B का द्वितीय टीका पोलियो की द्वितीय खुराक 31/2 माह की आयु पर डी.पी.टी. का तृतीय टीका हेपेटाईटिस B का तृतीय टीका पोलियो की तृतीय खुराक 9-12 माह की आयु पर खसरा का टीका 16-24 माह की आयु पर डी.पी.टी.का बूस्टर टीका पोलियो की बूस्टर टीका 5-6 वर्ष की आयु पर डी. पी. टी. का टीका 10-16 वर्ष की आयु पर टी.टी. का टीका स्वास्थ्य संस्थान मे जन्म लेने वाले सभी बच्चो को बी.सी.जी. का टीका और पोलियो की अतिरिक्त खुराक (जीरो डोज ) जन्म के समय दी जाती है। याद रखे 1. बच्चो मे बी.सी.जी. का टीका, डी.पी.टी. के टीके की तीन खुराके, पोलियो की तीन खुराके व खसरे का टीका उनकी पहली वर्षगांठ से पहले अवश्य लगवा लेना चाहिए। 2. यदि भूल वश कोई टीका छुट गया है तो याद आते ही स्वास्थ्य कार्यकर्ता / चिकित्सक से सम्पर्क कर टीका लगवाये ये सभी टीके उप स्वास्थ्य केन्द्र /प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र / राजकीय चिकित्सालयों पर निःशुल्क उपलब्ध हैं। 3. टीके तभी पूरी तरह से असरदार होते हैं जब सभी टीकों का पूरा कोर्स सही सही उम्र पर दिया जावें। 4. मामूली खांसी, सर्दी, दस्त और बुखार की अवस्था मे भी यह सभी टीके लगवाना सुरक्षित है। स्त्रोत: स्वास्थ्य विभाग, झारखण्ड सरकार