<h3 style="text-align: justify;">परिचय</h3> <p style="text-align: justify;">मसूड़ों के रोग, जिसे पीरियोओडोंटल/पेरियोडोंटाइटिस डिजीज के नाम से भी जाना जाता है। यह एक चिरकालिक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो कि दांतों को सहारा देने वाले मसूड़ों और हड्डियों को प्रभावित करता है। ये साधारणतय: मसूड़े की सूजन से लेकर गंभीर रोग के रूप में हो सकता है, जो कि मसूड़ों और सहायक हड्डियों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाता है। मसूड़े के रोग की व्यापकता अत्यधिक है। यह विश्वभर में नब्बे प्रतिशत आबादी को प्रभावित करता है तथा यह वयस्कों में दंत क्षति का एक प्रमुख कारण है। यह प्लाक (दांतों पर गंदगी) (बैक्टीरियल बायोफिल्म) के जमाव के कारण होता है, जो कि टार्टर या कैलकुलस नामक एक कठोर पदार्थ में बदल जाता है, जो कि दांत के आधार (मसूड़ों की जोड़ पर) में फंस जाता है, ऐसा तब होता है, जब मुख स्वच्छता बनाए नहीं रखी जाती है। मसूड़ों के रोगों की कभी-कभी उपेक्षा की जाती है, क्योंकि ये आमतौर पर दर्द रहित होते हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">प्रकार</h3> <ul style="text-align: justify;"> <li style="text-align: justify;">मसूड़ों में होने वाली सूजन (जिंजीवाइटिस): मसूड़ों की बीमारी का प्रारंभिक चरण</li> <li style="text-align: justify;">पीरियोओडोन्टाइटिस: यदि मसूड़ों में होने वाली सूजन का उपचार न किया जाए, तो यह पीरियोओडोन्टाइटिस में तब्दील हो जाता है।</li> </ul> <h3 style="text-align: justify;">लक्षण</h3> <p style="text-align: justify;">संकेत और लक्षण:</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>मसूड़े के लाल और सूजे हुए कोर (टेंडर/नाजुक ऊतक)।</li> <li>मसूड़ों से खून आना।</li> <li>मुंह से दुर्गन्ध आना।</li> <li>मसूड़े का पीछे होना।</li> <li>मसूड़ों का ऐसा आकार होना जैसे कि वे दांतों से दूर हट रहे हों या जगह छोड़ रहे हों।</li> <li>आंशिक रूप से लगाए गए नकली दांतों के फिट होने के तरीके में बदलाव।</li> <li>आंशिक डेंचर की फिटिंग में परिवर्तन।</li> </ul> <h3 style="text-align: justify;">कारण</h3> <p style="text-align: justify;">ज़ोखिम के कारक </p> <ul style="text-align: justify;"> <li>मुंह की अच्छे से देखभाल न करना।</li> <li>धूम्रपान या तंबाकू उपभोग।</li> <li>मधुमेह।</li> <li>टेढ़े दांत, जो कि आसानी से साफ़ नहीं हो पाते।</li> <li>गर्भावस्था।</li> <li>जेनेटिक (आनुवंशिक) गड़बड़ी।</li> <li>कुछ दवाएं जैसे कि स्टेरॉयड, कुछ मिर्गी रोधी दवाएं, कैंसर थेरेपी दवाएं, कुछ कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स और मुख से लिए जाने वाले गर्भ निरोधक।</li> <li>मसूड़ों के रोगों को शुरुआती दौर में आसानी से रोका जा सकता है तथा उसे ठीक या बदला जा सकता हैं।</li> </ul> <h3 style="text-align: justify;">निदान</h3> <p style="text-align: justify;">जल्द से जल्द मसूड़ों के रोगों की पहचान करने के लिए नियमित दंत-परीक्षण की आवश्यकता होती है, जैसे कि खून बहना या मसूड़े और ढीले दांत के संकेतों के लिए दंत-परीक्षण की ज़रूरत है। आगे की जांच के लिए एक्स-रे की आवश्यकता हो सकती हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हड्डी को कितनी क्षति हुयी है, यदि वास्तव में हड्डी को क्षति हुयी है।</p> <h3 style="text-align: justify;">रोकथाम</h3> <p style="text-align: justify;">मसूड़ों के रोग और इसकी प्रगति को रोकने के लिए घर पर बेहतर मुख (मुंह) स्वास्थ्य देखभाल आवश्यक है। इसमें नियमित दिन में दो बार ब्रश करना, दांतों के बीच के फासले की सफाई करना, संतुलित आहार खाना और नियमित रूप से दंत-परीक्षण के लिए जाना शामिल है। अच्छी मख स्वच्छता बनाए रखने से प्लाक (दांतों पर गंदगी) को हटाने में मदद मिलती है, जो कि बहुत जल्दी बनते है। यदि प्लाक को हटाया नहीं जाता है, तो यह टार्टर (कैलकुलस) नामक कठोर पदार्थ में बदल जाते है तथा यह बैक्टीरिया के विकास को बढ़ाते है। कैलकुलस (टार्टर) को दंत चिकित्सक द्वारा हटाया जाता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">वर्गीकरण</h3> <p style="text-align: justify;"><strong>जिंजीवाइटिस (मसूढ़ों में सूजन, खून आना या फिर इनका लाल होना)</strong><br /> <br />यह पीरियोओडोंटल (मसूड़ों) रोग का सबसे हल्का प्रकार है, जो कि मसूड़ों से सटे दांतों पर बैक्टीरिया प्लाक के जमाव के कारण होता है। जिंजीवाइटिस मसूड़ों की सूजन है तथा यह दांतों की अंतर्निहित सहायक संरचनाओं को प्रभावित नहीं करती है। यदि जल्दी उपचार किया जाता है तो इसे बदला या ठीक किया जा सकता है, लेकिन अगर नजरअंदाज कर दिया जाता है, तो यह सहायक ऊतकों में फैल सकता है, जिसके कारण दांतों की क्षति हो सकती है। ब्रश करते समय या अन्य समय में लाल या सूजे मसूड़े और मसूड़े से रक्तस्राव होना जिंजीवाइटिस के मुख्य लक्षण हैं। आमतौर पर इसके कारण दर्द या कोई अन्य लक्षण नहीं होते है, इसलिए काफी समय तक पता नहीं चलता है।<br /><strong> </strong><br /><strong>पीरियोओडोन्टाइटिस</strong><br /> <br />यदि जिंजीवाइटिस की उपेक्षा की जाती है, तो यह पीरियोओडोन्टाइटिस-मसूड़े के रोग के उन्नत रूप में बदल सकता है। पीरियोओडोन्टाइटिस मसूड़ों के साथ-साथ सहायक ऊतकों और हड्डी को नुकसान पहुंचाता है। जैसे-जैसे संक्रमण अल्वियोलर (वायुकोशीय) हड्डी में पहुंचता है, तब मसूड़े अपनी जड़ों की सतह से अलग होने लगते है और एक खाली जगह बन जाती है, उस रिक्त स्थान को पॉकेट के नाम से जाना जाता है। यह दांतों के ढीला होने का प्रमुख कारण है और दांतों को निकालना पड़ सकता है।<br /> <br />पीरियोओडोन्टाइटिस के कारणों में कैलकुलस संचय, तंबाकू उपभोग, आनुवांशिक और पर्यावरणीय कारक शामिल हैं। कई विकार जैसे कि त्वचा विज्ञान संबंधी, हीमेटोलॉजिकल, ग्रैनुलोमेटस, इम्यूनोसप्रेसिव, जेनेटिक और नियोप्लास्टिक विकारों में भी पीरियोओडोंटल प्रकटीकरण हो सकता हैं। पीरियोओडोंटल रोग को गर्भावस्था के प्रतिकूल परिणामों, हृदय रोग, स्ट्रोक, फुफ्फुसीय रोग और मधुमेह के साथ जुड़ा हुआ पाया गया है।<br /> <br />पीरियडोंटोलॉजी अमेरिकन एकेडमी के अनुसार पीरियोओडोन्टाइटिस के प्रकार निम्नलिखित हैं: </p> <ul style="text-align: justify;"> <li>क्रोनिक पीरियोओडोन्टाइटिस: इस रोग को मुख्यत: पॉकेट के गठन और मसूड़ों के घटाव से जाना जाता है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन वयस्कों में सबसे सामान्य है।</li> <li> एग्रेसिव पीरियोओडोन्टाइटिस: यह पीरियोडॉन्टल बीमारी का एक अत्यधिक विनाशकारी रूप है, जो कि तेजी से मसूड़ों और हड्डियों के विनाश का कारण बनता है तथा यह स्वस्थ रोगियों में होता है।</li> <li>प्रणालीगत रोगों के प्रकटीकरण के रूप में पीरियोओडोन्टाइटिस: हृदय रोगों, मधुमेह और श्वसन रोगों से जुड़ा हुआ है।</li> <li>नेक्रोटाइजिंग पीरियोडॉन्टल रोग: इस रोग को मसूड़ों के ऊतकों, पीरियोडॉन्टल लिगामेंट्स और वायुकोशीय (एल्वोलर) हड्डियों की क्षति (मृत्यु) से जाना जाता है, जो कि घावों का कारण बनता हैं। यह एचआईवी, कुपोषण और इम्यूनोसप्रेशन जैसी प्रणालीगत स्थितियों से पीड़ित लोगों में बेहद सामान्य है।</li> </ul> <h3 style="text-align: justify;">उपचार </h3> <p style="text-align: justify;">सर्वप्रथम मसूड़ों के रोग का पता लगाया जाता है; जितनी जल्दी हो सकें, उतनी जल्दी उसे प्रबंधित किया जाता है। उपचार का उद्देश्य रोग को उन्नत चरणों में बढ़ने से रोकना है।<br /> <br />मसूड़ों के रोग की गंभीरता के आधार पर उपचार गैर-सर्जिकल या सर्जिकल हो सकता है।<br /> <br />गैर-सर्जिकल उपचार में निम्नलिखित शामिल हैं:</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>स्केलिंग: दांतों और मसूड़ों के नीचे से टार्टर निकालना। आमतौर पर यह दंत चिकित्सक (डेंटिस्ट) या दंत स्वास्थिक (डेंटल हाइजीनिस्ट) द्वारा किया जाता है।</li> <li>रूट प्लानिंग: कैलकुलस और बैक्टीरियल टॉक्सिन के आगे होने वाले निर्माण को रोकने के लिए रूट सर्फिस को समतल किया जाता है।</li> <li>एंटीबायोटिक्स: इसमें टॉपिकल एंटीबायोटिक्स जैसे कि माउथ रिंस और जैल, या मुख से लेने वाले एंटीबायोटिक शामिल होते है।<br /> </li> </ul> <p style="text-align: justify;">सर्जिकल उपचार में निम्नलिखित शामिल हैं फ्लैप सर्जरी (पॉकेट रीडक्शन सर्जरी) </p> <ul style="text-align: justify;"> <li>सॉफ्ट टिशु ग्राफ्ट: बॉन ग्राफ्ट</li> <li>गाइडेड टिशु रिजेनरेशन</li> <li>इनेमल मैट्रिक्स डरिविटिव ऐप्लीकेशन </li> </ul> <p style="text-align: justify;">नेशलन हेल्थ पाेर्टल एवं विकासपीडिया द्वारा स्वास्थ्य की बेहतर समझ के लिए केवल सांकेतिक जानकारी उपलब्ध कराई गई है। किसी भी निदान/उपचार के लिए कृपया अपने चिकित्सक से परामर्श करें।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : नेशलन हेल्थ पाेर्टल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय , भारत सरकार। </p>