परिचय रेबीज एक घातक वायरल संक्रमण है, जो कि मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। यह रोग ज़ोनोटिक (यह रोग जानवरों में होता है, लेकिन यह रोग मनुष्यों में फ़ैल सकता है) है अर्थात् यह एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति में प्रसारित हो सकता है, जैसे कि कुत्ते से मनुष्य और सामान्यत: संक्रमित जानवर से काटने के बाद मनुष्य में फैल सकता है। रेबीज मनुष्य के लिए हमेशा घातक है। यदि काटने (प्रोफीलैक्सिस अर्थात् पीईपी) के तुरंत बाद उपचार नहीं किया जाता है, तो यह गंभीर हो सकता है। रेबीस वायरस केंद्रीय तंत्रिका प्रणाली को संक्रमित करता है और अंततः मस्तिष्क को प्रभावित करता है तथा जिसके परिणामस्वरूप मृत्यु हो जाती है। रेबीज वायरस परिधीय नसों के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुँचता है। रोग की ऊष्मायन अवधि, जो कि काटने/रेबीज़ के संपर्क में आने के अंतराल पर होती है। इसके लक्षणों की शुरुआत मनुष्य में सामान्यत: लगभग कुछ दिनों से कुछ महीनों में होती है। काटने के स्थान और काटने की गंभीरता एवं दूरी के आधार पर वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और अन्य कारकों तक पहुँचता है। लक्षण संक्रमण एवं फ्लू जैसे लक्षणों की अवधि सामान्यत: दो से बारह सप्ताह होती है। प्रारंभिक लक्षणों में सामान्यत: निम्न एक या एक से अधिक लक्षण शामिल है: चिंता। अनिद्रा। भ्रम। बेचैनी। बुख़ार। सिरदर्द। मतली और उल्टी। इसके बाद शीघ्र ही निम्नलिखित हो सकता है:- पानी पीने में असमर्थता और/या पानी से डर (हाइड्रोफोबिया)। हवा के झोंकें से डर (एरोफोबिया)। प्रकाश/रोशनी से डर (फोटोफोबिया)। असामान्य व्यवहार। मतिभ्रम से भ्रम का विकास। कुछ में हिंसक व्यवहार। थोड़ा या आंशिक पक्षाघात। अंततः कार्डियो-श्वसन की विफलता और मृत्यु। कारण रेबीज वायरस लाइसीवायरस बोले जाने वाले वायरस समूह से संबंधित है, जो स्तनधारियों को संक्रमित करता है। यह वायरस पागल/विक्षिप्त जानवर की लार में उपस्थित होता है। निदान परीक्षण का उपयोग रोग की पुष्टि करने के लिए किया जाता है। इसके उन्नत चरणों में निम्नलिखित शामिल है: त्वचा की बायोप्सी- रेबीज वायरस की उपस्थिति के लिए त्वचा का छोटा सा नमूना लिया जाता है और उसकी जांच की जाती है। लार का परीक्षण- रेबीज वायरस की उपस्थिति के लिए लार के नमूने का परीक्षण किया जाता है। लंबर पंचर- सुई का उपयोग प्रमस्तिष्कमेरु द्रव (सेरब्रोस्प्य्नल फ्लूइड/सीएसएफ) के छोटे से नमूने को निकालने के लिए किया जाता है। जिसकी जांच रेबीज एंटीबॉडी (सीएसएफ तरल पदार्थ है, जो कि आपके मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के चारों ओर होता है) के लिए की जाती है। रक्त परीक्षण- रेबीज एंटीबॉडी के लिए रक्त की जांच की जाती है। प्रबंधन उपचार इस बात पर निर्भर करता है, कि क्या रोगी में कोई संकेत एवं लक्षण दिखायी दे रहें है। वर्तमान उपचार में गहन देखभाल सुविधा तथा अन्य उपशामक उपायों में जीवन-सहयोगी सेवाएं प्रदान करना शामिल है। रोकथाम क. प्री-एक्सपोजर (ज़ोखिम से पहले) टीकाकरण/काटने के बाद (प्रोफिलैक्सिस): ज़ोखिम से पीड़ित रोगियों को रेबीज़ से बचने के लिए टीकाकरण लेने की सलाह दी जाती है। रेबीज के लिए उपलब्ध टीकें हैं: मानव डिप्लॉइड कोशिका वैक्सीन (एचडीसीवी), प्यूरिफाइड चिक एम्ब्रीओ सेल वैक्सीन (पीसीईसीवी) और प्यूरिफाइड वैरो रेबीज वैक्सीन (पीवीआरवी)। टीका इंट्रामस्क्युलर या इंस्ट्रमर्मल मार्ग द्वारा दिया जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित टीकों का उपयोग त्वचा के अंदर लगाने के लिए किया जाना चाहिए। रेबीज़ टीकाकरण देने की अनुसूची इस प्रकार है: पहली ख़ुराक किसी चयनित दिन (उस दिन को शून्य दिन के रूप में गिना जाता है) पर दी जाती है। दूसरी ख़ुराक सात दिनों के बाद दी जाती है। तीसरी ख़ुराक पहली ख़ुराक के बाद इक्कीस या अठाईस दिनों में दी जाती है। जिन व्यक्तियों को रेबीज के ज़ोखिम से पीड़ित होने की संभावना अधिक होती है, उन व्यक्तियों को रेबीज विशेषज्ञ या संक्रामक रोग विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर सुरक्षात्मक एंटीबॉडी का स्तर बनाए रखने के लिए प्रत्येक दो साल या उचित अंतराल पर टीके की बूस्टर ख़ुराक लेने की सलाह दी जाती है। ख. काटने (प्रोफीलैक्सिस अर्थात् पीईपी) के बाद: संपर्क में आने के तुरंत बाद या जल्द से जल्द टीकाकरण या सेरो-वैक्सीन थेरेपी दी जाती है। यह रोग रोकने में अत्यधिक सफ़ल है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं पानी व साबुन या डिटर्जेंट से घाव को अच्छी तरह से साफ़ करें तथा एंटी सेप्टिक जैसे कि पॉवीडोन आयोडीन या अन्य लगाएं। रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन का उपयोग गंभीर ज़ोखिम के बाद किया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार इसे श्रेणी III के संपर्क में आने के बाद दिया जाता है। एंटी-रेबीज एंटीबॉडीज की विशेष तैयारी, घावों और आसपास, शारीरिक रूप से जहाँ दिया जा सकता है, वहां दिया जाता है। "एसेन" आहार का उपयोग करते हुए आधुनिक रेबीज वैक्सीन का कोर्स दिया जाता है, जिसमें पांच इंजेक्शन शामिल हैं, इंट्रामस्क्युलर (पेशी में) मार्ग द्वारा शून्य दिन (पहले इंजेक्शन का दिन और संपर्क/काटने का दिन नहीं हो सकता है) से 3, 7, 14 और 28 में दिया जाता है या इंट्रा त्वचीय (त्वचा में) मार्ग द्वारा शून्य दिन (पहले इंजेक्शन का दिन और संपर्क/काटने का दिन नहीं हो सकता है) से 3, 7 और 28 पर दिया जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित केवल रेबीज टीकों का उपयोग इंट्रा-त्वचीय मार्ग के माध्यम से किया जाता है। ग. अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों के लिए रेबीज टीकाकरण: आमतौर पर यह सलाह दी जाती है, कि पालतू जानवरों और जंगली जानवरों सहित सभी जानवरों को छूने से बचें। रेबीज के संक्रमण से पीड़ित देशों में पालतू जानवरों का रेबीज के खिलाफ़ टीकाकरण नहीं किया जाता है। इसके अलावा मुक्त घूमने वाले आवारा कुत्ते और अन्य जानवर रेबीज के संक्रमण का स्रोत होते हैं। इन क्षेत्रों में जीवन-बचाने वाले रेबीज जैविक की उपलब्धता और पहुंच गंभीर चिंता का मसला है, इसलिए कई रेबीज मुक्त देश अपने नागरिकों को रेबीज संक्रमित देशों की यात्रा करने से पहले से पूर्व-ज़ोखिम टीकाकरण लगाने की सलाह देते हैं। संचारण रेबीज संक्रमित जानवरों के काटने, खरोंच, या चटकी हुई त्वचा चाटने या आंखों के माध्यम से मनुष्यों में फैलता है। एक बार रेबीज वायरस शरीर में प्रवेश करता है। यह तंत्रिका में प्रवेश करने से पहले बढ़ जाता है। यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र यानि कि रीढ़ की हड्डी से मस्तिष्क में पहुँच जाता है। एक बार वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में पहुँच जाएं, इसके बाद यह लार ग्रंथियों, फेफड़े, गुर्दे और अन्य अंगों में फैल जाता है। सिद्धांत के तहत यह संभव है, कि मानव के बीच रेबीज प्रसारित हों, लेकिन यह केवल संक्रमित अंगदान जैसे कि कॉर्निया, गुर्दा और फेफड़ों के परिणामस्वरूप हो सकता है। विकासपीडिया द्वारा एवं नेशनल नेशलन हेल्थ पाेर्टल द्वारा स्वास्थ्य की बेहतर समझ के लिए केवल सांकेतिक जानकारी उपलब्ध कराई गई है। किसी भी निदान/उपचार के लिए कृपया अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्त्राेत : नेशलन हेल्थ पाेर्टल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय , भारत सरकार।