सुजाक और क्लेमैडिया यह रोग यौन सम्पर्क से फैलते हैं अगर किसी व्यक्ति में सुजाक और क्लेमैडिया एक साथ हो जाए तो दोनों का इलाज भी एक साथ होने चाहिए| लक्षण पुरुषों में महिलाओं में -पेशाब करते समय पीड़ा -शुरू में कोई खास लक्षण नहीं दिखता हाँ पेशाब करते समय पीड़ा हो सकती है -शिशन(पेशाब नली) से पीब की बूंद निकलना -अगर सूजाक वाली महिला माँ बनने वाली हो तो उसे जल्दी ही इलाज करवा लेना चाहिए -अन्डकोशों में सूजन और दर्द -उसके होने वाले बच्चे को भी यह रोग हो सकता है| वह अन्धा हो जा सकता है| हफ़्तों या महीनों बाद -एक या दोनों टांगों में, टखनों और कलाइयों - पेट के निचले हिस्से में दर्द सूजन और में दर्द वाला सूजन जलन -पूरे शरीर में दाने या छाले - मासिक धर्म की समस्याएं - महिला बाँझ भी हो जा सकती है पुरुषों में ये लक्षण छुतहा स्त्री के साथ मैथुन करने के बाद उसे पांच दिन में दिखने लगता है | कभी-कभी तीन हपते बाद ही लक्षण दिखता है महिलाओं में महीनों या वषों बाद भी लक्षण नहीं दीखते हैं| लक्षण भले ही न दिखे पर उसे छूत तो हो ही जाता है| उपचार पहले यह रोग पैनसिलिन से दूर हो जाता है, पर अब डाक्टर दूसरे असरदार दवाइयां देते हैं| अगर पेट के निचले हिस्से में दरद हो और बुखार भी आता हो तो डाक्टरी इलाज जरूर करवाएं| हर उस व्यक्ति का इलाज करना चाहिए जिसने सूजाक के रोगी के साथ मैथुन किया हो सभी बच्चों को सूजाक और अंधेपन से बचने का उपाय करें| आतशक आतशक एक आम पर खतरनाक रोग है| यह रोग भी मैथुन से ही लगता है| लक्षण पहले प्रजनन अंग पर मुंहासे, छाले या खुले घाव के रूप में प्रगट होता है घाव में बहुत सारे रोगाणु होते हैं जो तेजी से फैलते हैं| घाव में कोई दर्द नहीं भी हो सकता है अगर घाव महिला के योनी के अन्दर हो तो नहीं दिखता है, लेकिन छूत फैला देता है| घाव कुछ दिन रहता है, फिर भर जाता है| लेकिन बीमारी अन्दर ही अन्दर फैलती रहती है| ह्पतों और महीनों बाद गला खराब हो सकता है, हल्का बुखार लग सकता है, मुंह में छाले हो सकते हैं या जोड़ों में सूजन आ सकती है| पूरे शरीर में पीड़ा देने वाले मुंहासे निकल आते हैं गोल छल्लेदार चकते निकल आते हैं हाथों या पांवो में खुजली वाले ददोरे निकल आते हैं अक्सरहां ये लक्षण अपने आप खतम हो जाते हैं व्यक्ति समझता है कि वह ठीक हो गया लेकिन बिना इलाज के यह रोग किसी भी अंग को नुकसान पहुंचा सकता है वह आदमी दिल का रोगी हो जा सकता है उसे फालिज या पागलपन हो सकता है, कई अन्य समस्यांए भी आ सकती हैं| उपचार इस रोग का डाक्टरी इलाज पूरी तरह कराना चाहिए पैन्सिलिन के इलाज से फायदा होता है गर्भवती या दूध पिलाने वाली महिला को जांच करवा लें कि उसके लिए पेंसिलिन उचित है या नहीं| एड्स – एच. आई. वी. एड्स रोग भी छुतहा होता है, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है एड्स शरीर कि रोगों से लड़ने वाली शक्ति को धर देता है एड्स पीड़ित रोगी आसानी से बीमार पड़ सकता है वह कई तरह कि बिमारियों के गिरफत में आ सकता है जैसे- दस्त न्यूमोनिया, टी.बी. चमड़ी का कैंसर| ज्यादा रोगी इन्हीं बीमारियों से मर जाते हैं, क्योंकि वे रोगों का मुकाबला नहीं कर पाते हैं| एड्स किसी व्यक्ति में खून, विर्य्र या योनी से बहने वाले श्राव से दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंचते हैं| एड्स रोगी के साथ मैथुन करने से यह रोग हो जाते हैं| एक से अधिक व्यक्ति के साथ संभोग करने से एड्स बीमारी होने का अवसर अधिक हो जाता है| इंजेक्शन को अगर साफ न किया जाए तो एड्स कि बीमारी तुरत हो सकती है गर्भवती महिला से अगर एड्स हो तो बच्चा भी एड्स का रोगी पैदा होता है| यह सोचना गलत है कि एड्स हाथ मिलाने, साथ रहने, खेलने या खाने से भी फैलता है | यह भी सोचना गलत है कि एड्स के साथ भोजन करने से, एक ही शौचालय जाने से या मच्छर से या मख्ही से फैलता है| लक्षण अलग़-अलग व्यक्तियों एड्स के लक्षण अलग-अलग होते हैं आम रोगों कि तरह इसके विशेष लक्षण होते हैं धीरे-धीरे वजन घटना एक महीने ज्यादा दस्त लगना एक महीने तक बुखार आता जाता हो| नीचे दिए गए लक्षणों में एक या एक अधिक लक्षण भी हो सकते हैं| एक महीने से काफी खांसी आना मुंह के पास छाले निकलना शरीर के किसी हिस्से में सूजी हुई लसीली गांठे चमड़ी पर दानें मस्से, घाव या छाले का निकलना, इनका जल्दी ठीक न होना हर समय थकावट महसूस करना टी.बी. का हो जाना| उपचार : अभी तक इस बीमारी का कोई इलाज खोजा नहीं जा सका है अभी तक कोई दवा नहीं निकली है जो रोग होता है केवल उसी का इलाज होता है दस्त लगने पर ओ.आर.एस. का घोल समय-समय पर पिलाएँ बुखार लगने पर उसकी गोलियाँ दें उसे भरपूर स्नेह दें ताकि वह बिना तकलीफ के मर सके| बचाव उसी व्यक्ति के साथ संभोग करें जिसे यह रोग न हो एक से अधिक लोगों के साथ यौन संबंध न रखें खास कर पुरुष या स्त्री वेश्या, नशीली दवा लेने वाला व्यक्ति|एस.टी.डी.(यौन संबंधी रोगों)का इलाज तुरंत कराएं| इंजेक्शन नये सिरिंज से लें या फिर निश्चित हो जाएँ कि इंजेक्शन और सुई को काफी देर तक उबलते पानी में रखा गया है| रोगी के खून, दस्त उल्टी, खुले घाव से एड्स फ़ैल सकता है| उनसे बचें | पसीने या खून से सने कपड़ों को भी न छुएं मैथुन करते समय कन्डोम का उपयोग करें एच. आई.बी. विषाणु से ग्रषित व्यक्ति के खून का उपयोग नहीं किया जाए| स्त्रोत: संसर्ग, ज़ेवियर समाज सेवा संस्थान