महत्वपूर्ण जानकारी सभी मरीजोंको दुष्प्रभाव नहीं होते। यदि आपको दुष्प्रभाव होते हैं, तो अपने डॉक्टर/नर्स को सूचित करें एवं उनकी सलाह लें। जल्दी कार्यवाही से दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। कुछ लक्षण अन्य कारणों की वजह से हो सकते हैं और इन्हें जाँच की आवश्यकता है। अपनी दवाईयों को स्वयं ही बंद या चालून करें। अपनी दवाईयाँ इतरोंको ना दे या दूसरों को उपचार की सलाह न दें। धूम्रपान न करें व शराब न पीएँ क्योंकी इससे दुष्प्रभाव और बढ़ सकते हैं। मुख्य दुष्प्रभाव मतली / उल्टी टीबी की दवाईयों की वजह से पेट में जलन के कारण हो सकता है दवाओं को केले में सन्निहित करके लें धूम्रपान न करें और शराब न पीएँ पौष्टिक खाना खाएँ अन्य दुष्प्रभाव अपने डॉक्टर/नर्स को सूचित करें और उनकी सलाह लें भूख में कमी पेट में दर्द/बेचैनी पीली त्वचा, पीली आँखे, गहरे रंग का मूत्र टीबी की दवाईयों की वजह से हो सकता है यह जिगर की क्षति/लिवर की विषाक्तता दर्शाता है तत्काल अपने डॉक्टर/नर्स को सूचित करें और उनसे सलाह लें सूचना : नारंगी रंग का मूत्र रिफैम्पिसिन की वजह से हो सकता है हाथों और पैरों में झुनझुनी, जलन, सुन्नता यह टीबी की दवाईयों के कारण होने वाली न्यूरोपैथी की वजह से हो सकता है। अपने डॉक्टर/नर्स को सूचित करें और उनकी सलाह लें डॉक्टर की सलाह पर विटामिन बी6 लेने से इस का निवारण हो सकता है फ्लू जैसे लक्षण ठंड लगना, शरीर में दर्द, साँस फुलना थकान, सूखी खाँसी भूख में कमी यह रिफैम्पिसिन की वजह से हो सकता है आमतौर पर मामूली होता है और अपने आप कम हो जाता है यह फ्लू के संक्रमण की वजह से भी हो सकता है। अपने डॉक्टर/नर्स को सूचित करें और उनकी सलाह लें खुजली/दाने/चकत्ते टीबी की दवाईयों की वजह से हो सकते है। यदि मुँह या नाक में या शरीर के बहुत बड़े क्षेत्र में होता हैं या बुखार भी आता है; तो तत्काल अपने डॉक्टर/नर्स को सूचित करें और उनकी सलाह लें कम दिखाई देना आँखों में कोई समस्या यह इथेमब्यूटोल की वजह से हो सकता है अपने डॉक्टर/नर्स को तुरंत सूचित करें और उनकी सलाह लें आमतौर पर इथेमब्यूटोल को बंद करने पर इसका निराकरण हो जाता है यदि इथेमब्यूटोल को बंद कर दिया जाता है, तो टीबी का पूरी तरह इलाज करने के लिए उसकी जगह पर अन्य दवा शुरू करने की आवश्यकता है जोड़ों, मांसपेशियों, स्नायु में दर्द चलने में या हिलने में कठिनाई यह पायराझिनामाइड और फ्लोरोक्विनोलोन के कारण हो सकता है आमतौर पर हानिरहित इनका दर्दनाशक दवाओं द्वारा इलाज किया जा सकता है तुरंत अपने डॉक्टर/नर्स को सूचित करें और उनकी सलाह लें स्त्रोत: इंडियन काउंसिल ऑफ मेडीकल रिसर्च, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय,भारत सरकार