परिचय दोस्तों, चक्कर और मूर्च्छा वैसे तो घबरा देनेवाली आकस्मिक घटना होती है। इसके बारे में कुछमहत्त्वपूर्ण बिंदू समझ लेना चाहिये। चक्कर आना यानि घूमनें की संवेदना होकर निचे गिर जाना। इसी को घूमरा भी कहते है। अंधेरा छाना अर्थात अचानक से आँखों के सामने अंधेरा छाने से कुछ नजर ना आना और गिर जाना ये दोनो वैद्यकीय घटना अलग अलग कारणों से घटती है। चक्कर आना मुख्यत: कान और मस्तिष्क से संबंधित है। अंधेरा छाना, रक्तदाब कम होने से संबंधित है। अंधेरा छाने से व्यक्ति के निचे गिरनेपर रक्तप्रवाह लेटी हुई स्थिती में मस्तिष्क तक पहुँचकर व्यक्ति होश में आता है। अंधेरा छाने के कारण अंधेरा छाने का प्रमुख कारण अचानक रक्तदाब कम होकर मस्तिष्क में रक्त कम पहुँचना। ऐसा अनेक बीमारियों में होता है। जैसे की, अतिवेदना या मानसिक आघातके कारण तंत्रिका तंत्रका एक हिस्सा उद्दिपित होकर रक्तदाब कम होता है। कुछ पलो में ही यह आघात कम होकर आदमी ठीक हो जाता है। हृदयरोग के दौरे से अचानक रक्तदाब कम हो सकता है। गर्दन की रीढ की बीमारी होनेपर मस्तिष्क में रक्तपूर्ती कम होती है। कुछ व्यक्तियों को कम रक्तदाब की प्रवृत्ती होती है। अचानक अधिक रक्तस्त्राव होने से रक्तदाब कम हो जाता है। अधिक दस्त, उलटियॉं होने से शरीर में पानी की मात्रा कम होकर रक्तदाब कम होता है। उष्माघात से भी रक्तदाब कम होता है। अतिरक्तदाब से धमनीयॉं आकुंचित होकर आगेका रक्तप्रवाह कम होता है। इससे भी अंधेरा छाता है रक्त शर्करा कम होने से भी आँखोंके सामने अंधेरा छा जाता है। मधुमेह की गोलियॉं या इन्शुलीन लेनेके बाद आहार न लेनेसे रक्तशर्करा कम होती है। रक्तद्रव्य यानि हिमोग्लोबिन का प्रमाण कम होनेसे मस्तिष्क को प्राणवायू कम पडता है। इससे मूर्च्छा आ सकती है। चक्कर आने के कारण कुछ व्यक्तियों को बस या नाव में चक्कर आती है। इस समय अंतर्कर्ण से मस्तिष्क तक सदोष संदेश जाते है। इसे टालने हेतु दवा उपलब्ध है। अंतर्कर्ण की कुछ बीमारी होने से चक्कर आते है। ग्लाकोमा नामक आँखोंकी बीमारी में चक्कर आते है। कुछ दवाइयों के दुष्परिणाम से चक्कर आते है। मस्तिष्क में गांठ होने या मस्तिष्क को धक्का पहुँचनेसे चक्कर आने की तकलीफ होती है। सागर स्तर से अधिक उँचाईवाले स्थानों पर प्राणवायु और हवा का दबाव कम होता है। आदत ना होने पर ऐसे ठिकानों पर तकलीफ हो सकती है। सूचना बीमारी महत्त्वपूर्ण हो तब समय पर डॉक्टर से मिलना आवश्यक है। अगर सामान्य बीमारी हो तब प्रतिबंधक दवाईयॉं साथ रखे। स्त्रोत: भारत स्वास्थ्य