पीत ज्वर रोग प्रस्तावना पीत ज्वर संक्रमित मच्छरों से फैलने वाला एक गंभीर वायरल रक्तस्रावी रोग है | इसके नाम में ‘पीत’ पीलिया के लिए आया है जो कुछ रोगियों को प्रभावित करता है | पीत ज्वर से जिन गंभीर रूप से प्रभावित जिन व्यक्तियों का इलाज नहीं किया जाता उनमें से 50 प्रतिशत की मृत्यु हो जाती है | यह वायरस अफ्रीका और लेतीं अमेरिका के कटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक फैलता है जहां की कुल जनसंख्या 900 मिलियन लोगों से अधिक की है | पीत ज्वर का वायरस फ्लेविवायरस जीनस का एक अर्बोवायरस है और इसका प्राथमिक विषाणु मच्छर होता है | यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में वायरस को ले जाता है, प्रथमतः बंदरों के बीच, बंदरों से मनुष्यों में और फिर मनुष्यों से मनुष्यों में | अनेक अलग-अलग प्रकार के एडीज एवं हिमोगोगस प्रजाति के मच्छर वायरस को फैलाते हैं | मच्छर या तो घरों के आस-पास (घरेलू), जंगल में (जंगली) अथवा दोनों जगहों पर (अर्ध-घरेलू)पनपते हैं | संक्रमण के प्रति लोगों की प्रतिरोधक क्षमता में कमी, वनों के कटाव,शहरीकरण, लोगों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने और जलवायु परिवर्तन के सरन विगत दो दशकों में पीत ज्वर के मामलों की संख्या बढ़ी है| पीत ज्वर का कोई इलाज नहीं है | उपचार लक्षणों पर आधारित होता है जिसका लक्ष्य रोगी को आराम दिलाने के लिए रोग के लक्षणों को कम करना है | टीकाकरण ही पीत ज्वर के विरुद्ध रोकथाम का सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपाय है | टीका सुरक्षित, सस्ता और अत्यधिक प्रभावकारी है, तथा 30-35 वर्ष और उससे अधिक समय तक के लिए 10 दिन के बाद प्रभावी प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है | पीत ज्वर प्रभावित देशों की समस्या की गंभीरता पीत ज्वर, मूलतः वायरल रक्तस्रावी ज्वर, एक प्रभावकारी टिके के विकसित किए जाने तक सर्वाधिक भयानक रोगों में से एक था | दुनिया भर में प्रतिवर्ष पीत ज्वर के अनुमानतः 200000 मामले होते हैं, जिनसे 300oo00 मौतें हो जाती हैं | सौभाग्य से, यह वायरस एशिया में कभी नहीं उभरा | बहुत बड़ी मानवीय जनसंख्या और एडीज एजिप्टी मच्छर विषाणु की मौजूदगी के कारण एशिया को इस वायरस के सामने आने का संभावित स्थान माना जाता है | एशिया में इस रोग की गैर-नौजुदगी के संभावित कारणों में डेंगू बुखार के अत्यधिक प्रभाव के कारण लिया गया क्रॉस-प्रोटेक्शन, एडीज इजिप्टी मच्छरों की स्थानीय संख्या के अधिक प्रभावकारी न होने, और पीत ज्वर के ऐसे सुदूर क्षेत्रों के लोगों में फैलने, जो वायुमार्ग से यात्रा नहीं करते और उनके संक्रमण फैलाने की संभावना नहीं है, को माना जाता है | एडीज इजिप्टी से संक्रमित पीत ज्वर से प्रभावित जोन से बाहर की दुनिया के क्षेत्र और इस प्रकार रोग के आरंभ और फैलाव का ग्रहणकर्ता क्षेत्रों में दक्षिणी अमेरिका के तटवर्ती क्षेत्र, मध्य अमेरिका, कैरिबियाई, दक्षिणी अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया (क्वीन्सलैण्ड), दक्षिणी चीन, ताईवान, और प्रशान्त द्वीप शामिल हैं | वार्षिक रूप से, अफ्रीका में 5000 तक और दक्षिणी अमेरिका में 300 तक मामलों की रिपोर्ट प्राप्त होती है, परंतु माना जाता है कि वास्तविक संख्या आधिकारिक रिपोर्टों (वीकली एपिमोलोजिकल रिकॉर्ड, नं. 6, 4 फरवरी 2005) से 10 से 50 गुणा अधिक है | 1990 और 1999 के बीच अफ्रीका में 11297 मामलों तथा 2648 मौतों की रिपोर्ट आई थी | सवार्धिक मामले नाइजीरिया में हुए थे जहां 1986 और 1994 के बीच महामारी श्रृखंलाबद्ध रूप से फैली | यह महामारी कैमरून (1990), घाना (1993-94, 1996), लाइबेरिया (1995, 1998), गैबोन (1994), सेनेगल (1995, 1996), बेनिन (1996) और केन्या (1992)में भी फैली थी | अफ्रीका में महामारी के दौरान, संक्रमण की घटना 20 प्रतिशत तक और रोग की घटना 3 प्रतिशत तक हो सकती है | दक्षिणी अमेरिका में,पीत ज्वर सैद्धांतिक रूप से अमेजन क्षेत्र और संक्रामक ग्रासलैण्ड्स में होता है | 1990 और 1999 के बीच 1939 मामले और 941 मौतों की रिपोर्ट प्राप्त हुई थी | अफ्रीका में, जहां गांवों और उसके आसपास के लोग मौसम के खुले संपर्क में रहते हैं, जिन बच्चों ने प्राकृतिक रूप से प्रतिरोधक क्षमता प्राप्त नहीं की है, उनके लिए रोग का जोखिम सबसे ज्यादा है और पुरुषों में मामले थोड़े ज्यादा होते हैं | दक्षिणी अमेरिका में,जहां वायरस वनाच्छादित विरल क्षेत्रों में वायरस फैलता है, यह सैद्धांतिक रूप से कृषि भूमि के लिए कटाई अथवा छंटाई में लगे लोगों को प्रभावित करता है | यधपि डब्ल्यूएचओ सदस्य राष्ट्रों से अंतररास्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के तहत पीत ज्वर के मामलों की रिपोर्ट देने की अपेक्षा की जाती है, रिपोर्ट किए गए आंकड़ो में रोग की सच्ची घटनाओं का कम आकलन किया जाता है |अध्ययन दर्शाते हैं कि पीत ज्वर रुग्णता और मृत्युदर के कम आकलन का फैक्टर 10-500 है | कम रिपोर्टिंग के कारणों में कमजोर निगरानी, विशेषत:ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां रोग के फैलने की संभावना अधिक होती है, और विशेषत: महामारीविज्ञान संबंधित निगरानी और प्रयोगशाला पुष्टि के लिए आमतौर पर क्षमता एवं अवसंरचना की कमी शामिल हैं | 1980 के दशक के अंतिम वर्षों से, पीत ज्वर पुनः उभरा है; डब्ल्यूएचओ को रिपोर्ट किए गए सभी पीत ज्वर मामलों में से 80 प्रतिशत से अधिक मामले अफ्रीका के थे | अफ्रीका के ‘जोखिम वाले’ 33 देशों में से, 16 ने 1980 से 1999 तक कम से कम 1 बार इसके प्रकोप रिपोर्ट दी थी | 2000 से 2004 तक की अवधि में ही, 16 देशों ने 1 या उससे अधिक बार प्रकोप की रिपोर्ट दी थी, जिनमें कुल 1927 मामले और 425 मौतों की रिपोर्ट दी गई थी | इस अवधि के दौरान सबसे बड़ा प्रकोप वर्ष 2000-2001 में गिनी में दर्ज किया गया था, जिसमें 38 में से 17 जिलों ने 833 मामलों और 246 मौतों की रिपोर्ट दी थी | वर्ष 2000 से डब्ल्यूएचओ को रिपोर्ट किए गए दो प्रकोप 2001 में अबिजान, आइवरी कोस्ट में और 2002 में तौबा, सेनेगल में शहरों में हुए थे | इसका प्रकोप लंबे अंतराल के बाद हो सकता है, जैसाकि 1993 में केन्या में और 2000 में गिनी में हुआ था, जो क्रमशः 20 और 50 वर्ष के बाद हुआ था | वर्ष 2004 में, दक्षिण अमेरिका में घोषित पीत ज्वर के मामलों की कुल संख्या में से, 5 देशों (बोलीविया, ब्राजील, कोलंबिया, पेरू और वेनेजुएला) द्वारा 111 मामले (47 प्रतिशत) और 52 मौतें (80 प्रतिशत) अधिसूचित किए गए थे | दक्षिणी अमेरिका में वैश्विक केस-फैटलिटी दर 47 प्रतिशत थी जो अफ्रीका (11 प्रतिशत) से बहुत अधिक थी | 2000-2012 के दौरान विभिन्न प्रभावित देशों में पीत ज्वर का प्रकोप (2008-2012) (2003-2007) (2000-2002) 3 फरवरी 2012 कैमरून में पीत ज्वर 3 फरवरी 2012 घाना में पीत ज्वर 1 दिसंबर, 2011 सेनेगल में पीत ज्वर 11 मार्च 2011 सिएरा लियोन में पीत ज्वर 1 फरवरी 2011 आइवरी कोस्ट में पीत ज्वर-अधतन 25 जनवरी 2011 आइवरी कोस्ट में पीत ज्वर 19 जनवरी 2011 युगांडा में पीत ज्वर 5 अक्तूबर 2010 सेनेगल में पीत ज्वर 19 जुलाई 2010 कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में पीत ज्वर 27 मई 2010 कैमरून में पीत ज्वर 24 फरवरी 2010 कैमरून में पीत ज्वर 12 जनवरी 2010 गिनी में पीत ज्वर 8 जनवरी 2010 आइवरी कोस्ट में पीत ज्वर 1 दिसंबर, 2009 मध्य अफ्रीकी गणराज्य में पीत ज्वर 1 अक्टूबर, 2009 कैमरून में पीत ज्वर 6 मई 2009 लाइबेरिया में पीत ज्वर 30 अप्रेल 2009 कांगो गणराज्य में पीत ज्वर 14 जनवरी 2009 गिनी में पीत ज्वर 6 जनवरी 2009 सिएरा लियोन में पीत ज्वर 20 मई 2008 मध्य अफ्रीकी गणराज्य में पीत ज्वर 25 अप्रेल 2008 लाइबेरिया में पीत ज्वर – अधतन 18 अप्रेल 2008 लाइबेरिया में पीत ज्वर 7 मार्च 2008 पराग्वे में पीत ज्वर – अपडेट 2 पीत ज्वर टीकाकरण पराग्वे में सर्वाधिक 1.27 लाख 28 फरवरी 2008 पराग्वे में पीत ज्वर – अधतन पराग्वे में पीत ज्वर के खिलाफ लामबंदी जरी 20 फरवरी 2008 पराग्वे में पीत ज्वर 7 फरवरी 2008 ब्राजील में पीत ज्वर 3 नवंबर 2008 बुर्किना फासो में पीत ज्वर 30 अक्टूबर 2008 मध्य अफ्रीकी गणराज्य में पीत ज्वर 29 सितम्बर 2008 गिनी में पीत ज्वर 8 अगस्त 2008 आइवरी कोस्ट में पीत ज्वर जनवरी- 12 फरवरी 2007 टोगो में पीत ज्वर 19 दिसंबर 2006 टोगो में पीत ज्वर 19 अक्टूबर 2006 आइवरी कोस्ट में पीत ज्वर 19 दिसंबर 2005 गिनी में पीत ज्वर-अधतन 9 दिसंबर 2005 सूडान में पीत ज्वर-अपडेट 2 7 दिसंबर 2005 आइवरी कोस्ट में पीत ज्वर-अधतन 28 नवंबर 2005 माली में पीत ज्वर-अधतन 3 28 नवंबर 2005 सूडान में पीत ज्वर –अधतन 21 नवंबर 2005 सूडान में पीत ज्वर 16 नवंबर 2005 माली में पीत ज्वर – अपडेट 2 10 नवंबर 2005 माली में पीत ज्वर – अधतन 3 नवंबर 2005 माली में पीत ज्वर 2 नवंबर 2005 गिनी में पीत ज्वर 20 अक्टूबर 2005 सेनेगल में पीत ज्वर 22 सितम्बर 2005 बुर्किना फासो और आइवरी कोस्ट में पीत ज्वर 31 अगस्त 2005 गिनी में पीत ज्वर 7 जनवरी 2005 गिनी में पीत ज्वर 6 जनवरी 2005 माली में पीत ज्वर 11 मार्च 2004 लाइबेरिया में पीत ज्वर–अपडेट 2 4 मार्च 2004 लाइबेरिया में पीत ज्वर – अधतन 2 25 फरवरी 2004 लाइबेरिया में पीत ज्वर 24 नवंबर 2004 बुर्किना फासो में पीत ज्वर 14 सितम्बर 2004 वेनेजुएला में पीत ज्वर 1 जून 2004 बुर्किना फासो में पीत ज्वर – अधतन 11 मई 2004 बुर्किना फासो में पीत ज्वर 10 अक्टूबर 2003 बुर्किना फासो में पीत ज्वर 30 सितम्बर 2003 सिएरा लियोन में पीत ज्वर – अधतन 19 अगस्त 2003 सिएरा लियोन में पीत ज्वर 11 जून 2003 सूडान में पीत ज्वर – अधतन 27 मई 2003 सूडान में पीत ज्वर 3 फरवरी 2003 गिनी में पीत ज्वर 17 जनवरी 2003 ब्राजील में पीत ज्वर 29 नवंबर 2002 2002 – सेनेगल में पीत ज्वर – अधतन 6 20 नवंबर 2002 2002 – सेनेगल में पीत ज्वर – अधतन 5 1 नवंबर 2002 2002 – सेनेगल में पीत ज्वर – अधतन 4 25 अक्टूबर 2002 2002 – सेनेगल में पीत ज्वर – अधतन 3 18 अक्टूबर 2002 2002 – सेनेगल में पीत ज्वर – अधतन 2 11 अक्टूबर 2002 2002 – सेनेगल में पीत ज्वर – अधतन 4 अक्टूबर 2002 2002 – सेनेगल में पीत ज्वर 21 जनवरी 2002 2002 –सेनेगल में पीत ज्वर 15 नवंबर 2001 2001 – बेल्जियम में पीत ज्वर की आयातित मामले – अधतन 12 नवंबर 2001 2001 – बेलिज्यम में पीत ज्वर की आयातित मामले 25 सितम्बर 2001 2001 – गिनी में पीत ज्वर 25 सितम्बर 2001 2001 – आइवरी कोस्ट में पीत ज्वर – अधतन 5 18 सितम्बर 2001 2001 – आइवरी कोस्ट में पीत ज्वर –अधतन 4 13 सितम्बर 2001 आइवरी कोस्ट में 2001 पीत ज्वर –अधतन 3 12 सितम्बर 2001 2001 - आइवरी कोस्ट में पीत ज्वर – अधतन 2 5 सितम्बर 2001 2001 – आइवरी कोस्ट में ज्वर – अधतन 4 सितम्बर 2001 2001 – आइवरी कोस्ट में पीत ज्वर 23 अगस्त 2001 2001 – लाइबेरिया में पीत ज्वर 7 जून 2001 2001 – पेरू में पीत ज्वर 31 मई 2001 2001 – आइवरी कोस्ट में पीत ज्वर 20 मार्च 2001 2001 – ब्राजील में पीत ज्वर – अधतन 2 7 मार्च 2001 2001 – ब्राजील में पीत ज्वर 28 फरवरी 2001 2001 – ब्राजील में पीत ज्वर 29 दिसंबर 2000 2000 – गिनी में पीत ज्वर 11 सितम्बर 2000 2000 – लाइबेरिया में पीत ज्वर – अधतन 24 अगस्त 2000 2000 – लाइबेरिया में पीत ज्वर 19 मई 2000 2000 – नाइजीरिया में पीत ज्वर 25 फरवरी 2000 2000 – नीदरलैंड में पीत ज्वर के दूसरे देश से संक्रमण के मामले 24 जनवरी 2000 2000 – ब्राजील में पीत ज्वर – अधतन 14 जनवरी 2000 2000 – ब्राजील में पीत ज्वर पीत ज्वर बाहर प्रभावित देशों के से पीत ज्वर की समस्या यात्री पीत ज्वर को गलती से एक ‘लुप्तप्राय’ रोग मान लेते हैं, और इसके संक्रमण के खतरे के बारे में संभवतः स्टिक जानकारी प्राप्त नहीं करते | आंशिक रूप से ऐसा इसलिए होता है कि अफ्रीका और दक्षिणी अमेरिका के स्थानीय लोग रोग प्रतिरोधक क्षमता रखते हैं और वायरस का प्रसार रिपोर्ट किए मामलों की वास्तविक अनुपस्थिति में होता है | वर्षा ऋतु और शुष्क ऋतु के आरंभ में समस्त ग्रामीण क्षेत्रों में खतरा बना रहता है | ऐसे क्षेत्रों में, गैर-संक्रमण अवधि के दौरान संक्रमण का खतरा संपर्क में आने के लगभग 1/1000 प्रति माह होता है, परंतु महामारी के दौरान 1/15 प्रति माह तक बढ़ सकता है | यात्रा के लिए टीकाकरण अनिवार्य है | 1996 से 1999 के बीच, यूएसए और यूरोप से ब्राजील (दो मामले), वेनेजुएला,और आइवरी कोस्ट जाने वाले गैर-टीकाकृत यात्रियों में चार खतरनाक मामले सामने आए | रोकथाम टीकाकरण करते हुए इन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से पूरी तरह बचा जा सकता है| एक मामले में (एक अमरीकी नागरिक ब्राजील में संक्रमित हुआ), रोगी को टिका नहीं लगाया गया था क्योंकि निकटतम टीकाकरण केन्द्नों सुविधाजनक स्थान पर नहीं था, जो टेनेसी में उसके घर से 25 मील दूर था| अमेरिका में टीकाकरण केन्द्रों के भौगोलिक विश्लेषण से पता चला कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में दूर-दूर थे | अंतरराष्ट्रीय विनियम के द्वारा पीत ज्वर के टीके का वितरण केवल विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुमोदित केन्द्रों द्वारा अथवा निर्धारित राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरणों द्वारा अनुमोदित केन्द्रों द्वारा किया जा सकता है | पीत ज्वर और भारत पीत ज्वर भारत में नहीं होता | भारत में पीत ज्वर के फैलने की स्थितियां बहुत अनुकूल- बहुत अधिक संख्या में मच्छर विषाणुओं की मौजूदगी और ग्रहणशील जनसंख्या के कारण- हैं | भारत सरकार भारत में पीत ज्वर के प्रवेश की रोकथाम के लिए एक कठोर पीत ज्वर टीकाकरण कार्यक्रम का अनुसरण कर रहा है | भारत आने वाले सभी यात्रियों अथवा भारत से पीत ज्वर से प्रभावित देशों में जाने वाले यात्रियों के पास पीत ज्वर के लिए एक वैध अंतरराष्ट्रीय टीकाकरण कार्ड होना चाहिए अथवा उन्हें 6 दिन की अवधि के लिए अथवा पीत ज्वर टीकाकरण के वैध होने तक के लिए (जो भी पहले हो) संगरुद्ध किया जाएगा | भारत में पीत ज्वर के प्रवेश को रोकने के लिए भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम 1969 और 2005 तथा वायुयान स्वास्थ्य नियमावली 1954 और पत्तन स्वास्थ्य नियमावली 1955 के अनुपालन में, सभी प्रवेश बिंदुओ पर पीत ज्वर रोग से बचाव के लिए सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जांच करने की कार्यनीति अपनाई हुई है | वर्षो से, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय एवं स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश भर में 27 पीत ज्वर टीकाकरण केन्द्र स्थापित किए हैं | इन केन्द्रों में टीकाकरण में वृद्धि हुई है और पीत ज्वर टीकाकरण की मांग वर्ष 2008 की 90000 से बढ़ कर लगभग 1,32,000 हो गई है | अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम, 2005 इन विनियमों का प्रयोजन और क्षेत्र रोग के अंतरराष्ट्रीय फैलाव को रोकने, उससे सुरक्षा करने, नियंत्रित करने और एक सार्वजनिक स्वास्थ्य जवाबदेही प्रदान करने के लिए ऐसे तरीके अपनाना है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के खतरों के अनुसार और उन तक सिमित हो, तथा जिनसे अंतरराष्ट्रीय यातायात एवं व्यापार में अनावश्यक हस्तक्षेप न हो | अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम, 2005 के प्रति भारत के सुरक्षित अधिकार और समझौते अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम, 2005 के प्रति प्रस्तावित सुरक्षित अधिकार :- इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम, 2005 के अनुच्छेद 6 तथा अन्य संगत अनुच्छेदों के तहत, पीत ज्वर अधिसूचित किए जाने पर भारत सरकार के पास किसी देश के सम्पूर्ण भू-भाग पर पीत ज्वर से संक्रमित क्षेत्र के रूप में विचार करने का अधिकार है | भारत सरकार के पास किसी क्षेत्र को तब तक पीत ज्वर संक्रमित क्षेत्र मानने का अधिकार है जब तक इस बात का निर्णायक साक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता कि उस क्षेत्र से पीत ज्वर संक्रमण का पूर्णतया उन्मूलन हो गया है | पीत ज्वर रोग को एक अंतरराष्ट्रीय जन स्वास्थ्य आपात स्थिति का रोग माना जाएगा और वर्तमान में लागू वाहन के कीटाणुनाशन, यात्रियों तथा चालक दल की टीकाकरण आवश्यकताओं एवं संगरोध (जैसा आवश्यक हो) (अनुच्छेद 7, 9.2 (ख) 42 और संगत अनुलग्नकों) जैसे सभी स्वास्थ्य उपाय जारी रहेंगे, जैसाकि अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम, 1969 के संलग्नक-II II के तहत निर्धारित किया गया है | हाल ही के वर्षो में, अंतरराष्ट्रीय यात्राओं, पीत ज्वर प्रभावित देशों में और उन देशों से यात्राओं सहित, में वृद्धि हुई है | भारत में सभी हवाई अड्डों पर यात्री भार में 26.7 प्रतिशत वृद्धि हुई है | वास्तविक संख्या में, वर्ष 2006-07 की संख्या 1492134 बढ़ कर वर्ष 2007-08 में 1842784 हो गई थी | पीत ज्वर प्रभावित देशों से कोई विशिष्ट आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं | तथापि, अफ्रीका महाद्वीप को भारत की संवर्धित सहायता के साथ पीत ज्वर प्रभावित देशों से आवागमन में वृद्धि होने की संभावना है | पीत ज्वर के कारक एजेंट यह रोग पीत ज्वर वायरस के कारण फैलता है, जो जो फ्लैविवायरस समूह से संबंध रखता है | पीत ज्वर का फैलाव पीत ज्वर वायरस के फैलाव के दो स्वरूप हैं, सिल्वेटिक अथवा वन चक्र और शहरी चक्र | इसका फैलाव तब शुरू होता है जब विषाणु मच्छर (अफ्रीका में एडीज अफिकानस, और दक्षिण अमरीका में जीनस हीमेगोगस की विभिन्न प्रजातियां) वायरस से संक्रमित गैर-मानव प्राइमेट्स को काटते हैं | फिर, संक्रमित मच्छर वनों से होकर गुजरने वाले मनुष्यों को काटते हैं | महामारी का सबसे बड़ा खतरा तब पैदा होता है जब वायरस लेकर मानव शहरी क्षेत्रों में लौटते हैं और घरेलू विषाणु मच्छर एडीज इजिप्टी उनको काटते हैं, जो फिर वायरस को अन्य मनुष्यों में फैलाते हैं | रोग का प्रजेंटेशन गहन अध्ययन के बावजूद, पुर्णतः विवरणात्मक लेखाओं से परे इस रोग के बारे में अपेक्षाकृत कम जानकारी है | आंशिक रूप से, इसका कारण यह है कि यह रोग सुदूर क्षेत्रों में पैदा होती है जहां परिष्कृत चिकित्सा देखभाल उपलब्ध नहीं है | यधपि मानव रोग संक्षिप्त रूप से गैर-मानव प्राइमेट्स में देखा जा सकता है, पिछले 20 वर्षों में इसके रोगजनन पर कोई शोध नहीं किया गया है | नैदानिक रोग गैर-विशिष्ट, अबोंटिव अस्वस्थता से लेकर घातक रक्तस्रावी ज्वर तक अलग-अलग प्रकार का होता है | एक संक्रमित मच्छर के काटने के बाद रोगोद्भवन अवधि 3 से 6 दिन की होती है | रोग आमतौर पर ज्वर, ठण्ड, व्याकुलता, सिरदर्द, पीठ के निचले हिस्से में दर्द, सामान्य वाट रोग, वमन और चक्कर के साथ अचानक सामने आ सकता है | शारीरिक जांच करने पर कंजंकिटवा तथा चेहरे के लाल होने तथा बुखार बढने (फैगेट के लक्षण) के संबंध में संबंधित मंदस्पंदन के साथ,रोगी पस्त और गंभीर रूप से बीमार लगता है | वायरस रक्त में मौजूद रहता है और इस प्रकार रोगी मच्छरों के लिए संक्रमण के स्रोत का काम करता है | औसत बुखार 39 डिग्री सेल्सियस होता है जो 3 दिन तक रहता है | कम उम्र के बच्चे ज्वरीय ऐंठन महसूस कर सकते हैं | प्रयोगशाला संबंधी असामान्यताओं में संबद्भ न्यूट्रोपेनियाबुखार के साथ ल्यूकोपेनिया शामिल है | इसके आरंभ के 48 से 72 घंटे के बीच और पीलिया के प्रकट होने के बाद, सीरम ट्रांसमिनेज स्तर बढ़ सकते हैं | यह तथाकथित ‘संक्रमण अवधि’ कई दिन तक रह सकती है और उसके बाद बुखार समाप्त होने के साथ तथा 24 घंटे तक लक्षणों के बने रहने के साथ, एक ‘घटाव अवधि’ आती है | घटाव अवधि के दौरान वायरस को प्रतिजैविकों तथा कोशिकीय प्रतिरक्षण प्रतिक्रिया द्वारा समाप्त किया जाता है | रक्त में गैर-संक्रामक प्रतिरोधक कॉम्पेलक्स मौजूद हो सकते हैं जिनका इम्युनोएसेज अथवा पीसीआर द्वारा पता लगाया जा सकता है | अबोंटिव संक्रमणों वाले रोगी इस स्तर पर ठीक हो सकते है, जिनमें आगे कोई लक्षण नजर नहीं आते | प्रभावित लोगों में से लगभग 15-25 प्रतिशत लोगों में, यह बीमारी ज्वर, उल्टी, अधिजठर दर्द, पीलिया, गुर्दे का फेल्योर और रक्तस्रावी डायथीसिस के साथ, अधिक गंभीर रूप में (तथाकथित ‘इंटॉक्सिकेशन का इरपेहॉड’) पुनः हो सकती है | रक्तस्रावी मैनिफेस्टेशन में पेटेशिया, एक्सिमोसेस, एपिस्टेक्सिस, मसूड़ों तथा सुई लगाने के स्थान से रक्त स्राव शामिल हैं | अनेक मामलों में, बहुत अधिक रक्त स्राव, कॉफी-ग्राउंड्स हीमेटेमेसिस, मेलिएना, अथवा मैट्रोरेजिया हो जाते हैं | प्रयोगशाला संबंधी असामान्यताओं में थ्रोम्बोसाइटोपेनिया, थक्का जमने और प्रोथ्रोम्बिन में ज्यादा समय लगना, फाइब्रिनोज तथा फैक्टर II, V, VII, VIII, IX और X का कम होना एवं फाइब्रिनये सिप्लट उत्पादों की मौजूदगी शामिल हैं | असमान्यताएं थक्का जमाने वाले कारकों के कम संश्लेषण एवं कंजम्प्शन कोऑग्युलोपैथी के कारण बहुकारकीय रक्तस्त्राव की ओर इशारा करती हैं | कोलेजन एवं एडीपी स्टिम्युलेटड एकीकरण द्वारा प्रदशित प्लेटलेट निष्क्रियता बंदर मॉडल में देखी गई है | इलैक्ट्रोकार्डियोग्राम पर एसटीटी तरंग असामान्यताओं द्वारा मायोकार्डियल आघात, और कभी-कभार गंभीर कार्डिएक एनलार्जमेंट,का पता चलता है | हेपेटोरीनल रोग के रोगियों में से 20-50 प्रतिशत की, आमतौर पर रोग के आरंभ से 7 से 10 दिन के बाद मृत्यु हो जाती है | मृत्यु से पहले की घटनाओं में हाइपोटेंशन शामिल है, जो द्रवों एवं वासोप्रेशरों से मैनेज करने के लिए लगातार कठिन होता जाने वाला लक्षण है | रोगी बढ़ा हुआ डेलिरियम, स्टुपोर, कोमा, चेयने-स्टोक्स श्वसन, मेटाबोलिक एसिडोसिस, हायपरकेलेमिया, हायपोग्लेकेमिया और हाइपोथर्मिया भी महसूस करते हैं | बढ़े हुए एल्बुमिन के साथ, सेरेब्रोस्पाइनल द्रव पर दबाव बढ़ जाता है, परंतु श्वेत रक्त कोशिकाओं में माइक्रोस्कोपिक पेरिवस्क्यूलर हैमरेज और ओडेमा शामिल हैं | मस्तिष्क ऊतक के वायरल संक्रमण (एनसिफलोपैथी के विपरीत) के कारण पूर्णतः पीत ज्वर वायरल एनसिफलाइटिस बहुत दुर्लभ होता है | पीत ज्वर का टीका पीत ज्वर का टिका ल्यूकोसिस-मुक्त भ्रूणों में बढ़े हुए पीत ज्वर वायरस का 17डी स्ट्रेन एक तनुकृत, जीवित वायरस होता है | ठीक प्रकार से दी गई एक खुराक, बुनियादी रूप से उसके शत-प्रतिशत प्राप्तकर्ताओं को प्रतिरक्षण प्रदान करती है | बचा प्रदान करता है तथा फिलहाल 10 वर्ष के बाद पुनः टीकाकरण करवाने की सलाह दी जाती है | यह टिका त्वचा के निचे लगाई जाने वाली एकल सुई के रूप में दिया जाता है | पीत ज्वर टीकाकरण प्रमाण-पत्र टीकाकरण के 10 दिन के बाद ही वैध माना जाता है| टीके का सार टीके का प्रकार खुराकों की संख्या लगाने का स्थान अनुसूची बूस्टर कंट्राइंडिकेशंस विपरीत रिएक्शन विशेष सावधानियां भंडारण तापमान लाइव वायरल 0.5 मिली की एक खरक त्वचा में सब-क्यूटेनियस 9 माह की आयु पर दिया जा सकता है प्रत्येक 10 वर्ष में एक बार बूस्टर लगाने की जरूरत है अंडे से एलर्जी; दवाइयों अथवा रोग से प्रतिरोधक क्षमता में कमी;लाक्षणिक एचआईवी संक्रमण; पिछली खुराक के प्रति हायपरसेंसिटिविटी;गर्भावस्था अंडे के प्रति हायपरसेंसिटिविटी; वहुत कम आयु वालों को एनसिफलाइटिस, दुर्लभ मामलों में; अनेक अंगों की निष्क्रियता से मृत्यु की दुर्लभ रिपोर्ट | छह माह की आयु से पहले ण लगाएं; गर्भावस्था के दौरान लगाने से बचें | +2 से +8 डिग्री सेंटीग्रेड साइड इफेक्ट्स 17डी टीकाकरण के गंभीर प्रतिकूल प्रभाव बहुत दुर्लभ हैं | टीके के बाद एनसिफलाइटिस (टीके के वायरस द्वारा मस्तिष्क पर प्रभावी होने के कारण) को लंबे समय से बहुत युवा शिशुओं में वैक्सीन के उपयोग से संबंधित एक दुर्लभ जटिलता के रूप में माना जाता रहा है| रिपोर्ट किए गए 21 में से 18 मामले बच्चों के थे, जिनमें से 16 बच्चे 7 माह से छोटे थे | एकमात्र रिपोर्ट किए गए जानलेवा मामले के रोगी के मस्तिष्क में मिले वायरस में ई जिन में दो एमिनो एसिड वदलाव मौजूद थे और इसने जंतुओं में संवर्धित न्यूरोवायरुलेंस दर्शाई | इस बात के कारण ज्ञात नहीं है कि अन्य मामले टीके के वायरस में उत्परिवर्तन के कारण हुए थे या नहीं | पीत ज्वर टीके के एनाफिलेक्टिक रिएक्शन लगभग 1/58000 की आवृत्ति पर होते हैं और टीके को स्थिर करने के लिए प्रयुक्त जिलेटिन के प्रति lसंवेदनशीलता के कारण ऐसा हो सकता है | टीकाकरण के मामूली दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट) पीत ज्वर के टीके के साथ बुखार और दर्द के साथ जहां टीका लगाया गया, वहां दर्द, लाली अथवा सूजन होती है | यह समस्या 4 में से 1 व्यक्ति को होती है | ये सामान्यतः टीका लगाने के तुरंत बाद शुरू होकर एक सप्ताह तक रह सकती है | अधिकांश लोगों को बांह में हल्का दर्द होगा | 2 से 10 प्रतिशत लोग टीका लगाने के बाद से 24 घंटे से लेकर 3 से 9 दिन तक थकान, सिरदर्द, मांसपेशी में दर्द महसूस कर सकते हैं | 1 प्रतिशत लोगों को नियमित कार्यकलाप कम करने की जरूरत होती है | टीकाकरण के अधिक गंभीर साइड इफेक्ट टीके के गंभीर नुकसान, या मृत्यु का खतरा बेहद कम है | एक टीका घटक के प्रति गंभीर एलर्जी रिएक्शन (लगभग 58000 में से 1 व्यक्ति) | गंभीर तंत्रिकातंत्रीय रिएक्शन (लगभग 125000 में से 1 व्यक्ति )| अंगों की निष्क्रियता के साथ गंभीर प्राण-घातक गिमारी (लगभग 250,000 में से 1 व्यक्ति) इस साइड इफेक्ट से पीड़ित होने वाले में से आधे से अधिक लोगों की मृत्यु हो जाती है | बूस्टर खुराक के बाद ये अंतिम दो समस्याओं की रिपोर्ट कभी नहीं आई | 130,000 में से 1 व्यक्ति को तत्काल हायपरसेंसिटिविटी – लाल चकत्ते, खुजली, बेहोशी अथवा अस्थमा – हो सकती है, इसी कारण क्लिनिक में 30 मिनट तक प्रतीक्षा करने की जरूरत होती है | 0.09 से 2.5 प्रति मिलियन लोगों को अनेक अंगों, अर्थात फेफड़े, गुर्दे, यकृत, तिल्ली, त्वचा, रक्त वाहिनियों की सूजन हो जाती है | 8 मिलियन में से 1 व्यक्ति को एनसिफलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन) हो जाती है | पीत ज्वर टीके के विनिर्माता, खरीद और आपूर्ति वर्तमान में पीत ज्वर के टीके के डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुमोदित 3 विनिर्माता हैं, जो निम्नलिखित हैं: एवेंटिस पाश्चर, फ्रांस 58, एवेन्यू लेकलर्क बीपी 7046 69348 लियोन सिड़ेक्स 07, फ्रांस बायोमैंगिनोज, ब्राजील एवी ब्राजील 4365 – मैंगिनोज ब्राजील 21045 – 900 रियो डी जनेरियो/आरजे ब्राजील इंस्टिट्यूट पाश्चर डकार, सेनेगल बीपी 220 36, एवेंन्यू पाश्चर डाकर सेनेगल भारत में टीके का उत्पादन और आपूर्ति केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान, कसौली द्वारा की जाती है | हालांकि, हाल के वर्षों में, टीके की कम आपूर्ति के कारण उपर्युक्त 27 केन्द्रों में पीत ज्वर के टीके की कमी हुई है | डब्ल्यूएचओ के माध्यम से पीत ज्वर के टीके का आयात किया जा रहा है (जिसकी आपूर्ति में लगभग 8 से 9 महीने लगते हैं) जिसके कारण टीके में विलंब और कमी रही है | यदि टीके की निर्बाध आपूर्ति बनाई रखी जा सके तो उपर्युक्त केन्द्रों द्वारा पीत ज्वर टीकाकरण में कोई कमी अथवा कठिनाई नहीं होगी | सीआरआई कसौली: पता और संपर्क विवरण इस प्रकार है: उपचार केंद्र, केंद्रीय अनुसंधान संस्थान, कसौली, हिमाचल प्रदेश फोन – 01792-272538, 01792-273209 पीत ज्वर के टीके की खरीद देश में सीआरआई, कसौली द्वारा पीत ज्वर के टीके का उत्पादन करके उसकी आपूर्ति विभिन्न मान्यताप्राप्त टीकाकरण केन्द्रों को की जाती है | आपात स्थिति अथवा टीके के उत्पादन/आपूर्ति के रुकने के स्थिति में, सीआरआई, कसौली द्वारा डब्ल्यूएचओ के माध्यम से टीके की खरीद की जाती है और उपर्युक्त विभिन्न टीकाकरण केन्द्रों को आपूर्ति की जाती है | टीकाकरण की आवश्यकता का वार्षिक आधार पर प्राक्कलन किया जता है | पीत ज्वर टीकाकरण केंद्र/अस्पताल सीआरआई, कसौली को अपनी मांग भेजते हैं और सीआरआई, कसौली से तिमाही आधार पर, आर्थात वर्ष में चार बार अथवा जितनी और जरूरत हो, उतनी बार पीत ज्वर टीके की खरीद करते हैं | पीत ज्वर केंद्र/अस्पताल टीकाकरण के लिए टीका प्राप्त होने के बाद अपने आवंटित बजट से सीआरआई, कसौली को भुगतान करते हैं | सीआरआई (कसौली) को आर्डर किए जाने वाले टीकों की संख्या यह सुझाव दिया जाता है कि प्रत्येक टीकाकरण केंद्र मांग करते समय यह सुनिश्चित करे कि उसके पास छह माह के लिए मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक सुरक्षित है (जिसमें आदर्श रूप से 10 प्रतिशत अपव्यय की मात्रा शामिल होनी चाहिए) | मांग में अपेक्षित मल्टी डोज वायल (10, 5 अथवा 2 मिली) की संख्या और मात्रा दर्शाई जानी चाहिए | पीत ज्वर के टीके की वायल पीत ज्वर के टीके नीचे दिए अनुसार मल्टी डोज अथवा सिंगल डोज की शीशियों में उपलब्ध हैं: मल्टी डोज (10, 5 और 2 खुराक की शीशी) सिंगल डोज वर्तमान में, टीकाकरण का शुल्क यात्री से 300 रु. प्रति टीकाकरण डोज की दर से वसूला जाता है | इसमें सिरिंज, स्तरिलाइजेशन, टीका लगाने, परिवहन और कोल्ड चेन बनाए रखने की लागत शामिल है | पीत ज्वर का टीका लगाने के दौरान रखी जाने वाली सावधानियां एनाफिलैक्टिक रिएक्शनों के लिए निगरानी रखने के साथ-साथ, सभी यात्रियों से निरपवाद रूप से यह पुष्टि करवाई जाती है कि उन्हें अंडा प्रोटीनों अथवाकिसी अन्य टीके अथवा दवाई के प्रति संवेदनशीलता तो नहीं हैं | सभी एसेप्टिक सावधानियां रखी जाती हैं | रिकंइंस्टिट्यूटेड टीकों का उपयोग उसी दिन (6 घंटे के भीतर) कर लिया जाता है | पीत ज्वर के टीकों की ऑडिटिंग प्रत्येक पीत ज्वर टीकाकरण केंद्र पर प्रयुक्त टीकों और स्टॉक में शेष टीकों की संख्या का ब्यौरा देते हुए एक मासिक रिपोर्ट बनाई जाती है | प्रत्येक केंद्र पर एक पूर्ण रजिस्टर रखा जाता है, जिसमें टीकाकृत व्यक्ति का सम्पूर्ण ब्यौरा, पासपोर्ट नम्बर और संपर्क विवरण सहित रखा जाता है | टीकाकरण केंद्र पर तैनात चिकित्सा अधिकारी पीत ज्वर टीकाकरण की समूची प्रक्रिया का पर्यवेक्षण करता है | चूँकि प्रत्येक टीकाकरण पर 300/- रु. में किया जाता है – अत: एक रसीद जारी की जाती है | पीत ज्वर टीकाकरण केंद्र पीत ज्वर टीकाकरण करने वाली सरकारी संस्थाओं की क्षमता 27 टीकाकरण केंद्र हैं (अनुलग्नक-1 के रूप में सूची संलग्न) | ये सभी टीकाकरण केंद्र स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा अनुमोदित हैं और केंद्र सरकार या राज्य के किसी सरकारी संस्थान में स्थित हैं | ये केंद्र तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात, उत्तर प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गोवा और दिल्ली राज्यों में फैले हुए हैं | ये केंद्र अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य के नियमों और देश के नियमों का पालन करते हुए सभी प्रकार के कड़े उपाय करते हैं | अन्य सेटिंग्स में पीत ज्वर टीकाकरण का विस्तार सभी मौजूदा एपीएचओ/पीएचओ में पीत ज्वर टीकाकरण का विस्तार: जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, पीत ज्वर टीकाकरण सेवाएँ फिलहाल 27 सरकारी संस्थाओं द्वारा प्रदान की जा रही हैं | पीत ज्वर टीकाकरण के विस्तार हेतु, सबसे पहले सभी एपीएचओ और पीएचओ को पीत ज्वर टीकाकरण केन्द्रों के रूप में निर्धारित किया जाए | इनमें निम्नलिखित मौजूदा एपीएचओ/पीएचओ शामिल होंगे: एपीएचओ चेन्नई पीएचओ तूतीकोरिन एपीएचओ अमृतसर (क) जिन राज्यों में कोई एपीएचओ/पीएचओ नहीं हैं, उनमें विस्तार: निम्नलिखित राज्य, जहाँ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों/यातायातों का संचालन किया जा रहा है, पीत ज्वर टीकाकरण केंद्र नहीं हैं: क. राजस्थान ख. जम्मू-कश्मीर ग. बिहार घ. असम ङ. अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह (ख) उपर्युक्त के अलावा, निम्नलिखित राज्यों, जहाँ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों/यातायातों का संचालन किया जा रहा है, कोई पीत ज्वर टीकाकरण केंद्र नहीं हैं: अरुणाचल प्रदेश छत्तीसगढ़ हरियाणा झारखंड मध्य प्रदेश मणिपुर मेघालय मिजोरम नागालैंड उड़ीसा सिक्किम त्रिपुरा उत्तरांचल चंडीगढ़ दादर और नगर हवेली दमन और दीव लक्षद्वीप पांडिचेरी जिन यात्रियों को (क) और (ख) क्षेत्रों से टीकाकरण करवाने की आवश्यकता है, उन्हें निकटवर्ती निर्धारित टीकाकरण केंद्र पर जाना पड़ता है | इन क्षेत्रों में पीत ज्वर टीकाकरण सुविधाओं को खोले जाने की व्यवहार्यता के बारे में राज्य के स्वास्थ्य सेवा निदेशालयों से बात की जा रही है | नए पीत ज्वर टीकाकरण केन्द्रों की पहचान: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय डब्ल्यूएचओ के मानदंडो के अनुसार, प्राधिकृत पीत ज्वर टीकाकरण केन्द्रों के रूप में निर्धारित किए जाने के लिए नए/अतिरिक्त टीकाकरण केन्द्रों की संभावनाएं तलाश रहा हैं | क. मेडिकल कॉलेज/केंद्र सरकार की संस्थाएँ: टीकाकरण केंद्र सरकारी संस्थाओं (केन्द्रीय अथवा मेडिकल कॉलेज/संस्थाओं) में खोले जा सकते हैं | ख. जिन क्षेत्रों में कोई केंद्र सरकार का अथवा मेडिकल कॉलेज नहीं हैं, वहाँ राज्य सरकार की संस्थाओं को पीत ज्वर टीकाकरण केन्द्रों के रूप में निर्धारित किया जा सकता है | ग. अन्य संगठनों/निजी संगठनों को केंद्र सरकार की अथवा राज्य सरकार की संस्था अथवा मेडिकल कॉलेज के न होने पर निर्धारित किया जा सकता है | पीत ज्वर केंद्र की स्थापना हेतु पूर्वापेक्षाएं अत्यधिक ग्रहणशील जनसंख्या और मच्छर विषाणु – एडीज इजिप्टी की बहुतायत के मद्देनजर, भारत में पीत ज्वर होने की संभावना बहुत अधिक है | यदि पीत ज्वर की शुरुआत होती है, तो सघन जनसंख्या भी उच्च रुग्णता एवं मृत्यु का कारण बनती है (पहली बार होने वाले क्षेत्रों में मामलों के जानलेवा होने की दर 50 प्रतिशत तक उच्च होती है) | इन तथ्यों के मद्देनजर, पीत ज्वर टीकाकरण प्रक्रिया का एक कठोर गुणवत्ता नियंत्रण बनाए रखना होगा और यदि अन्य संस्थाओं में शुरू किए जाएँ तो निम्नलिखित पहलुओं का ध्यान रखा जाना होगा: निर्धारित पीत ज्वर टीकाकरण केंद्र: पीत ज्वर टीकाकरण के प्रयोजनार्थ, केवल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्राधिकृत टीकाकरण केंद्र ही मान्यताप्राप्त केंद्र हैं | इनका निर्धारण स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय द्वारा किया जाता है और डब्ल्यूएचओ को अधिसूचना भेजी जाती है| कोल्ड चेन का मामला: पीत ज्वर के टीके को एक प्रभावी कोल्ड चेन कार्यतंत्र के साथ +2 से +8 सेंटीग्रेट तक के तापमान पर रखा जाना होता है | कोल्ड चेन बनाए रखना एक ऐसी समस्या है, जिसके न हो सकने के कारण टीके लगाए जाने लायक नहीं रह पाते | सरकारी संस्थाओं में, एक आइस लाइन्ड रेफ्रिजरेटर सरकारी संस्थाओं में बड़े पैमाने पर किए जा रहे प्रतिरक्षण से चली आ रही एक सामान्य प्रथा है | अपेक्षाकृत नई संस्थाओं के लिए, इसी प्रकार का कोल्ड चेन मैकेनिज्म की आवश्यकता होगी | पीत ज्वर टीके की मांग और आपूर्ति: वर्तमान में, टीके के प्रत्येक वायल में 10/5/2 खुराक होती हैं | जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, पीत ज्वर के टीके वर्तमान में डब्ल्यूएचओ द्वारा मान्यताप्राप्त विनिर्माता से आयात किए जा रहे हैं और इस प्रकार प्रत्येक संस्था को प्रापण और आपूर्ति को सुसाध्य बनाने के लिए टीकों की मांग के लिए कम-से-कम 6 माह पहले देनी होगी | प्रत्येक संस्था को सीआरआई कसौली/डीजीएचएस को त्रैमासिक आधार पर उपयोग रिपोर्ट देनी होगी | सूई (इंजेक्शन) सुरक्षा के तरीके: प्रत्येक संस्था सुरक्षित सुई तरीकों संबंधी अध्याय में दर्शाए अनुसार इंजेक्शन सुरक्षा तरीकों का पालन करेगी | टीका लगाने हेतु प्रशिक्षित जनशक्ति: प्रत्येक संस्था पर जनशक्ति को पीत ज्वर का टीका लगाने के लिए एपीएचओ/पीएचओ द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा | पीत ज्वर का टीका लगाने वाली संस्थाओं के कार्मिकों द्वारा एक 2 दिवसीय मानक प्रशिक्षण दिया जाना होगा | प्राधिकृत अंतरराष्ट्रीय पीत ज्वर टीकाकरण कार्ड: भारत आने वाले यात्रियों के पीत ज्वर कार्डो की एकरुपता बनाए रखने में कठिनाई: इसके लिए सभी मान्यताप्राप्त पीत ज्वर टीकाकरण केन्द्रों पर डब्ल्यूएचओ के आईएचआर (2005) दस्तावेज के डब्ल्यूएचओ प्रपत्र के अनुसार मुद्रित, और प्राधिकृत एजेंटों से अधिप्राप्त अंतरराष्ट्रीय पीत ज्वर टीकाकरण कार्डो को उपयोग किया जाएगा | यदि पीत ज्वर टीकाकरण कार्ड अलग स्टेशनरी पर प्रिंट किए गए हों, तो इमिग्रेशन अधिकारियों को इसे पहचानने में कठिन हो सकती है | पीत ज्वर कार्डो पर प्राधिकृत हस्ताक्षरी: केंद्र/राज्य सरकार द्वारा नियुक्त चिकित्सा अधिकारी और अधिकारी को ही पीत ज्वर कार्डो पर हस्ताक्षर किए जाने की अनुमति होगी | टीकाकरण केंद्र के लिए स्थान एवं अवसंरचना एक आदर्श पीत ज्वर टीकाकरण केंद्र में पंजीकरण, प्रतीक्षालय/कक्ष हेतु स्थान, सुई (टीकाकरण) कक्ष, ऑब्जरवेशन कक्ष एवं सार्वजनिक उपयोग के लिए सुविधाएँ उपलब्ध होनी चाहिए | प्रतीक्षालय/कक्ष हेतु जगह विमान पतन स्वास्थ्य संगठन (एपीएचओ), मंगलवार व गुरुवार को अपराह्न 2-4 बजे के बीच, पीत ज्वर टीके की सुविधा प्रदान करता है | एपीएचओ, हर टीकाकरण दिवस में 60-80 व्यक्तियों को टीका प्रदान करता है | एपीएचओ दिल्ली, के प्रतीक्षालय का निम्नलिखित आयाम हैं – जगह कुर्सी 36 फीट *18 फीट (लम्बाई * चौड़ाई) 25 इंजेक्शन (टीकाकरण) कक्ष एपीएचओ, दिल्ली के टीकाकरण कक्ष के निम्नलिखित आयाम हैं – जगह कुर्सी टीकाकरण कक्ष 18 फीट *19 फीट (लम्बाई * चौड़ाई) 15 (क) टीकाकरण कक्ष के उपकरण व अवसंरचना (1) 01 एमएल डिस्पोजबल/ए.डी. सिरिन्ज व सूई (2) 05 एमएल डिस्पोजबल सिरिन्ज व सूई (3) दस्ताने (4) रुई/पानी स्वाब (5) हब कटर (6) सूई विनाशक (7) अपशिष्ट निपटान बैग/बाल्टी (8) स्टूल (दो) (9) अलमारी (10) कुर्सी (15 -5 स्टाफ व 10 टीका प्राप्त करने वाले के लिए) (11) टेबल (एक) (12) ट्रे (13) कैंची (14) एक पलंग (15) एक काउच (16) स्ट्रेचर (17) चलता फिरता स्क्रीन (18) 400 लीटर तथा 165 लीटर की क्षमता वाले 02 फ्रिज (ख) वैक्सीन स्टोरेज हेतु जगह वैक्सीन स्टोरेज: वैक्सीन को, बच्चों की पहुंच से दूर, 2 डिग्री से 8 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान में रखना चाहिए तथा ट्रांसपोर्ट करना करना चाहिए | वैक्सीन को पतला करने वाले पदार्थ को 2-8 डिग्री सेंटीग्रेट में स्टोर करना चाहिए | वैक्सीन स्टोरेज जगह: 2,000 वैक्सीन डोज तक रखने की क्षमता वाले 12 इंच X 12 इंच X 19 का 400 लीटर के माप का फ्रिजर कम्पार्टमेंट | (क) निगरानी कक्ष (तीव्रगहिता (एनाफिलेक्टिक) संबंधी सदमा/प्रतिकूल प्रतिक्रिया) निगरानी कक्ष में निम्नलिखित होना चाहिए: चार पलंग थर्मामीटर बी पी इंस्ट्रूमेंट स्टैथौस्कोप (ख) आपातकाल दवाई किट (किसी भी वक्त के लिए निगरानी कक्ष में) प्लास्टिक/डिस्पोजेबल सिरिंज्स सूई एडरिनलाइन एंटी – हिस्टामाइन हाइड्रोकोटिसोन टरब्यूटलाइन डेक्सट्रोज (25%) IV केनुलेस (20 जी तथा 22 जी) कोटन गोज IV इन्फूजेन सेट ओरल ड्रग: पेरासिटेमोल एंटीहिस्टमाइन माउथ गेग तथा टंग डिप्रेसर आक्सीजन सिलेंडर एएमबीयू बैग फेस मास्क (वयस्क/बच्चे) IV फ्लूइडस सामान्य सलाइन 5% डेस्कट्रोस में एन/5 रिंगर लेक्टेट बुनियादी सुविधाएँ (वैकल्पिक) पीने के पानी की सुविधा, वाश रूम, टीवी जनशक्ति (केवल वैक्सीन दिवस तथा समय हेतु) 01 डॉक्टर 01 नर्स पंजीकरण हेतु 01 क्लर्क/व्यक्ति टीकाकरण हेतु 01 सहायता प्रदान करने वाला पीत ज्वर वैक्सीन के लाभार्थियों हेतु आवश्यक सूचना (यात्रियों के लिए पीत ज्वर केंद्र में प्रदर्शित करने हेतु – परिशिष्ट 2 देखें) टीकाकरण प्रक्रिया टीकाकरण प्रक्रिया तथा पीत ज्वर टीके से संबंधित दुष्प्रभाव/प्रतिकूल प्रभाव संबंध में सभी आवश्यक सूचना को सभी टीका लेने वालों के लिए प्रदर्शित एवं सूचित किया जाना चाहिए | टीका लाभार्थी निम्नलिखित दिशा में जाएँगे | टीका लाभार्थी का फ्लो चार्ट (तीव्रग्रहीता (एनाफायलेक्सिस)/प्रतिकूल प्रतिक्रिया वाले मामले में) पीत ज्वर टीकाकरण हेतु प्रक्रिया टीकाकरण सेवा पहले आवें पहले पावें के आधार पर किया जाएगा | पहले आएं पहले पाएं प्रणाली को बनाए रखने के लिए पंजीकरण/टोकन वितरण प्रणाली को लागू किया जाए | पंजीकरण के दौरान, यात्रा दस्तावेज (पासपोर्ट) की जाँच की जाएगी तथा सभी टीकाकृत व्यक्तियों को पंजीकरण/प्रतीक्षालय क्षेत्र में प्रदर्शित पीत ज्वर टीकाकरण के संबंध में आवश्यक सूचना को पढ़ने का निदेश दिया जाता है | सभी टीकाकृत व्यक्तियों को सूचित किया जाता है कि टीकाकरण के समय यात्रा दस्तावेज (पासपोर्ट) तथा 300 रुपए का वैक्सीन फ़ीस अपने साथ लाएं/रखें | सभी टीका प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को प्रतीक्षालय कक्ष में इंतजार करने का निदेश दिया जाता है तथा टीकाकरण कक्ष में 10 व्यक्तियों के बैच में वैक्सीन के लिए बुलाए जाएँगे | सभी टीका प्राप्त करने वाले व्यक्ति को पीत ज्वर वैक्सीन के दुष्प्रभाव/प्रतिकूल प्रभाव तथा अन्य विषय में सूचित किया जाता है तथा पढ़ने के लिए दिया जाता है | सभी टीका कृत व्यक्तियों से सूचित सहमति प्राप्त करना है | यात्रा दस्तावेज (पासपोर्ट) से वैक्सीन रजिस्टर में प्रविष्टियों भरी जाएँगी तथा तत्पश्चात वैक्सीन हेतु फ़ीस जमा की जाएगी तथा उस से संबंधित प्राप्ति टीकाकृत व्यक्ति को दी जाएगी | टीकाकृत व्यक्तियों को डब्ल्यूएचओ पीत ज्वर टीकाकरण कार्ड में वैक्सीन संबंधी प्रविष्टियों को भरने का निदेश दिया जाता है तथा टीका लगवाने का निदेश दिया जाता है | डॉक्टर व नर्स निम्न प्रकार से वैक्सीनेशन प्रक्रिया की शुरुआत करते है: क. वायल व्यवहार्यता मार्कर की जाँच (वीवीएम हेतु अनुलग्नक -3 देखें) | ख. 5 एमएल डिस्पोजबल प्लास्टिक सिरिंज सहित वायल में मिश्रित डिल्यूअंटा की आवश्यक मात्रा | ग. प्रक्रिया के दौरान, बायोमेडिकल वेस्ट नियमों के अनुसार सभी बायो मेडिकल वेस्ट को अलग कर विशेष बैग में एकत्र/निपटान किया जाता है | घ. टीका देने वाली जगह को पानी स्वाब से साफ़ किया जाता है | ङ. सभी व्यक्तियों के लिए निर्धारित 0.5 एमएल की वैक्सीन डोज, टीकाकृत व्यक्ति को 01 एमएल डिस्पोजबल/ ए डी प्लास्टिक सिरिंज से टीका दिया जाएगा | च. टीका प्राप्त करने के पश्चात टीकाकृत व्यक्तियों को 30 मिनट तक इंतजार करने तथा किसी दुष्प्रभाव/प्रतिकूल प्रतिक्रिया होने पर वहीं उसी समय ड्यूटी डॉक्टर को सूचित करने के लिए कहा जाता है | रिकॉर्ड का रखरखाव निम्नलिखित रिकॉर्ड का रखरखाव किया जाना है – पंजीकरण रिकॉर्ड – टीकाकृत व्यक्ति का नाम तथा यात्रा दस्तावेज व्यौरा (पासपोर्ट सं.) को रिकॉर्ड करना | सहमति फ़ार्म/रजिस्टर – टीकाकरण के पूर्व प्रत्येक टीकाकृत व्यक्ति से सूचित सहमति प्राप्त की जाती है – सहमति – मैं एतदद्वारा, पीत ज्वर टीकाकरण हेतु अपनी पूरी, नि:शुल्क, स्वैच्छिक सहमति प्रदान करता/करती हूँ | टीके की प्रक्रिया, जोखिम, जटिलता, प्रतिकूल संकेत तथा अन्य संबंधित सूचना के विषय में मुझे पढ़ने के लिए दिया गया था तथा जो भाषा मैं समझता हूँ, उसमें डॉक्टर द्वारा स्पष्ट किया गया था | यात्री के हस्ताक्षर पीत ज्वर टीकाकरण रजिस्टर रजिस्टर में निम्नलिखित प्रविष्टियाँ भरी जानी है : क्रमांक, नाम, जन्म दिवस, लिंग, पासपोर्ट संख्या, पता, वैक्सीन बैच सं., पावती सं., यात्री के हस्ताक्षर, चिकित्सा अधिकारी के हस्ताक्षर पीत ज्वर कार्ड – केवल डब्ल्यूएचओ द्वारा संस्तुत पीत ज्वर कार्ड ही प्रयोग में लाया जाएगा | सुरक्षित इंजेक्शन प्रचलन हेतु मार्गदर्शन रोगाणुहीन इंजेक्शन उपकरण का प्रयोग प्रत्येक इंजेक्शन के लिए ऑटो डिस्पोजेबल (एडी) रोगाणुहीन सिरिंज तथा सूई का प्रयोग करना तथा प्रत्येक मेडिकेशन को दुबारा तैयार करना | पैकेजों का प्रतिबंध प्रमाणिकता में दरार हेतु परीक्षण करना | यदि कोई पैकेज पंचर हो, फटा हुआ या आद्रता से क्षतिग्रस्त हो तो उस सूई व सिरिंज को नष्ट कर देना | एडी सिरिंज – प्रयोग हेतु निदेश प्रयोग में लाने के लिए सही सिरिंज का इस्तेमाल करें | पैकेजिंग की जाँच करें | यदि पैकेज क्षतिग्रस्त, खुला या एक्सपायर्ड हो गया तो उसका प्रयोग न करें | प्लंजर की तरफ से पैकेज को खोलें या फाड़ें तथा प्लंजर को पकड़ कर सिरिंज को निकालें| पैकेजिंग को काले प्लास्टिक के थैले में डालें | सूई कवर/केप को हटा कर काले प्लास्टिक थैले में डालें | प्लंजर को तबतक न हिलाएं जबतक कि आप सिरिंज को वैक्सीन से भरने के लिए तैयार न हों तथा वायल के अंदर हवा न भरने दें क्योंकि इससे सिरिंज लॉक हो जाएगा | उपयुक्त वैक्सीन वायल लें, वायल को उल्ट लें, रबर कैप से होते हुए सूई को वायल के अंदर डालें | सूई को इस तरह से डालें कि सूई की नोक वैक्सीन का स्तर के भीतर हो | सीमा से अधिक डालने पर हवा का बुलबुला बनने की संभावना होती है, जिसे निकालना अत्याधिक कठिन होता है | सूई व वायल के रबर कैप (सेप्टम) को न छुएँ | सिरिंज को भरने के लिए प्लंजर को धीरे से पीछे खींचे | प्लंजर वैक्सीन हेतु आवश्यक डोज (0.1 या 0.5 एमएल) खींचने के पश्चात वह स्वयं ही रुक जाएगा | सिरिंज में हवा को न खींचे | यदि अकस्मात ही सिरिंज में हवा भर जता है, तो हवा के बुलबुले को निकालने के लिए निम्नलिखित कदम उठाएं: (क) सूई को वायल से निकाल लें | सिरिंज को ऊपर सीधा रखकर, बैरल को टैप करें ताकि बुलबुले के नोक की ओर लाया जा सके | (ख) प्लंजर को पीछे खींचे ताकि सूई के माध्यम से हवा अंदर आ सके, जब तक कि वह सिरिंज बैरल में हवा के बुलबुले के संपर्क में न आ जाए | (ग) फिर ध्यान से डोज मार्क (0.5 या 01 एमएल) तक प्लंजर को धकेले जिससे हवा के बुलबुले को बाहर निकाला जा सके | टीका देने हेतु उपयुक्त जगह को साफ़ कर लें, यदि आवश्यक पड़े तो गीले सवाब से तथा टीका लगाएं | डोज देने के लिए प्लंजर को पूरी तरह से धकेलें जब तक कि वह लॉक न हो जाए | इस्तेमाल करने के तुरन्त बाद हब कटर का प्रयोग कर सिरिंज के हब को काट लें दो सख्त सफेद पारदर्शी प्लास्टिक कन्टेनर में टुकड़ों को एकत्र कर लेता है | फिर काटे सिरिंज को प्लास्टिक के लाल थैले में एकत्र कर लें | काटे गए/ नष्ट किए गए बैरल्स तथा सुईयों को निश्चित स्थान पर निस्संक्रामक किया जाना चाहिए तथा ठीक ढंग से निपटाया जाए | सिरिंज का प्रयोग एवं निबटान (अधिमानत: ऑटो डिस्पोजबल (एडी) सिरिंज का प्रयोग किया जाना चाहिए) व्यवहारत:, अधिकतम केन्द्रों में प्रत्येक प्रयोग हेतु 1 एमएल डिस्पोजबल प्लास्टिक सिरिंज का प्रयोग किया जा रहा है, तथा प्रयोग के पश्चात, सिरिंज को निडल डिस्ट्रॉयर का प्रयोग कर नष्ट कर दिया जाता है | जहाँ व्यावहारिक रूप से संभव हो, वहाँ प्रतिरक्षीकरण हेतु काँच या डिस्पोजबल सिरिंज के बदले ऑटो डिस्पोजबल (एडी) का प्रयोग किया जाना चाहिए | एडी सिरिंजों आरंभ करने के साथ-साथ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने विस्तृत उपभोक्ता मार्गदर्शिका भी विकसित एवं प्रचारित किया जिसमें एडी सिरिंज के प्रयोग तथा एडी सिरिंज के निपटान करने के लिए उठाए जाने वाले कदम की रूप रेखा है | सुरक्षित निपटान हेतु कदम/चरण: डिस्पोजेबल सिरिंजों (प्लास्टिक) के प्रयोग करने हेतु प्रक्रिया: हब कटर जो सिरिंज का प्लास्टिक हब काटता है नाकि सूई का मेटल भाग का प्रयोग कर प्रतिरक्षीकरण स्थल पर इंजेक्सन | कटी हुई सुईयों, हब कट्टर के पंचर प्रूफ सफेद पारदर्शी कन्टेनर में एकत्र हो जाएँगी| सिरिंज की अलग करें तथा अनटूटे वायल को लाल रंग के बैग या कन्टेनर में स्टोर करें | यदि प्रतिरक्षीकरण वेस्ट, आउटरीच केंद्र से उत्पन्न हुआ है, तब इसे आगे के निपटान हेतु जिला अस्पताल/सीएचसी/पीएचसी को सौंप दें | एकत्र की गई सामग्री को सार्वजनिक बयो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट सुविधा में भेजें | यदि ऐसी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं तो अगला कदम उठाएं | एकत्रित सामग्री को आटोक्लेव में ट्रीट करें | यदि आटोक्लेव नहीं किया जा सकता तो उस स्थिति में कम से कम 10 मिनट तक ऐसे कचरे को पानी में उबालें या रसायनिक उपचार करें | यह सुनिश्चित हो जाएगा कि इन उपचारों से डिसइन्फेक्शन हो जाएगा | आटोक्लेवड वेस्ट को निम्न प्रकार से डिस्पोज करें: (क) सूई तथा टूटे वायल को पिट या टैंक में डिस्पेज कर सकते हैं | (ख) सिरिंज तथा वायल जो टूटे नहीं हैं को रिसाइकिलिंग या लैंड फिल हेतु भेंजें | पुन: प्रयोग करने के लिए कंटेनर्स को अच्छी तरह से धोंएं | वेस्ट की उत्पति, उपचार तथा निपटान का उपयुक्त रिकार्ड बनाए | एडी सिरिंज (प्लाष्टिक) के प्रयोग हेतु प्रक्रिया: हब कटर जो सिरिंज का प्लास्टिक हब काटता है, नाकि सूई का मैटल भाग का प्रयोग कर प्रतिरक्षीकरण स्थल पर इंजेक्शन देने के तुरन्त बाद एडी प्लास्टिक सिरिंज से सूई को हटाना | कटी हुई सूईंयों, हब कट्टर के पंचर प्रूफ सफेद पारदर्शी कन्टेनर में एकत्र हो जाएँगी| सिरिंज को अलग करें तथा अनटूटे वायल (परन्तु छांटा हुआ) को लाल रंग के बैग या कन्टेनर में स्टोर करें | यदि प्रतिरक्षीकरण वेस्ट, आउटरीच केंद्र से उत्पन्न हुआ है, तब इसे आगे के निपटान हेतु जिला अस्पताल/सीएचसी/पीएचसी को सौंप दें | एकत्र की गई सामग्री को सार्वजनिक बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट सुविधाकेंद्र में भेजें| यदि ऐसी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं तो अगला कदम उठाएं | एकत्रित सामग्री को आटोक्लेव में ट्रीट करें | यदि आटोक्लेव नहीं किया जा सकता तो उस स्थिति में कम से कम 10 मिनट तक ऐसे वेस्ट को पानी में उबालें या रसायनिक उपचार करें | यह सुनिश्चित हो जाएगा कि इन उपचारों से डिसइंफेक्शन हो जाएगा | आटोक्लेवड वेस्ट को निम्न प्रकार से डिस्पोज किया जा सकता हैं: (क) सूई तथा टूटे वायल के पिट या टैंक में डिस्पोज कर सकते हैं | (ख) सिरिंज तथा अनटूटे वायल को रिसाइकिलिंग या लैंड फिल हेतु भेंजें | पुन: प्रयोग करने के लिए कंटेनर्स को अच्छी तरह से धोंएं | वेस्ट की उत्पति, उपचार तथा निपटान का उपयुक्त रिकोर्ड बनाएं | इंजेक्शन उपकरण तथा दवाईयों के संदूषण पर रोक: साफ़ उपयुक्त स्थान पर प्रत्येक इंजेक्शन को तैयार करें जहाँ खून या शरीरिक तरल पदार्थ से संदूषण होने की संभावना कम है | कृपया एम्पाउल्स की अपेक्षा पोप ओपन एम्पाउल्स का प्रयोग करें जिसे खोलने के लिए मेटल फाइल का इस्तेमाल किया जाता है | यदि किसी ऐसे एम्पाउल का उपयोग करते हैं, जिसको खोलने के लिए मैटल फाइल की जरूरत पड़े, तो एम्पाउल को खोलते समय एक साफ़ बैरियर (जैसे छोटे रेशमी कपड़े के पैड) से उंगलियों को बचाएं | दिखाई देने वाले संदूषण तथा प्रमाणिकता की दरारों (यानि दरार, लीक्स) की जाँच करें तथा दवाईयों को डिस्कार्ड कर दें | प्रयोग, स्टोरेज तथा हेंडलिंग हेतु विशिष्ट सिफारिशों का ही अनुसरण करें | सिरिंज या सूई यदि किसी गंदे स्थान को छूती है तो उसे फेंक दें | टीका प्रदाता को सूई के आघात से बचाव: इंजेक्शन देने के दौरान तथा पश्चात मरीज द्वारा अचानक हिलने को पहले से ही आशा कर उपयुक्त उपाय करना | सुईयों पर दुबरा केप्पिंग करने या अन्य हाथ के कार्य करने से बचें | यदि रिकेप्पिंग करना आवश्यक है, सिंगल हेंडेड स्कूप तकनीक का प्रयोग करें | प्रयोग के समय, इस्तेमाल में लाए गए सिरिंज तथा सुईयों को एक शार्प कन्टेनर में एकत्र कर लें जो पंचर व लिक फ्रूप है तथा जिसे पूरी तरह भरने पर बंद किया जा सकता है | इस्तेमाल की गई सुईयों तक पहुंच पर रोक सुरक्षित क्षेत्र में ले जाने हेतु सील शार्प कंटेनरों को निपटान हेतु तैयार करना | सोर्स कंटेनरों को बंद तथा सील करने के पश्चात, इसे न खोलें, खाली करें, पुन: प्रयोग न करें या न बेचें | शार्प वेस्ट को कुशल, सुरक्षित तथा पर्यावरण के अनुकूल से प्रबंधन करना ताकि इस्तेमाल में लाए गए इंजेक्शन उपकरण से लोगों को स्वैच्छिक तथा आकस्मिक रूप से जोखिम होने से रोका जा सके | अभ्यास में लाने वाले अन्य मुद्दे टीका प्रदाता के हाथ की स्वच्छता तथा त्वचा की प्रमाणिकता – इंजेक्शन सामग्री तैयार करने तथा इंजेक्शन देने के पूर्व हाथ साफ़ करना (अर्थात, हाथ धोना या रोगाणुहीन करना) | प्रत्येक इंजेक्शन के मध्य हाथ की सफाई की आवश्यकता व्यवस्था के आधार पर तथा यदि हाथ मिट्टी, खून या शारीरिक द्रव के संपर्क के आधार पर होगी | यदि त्वचा में सामान्य संक्रमण या त्वचा की अन्य स्थिति (यानि विपिंग डरमाटाइटिस, त्वचा में क्षति, या घाव) हो तो इंजेक्शन न दें | छोटे घाव को ढक दें | ग्लोब्स-इंजेक्शन के लिए ग्लोब्स की आवश्यकता नहीं है | यदि अत्यधिक खून बहने की संभावना हो तो एक बार प्रयोग में लाए जाने वाले ग्लोब्स का इस्तेमाल किया जा सकता है | वायल टॉप्स या एम्पाउलेस की स्वाबिंग – एक एंटीसेप्टिक या डीसइन्फैक्टेट से वायल टॉप्स या एम्पाउलेस की स्वाबिंग करना अनावश्यक है | यदि कोई एंटीसेप्टिक से स्वाबिंग करने हेतु चुना जता है तो साफ़, एकल प्रयोग स्वाब का प्रयोग करें तथा उत्पाद विशिष्ट संस्तुत संपर्क समय को बनाए रखें | बहु प्रयोग कन्टेनर में रखे गए गीले काटन बाल्स का प्रयोग न करें | इंजेक्शन के पूर्व त्वचा को तैयार करना – दिखाई पड़ रही गंदी या मैली त्वचा को धो लें | इंजेक्शन देने के पूर्व साफ़ त्वचा को स्वाब करना अनावश्यक है | यदि कोई एंटीसेप्टिक से स्वाबिंग करने हेतु चुना जाता है तो साफ़, एकल प्रयोग स्वाब का प्रयोग करें तथा उत्पाद विशिष्ट संस्तुत संपर्क समय को बनाए रखें | बहु प्रयोग कन्टेनर में रखे गए गीले कोटटन बोल्स का प्रयोग न करें | पीत ज्वर वैक्सीन लाभार्थियों हेतु आवश्यक सूचना समस्त वैक्सीन लाभार्थियों को निम्नलिखित को ध्यान से पढ़ें तथा इस पर सख्ती व इमानदारी बरतें | सभी वैक्सीन लाभार्थियों को वैक्सीनेशन प्राप्त करने के पश्चात 30 मिनट तक प्रतीक्षा करनी होगी | यदि लाभार्थी को असहज महसूस हो, दुष्प्रभाव, प्रतिक्रिया या कोई अन्य प्रतिकूल प्रतिक्रिया हो तो वह तत्काल वहीं व उसी समय ऑन ड्यूटी डॉक्टर को सूचित कर सकता है | किसे पीत ज्वर का टीका नहीं लेना है? अंडा, चिकन प्रोटीन, या ज्लेटिन से एलर्जी वाले व्यक्ति | जिन्हें पीत ज्वर टीके के पूर्व डोज से गंभीर एलर्जिक रिएक्शन न हुआ हो | यदि आपको किसी प्रकार की गंभीर एलर्जी हो तो अपने डॉक्टर को अवश्य बताएं | यदि आप गर्भवती हो, या अगले दो हफ्तों में या अभी गर्भवती हो सकती हो | 12 माह से कम आयु के बच्चे (भारत सरकार के मौजूदा मानदंडो की अनुसार) | यदि आपको एचआईवी/एड्स है | यदि कर्क रोग या अन्य चिकित्सा परिस्थितियाँ जैसे प्रत्यारोपण या रेडियेशन या ड्रग उपचार (स्टेयोराइड या कोरटिसोन,कैंसर कीमोथैरेपी, या अन्य दवाईयाँ जो इम्यून सेल के कार्य पर प्रभाव डालती है) करा रहें हों के परिणामस्वरूप आपका इम्यून सिस्टम कमजोर हो गया है | व्यक्ति जिन्हें तीव्र/माध्यम रोग (बुखार सहित या रहित) है को जबतक कि वे ठीक नहीं हो जाते वे इस वैक्सीन को टाल सकते हैं | व्यक्ति जिन्हें थाइमम डिसआडर, जैसे मियासथिनिया ग्रेविस, डिजोर्ज सिंड्रोम, या थाईमोमा या थाईमस निकाला गया हो | यदि आपको कोई लीवर या किडनी का बड़ा रोग है | अन्य सलाह नर्सिंग माँएं को पीत ज्वर वाले जोखिम भरे क्षेत्र में यात्रा नहीं करें या टाल दें | 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यस्क को इस वैक्सीन से तीव्र समस्या के जोखिम का सामना करना पड़ सकता है | #पीत ज्वर टीकाकरण से छुट अथवा उसके कंट्राइंडिकेशन से संगरोध किए जाने (अलग रखने) से कोई छुट नहीं मिलती | टीकाकरण के मामूली दुष्प्रभाव पीत ज्वर के टीके के साथ बुखार और दर्द के साथ जहाँ टीका लगाया गया, वहाँ सोरनेस, लाली अथवा सूजन होती है | यह समस्या 4 में से 1 व्यक्ति को होती है | यह सामान्यत: टीका लगाने के तुरन्त बाद शुरू होकर एक सप्ताह तक रह सकता है| अधिकांश लोगों को बांह में हल्का दर्द होगा | 2 से 10 प्रतिशत लोग टीका लगाने के बाद से 24 घंटे से लेकर 3 से 9 दिन तक थकान, सिरदर्द, मांसपेशी में दर्द महसूस कर सकते हैं | 1 प्रतिशत लोगों को नियमित कार्यकलाप कम करने की जरूरत होती है | टीकाकरण के अधिक गंभीर साइड इफेक्ट टीके के गंभीर नुकसान, या मृत्यु का खतरा बेहद कम है | एक टीका घटक के प्रति गंभीर एलर्जी रिएक्शन (लगभग 58000 में से 1 व्यक्ति)| गंभीर तंत्रिकातंत्रीय रिएक्शन (लगभग 125000 में से 1 व्यक्ति)| अंगों की निष्क्रियता के साथ गंभीर प्राण-घातक बीमारी (लगभग 250,000 में से 1 व्यक्ति) | इस साइड इफेक्ट से पीड़ित होने वाले लोगों में से आधे से अधिक लोगों की मृत्यु हो जाती है | बूस्टर खुराक के बाद ये अंतिम दो समस्याओं की रिपोर्ट कभी नहीं आई | 130,000 में से 1 व्यक्ति को तत्काल हायपरसेंसिटिविटी – रैश, खुजली, बेहोशी अथवा अस्थमा- हो सकती है, इसी कारण क्लीनिक में 30 मिनट तक प्रतीक्षा करने की जरूरत होती है | 0.09 से 2.5 प्रति मिलियन लोगों को अनेक अंगों, अर्थात फेफड़े, किडनी, लीवर, स्प्लीन, त्वचा, रक्त वाहिनियों की सूजन हो जाती है | 8 मिलियन में से 1 व्यक्ति को एनसिफलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन) हो जाती है | यदि कोई गंभीर प्रतिक्रिया हो जाती है? (क) मेरे लिए ध्यान देनें योग्य बातें | किसी असामान्य परिस्थिति जैसे उच्च ताप, व्यवहार में बदलाव, या फ्लू जैसे लक्षणों के लिए देखें | शाँट लेने के कुछ मिनटों या कुछ घंटों के बीच सांस लेने में परेशानी, गला खराब या खरखराहट, हिव्स, पीलापन, कमजोरी, दिल की धड़कन में तेजी, या चक्कर आना, एलर्जिक प्रतिक्रिया के संकेत हों | (ख) मुझे क्या करना चाहिए? डॉक्टर को फोन करें, या उस व्यक्ति को तुरन्त डॉक्टर के पास ले जाएँ | डॉक्टर को, क्या हुआ, तारीख तथा किस समय हुआ, व कब वैक्सीन दिया गया था के विषय में बताएं | वायल वैबिलिटी मार्कर (वीवीएम) वैक्सीन वायल मॉनिटर (वीवीएम) एक लेबल है जिसमें समयोपरांत संचित ताप विवरण को रजिस्टर करने के लिए वैक्सीन वायल पर लगाया जाता है जोकि ताप सेंसिटिव सामग्री से बना है | समय तथा ताप दोनों के संयुक्त प्रभाव से वीवीएम का अंदर का चौकोर काला हो जाता है | रंग में बदलाव की दर तथा ताप में सीधा संबंध है – ताप कम होगा तो रंग का बदलाव धीरे से होगा | ताप अधिक होगा तो रंग का बदलाव तेजी से होगा | वीवीएम एक लोगाई है जिसके अंदर एक छोटा चौकोर है | इसे उत्पाद लेबल पर छापा जा सकता है, जोकि वैक्सीन वायल या ट्यूब के कैप पर या एम्पाउल के गले पर लगाया जा सकता है | वीवीएम का आंतरिक स्क्वेयर ताप संवेदी पदार्थ का बना होता है, जो आरंभिक स्थान पर हल्के रंग का होता है और ताप के संपर्क के साथ गहरा होता जाता है | शुरूआती बिंदु में भीतर का चौकोर बाहरी गोलाई से हल्के रंग का है | फिर वहाँ से, यदि तापमान/ या ताप की अवधि वैक्सीन को डिग्रेड करने का स्तर जो कि अनुकूल सीमा के परे है, तो भीतर का चौकोर, बाहरी लोगाई से हल्के रंग का होगा | छंटनी के समय, भीतर का चौकोर तथा बाहरी लोगाई एक ही रंग का होगा | ये यह दर्शाता है कि वायल ताप के अवांछनीय स्तर के ऊपर पहुंच गया है | भीतर चौकोर ताप के कारण गहरा होता जाएगा जबतक कि यह बाहरी गोलाई से अधिक गहरा न हो जाए | जब भी भीतर चौकोर का रंग बाहरी गोलाई से के समान अधिक गहरा हो जाए तो वायल को फैंक देना चाहिए | वीवीएम, वैक्सीन (तरल या फ्रिज-ड्राइड) के प्रकार पर निर्भर करते हुए लेबल पर या केप के ऊपर या एम्पाउले की गर्दन पर लगाया जाता है | तरल प्रकार के वीवीएम, कस्टम लेबलों पर लगाए जाते हैं, ताकि वीवीएम रीडिंग्स का सन्दर्भ ग्रहण किया जा सके भले ही उन वायलों को खोल दिया गया है तथा जिन्हें मल्टी डोज वायल पालिसी (एमडीवीपी) के अनुसार अनुगामी सत्र में प्रयोग में लाया जाना है | फ्रिज ड्राइड वैक्सीन हेतु वीवीएम, केप (वायल) के ऊपर या एम्पाउल के गर्दन पर लगाया जाता है, ताकि दुबारा सूई तैयार करते वक्त इसे फेंका जा सके | जैसा कि फ्रिज ड्राइड वैक्सीन को छ: घंटे के भीतर फैंक देना चाहिए या सत्र के अंत में, जो भी पहले हो, दुबारा सूई तैयार करते वक्त ही वीवीएम का संदर्भ ग्रहण किया जा सकता है | बाहरी लोगाई के रंग की तुलना में भीतरी चौकोर का रंग, ध्यान देने योग्य बात है: नियम 1: यदि भीतरी चौकोर का रंग, बाहरी गोलाई से हल्के रंग का है तो वैक्सीन का प्रयोग किया जा सकता है | नियम 2: यदि भीतरी चौकोर का रंग, बाहरा गोलाई के समान है, या गहरा है तब वैक्सीन का प्रयोग नहीं किया जाएगा | उनके ताप की स्थिरता के आधार पर, विभिन्न प्रकार के वैक्सीन हेतु चार विभिन्न प्रकार के वीवीएम डिजाइन किए जाते हैं | रिएक्शन दरें वीवीएम की चार विभिन्न मॉडल्स पर निर्भर करती हैं जो दो निश्चित तापमान बिंदु पर उनके ताप की स्थिरता के आधार पर वैक्सीन के चार समूहों से संबंधित है | पीत ज्वर प्रभावित देशों से भारत आ रहे/लौट रहे यात्रियों के लिए एडवाइजरी आईएचआर – 2005 के अनुच्छेद 6 के तहत विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पीत ज्वर अधिसूचित किए जाने पर भारत सरकार के पास किसी देश के सम्पूर्ण भू-भाग को पीत ज्वर से संक्रमित क्षेत्र मानने का अधिकार है | पीत ज्वर से प्रभावित देशों की भारत सरकार द्वारा जारी, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा समय-समय पर यथासंशोधित, सूची अनुलग्नक-1 में दी गई है | पीत ज्वर को अंतर्राष्ट्रीय सरोकार के जन स्वास्थ्य आपात रोग के रूप में माना जाता है और वाहनों के विसंक्रमण, यात्रियों तथा चालक दल के टीकाकरण संबंधी आवश्यकताओं एवं संगरोध (जब भी आवश्यक हो) जैसे वर्तमान में लागू सभी स्वास्थ्य उपायों का कार्यान्वयन किया जाएगा | पीत ज्वर प्रभावित किसी भी देश से प्रस्थान के 6 दिन के भीतर भारत आ रहे सभी अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों को देश द्वारा निर्धारित किसी पीत ज्वर टीकाकरण केंद्र से विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी मॉडल के अनुसार टीकाकरण अथवा रोगनिरोध का वैध प्रमाण –पत्र (मूल रूप में) रखना होगा | पीत ज्वर टीकाकरण, रोगनिरोध के वैध मूल प्रमाण-पत्र के बिना पीत ज्वर से प्रभावित किसी भी देश से भारत में आ रहे किसी यात्री को अपने शरीर में पीत ज्वर का वायरस लेकर आने वाला संदिग्ध व्यक्ति माना जाएगा और उसका संगरोध किया जाएगा | संगरोध का समय 6 दिन तक सीमित है और अवधि की गणना प्रभावित देश के हवाई अड्डे से यात्री के प्रस्थान के समय से अथवा पीत ज्वर टीकाकरण के वैध होने तक (जो भी कम हो) की जाती है | चिकित्सा आधारों/गर्भावस्था/बीमारी आदि के आधार पर पीत ज्वर के टीकाकरण में छुट देने से व्यक्ति संगरोध से नहीं बच सकता | पीत ज्वर टीकाकरण अथवा रोग निरोध प्रमाण-पत्र विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा यथाविनिर्दिष्ट उचित प्रपत्र में होना चाहिए | यदि पीत ज्वर टीकाकरण भारत में करवाया गया है तो वह तभी वैध होगा जब वह भारत सरकार द्वारा निर्धारित पीत ज्वर टीकाकरण केंद्र से करवाया गया हो | कार्यरत पीत ज्वर केन्द्रों की सूची फ्लैग बी पर दी गई है | टीकाकरण प्रमाण-पत्र में सभी कॉलम ठीक प्रकार से भरे जाने चाहिए | यात्रियों की व्यक्तियों जानकारी, जैसे नाम, जन्म तिथि, लिंग, पासपोर्ट नम्बर, राष्ट्रीयता, पासपोर्ट में दर्शाए अनुसार सही-सही भरी जानी चाहिए और उसे स्वयं यात्री द्वारा अपने हस्ताक्षर से सत्यापित करना चाहिए | रोग के नाम, टीके के बैच नम्बर, टीकाकरण की तारीख, हस्ताक्षर और टीका लगाने वाले के व्यावसायिक दर्जे संबंधी प्रविष्टियाँ सही प्रकार से भरी जानी चाहिए और टीकाकरण प्रमाण-पत्र पर टीकाकरण केंद्र की आधिकारिक मुहर लगाई जानी चाहिए | विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा दी गई सलाह के अनुसार, टीकाकरण की तारीख उचित स्वरूप में, अर्थात – दिन-महीने का नाम-वर्ष (23 सितम्बर 2012), होनी चाहिए | प्रमाण-पत्र टीकाकरण की तारीख के 10 दिन के बाद ही वैध होता है | इसका कारण यह है कि टीकाकरण के बाद शरीर को पीत ज्वर के विरुद्ध प्रतिरक्षण क्षमता विकसित करने में 10 दिन लगते हैं | पीत ज्वर का टीका लगवाने के 10 दिन के भीतर पीत ज्वर प्रभावित देश से भारत आ रहे किसी भी यात्री को 6 दिन के लिए संगरुद्ध किया जाएगा जिसकी गणना प्रभावित देश के हवाई अड्डे से प्रस्थान की तारीख और समय से अथवा प्रमाण-पत्र के वैध होने से, जो भी पहले हो, की जाएगी | विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों और अंतर्राष्टीय स्वास्थ्य विनियम-2005 के अनुसार, प्रमाण-पत्र के किसी भी भाग को पूरा न करने पर टीकाकरण प्रमाण-पत्र “अवैध” हो जाएगा | प्रमाण-पत्र पर यात्री के हस्ताक्षर का पासपोर्ट के हस्ताक्षर से सत्यापन किया जाएगा | टिप्पणी: नियमानुसार अंतर्राष्ट्रीय यात्राओं के दौरान क्लियरेंस के लिए केवल मूल टीकाकरण प्रमाण-पत्र को ही स्वीकार किया जाएगा और फैक्स कॉपी/फोटो कॉपी/ई-मेल अथवा किसी अन्य स्वरूप में प्रमाण-पत्र, टीकाकरण के प्रमाण के रूप में स्वीकार नही है | यात्रियों के संगरोध की अवधि के दौरान संगरुद्ध यात्रियों की किसी भी बीमारी का इलाज पदनामित विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा एपीएचओ के प्रर्यवेक्षण में किया जाएगा | पीत ज्वर प्रभावित देशों का दौरा करने के इच्छुक सभी यात्रियों को पीत ज्वर का टीकाकरण करवाने की सलाह दी जानी चाहिए, भले ही वे 6 दिन के भीतर भारत लौट आने वाले हों, उन्हें संगरोध की प्रक्रिया/विनियमनों के लागू होने से बचने के लिए उनके भारत आगमन पर पीत ज्वर टीकाकरण प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक है | इन संगरोध नियमों में से किसी भी नियम के तहत “कोई डिप्लोमैटिक इम्युनिटी उपलब्ध नहीं है|” स्त्रोत: स्वास्थ्य विभाग मंत्रालय , भारत सरकार