परिचय फेफड़ों का टी.बी. लंबे समय तक रहने वाला एक छुतहा रोग है| ज्यादातर यह बीमारी पन्द्रह से पैतीस वर्ष के लोगों में होती है| कमजोर, कुपोषित लोग जो टी.बी. के रोगी के साथ रहते हैं उनमे यह बीमारी जल्दी लगती है| तपेदिक इलाज से ठीक हो सकता है, लेकिन जानकारी की कमी से पांच लाख लोग एस बीमार से मर जाते हैं| जरूरी है शुरू के दिनों में ही इलाज शुरू हो जाए| टी.बी. के आम लक्षण -तीन हपते तक बलगम के साथ या बिना बलगम के खांसी आना -लगातार वजन कम होना और कमजोरी बढ़ना -खांसी में थूक या बलगम के साथ खून निकलना - दो हपते से ज्यादा बुखार आना – शाम को बुखार जो रात को पसीना आने पर उतर जाता है| - छाती या पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द| गंभीर टी.बी. के लक्षण साँस लेने में कठिनाई अचानक साँस रुक जाना पीली, लाल रंग की चमड़ी धीरे-धीरे वजन का घटना गंभीर सिर का दर्द दौरे और बेहोशी अन्त में मृत्यु बच्चों में टी.बी.के लक्षण टी. बी. वाले बच्चों में न खांसी होती है न रत का बुखार अच्छे भोजन मिलने के बाद भी वजन घटता रहता है उन्हें साँस लेने में कठिनाई भी होती है गर्दन में सूजन आ जाती है चमड़ी का रंग हल्का हो जाता है अक्सर फेफड़े का टी.बी. होता है, पर शरीर के दूसरे अंगों का टी.बी. भी हो सकता है| हड्डियां, जोड़, आंख, गुर्दा, चमड़ी का भी टी.बी. हो सकता है| ध्यान देने वाली बातें दवाओं को डाक्टर के नुक्से के मुताबिक ही खाएं कम से कम दो दवाओं का एक साथ लेना जरूरी होता है टी.बी. के रोगाणु जल्दी नहीं मरते लम्बे समय के इलाज के बाद ही धीरे-धीरे वे मरते हैं पूरा इलाज छ: महीने से एक साल तक चलता है आराम और सेहतमंद भोजन जरूरी है टी.बी. वेहद छुतहा, आस-पास किसी को न रहने दें बच्चों को टी.बी. के टिके जन्म के बाद ही लगवा दें शरीर के अन्य हिस्से के टी.बी. का इलाज भी उसी तरह होता है जैसा की फेफड़े की टी.बी. स्त्रोत: संसर्ग, ज़ेवियर समाज सेवा संस्थान