आँख से जुड़ी बीमारियां आंखें आंख कई छोटे हिस्सों से बनी एक जटिल ग्रन्थि है, जिनमें से प्रत्येक हिस्सा सामान्य दृष्टि हेतु अनिवार्य है। साफ देख पाने की क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि ये हिस्से परस्पर कितने बेहतर तरीके से काम करते हैं। दृष्टि, एक छवि बनाने के लिए दोनों आँखों के परस्पर उपयोग की क्षमता होती है। सटीक दृष्टि के लिए दोनों आँखें एक साथ आसानी से सटीक एवं बराबर काम करती हैं। दृष्टि से संबंधित तथ्य, श्रेणी,परिभाषा और अन्धत्व से जुड़ी जानकारी वर्तमान में 3.7 करोड़ लोग दृष्टिहीन हैं एवं 12.4 करोड़ लोग गंभीर रूप से दृष्टि-विकार से पीड़ित हैं। दृष्टिहीनता उत्पन्न करनेवाली स्थितियों के बचाव या त्वरित उपचार से 80 प्रतिशत मामलों में अन्धवत्व से बचा जा सकता है। विश्व के नब्बे प्रतिशत दृष्टिहीन लोग विकासशील देशों में रहते हैं। विश्वभर के दृष्टिहीनों में दो-तिहाई से अधिक महिलाएं हैं। विश्व के एक-चौथाई दृष्टिहीन लोग भारत में रहते हैं; अर्थात्, 9-12 लाख लोग लगभग 70 प्रतिशत दृष्टिहीन लोग भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं जहां आँखों की अच्छी देखभाल उपलब्ध नहीं है। यदि प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो अंधत्व तथा दृष्टिहीनता से पीड़ित लोगों की संख्या वर्ष 2020 तक दुगुनी हो जाएगी। दृष्टि की श्रेणियाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ) ने दृष्टि की विभिन्न दर्जें की कई श्रेणियाँ निर्दिष्ट की है जिसका दृश्य तीक्ष्णता मापक के माध्यम से आकलन किया जाता है।दृश्य तीक्ष्णता आंख द्वारा विस्तार से देखने की क्षमता को मापती है। सामान्यत: दृश्य तीक्ष्णता, एक चार्ट का 3 मीटर, 6 मीटर या 40 सेमी दूरी पर उपयोग कर मापी जाती है। चार्ट में विभिन्न आकारों के अक्षर, अंक या विभिन्न आकार हो सकते हैं।आप स्नेलन चार्ट का उपयोग कर सकते हैं तथा नीचे दी गई सारणी को देखकर, दृश्य तीक्ष्णता को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है, ज्ञात कर सकते हैं। सारणी में डब्ल्यू.एच.ओ और भारतीय दोनों परिभाषाएँ हैं। श्रेणी बेहतर आंख में दृश्य तीक्ष्णता पेश है डब्ल्यू.एच. ओ परिभाषा भारतीय परिभाषा 012345 6/6 - 6-18< 6/18 - 6/60< 6/60 - 6/120< 3/60 - 1/60<1-60 – PL (प्रकाश की धारणा)प्रकाश की कोई धारणा नहीं (NPL) सामान्यदृश्य हानिगंभीर दृश्य हानिअंधापनअंधापनअंधापन सामान्यदृश्य हानिअंधापनअंधापनअंधापनअंधापन कम दृष्टि की परिभाषा कम दृष्टि एक ऐसी स्थिति है, जिसमें सामान्य चश्मों या अन्य उपचार द्वारा दृष्टि को 6/18 से अधिक स्तर तक नहीं सुधारा जा सकता। लेकिन एक व्यक्ति की शेष दृष्टि का अधिकतम उपयोग मैगनीफायर या दूरबीन जैसे यंत्रों द्वारा कर सकते हैं।एक व्यक्ति की कम लेकिन क्रियाशील दृष्टि हो सकती है, यानी वह दृष्टि का विशेष प्रयोजनों के लिए उपयोग कर सकता/सकती हैं। कम मात्रा में दृष्टि भी उपयोगी हो सकती हैं, उदाहरण के लिये नज़दीक से किसी व्यक्ति को पहचानना या वस्तुओं से टकराने से बचना। दृष्टि कितनी उपयोगी है, यह व्यक्तिगत अनुभवों पर निर्भर करता है एवं इस बात पर कि क्या व्यक्ति को अपनी दृष्टि का अधिकतम उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया है। यह बाहरी कारकों, जैसे प्रकाश एवं रंगीन वस्तुओं पर भी निर्भर करता है। अंधत्व तथा दृष्टि की क्षीणता के कारण सामान्य कारण अंधत्व या दृष्टिक्षीण की दु्र्बलता लाने वाली परिस्थितियां मोतियाबिंद अपवर्तक त्रुटि आँख की जन्मजात असंगति ऑप्टिक एट्रॉफी कॉर्निअल रोग कांचबिंदु रेटिनल रोग एम्ब्लिओपिक अन्य (सजातीय विवाह, आघात, आदि) यह देखा जा सकता है कि मोतियाबिंद, अंधत्व का सबसे बड़ा कारण है, तथा अपवर्तक त्रुटि दृष्टि की क्षीणता का सबसे बड़ा कारण है। इनके अलावा आंख की जन्मजात विसंगति, ऑप्टिक एटगॉफी, कॉर्निअल रोग,कांचबिंदु, रेटिनल रोग, एम्ब्लिओपिक अंधत्व या दृष्टि की क्षीणता के कारण होना पाये गये हैं।मोतियाबिंद एवं अपवर्तक त्रुटि अंधत्व एवं दृष्टि की क्षीणता के सबसे बड़ा कारण होते हैं। इन परिस्थितियों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन मोतियाबिंद के मामले में एक इन छोटे से ऑपरेशन द्वारा दृष्टि को फिर चंगा किया जा सकता हैं, एवं अपवर्तक त्रुटि के लिए चश्मे देकर। अंधत्व एवं दृष्टि की क्षीणता के इन रूपों का उपचार, सभी स्वास्थ्य उपचारों में से सर्वाधिक सफल एवं सस्ता है।इनके कई कारणों में से एक है- आंख की देखभाल कि उचित सेवाएं उपलब्ध न होना या आवश्यकतानुसार प्रशिक्षित देखभाल करने वाले उपलब्ध न हों। कभी-कभी देखभाल पर आने वाली खर्च की वजह से लोग आंख देखभाल की उपलब्ध सेवाओं का लाभ नहीं ले पाते या फिर दूर स्थित आंख देखभाल केन्द्रों तक आवागमन पर होने वाले खर्च के कारण वहाँ जाने से हिचकते हैं। कभी-कभी वे कमजोर दृष्टि को यह सोचकर स्वीकार कर लेते हैं कि वे जैसे –तैसे काम चला लेगें, यह विशेषत: बूढ़े या अधिक उम्र के व्यक्तियों पर लागू होता है। सजातीय विवाह रक्त संबंध या रिश्तेदारी पूर्वजों की साझेदारी द्वारा होती है। कन्सॅन्जीनिअस शब्द लैटिन भाषा से आया है जिसका अर्थ समान रक्त होता है।सजातीय व्यक्तियों में पूर्व की कुछ पीढ़ियों में कम से कम एक उभयनिष्ठ पूर्वज होता है। सजातीयता की परिभाषा है ऐसी स्थिति, जिसमें रक्त संबंध वाले दो व्यक्तियों जैसे कि चचेरे /ममेरे भाई-बहन, की संतान हो।जीन्स जो कि जोड़े में होते हैं, सूचना के ऐसे पुलिंदे होते हैं जो हम अपने जन्मदाताओं से विरासत में पाते हैं। समान पूर्वजों के जोड़े को होने वाली संतान में जन्मगत दोषों का खतरा तेज़ी से बढ़ता है क्योंकि रिश्तेदार व्यक्तियों में ऐसे समान नुकसानदेह जीन की संभावना अधिक होती है जो दो प्रतियों में संतानों में आते हैं। सजातीयता से संबंधित जोड़ों में जन्मगत दोषों का खतरा उनकी रिश्तेदारी की निकटता के स्तर के अनुसार बढ़ता है, अधिक निकट संबंधियों में अधिक खतरा होता हैं। हालांकि, सबसे सजातीय जोड़े सामान्य, स्वस्थ संतान पैदा करने के लिए समर्थ हैं। लक्षण सजातीय विवाह से जन्मी संतानों की एक बड़ी संख्या लंबे समय तक जीवित नहीं रहती हैं या छह महीने की आयु से गंभीर दोषों से पीड़ित होता है। इनमें से ज्यादातर बीमारियां इन्द्रियों और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। अकसर बच्चे की त्वचा का रंग गुलाबी, बाल सफेद तथा आँखों में आवश्यक वर्णक का अभाव होता है। इस स्थिति को एलब्निज्म/रंजकहीनता कहा जाता है। रतौंधी, रेटिनाइटिस (दृष्टि पटल शोध), पिगमेंटोसा, प्रकाश भीति, दृश्य तीक्ष्णता में कमी, अक्षिदोलन, एवं अपवर्तक त्रुटियां सजातीय विवाह से संबंधित आँख की स्थितियां हैं। वंशानुगत अध:पतन एवं रेटिना (दृष्टि पटल) के क्षय, आमतौर पर धीरे-धीरे बढते हैं, परिणामस्वरूप दूरदृष्टि की कमी, सुरंगीय दृष्टि एवं रतौंधी होते हैं। यह आमतौर पर बच्चों और युवा वयस्कों को प्रभावित करता है। यह एक आनुवांशिक स्थिति है जिसमें बालों, त्वचा एवं आँखों में रंजक की कमी होना शामिल है। नेत्र की रंजकहीनता में केवल आंखें प्रभावित होती है। यह आमतौर पर प्रकाश भीति, दृश्य तीक्ष्णता में कमी, अक्षिदोलन, एवं अपवर्तक त्रुटियों से जुड़ा हुआ है। एनिरिडिया: इस स्थिति में आयरिस जन्म से ही अनुपस्थित होता है।आईरिसकाकोलोबोमा / कोरॉइड: विकासात्मक विषमताओं के कारण इन संरचनाओं में से किसी एक का अभाव होता है।निवारणयह परामर्श दिया जाता है कि रक्त सबंधियों से विवाह न करें। सजातीय जोड़े जो संतान चाह रहे हैं या गर्भधारण करना चाहते हैं, उन्हें भ्रूण के जोखिम को जानने के लिए आनुवांशिक परामर्श लेनी चाहिए एवं परीक्षण के विकल्पों को जानना चाहिए। मोतियाबिंद आंखों के लेंस आँख से विभिन्न दूरियों की वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। समय के साथ लेंस अपनी पारदर्शिता खो देता है तथा अपारदर्शी हो जाता है। लेंस के धुंधलेपन को मोतियाबिंद कहा जाता है। दृष्टिपटल तक प्रकाश नहीं पहुँच पाता है एवं धीरे-धीरे दृष्टि में कमी अन्धता के बिंदु तक हो जाती है। ज्यादातर लोगों में अंतिम परिणाम धुंधलापन एवं विकृत दृष्टि होते है।हालांकि आमतौर पर 55 वर्ष की आयु से अधिक के लोगों में मोतियाबिंद होता है, युवा लोग भी इससे प्रतिरक्षित नहीं हैं। मोतियाबिंद दुनिया भर में अंधत्व के मुख्य कारण हैं। 60 से अधिक आयु वालों में 10 में से चार लोगों में मोतियाबिंद विकसित होता है। शल्य क्रिया ही इसका एकमात्र इलाज़ है, जो सुरक्षित एवं आसान प्रक्रिया है।मोतियाबिंद का निश्चित कारण पता नहीं है। मोतियाबिंद के विभिन्न प्रकार होते हैं, सबसे आम वृद्धावस्था का मोतियाबिंद है, जो 50 से अधिक आयु वाले लोगों में विकसित होता है। इस परिवर्तन में योगदान देने वाले कारकों में रोग, आनुवांशिकी, बुढ़ापा, या नेत्र की चोट शामिल है। वे लोग जो सिगरेट के धुएँ, पराबैंगनी विकिरण(सूर्य के प्रकाश सहित), या कुछ दवाएं के सम्पर्क मे रह्ते हैं, उन्हें भी मोतियाबिंद होने का खतरा होता है। मुक्त कण और ऑक्सीकरण एजेंट्स भी आयु-संबंधी मोतियाबिंद के होने से जुड़े हैं। लक्षण समय के साथ दृष्टि में क्रमिक गिरावट वस्तुयें धुंधली, विकृत, पीली या अस्पष्ट दिखाई देती हैं। रात में अथवा कम रोशनी में दृष्टि में कमी होना। रात में रंग मलिन दिखाई दे सकते हैं या रात की दृष्टि कमजोर हो सकती है। धूप या तेज रोशनी में दृष्टि चमक से प्रभावित होती है। चमकदार रोशनी के चारों ओर कुण्डल दिखाई देते हैं। मोतियाबिंद से खुजली,आंसू आना या सिर दर्द नहीं होता है। उपचारवर्तमान में लेंस की पारदर्शिता को पुनर्स्थापित करने वाली कोई भी दवा उपलब्ध नहीं है। चश्मे मदद नहीं कर पाते क्योंकि प्रकाश की किरणें आंखों से पारित नहीं हो पाती हैं। शल्यक्रिया के द्वारा हटाना ही मोतियाबिंद के इलाज का एकमात्र तरीका है। मोतियाबिंद सर्जरी के विभिन्न प्रकार होते हैं। यदि दृष्टि केवल कुछ धुंधली हो तो मोतियाबिंद का इलाज करने की आवश्यकता नहीं होती है। बस चश्मे बदलने से दृष्टि के सुधार में मदद मिलती है, लेकिन केवल थोड़े समय के लिए। सर्जरी तब करनी चाहिए जब मरीज को अपनी पसंद की चीजें करने के लिए पर्याप्त दिखाई न दें। कांच बिंदु कांच बिंदु रोग नेत्र तंतु की गंभीर एवं निरंतर बढ़ती हुई क्षति द्वारा धीरे-धीरे दृष्टि को नष्ट कर देता है। जब हम वस्तु को देखते हैं, छवि दृष्टि पटल से मस्तिष्क तक नेत्र तंतु द्वारा पहुंचाई जाती है। कांच बिंदु में अंत:नेत्र दाब प्रभावित आँख की सहने की क्षमता से अधिक हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप नेत्र तंतु की क्षति होती है जिससे दृष्टि चली जाती है।वस्तु को देखते समय कांच बिंदु वाले व्यक्ति को केवल वस्तु का केन्द्र दिखाई देता है। समय बीतने के साथ व्यक्ति यह क्षमता भी खो जाता है। सामान्यत:,लोग इस पर कदाचित ही ध्यान देते हैं जबतक कि काफी क्षति न हो गई हो। अक्सर कांच बिंदु बिना किसी लक्षण के विकसित होता है इसे "नज़र का चुपके से आने वाला चोर" के रूप में संदर्भित किया जाता है।विश्व स्तर पर कांच बिंदु लगभग छह करोड़ लोगों को प्रभावित करता है और भारत में यह अंधत्व का दूसरा सबसे आम कारण है। करीब एक करोड़ भारतीय कांच बिंद से पीड़ित हैं जिनमें से 1.5 लाख नेत्रहीन हैं। कांच बिंदु आमतौर पर दोनों आँखों को प्रभावित करता है। हालाँकि आमतौर पर यह 40 वर्ष से अधिक आयु के वयस्कों के बीच में पाया जाता है, यह नवजात शिशुओं को भी प्रभावित कर सकता हैं। प्रकारप्राथमिक खुला कोण और बंद कोण कांच बिंदु।1. प्राथमिक खुला कोण कांच बिंदुप्राथमिक खुला कोण कांच बिंदु में आँख की जल निकासी नली धीरे-धीरे बंद हो जाती है। जल निकासी प्रणाली ठीक ढंग से काम नहीं करने की वजह से आंख का आंतरिक दाब बढ़ जाता है।(हालाँकि,जल निकासी नली का प्रवेश आमतौर पर काम कर रहा होता हैं एवं अवरुद्ध नहीं होता हैं) रुकावट अंदर होती है एवं द्रव बाहर नहीं आ पाता है,इस वज़ह से आंख के अंदर दबाव में वृद्धि होती है।प्राथमिक खुला कोण कांच बिंदु से सबंधित कोई विशेष लक्षण नहीं होते हैं। समय पर समय पर की जाने वाली आँख परीक्षण कांच बिंदु को जल्द से जल्द पहचानने के लिए आवश्यक है। इसके ज़रिए इसे दवा से नियंत्रित किया जा सकता है। 2. कोण बंद कांच बिंदुकोण बंद कांच बिंदु एक तीव्र प्रकार का कांच बिंदु है। इस स्थिति में आंखों में दबाव तेजी से बढ़ता है। आईरिस एवं कॉर्निया की चौड़ाई कम होती है, परिणामस्वरूप जल निकासी नली के आकार में कमी होती है।लक्षणवयस्क मरीज परिधीय दृष्टि के नुकसान की शिकायत करता है मरीज कुण्डल या इंद्रधनुष-रंग के गोले या रोशनी देख सकते ह दृष्टि मटमैली या धुँधली हो जाती है। मरीज आंख में दराद एवं लालिमा की शिकायत कर सकते हैं दृष्टि का क्षेत्र इतना कम होता है कि मरीज स्वतंत्र रूप से नहीं चल सकता। जब भी आंखों की चोट के बाद दर्द या दृष्टि में कमी हो तो माध्यमिक कांच बिंदु की आशंका करनी चाहिए। मधुमेह के मरीज भी कांच बिंदु से पीड़ित हो सकते हैं। बच्चेशिशुओं एवं बच्चों में इसके लक्षणों मे लालिमा,पानी आना, आँखों का बड़ा होना, कॉर्निया का धुंधलापन एवं प्रकाश भीति शामिल है। आघात आँखों का आघात आंखों में अंधत्व का एक प्रमुख कारण है। अधिकतर आघात के मामलों में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं या प्रशिक्षित कर्मियों की कमी के कारण लोग अंधे हो जाते हैं। आँख की चोटें आपात स्थिति के रूप में मानी जानी चाहिए एवं तुरंत उपचार किया जाना चाहिए। तात्कालिक प्राथमिक उपचार एवं विशेषज्ञ द्वारा जांच, दृष्टि बहाली के लिए आवश्यक है। कारण घरेलू चोट लगने की घटनाएं फसल उगाना एवं कटाई जलाने की लकड़ी काटना एवं चीरना जलती हुई लकड़ी के उड़ती चिंगारियों के कण खाना बनाते लौ या भाप लगने से कीड़े के डंक या काटने से धूल कण (बाह्य वस्तु) औद्योगिक धातु कण (बाह्य वस्तु) जलते हुए कण लौ या भाप चेहरे का विदारण रासायनिक पदार्थ से जलना दुर्घटनाएं वाहनों से टूटे कांच गिरने की वजह से चोटें तेज या भोथरी वस्तुओं का अंदर घुसना रसायन से जलना रसायन से जलने पर तत्काल प्राथमिक उपचार आवश्यक होता है। जितना जल्द सम्भव हो, उतना जल्द, कम से कम पाँच मिनट तक अपना चेहरा, पलकें एवं आँखे धोयें। आंखों के आंतरिक कोने में अधिक पानी डालें। सुनिश्चित करें कि रसायन दूसरी आँख में न जाए। आंखों को सूखी, साफ सुरक्षित ड्रेसिंग पट्टी से ढ़ंकें, मरीज़ आँख न रगड़े, इस बात के लिए उसे सतर्क करें। तुरंत चिकित्सा सहायता लें। नरम पैड लगाएं, आंखों को ढकें तथा मरीज़ को तुरंत अस्पताल ले जाएं। आँखों के प्रति हानिकारक आदतें स्वयं दवा लेना आँखों की पारम्परिक दवाएं- पत्तियों या जड़ी बूटियों/ मानव मूत्र/ पशु उत्पादों का अर्क जो स्थायी रूप से नेत्र सतह को क्षति पहुंचाता है, दृष्टि हानि या अंधत्व उत्पन्न करता है। आँख के आघात से निपटने के लिये कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं का ध्यान रखना आंख की आपात स्थिति में कटना, खरोंच, आंखों में कोई चीज़ घुसना, जलना, रसायन से संपर्क, एवं भोथरी वस्तुओं से चोट शामिल हैं। चूकि आंख आसानी से क्षतिग्रस्त हो सकती है, इनमें से कोई भी स्थिति यदि अनुपचारित रहे तो दृष्टि की हानि का कारण बन सकती है। आँख की सभी बडी चोटों तथा समस्याओं के लिए चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है। कई आंख की कई समस्याएं, जो चोट की वजह से नहीं होती (जैसे दर्दभरी लाल आँख), उनके लिए भी त्वरित चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता होती है। आंख मे रसायन से चोट, काम के दौरान दुर्घटना या आम घरेलू उत्पादों जैसे सफाई का घोल, बगीचे के रसायन, सॉल्वैंट्स, आदि की वजह से हो सकती है। धुआं एवं एयरोसौल्ज़ भी रासायनिक जलन पैदा कर सकते है। अम्ल से जलने के मामले में कॉर्निया का धुंधलापन अक्सर साफ हो जाता है तथा ठीक होने की अच्छी सम्भावना होती है। लेकिन क्षारीय पदार्थ- जैसे चूना, नाली की सफाई के कमर्शियल रसायन एवं प्रशीतन उपकरणों में पाया जाने वाला सोडियम हायड्रॉक्साइड - कॉर्निया को स्थायी क्षति पहुंचा सकते है। कभी कभी तुरंत उपचार के बावजूद क्षति होती रहती है। धूल, बालू, एवं अन्य मलबे आँख में किसी भी समय आ सकते है। लगातार दर्द एवं लालिमा संकेत करते हैं कि पेशेवर देखभाल एवं उपचार की आवश्यकता है। बाह्य वस्तु आपकी दृष्टि को खतरा हो सकती है यदि उसके द्वारा कॉर्निया या लेंस क्षति पहुंचने की संभावना हो। ग्राइंडिंग या धातु पर धातु की हेमरिंग के कारण तेज गति से चलती हुई बाह्य वस्तु सबसे ज्यादा जोखिम पैदा करती हैं। आमतौर पर काली आंख, आंख या चेहरे पर सीधे आघात के कारण होती है। कुछ प्रकार के खोपड़ी भंग, प्रत्यक्ष आघात के अभाव में भी आंखों के चारों ओर खरोंच उत्पन्न कर सकते हैं। अक्सर पलक और आंख के आसपास के ऊतक में सूजन भी हो सकती है। कभी-कभी, सूजे हुए ऊतक के दबाव से आंखों को गंभीर क्षति होती है। आंखों के अंदर रक्त स्राव दृष्टि को कम कर सकता है, कांचबिंदु कर सकता है या कॉर्निया को क्षति पहुंचा सकता है। आँख की आपात स्थिति में क्या कर सकते हैं, यह मालूम होने से कीमती समय बच सकता है तथा दृष्टि हानि को रोका भी जा सकता है। यहाँ बुनियादी नेत्र चोट के मामले में कुछ निर्देश दिये गये हैं। आंख की अन्य चोटों के लिए निवारण स्व-चिकित्सा एवं पारंपरिक प्रथाओं के खतरों के बारे में लोगों को सतर्क करना। अयोग्य चिकित्सकों से उपचार न कराएं, एक योग्य चिकित्सक से तुरंत परामर्श लें। बच्चों से दवाएं, औषधियां, एसिड, रसायन, खाने की गर्म चीज़ें एवं नुकीली वस्तुएं दूर रखें। नुकीली वस्तुओं, तीर-धनुष एवं गिल्ली-डंडा के साथ खेलने से बच्चों को हतोत्साहित करें। जब भी वाहन चलाएं या कोई भी औद्योगिक काम करें, सुरक्षात्मक चश्मे का उपयोग करें। प्राथमिक उपचार प्रक्रियाओं के बारे में सीखें तथा सबसे नज़दीक की चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी रखें। उपचार आँखों को रगड़ने से बचें। बच्चों के मामले में, यदि वे आज्ञा का पालन नहीं करते हैं तो उनके हाथ पीठ पीछे बांध दे। नम संकीर्ण फोहे या रूमाल के मुड़े कोने से बाह्य वस्तु को चमकदार रोशनी में निकालें। यदि बाह्य वस्तु दिखाई नहीं दें, हाथ में कुछ साफ पानी लें एवं उसमें तेज़ी से पलके झपकाएं। यदि फिर भी असफल होते हैं, उपरी पलक को आगे की ओर खींचें, निचली पलक को ऊपर धकेलें तथा दोनों पलको को छोड़ दें। निचली पलकों के बाल अक्सर बाह्य वस्तु को निकाल देतें हैं। यदि बाह्य वस्तु कॉर्निया में धंसी हो, नरम पैड/गद्दी लगायें, आंखों को ढकें एवं मरीज को तुरंत अस्पताल लें जाएं। आधारभूत प्राथमिक चिकित्सा रासायनिक जलन - रसायन के आंख से संपर्क के सभी मामले में तुरंत पानी या किसी अन्य पीने योग्य तरल से आंख धोएं। आंख नल या शॉवर के नीचे रखे या साफ बर्तन से पानी लेकर आंख में पानी डालें। धोते समय आंख खुली एवं चौड़ी रखें। कम से कम 15 मिनट तक धोना जारी रखें। आंख के कप का प्रयोग न करें। यदि कॉन्टैक्ट लैंस अभी भी आँखों में है, तो लेंस पर तुरंत पानी डालने लगें। इससे लेंस पर से बाह्य वस्तु निकल जाएगी। आंख पर पट्टी न बांधे। धोने के तुरंत बाद चिकित्सा उपचार लें। आँखों में चश्में आंख न रगड़ें। आँसुओं द्वारा बाह्य वस्तु को आँख से हटाने की कोशिश करें या आईवॉश का प्रयोग करें। ऊपरी पलक ऊपर उठाएं तथा निचली पलक नीचे करके बाह्य वस्तु निकालने की कोशिश करें। यदि बाह्य वस्तु नहीं हटती है तो आंखें बंद रखें, हल्के ढंग से पट्टी बाँधे, एवं डॉक्टर को तुरन्त दिखाएं। आंख में फूंक मारें। आंखों पर दबाव डाले बगैर ठंडा सेक लगाएं। प्लास्टिक की थैली में कुचली हुई बर्फ माथे पर टेप चिपकाकर हल्के से घायल आंख पर, उसे आराम देने के लिए रखें। दर्द, आँख में कमी, या मलिनकरण (काली आँख) के मामले में, आपातकालीन चिकित्सकीय सहायता लें। इनमें से किसी भी लक्षण का मतलब है आँख को आंतरिक क्षति। आंख या पलक का कटना एवं छेद आंख को पानी या किसी भी अन्य तरल पदार्थ से न धोयें। आंख में फंसी किसी भी वस्तु को निकालने की कोशिश न करें। दबाव डाले बगैर आंख को कड़क कवच से ढकें। आप पेपर कप के निचले आधे तले का उपयोग कर सकते हैं। डॉक्टर से तुरंत मिलें। सामान्य सावधनियां जब भी कोयला, लकड़ी, रेत आदि का कोई छोटा कण आंख में जाए तो आंखें न रगड़े। आंखें पूरी तरह से खोलें तथा भरपूर साफ, ठंडे पानी से धोयें। नुकीली वस्तु- जैसे घास की पत्ती, पेपर का कोना या किनारा, पेन्सिल, चाकू से चोट या जलने, गर्म पानी, तेल, भाप, गर्म राख, पट़ाखे, कॉस्टिक सोडा, चूना आदि से चोट प्रभावित कार्निया में आघात के मामलों में प्रभावित आंख को साफ पानी से धोएं। नेत्र चिकित्सक से तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लिया जाना चाहिए। तेज़ चोट के मामले में रोगी को ऊर्ध्वाधर स्थिति में आराम करने की सलाह दें। रोगाणुहीन पैड से दोनों आंखों पर पट्टी करें। जल्द से जल्द एक नेत्र चिकित्सक से परामर्श लें। निवारक उपाय घर में, यात्रा एवं कार्य के दौरान सभी खतरनाक एवं खेल गतिविधियों के समय आंखों की रक्षा करें। अपने घर में तथा कार्यस्थल पर प्राथमिक चिकित्सा किट रखें। आँख की चोट की स्थिति में त्वरित उपचार के लिए यात्रा किट में आंख का कड़क कवच तथा बाज़ार में उपलब्ध नेत्र धोने का तरल पदार्थ रखें। आंख की चोट हानिरहित है ऐसा नहीं सोचें। संशय की स्थिति में तुरन्त एक चिकित्सक को दिखाएं। आँख के स्वास्थ्य की अच्छी आदतें एवं प्राथमिक उपचार आँखें एवं आंख के आसपास की त्वचा को साबुन और साफ पानी से धोकर साफ रखें। सोने से पहले आंखों को धोना आवश्यक है क्योंकि इससे पूरे दिन में एकत्रित धूल एवं गंदगी हट जाती है। कभी भी दूसरे व्यक्ति का तौलिया, रुमाल या उपयोग किए हुए कपड़े का उपयोग अपनी आंखों को पोछने के लिये प्रयोग न करें क्योंकि इससे संक्रमण हो सकता है। काजल या सूरमा या अन्य सामग्री आँखों में उपयोग करने से बचें। यदि आप इनका उपयोग करते हैं तो प्रत्येक व्यक्ति को यह लगाने के लिये अपना-अपना साधन उपयोग करना चाहिए। आँखो को धूल, धुएँ या बहुत तेज प्रकाश से बचाएं। सूर्य-ग्रहण नग्न आँखों से न देखें। मक्खियां संक्रमित व्यक्तियों से स्वस्थ व्यक्तियों में बीमारियाँ फैलाती हैं। अपने वातावरण को साफ रखें। मधुमेह और उच्च रक्तचाप दृष्टि को क्षति पहुंचा सकते हैं एवं अंधत्व ला सकते हैं। उन्हें नियंत्रण में रखिये, अपनी आँखों की जाँच समय-समय पर कराएं। सभी जहरीले ड्रग्स, शराब और तंबाकू स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, आँखों के लिए तो और भी ज़्यादा। ऐसी चीजों से बचें। बच्चों को खतरनाक खेलने वाली चीजें जैसे धनुष-बाण, गिल्ली डंडा एवं नुकीले, तेज़ किनारों वाले खिलौनों से दूर रखें। वयस्को की देख-रेख के बिना बच्चों को पटाखों के साथ खेलने से हतोत्साहित करें। वेल्डिंग और बढ़ईगिरी जैसे कार्य करते समय सुरक्षात्मक चश्मे का उपयोग करें। स्वयं दवा लेने से बचें। नीम-हकीम या सड़क किनारे दवा विक्रेताओं द्वारा बेचे जाने वाली दवा का उपयोग न करें। यदि आपको कोई नजर की समस्या हो तो नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श करें। यदि आप चश्मे का उपयोग करते हैं, उन्हें साफ तथा खरोंचों से मुक्त रखें। कभी भी अन्य लोगों के काले चश्मे का उपयोग न करें क्योंकि इससे आंख में संक्रमण हो सकता है। एक-दूसरे की आँखों को छूने के द्वारा रोग के संचरण को रोकने के लिए बच्चों को लुका-छिपी का खेल खेलने से हतोत्साहित करें। खाना पकाते समय सोडा का उपयोग से बचें क्योंकि यह विटामिन को नष्ट कर देता है। पढ़ने की अच्छी आदतें मुद्रित पृष्ठ को आँखों से डेढ़ फीट दूर एवं 45 से 70 डिग्री के कोण पर झुकाकर पकड़ें। चलती ट्रेन एवं बसों में लेटे हुए या टिमटिमाते/ धुंधले प्रकाश में नहीं पढ़ें। अपर्याप्त रोशनी में बारीक प्रिंट न पढ़ें। पढ़ते या आँखों को जोर देने वाले कार्य करते समय बारम्बार आँखें बंद करके या एक मिनट के लिए दूर की वस्तु को देखकर अपनी आँखों को आराम दें। Source: हैंडबुक फॉर कम्युनिटी आई हेल्थ वर्कर्स,इंटरनेशनल सेन्टर फॉर एडवांसमेन्ट ऑफ रूरल आई केयर,एल.वी. प्रसाद आइ इंस्टीट्यूट, राजेन्द्रनगर, पोस्ट- हैदराबाद, MERCK नेत्र शोथ लक्षणः आंखों का सफेद भाग लाल हो जाना आंखों में खुजली होना आंख से पानी जैसा तरल पदार्थ निकलना कारणःवायरस, कीटाणु, एलर्जी, नेत्र शुष्कता आदि जैसे कंज्क्टीवीटा में संक्रमण या उसे नुकसान होने से नेत्र शोथ हो सकता है। मोतियाबिंद-मिथक और यथार्थ मिथक –1: मोतियाबिंद आंख के ऊपर “उत्पन्न” होते हैं। यथार्थ: मोतियाबिंद आंख के लेंस का धुंधला हो जाना है, और लेंस आंख के भीतर होता है, उसकी सतह पर नहीं। आंख का प्राकृतिक लेंस पानी और प्रोटीन तंतुओं से बना होता है, जो इस तरह से व्यवस्थित होते हैं कि जिससे लेंस साफ रहता है और उसमें से प्रकाश पार निकल सकता है। जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, प्रोटीन तंतु आपस में लिपट कर गुच्छों में बदल जाते हैं और लेंस के कुछ भागों को धुंधला कर देते हैं। समय के साथ किसी एक भाग-विशिष्ट में गुच्छे अलग दिखाई देने लगते हैं, जिससे दृष्टि कमजोर होने लगती है। मिथक – 2: मोतियाबिंद को लेज़रों से निकाला जा सकता है। यथार्थ: इस भ्रांति के साथ कि मोतियाबिंद आंख की सतह पर ऊत्पन्न होते हैं, कई लोग यह मानते हैं कि उन्हें लेज़र द्वारा निकाला जा सकता है। दरअसल ऐसा नहीं कुछ नहीं होता क्योंकि धुंधलापन लेंस के वास्तविक गुणों के भीतर उत्पन्न होता है। मोतियाबिंद शल्यक्रिया में, आपके प्राकृतिक लेंस को तोड़ कर फेको प्रोब नामक एक औजार से निकाल लिया जाता है। फिर आंख में उसके स्थान पर आईओएल नामक एक कृत्रिम लेंस लगा दिया जाता है। मिथक – 3: मोतियाबिंद “वापस बढ़” जाते हैं। यथार्थ: यह सही नहीं है। पर हां, मोतियाबिंद के रोगी में कभी-कभार शल्यक्रिया के वर्षों या महीनों बाद एक भिन्न, द्वितीयक मोतियाबिंद उत्पन्न हो सकता है। ऐसा तब होता है जब नए लेंस इम्प्लांट को संभालने वाली झिल्ली धुंधली पड़ जाती है, जिससे नज़र के साथ समस्याएं बढ़ जाती हैं और देखने में कठिनाई होने लगती हैं। इसका उपचार लेज़र शल्यचिकित्सा से किया जा सकता है। यह एक सरल प्रक्रिया होती है जिसमें आपका आंख का शल्यचिकित्सक लेंस के भीतर प्रकाश को आने देने के लिये झिल्ली के भीतर एक छोटा सा छिद्र बना देता है। यह प्रक्रिया शीघ्र और दर्दरहित होती है, पन्द्रह मिनट से कम में हो जाती है और साधारणतया आपके डॉक्टर के कार्यालय में की जाती है। मिथक – 4: मोतियाबिंद को निकालने के पहले उसका “पका होना” जरूरी है। यथार्थ : भूतकाल में यह सत्य था – मोतियाबिंद को उन्नत अवस्था में आने के बाद ही निकाला जा सकता था। लेकिन आधुनिक मोतियाबिंद शल्यचिकित्सा में, मोतियाबिंद का निकाले जाने के पहले पकना जरूरी नहीं है। आप मोतियाबिंद द्वारा आपकी दृष्टि और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करना शुरू करते ही उसे निकलवा सकते हैं। मिथक -5: केवल बूढ़े लोगों को ही मोतियाबिंद होता है। यथार्थ : मोतियाबिंद 65 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों में सबसे आम हैं। लेकिन,मोतियाबिंद अपेक्षाकृत कम उम्र वाले लोगों में भी हो सकता है। ये मोतियाबिंद मधुमेह, कुछ दवाओं और आंख की अन्य समस्याओं के कारण होते हैं। कुछ मामलों में मोतियाबिंद जन्म के समय मौजूद रह सकते हैं, जिन्हें जन्मजात मोतियाबिंद कहा जाता है। विभिन्न प्रकार के मोतियाबिंदों के बारे में अधिक जानकारी के लिये देखें, मोतियाबिंद 101: प्रकार और कारण। मिथक – 6: मोतियाबिंद शल्यचिकित्सा खतरनाक होती है। यथार्थ: मोतियाबिंद शल्यचिकित्सा चिकित्साशास्त्र में सबसे सुरक्षित और सबसे अधिक पारंगत की हुई शल्यचिकित्सा प्रक्रियाओं में से एक है, जिसकी सफलता की दर 95 प्रतिशत है। फिर भी,किसी भी अन्य शल्यक्रिया की तरह,जोखिम संभव हैं और उनके बारे में अपने डॉक्टर से बात की जानी चाहिये। मिथक – 7: मोतियाबिंद शल्यचिकित्सा से ठीक होने में कई महीने लग सकते हैं। यथार्थ: कई मामलों में, मोतियाबिंद रोगी को शल्य चिकित्सा के तुरंत बाद दृष्टि में फर्क नज़र आता है; लेकिन, कुछ लोगों की दृष्टि में उसके बाद कुछ महीनों तक सुधार आता रहता है। प्रक्रिया के बाद तीन सप्ताह तक आपको न झुकने या कोई वजनदार चीज न उठाने की ताकीद की जाती है और अपनी आंख को रगड़ने या दबाने की मनाही की जाती है। इसके अलावा, शल्यक्रिया के अगले दिन, आपकी आंख पर से पट्टी को निकालने के बाद, आप अपनी अन्य सभी सामान्य गतिविधियां वापस शुरू कर सकते हैं। (मोतियाबिंद शल्य चिकित्सा के बारे में और जानने के लिये पढ़िये, ओलिवेट शा की कहानी)। मिथक -8:मोतियाबिंद शल्यचिकित्सा के बाद चश्मे की जरूरत नहीं होती है। यथार्थ: शल्यचिकित्सा के बाद चश्मों की जरूरत होगी या नहीं यह लगाए गए अंतःनेत्रगोलकीय (नेत्र के भीतर) लेंस के प्रकार पर निर्भर होता है। एककेन्द्रिक(मोनोफोकल) लेंस के साथ रोगियों को नजदीक की और माध्यमिक दूरियों के लिये पढ़ने या कम्प्यूटर पर कार्य करने के लिये चश्मों की जरूरत पड़ने की अधिक संभावना होती है। कई लोग बहुकेन्द्रिक(मल्टीफोकल) लेंस लगवाते हैं क्योंकि अधिकांश मामलों में सभी दूरियां ठीक हो जाती हैं और चश्मों की जरूरत नहीं पड़ती। आपको यह जानने के लिये अपने डाक्टर से बात करनी होगी कि क्या बहुकेन्द्रिक(मल्टीफोकल) लेंस आपके लिये उपयुक्त रहेंगे। मोतियाबिंद शल्यचिकित्सा के लिये लेंस विकल्पों पर अधिक जानकारी के लिये पढ़ें। मिथक – 9:मोतियाबिंद एक आंख से दूसरी में फैल सकते हैं। यथार्थ: मोतियाबिंद एक या दोनों आंखों में उत्पन्न हो सकते हैं, लेकिन वे फैलते नहीं हैं। मिथक -10: मोतियाबिंद ध्यान से करने के कार्यों जैसे पढ़ाई और सिलाई को करने से और बिगड़ जाते हैं। यथार्थ: आपके इन कार्यों को करने से मोतियाबिंद उत्पन्न या पहले से मौजूद मोतियाबिंद और नहीं बिगड़ सकता। मोतियाबिंद होने के कारण आपके अपनी आंखों का इस्तेमाल करने के तरीके पर निर्भर नहीं होते। फिर भी यह संभव है कि आपका ध्यान मोतियाबिंद पर नजदीक से किये जाने वाले कार्यों को करते समय जाएगा क्योंकि इन गतिविधियों को करते समय अधिक रोशनी की जरूरत होना मोतियाबिंद के लक्षणों में से एक है। मिथक – 11 :मोतियाबिंद को होने के बाद वापस लौटाया जा सकता है। यथार्थ: लेंस का धुंधलापन उम्र की प्रक्रिया का प्राकृतिक भाग है और उसे टाला नहीं जा सकता। फिर भी, अपनी जीवनशैली में परिवर्तन लाकर आप मोतियाबिंदों को धीमा या उत्पन्न होने से रोक सकते हैं: यदि आप धूम्रपान करते हैं तो उसे छोड़ने के बारे में सोचिये। संतुलित आहार ग्रहण करें, जिसमें खूब सारे फल और सब्जियां हों। धूप का चश्मा(100% यूवी ए और बी सुरक्षित) पहनें और सूर्य के प्रकाश में अधिक देर तक न रहें। रतौंधी रोग के घरेलु उपचार स्रोत: http://www.cataractsurgeryindia.in/ स्रोत:http://rushabheye.blogspot.com/