परिचय चमड़ी शरीर का जरुरी भाग है। इसके बहुत सारे काम हैं। शरीर में चमड़ी की दो तह होती – एक ऊपर का हिस्सा और दूसरा अन्दर का हिस्सा। नीचे वाले हिस्से में पसीना बनता है, यही खून के बहने की नलियाँ होती है। नीचे की परत के बाद चरबी की परत होती है। सब परतें मिल जुल कर शरीर की रक्षा करती है। उन्हें तेज धूप, रोगों कीटाणु शरीर के अन्दर घुस जाते हैं और व्यक्ति बीमार पर जाता है। चमड़ी की समस्याओं से बचाव चमड़ी में जलन, सूजन, पीड़ा, पीव या मवाद, या फिर उसके गरम हो जाने पर गरम पानी से भीगें कपड़े से सेंक करें उसे हिलाएँ-दुलएं न कुछ खतरनाक लक्षण सूजी हुई लसलसा चमड़ी पतली या मोटी लाल लकीर कटी जगह या घाव से बदबू निकलना उपचार एक पाव उबले पानी में दो बड़े चम्मच सिरका मिला कर भींगे कपड़े से सिकाई करें। आप सिरका की जगह लाल दवा (पोटाशियम परमैगनेट ) भी इस्तेमाल कर सकते हैं। खुजली (खारिश) बच्चों में खुजली हो जाना आम बात है। चमड़ी पर छोटे-छोटे गुमरे उभर जाते हैं, जिनमें बहुत ज्यादा खुजली होती है। यों तो खुजली सारे बदन में हो सकती है, लेकिन कुछ खास जगहों पर ज्यादा होती है उँगलियों के बीच क्लायों पर कमर के आस-पास पेशाब – पखाना करने वाले अंगों पर उपचार खुजली की बीमारी छूने से ही होती है। परिवार में एक की होती है तो बाकी लोगों को भी जल्दी हो सकती है। आटा में थोड़ी हल्दी मिलाएं, उसमे ऐसा पानी दें जिसमें नीम की पत्ती उबाला गया है। उबटन तैयार है। पूरे शरीर को साबुन और पानी से अच्छी तरह धो लें शरीर को पोंछने के बाद उबटन लगाएं थोड़ी देर धूप में खड़े रहें तीन दिनों तक इसी तरह उबटन लगाएं और धूप सेंके,घर के चादरों, तकियों के खौल को उबले पानी में धोकर सूखा लें शरीर की सफाई सबसे ज्यादा जरूरी है। बालों और शरीर के जुएं (ढील) सिर और बदन के बालों में जुओं से खुजली होती है। जुओं से बचाव के लिए शरीर की सफाई सबसे जरूरी है। चारपाइयों,तकियों और बिस्तरे को रोज धूप दिखाएँ। बच्चों के बालों को नियमित रूप से देखें। अगर किसी बच्चे के बाल में जुआ दिखता है तो उसे दूसरे बच्चों के साथ न सुलाएं। उपचार सिर में लगाने वाले तेल और किरासन तेल को बराबर हिस्सा लेकर मिलाएं इस घोल का शाम के समय लगाएं, ध्यान रहे कि घोल बालों कि जड़ तक पहुँच जाए घोल लगाने के बाद सिर को कपड़े से ढक दें सुबह के समय बालों को साबुन से धोएँ महीन दांतों वाले कंघी से बाल बनाएँ बाद में कंघी को किरासन तेल में डुबाएं ताकि जिन्दे और मरे हुए ढील निकल जाए सिरका मिले गरम पानी से सर धोने से भी जुओं से छुटकारा मिलता है हर दस दिन पर यही उपचार करें। पीबवाले छोटे-छोटे घाव छूत के कारण चमड़ी में पीब भरे छोटे-छोटे घाव निकल आते हैं।गन्दे नाखूनों से खुजलाने से या कीटाणुओं से भी ऐसे घाव निकल आते हैं। उपचार और बचाव इन घावों को साबुन और उबले पानी से अच्छी तरह धोएँ। धीरे-धीरे घावों पर पड़े पपड़ियों को भी साफ कर दें। दिन में तबतक यह उपचार करें जब तक कि घाव सूख नहीं जाते हैं। छोटे-छोटे घावों को खुला रहने दें। बड़े घावों पर पट्टी बांधे, उन्हें रोज बदल दें। घावों को खुजलाकर छीले नहीं, इससे घाव दूसरे भाग में भी फ़ैल जाते हैं। बच्चों के नाखूनों को काट दें ताकि खुजलाने पर ज्यादा नुकसान न हो यह छुतहा होता है, दूसरे बच्चों को घाव वाले बच्चों को उठने बैठने या सोने न दें। फोड़े (बड़े घाव) यह भी छूत से ही होता है। इसमें चमड़ी के नीचे पीब भरी गिल्टियाँ बन जाती है। गन्दे सुई के लगने ऐसे फोड़े जिक्ल आते हैं। इसमे बहुत ही दर्द होता है। आस-पास कि चमड़ी गरम हो जाती है, लाल भी हो जा सकती है और बुखार भी लग जाता है। उपचार घाव को दिन में कई बार गरम पानी से सेंके घाव को अपने आप ही फटने दें फटने के बाद भी गरम पानी से सेंक करते रहें बहुत दर्द करने पर डाक्टरी सहायता लें। खुजली वाले पित्ती कुछ लोगों को खास चीज छूने , खाने या साँस लेने पर चमड़ी पर खुजली वाले पित्ती निकल आते हैं। पित्ती चमड़ी पर उभरी हुई चकती होती है। मधुमक्खी के डंक मारने पर भी ऐसी ही चकती होती है। चकती और आस-पास बहुत ही खुजली होती है, चकती शरीर के दूसरे भाग में निकल आ सकती है। उपचार ठंडे पानी से नहाए, चकतों पर बर्फ रखें ठंडा दलिया या माड लगाने से भी आराम मिलता है छोटे बच्चों के नाखूनों की काट दें ताकि चकतो को न खुरच सकें बिच्छू काटने तथा कुछ तरह के पेड़ पौधों को छूने पर भी इसी तरह के चकते निकल आते हैं। चेहरे और शरीर के सफेद दाग गरदन, छाती और पीठ पर कभी-कभी गहरे या हल्के रंग के छोटे-छोटे दाग निकल जाते हैं। यह दाग चमड़ी में खास तरह के फफूंदी के लगने से होता है। इसमें किसी तरह की खुजली नहीं होती है और किसी तरह के इलाज की भी जरूरत नहीं होती है। उपचार दस भाग तेल और एक भाग गंधक सल्फर मिला कर मलहम बना लें उस दागों पर तबतक लगावें जबतक कि दाग गायब नहीं हो जाते हैं। दुबारा न हो इस लिए यह उपचार कुछ महीनों तक हर दस दिनों पर रहें। एक और तरह के छोटे-छोटे सफेद दाग होते हैं। ऐसे दाग काली चमड़ी वाले बच्चों के गालों पर निकल आते हैं। ये दाग या निशान छुट के नहीं है। ऐसे बच्चों को धूप से बचना चाहिए। बड़े होने पर दाग अपने आप मिट जाते हैं। मुहासें और कीलें किशोर-किशोरियों के चेहरे, छाती और पीठ पर मुहासे हो जाते हैं। खासकर जब त्वचा बहुत चिकनी होती है। ऐसे मुहासें छुतहा भी हो सकते हैं। मुहासों को उगलियों से न छुएं न निचोड़े। नाक और चेहरे के मुहासों को तो बिलकुल नहीं। उपचार : चेहरे को साबुन और गरम पानी से दिन में दो बार धोएँ। धूप से मुहासें ठीक होते हैं, चेहरे, पीठ या छाती को बराबर धूप दिखाएँ। सेहतमंद भोजन खाएं और खूब पानी पिएं। अच्छी तरह सोएं। चिकना तेल या क्रीम न लगाएं। सोने से पहले गंधक और अलकोहल का घोल लगाएं दस भाग अलकोहल, एक भाग गंधक यदि मुहासें ऊपर दिए गए उपचार नहीं खतम होते हैं तो डाक्टर को दिखाएँ। चमड़ी का कैंसर गोरी चमड़ी वाले लोगों को धूप में ज्यादा देर घूमने से चमड़ी का कैंसर हो सकता है। इस तरह का कैंसर खासकर कान, गाल कि हड्डी, कनपटी, नाक तथा होटों पर ज्यादा होता है। चमड़ी का कैंसर कई रूप ले सकता है। शुरू में यह घेरे कई तरह दिखता है, जो कि मोती के रंग का होता है। घेरे के बीच में एक छेद होता है। यह धीरे-धीरे बढ़ता है। इसका उपचार डाक्टर आपरेशन के जरिए करता है। गोरी चमड़ी वाले लोगों को धूप से बचना चाहिए धूप में जाने के पहले जिंक आक्साइड मरहम लगा कर निकलनी चाहिए। चमड़ी का टी. बी. जो छोटे कीटाणु फेफड़े के टी. बी. पैदा करते हैं वही कीटाणु चमड़ी पर भी बुरा असर डालते हैं। चमड़ी की टी. बी. के लक्षण : लम्बे समय तक चमड़ी पर चकता बड़े-बड़े मस्सों का निकलना चमड़ी का घाव जैसा अल्सर चमड़ी गला देने वाला ट्यूमर चमड़ी का टी. बी. धीरे-धीरे शुरू होता है। बहुत समय तक रहता है। चमड़ी के टी.बी. का इलाज मुश्किल होता है समय से ही डाक्टर को दिखा लेना चाहिए। कभी-कभी गरदन और कंधे के बीच की हड्डी के पीछे वाले गांठों में भी टी.बी. अपना छूत फैला देता है। ये गांठे बड़ी होकर फूट जाती हैं और उसमें पीब निकलता है। ऐसा बार-बार होता है इस टी.बी. में भी डाक्टरी इलाज जरूरी है। स्त्रोत: संसर्ग, ज़ेवियर समाज सेवा संस्थान