परिचय दांतों की अतिसंवेदनशीलता को सामान्यत: दांतों की संवेदनशीलता (दंत संवेदनशीलता) के नाम से जाना जाता है। यदि किसी व्यक्ति को दांतों में गर्म, ठंडा या मीठा खाद्य पदार्थ और पेय या ठंडी हवा में सांस लेने पर हल्की से गंभीर असुविधा या दर्द महसूस होता है, तो यह स्थिति दांतों की संवेदनशीलता को इंगित करती है। यह बहुत ही सामान्य नैदानिक प्रस्तुति है तथा रोगियों के लिए बेहद चिंताजनक है। अध्ययनों से पता चला है, कि अधिकांश आबादी में सामान्य आबादी का दस से तीस प्रतिशत दांतों की अतिसंवेदनशीलता से पीड़ित है। परिभाषा‘डेंटाइन (दंतधातु) अतिसंवेदनशीलता’ सामान्यत: रासायनिक, थर्मल या ओस्मोटिक उत्तेजना की प्रतिक्रिया में क्षतिग्रस्त डेंटाइन के कारण लधु, तीव्र दर्द होता है, जिसे किसी अन्य दंत दोष या पैथोलॉजी के रूप में परिभाषित नहीं किया जाता है। (डेंटाइन हमारे दांतों का आंतरिक हिस्सा है, जो कि इनेमल की परत से ढका होता है, इनेमल के निकल जाने पर खाए जाने वाले खाद्य पदार्थ सीधे डेंटाइन तक पहुंच जाते है, जिसके कारण डेंटाइन से जुड़ी नलिकाएं खुल जाती है और ऐसे में गर्म और ठंडी चीज़ें खाने से हमारे दांत सेंसिटिव हो जाते हैं तथा दांतों में दर्द और झन्नाहट होने लगती है) कारण दांत में बाह्य दंतवल्क (बाहरी तामचीनी परत या आउटर इनेमल लेयर) होती है। ‘डेंटाइन’ इनेमल और मसूड़ों के नीचे होते हैं। ‘डेंटाइन’ इनेमल/दंतवल्क से ढंका हुआ होता है। ‘इनेमल’ डेंटाइन को सुरक्षा प्रदान करते है। डेंटाइन में सूक्ष्म नलिकाएं या नलिकाएं होती हैं, जो कि दांतों की लुगदी से जुड़ी होती है। यदि इनेमल की परत दातों से उतरने लगती है, तो डेंटाइन इनेमल के सुरक्षात्मक आवरण को खो देता है तो इसकी नलिकाएं खुल जाती हैं। ये नलिकाएं गर्म, ठंडे या अम्लीय खाद्य पदार्थों को दांत की लुगदी के भीतर की नसों और कोशिकाओं तक पहुंचने देती हैं और इससे दांत संवेदनशील हो जाते हैं। रगड़-रगड़ कर टूथब्रश करना: बहुत जोर से ब्रश करना और एक ओर से दूसरी ओर ब्रश करना, जिसके कारण इनेमल घिस या क्षतिग्रस्त हो जाते है, इनेमल घिसकर दांतों के अंदर के मुलायम हिस्से 'डेंटाइन तक पहुंच जाता है। जिससे डेंटाइन संवेदनशील हो जाता है। दंत क्षरण: अम्लीय आहार और पेय पदार्थों से उपजे एसिड हमलों के कारण दांतों के इनेमल क्षतिग्रस्त हो जाते है। यदि इनेमल घिस जाता है, तो इनेमल से ढंका हुआ डेंटाइन खुल जाता है या डेंटाइन बाहर आ जाता है, जिसके कारण दांतों में संवेदनशीलता महसूस होती है। मसूड़े के रोग या गम डिसीज़: प्लाक (दांत का मैल) या टार्टर के जमा होने से मसूड़े अपनी जगह से खिसकने (जगह छोड़ने) लगते हैं और यहां तक कि ये दांतों को सहारा प्रदान करने वाली हड्डी की संरचनाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। मसूड़ों के अपनी जगह से खिसकने के कारण दांत अपनी जगह से हिल-डुल जाते हैं तथा अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। दांत के आसपास के मसूड़ों में पॉकेट बन सकती है, जिससे उस क्षेत्र को साफ रखना मुश्किल हो जाता है तथा समस्या और बढ़ जाती है। दांत पीसना: दांत पीसना एक आदत है, जिसमें दांत आपस में पिसते या रगड़ खाते है। इससे दांतों का इनेमल भी खराब हो जाता है, जो कि दांतों को संवेदनशील बनाता हैं। टूटा हुआ दांत या दांत भरना: टूटा हुआ दांत (दांतों में कोई सुराख़ या दांत का कोई हिस्सा झड़ना)/दांत भरना वह है, जो कि टूट गया है। दांतों की ब्लीचिंग (टूथ ब्लीचिंग): कुछ रोगियों में ब्लीचिंग के दौरान या ब्लीचिंग के बाद थोड़े समय के लिए दंत संवेदनशीलता होती है। दांतों की अतिसंवेदनशीलता में अंतर्निहित तंत्र को व्याख्यायित के लिए कई थ्योरी जैसे कि ट्रांसड्यूसर थ्योरी (सिद्धांत), मॉड्यूलेशन थ्योरी, "गेट" कंट्रोल और वाइब्रेशन थ्योरी और हाइड्रोडायनामिक थ्योरी प्रस्तावित की जाती है। सबसे व्यापक रूप से स्वीकृत सिद्धांत ‘ब्रैनस्ट्रॉम का हाइड्रोडायनामिक सिद्धांत’ है, जो कि दांतों की नलिकाओं के भीतर द्रव आंदोलन के कारण नोसिरेसेप्टर्स की सक्रियता को दर्शाता है। रोकथाम दांतों की संवेदनशीलता के साथ-साथ अधिकतर मुख स्वास्थ्य समस्याओं के विरूध अच्छी मुख स्वच्छता सबसे बेहतर बचाव है। बहुत जोर से ब्रश करना, ब्रश करते समय बहुत अधिक दबाव डालना या कठोर ब्रिसल वाले टूथब्रश का उपयोग करने से दांतों में घर्षण (रगड़) और जिंजिवाइल रीसेशन होता है, जिससे दांतों की संवेदनशीलता बढ़ जाती है। अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन अच्छी दंत चिकित्सा देखभाल दिनचर्या के लिए निम्नलिखित अपनाने की सलाह देता है: मुलायम ब्रिसल वाले टूथब्रश और फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से दिन में दो बार दांतों को धीरे-धीरे ब्रश करें। अपने दांतों को एक ओर से दूसरी ओर ब्रश न करें। अगर ब्रिसल्स खराब हो जाए, तो हर तीन या चार महीने में या इससे पहले टूथब्रश बदलें। उपचार उपचार का प्रकार संवेदनशीलता के कारण पर निर्भर करता है। संवेदनशीलता को व्यवस्थित होने में कुछ समय लगता है। उपचार के तहत घर पर उपयोग के लिए डिसेन्सिटाइज़िंग टूथपेस्ट का उपयोग; या दंत चिकित्सकों द्वारा डिसेन्सिटाइजिंग एजेंटों का सामयिक अनुप्रयोग शामिल है।इन डिसेन्सिटाइज़िंग एजेंटों में ऐसे यौगिक होते हैं जो कि दांत के अंदर की नसों में होने वाली उत्तेजना से उत्पन्न दर्द को रोकते हैं। सबसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाला घटक पोटेशियम नाइट्रेट है। अन्य प्रभावी डिसेन्सिटाइजिंग एजेंट डेंटिन सीलर्स (रेजिन), सोडियम साइट्रेट और सोडियम मोनोफ्लोरोफॉस्फेट हैं। कार्यालय उपचार में फ्लोराइड वार्निश या फ्लोराइड जेल एप्लीकेशन, फिलिंग, क्राउन, इनले या बॉन्डिंग होते हैं, जिनका उपयोग दांत के क्षतिग्रस्त क्षेत्रों की मरम्मत के लिए या गम रीसेशन से आवरण रहित (खुले) क्षेत्रों को ढकने करने के लिए किया जाता है। आक्रामक प्रक्रियाओं में जिंजिवल ग्राफ्ट सर्जरी या रूट कैनाल उपचार शामिल हैं। नेशनल नेशलन हेल्थ पाेर्टल एवं विकासपीडिया द्वारा स्वास्थ्य की बेहतर समझ के लिए केवल सांकेतिक जानकारी उपलब्ध कराई गई है। किसी भी निदान/उपचार के लिए कृपया अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्त्राेत : नेशलन हेल्थ पाेर्टल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय , भारत सरकार।