प्रस्तावना 1.1 इस योजना के अधीन किसी भी सुपर स्पेशियलिटी सरकारी अस्पताल/संस्थान या अन्य सरकारी अस्पतालों में चिकित्सीय उपचार प्राप्त करने के लिए इस दिशानिर्देश को अनुलग्रक में सूचीबद्ध मुख्य जानलेवा बीमारियों से पीड़ित गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले रोगियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है जिसे ऐसे रोगियों को वित्तीय सहायता ‘एक बारगी अनुदान' के रूप में जारी की जाती है जो उस अस्पताल, जहां पर उपचार दिया गया हो/दिया जा रहा है, के चिकित्सा अधीक्षक/निदेशक को जारी की जाती है। 1.2 स्वास्थ्य विभाग से संबद्ध मानव संसाधन विकास संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत केन्द्रीय सरकारी अस्पतालों के कार्यकरण पर अपनी 31 वीं रिपोर्ट में बड़ी बीमारियों के लिए गरीब रोगियों के उपचार के लिए अपर्याप्त सुविधाओं के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की थी। समिति ने महसूस किया कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान अथवा अन्य केन्द्रीय सरकारी अस्पतालों में विशिष्ट जानलेवा बीमारियों का उपचार करवाने के लिए आने वाले गरीब रोगियों की सहायता करने के लिए निधियों के सभी उचित स्रोतों का पता लगाना आवश्यक था। समिति की उपर्युक्त सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एक राष्ट्रीय बीमारी सहायता निधि को नया नाम देते हुए राष्ट्रीय आरोग्य निधि (आरएएन) स्थापित करने का निर्णय लिया गया। गैर-योजना व्यय संबंधी समिति ने 17 अक्तूबर, 1996 को हुई अपनी बैठक में इस निधि को स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। तदनुसार भारत के राजपत्र (असाधारण) में यथा प्रकाशित दिनांक 13.1.97 के संकल्प संख्या एफ- 7-2/96-वित्त-II के तहत राष्ट्रीय आरोग्य निधि की स्थापना की गई थी और इस निधि को सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत एक स्वायत्त सोसायटी के रूप में पंजीकृत करवाया गया था। इसकी स्थापना भारत सरकार के 5 करोड़ रूपए के शुरूआती अंशदान से की गई थी। इस निधि में एफ सी आर ए के अनुमोदन से भारत या विदेश में रहने वाले लोग, निजी या सार्वजनिक क्षेत्र के निगमित निकाय, लोकोपकारी संगठन भी अंशदाता बन सकते हैं और इस निधि में दिए गए सभी अंशदान आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80-छ के अंतर्गत आयकर भुगतान से पूरी तरह से मुक्त हैं। परिक्रामी कोष का गठन 2.1 इस योजना के अधीन किसी भी सुपर स्पेशियलिटी सरकारी अस्पताल संस्थान या अन्य सरकारी अस्पतालों में चिकित्सीय उपचार प्राप्त करने के लिए मुख्य जानलेवा बीमारियों से पीड़ित गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले रोगियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। ऐसे रोगियों को वित्तीय सहायता ‘एक बारगी अनुदान' के रूप में जारी की जाती है जो उस अस्पताल, जहां पर उपचार दिया गया हो/दिया जा रहा है, के चिकित्सा अधीक्षक को जारी की जाती है। जरूरतमंद रोगियों को सहायता देने के कार्य में तेजी लाने की दृष्टि से योजना को संशोधित किया गया है और निम्नलिखित अस्पतालों / संस्थानों में परिक्रामी निधि स्थापित की गई है तथा 50 लाख रु. तक (एम्स के मामले में 90 लाख रु. तक) निधि संबन्धित अस्पताल/ संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक/निदेशक के अधिकार क्षेत्र में रखी गई: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, (एम्स) नई दिल्ली, डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नयी दिल्ली सफदरजंग अस्पताल, नयी दिल्ली लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और श्रीमती सुचेता कृपलानी अस्पताल, नयी दिल्ली स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) चंडीगढ़, जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, जेआईपीजीएमईआर (जिपमेर)-पुदुच्चेरी, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान, एनआईएमएचएएनएस (निम्हांस)- बेंगलुरु, संजय गाँधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआईएमएस), लखनऊ चितरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान, कोलकाता गाँधी मेमोरियल और एसोसिएटेड हॉस्पिटल (केजीएमसी) लखनऊ पूर्वोत्तर इंदिरा गांधी क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं आयुर्विज्ञान संस्थान, एनईआईजीआरआईएचएमएस- शिलांग क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (आरआईएमएस) -इम्फाल शेरे कश्मीर आयुर्विज्ञान संस्थान, श्रीनगर अस्पतालों/संस्थानों के चिकित्सा अधीक्षक/निदेशकों को अपने-अपने अस्पताल/संस्था में उपचार के लिए रिपोर्ट करने वाले प्रत्येक पात्र मामले में 2,00,000/- रुपए तक आपातकालीन मामलों में 5,00,000/- तक की वित्तीय सहायता स्वीकृत करने के लिए वित्तीय शक्तियां प्रत्यायोजित की गई हैं। इसके अतिरिक्त यह निर्णय लिया गया है कि जहां उपचार की राशि 2 लाख रुपए से अधिक है उन मामलों को सरकारी अस्पताल/संस्थान आरएएन मुख्यालय को भेजेंगे। राज्य रोग सहायता निधि का गठन सभी राज्य सरकारों/संघ राज्य प्रशासनों को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दिनांक 11/11/96 के पत्र द्वारा उनके संबंधित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में रोग सहायता निधि गठित करने का परामर्श दिया गया है। यह निर्णय लिया गया है कि केंद्र सरकार से प्रत्येक राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों (विधानमंडल सहित) को सहायता अनुदान जारी की जाए, जहां भी ऐसी निधियों का गठन किया गया है। राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को सहायता अनुदान, राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा राज्य निधि/सोसायटी को दिए गए योगदान के 50% तक होगा, जो कि गरीबी रेखा से नीचे की अधिक संख्या और प्रतिशत जनसंख्या वाले राज्यों अर्थात आंध्र प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उड़ीसा, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के लिए अधिकतम 5 करोड़ रुपए तक होगा और अन्य राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के लिए 2 करोड़ रुपए तक होगा। राज्य/संघ राज्य क्षेत्र स्तर की निधियाँ भी दानकर्ताओं से योगदान/दान प्राप्त कर सकती हैं, जैसा कि राष्ट्रीय आरोग्य निधि के लिए उल्लेख किया गया है। राज्य/संघ राज्य क्षेत्र स्तर पर रोग सहायता निधि संबंधित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में निवास करने वाले रोगियों को, व्यक्तिगत मामले में 1.50 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता जारी करेगी/और जहां वित्तीय सहायता के 1.50 लाख रुपए से अधिक होने की संभावना हो, उन सभी मामलों को राष्ट्रीय आरोग्य निधि को अग्रेषित करेगी। निम्नलिखित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों (विधानमंडल सहित) ने रोग सहायता निधि का गठन किया है:- कर्नाटक, मध्य प्रदेश, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तराखण्ड, पंजाब, उत्तर प्रदेश, और मणिपुर और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली तथा पुदुचेरी। निम्रलिखित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों ने निरंतर अनुस्मारकों के बावजूद राज्य रोग सहायता निधि का गठन नहीं किया है। 1. मेघालय 2. नागालैण्ड योजना में यह प्रावधान किया गया है कि जब भी संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन रोग सहायता सोसायटी/समिति का गठन करेगा, एनआईएएफ में से संघ राज्य क्षेत्रों (जहां विधानमंडल नहीं है) को एक बजट परिव्यय की मंजूरी दी जाएगी। 21-10-98 को आयोजित प्रबंधन समिति की पहली बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि प्रत्येक संघ राज्य क्षेत्र को 50 लाख रुपए के बजट परिव्यय की मंजूरी दी जाएगी। तदनुसार निम्नलिखित संघ राज्य क्षेत्रों के लिए बजट प्रावधान किए गए हैं: लक्षद्वीप दमन और दीव दादरा और नगर हवेली अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह चंडीगढ़ आरएएन के तहत सहायता के लिए पात्रता मानव जीवन के लिए घातक विशिष्ट बीमारियों से ग्रस्त सिर्फ गरीबी रेखा से नीचे के व्यक्ति। सहायता सिर्फ सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए ही लागू। केंद्रीय सरकार/राज्य सरकार/पीएसयू के कर्मचारी पात्र नहीं हैं। रोगी द्वारा पहले व्यय किए जा चुके चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति अनुमत नहीं है। सामान्य बीमारियों तथा उन बीमारियों के लिए जो अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों/योजनाओं के तहत उपचार शुल्क मुक्त है, अनुदान के लिए पात्र नहीं हैं। अपने राज्य में उपचार करा रहे रोगी राज्य रोग सहायता निधि (जहां ऐसी निधि का गठन किया गया) से सहायता प्राप्त करेंगे बशर्त चिकित्सा लागत 1.50 लाख रुपए से अधिक न हो। 1.50 लाख रुपए से अधिक खर्च के मामले राज्यों द्वारा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय आरोग्य निधि (केंद्रीय निधि) से सहायता के लिए रेफर किए जाएंगे। राष्ट्रीय आरोग्य निधि की प्रबंधन समिति राष्ट्रीय आरोग्य निधि का प्रबंधन एक प्रबंध समिति द्वारा किया जाता है जिसमें निम्नलिखित सदस्य शामिल हैं: केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री – अध्यक्ष अपर सचिव (स्वास्थ्य) - सदस्य विशेष महानिदेशक, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय - सदस्य आर्थिक सलाहकार, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय – सदस्य – सचिव मुख्य लेखा नियंत्रक (स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय) – कोषाध्यक्ष राष्ट्रीय आरोग्य निधि की तकनीकी समिति योजना के तहत सहायतार्थ शामिल की जाने वाली बीमारी की प्रकृति और अन्य सहायक मुद्दों जैसे तकनीकी मामलों पर प्रबंधन समिति को परामर्श देने के लिए एक तकनीकी समिति है। इस तकनीकी समिति में निम्नलिखित शामिल हैं:- विशेष महानिदेशक, (वरिष्ठतम) स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय आर्थिक सलाहकार चिकित्सा अधीक्षक, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली विभागाध्यक्ष, हृदय विज्ञान विभाग, एम्स, नई दिल्ली विभागाध्यक्ष, रूधिर विज्ञान, एम्स, नई दिल्ली विभागाध्यक्ष, चिकित्सा अर्बुद विज्ञान, सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली विभागाध्यक्ष, चिकित्सा अर्बुद विज्ञान, एम्स, नई दिल्ली योजना के अंतर्गत शामिल रोगों की सूची निधि से उन रोगों का उपचार किया जाना है, जिन्हें जरुरत है। सहायता का लाभ लेने के लिए आवेदन जमा करने की प्रक्रिया राष्ट्रीय आरोग्य निधि के अंतर्गत सहायता प्राप्त करने के लिए आवेदन जमा करने की प्रक्रिया दिया गया है। संपर्क व्यक्ति विस्तृत सूचना के लिए कृपया निम्रलिखित से संपर्क करे : अवर सचिव (अनुदान) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, कमरा नं. 514-ए, निर्माण भवन नई दिल्ली-110011 टेलीफोनः 23061986/22061731 निधि से प्रदान किए जाने वाले उपचार की ब्यौरेवार सूची निम्नलिखित है इस सूची की तकनीकी समिति द्वारा समय-समय पर समीक्षा की जाती है। हृदय विज्ञान एवं हृदय संबंधी शल्य क्रिया : सीआरटी/बाइवेंट्रिक्युलर पेसमेकर सहित पेसमेकर आटोमेटिक इम्पलॉटेबल कार्डियोवर्टर डिफाइब्रिलेटर (एआईसीडी) और कोम्बो युक्तियाँ डायग्नोस्टिक कार्डियक कैथेटराइजेशन और कोरोनरी एंजियोग्राफी सहित कोरोनरी आर्टरी रोग एंजियोप्लास्टी स्टेंट के साथ या बिना रोटा-एब्लेशन, बैलून वॉल्व्यूलोप्लास्टी सहित नैदानिक प्रक्रिया एएसडी, वीएसडी एवं पीडीएडिवाइस क्लोजर कैरोटिड एंजियोप्लास्टी और रीनल एंजियोप्लास्टी, ऑर्टिक सर्जरी व स्टेंट ग्राफ्टिग सहित पेरिफेरल वास्क्युलर एंजियोप्लास्टी क्वायल इम्बोलाईजेशन एवं वास्क्युलर प्लग्स इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिकल अध्ययन (ईपीएस)एवं रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएएफ) एब्लेशन सीएबीजी वाल्ब प्रतिस्थापन सहित जन्मजात एवं अर्जित समस्याओं के लिए हृदय की शल्य क्रिया हृदय/फेफड़ा प्रत्यारोपण (अधिकतम लागत सीजीएचएस दरों तक) इंट्रा ऑर्टिक बलून पंप (आईएबीपी) एक्यूट मियोकार्डियल इन्फ्रेक्शन, पुलमोनरी श्रोम्बोएबोलिज्म व प्रोस्थेटिक वाल्ब श्रोम्बोसिस हेतु श्रोम्बोलाइटिक थेरेपी आईवीसी फिल्टर कैंसर रेडियो थेरापी और गामा नाइफ शल्य क्रिया/जीआरटी/एमआरट/ब्राकोथेरेपी सहित सभी तरह के विकिरण उपचार टोमनल थेरेपी सहित मेडिकेशन समर्थित कैंसर रोधी किमोथेरापी अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण-एलोजेनिक तथा ऑटोलोगस नैदानिक प्रक्रियाएं – पीईटी स्कैन सहित ऑपरेवल कैंसर रोगियों के लिए शल्य क्रिया मूत्र विज्ञान/वृक्क विज्ञान/जठरांत्र विज्ञानः डायलिसिस (हीमोडायलिसिस तथा पेरीटोनियल दोनों) एबीओ असंगत दाताओं में प्लाज्मलफेरेसिस गुर्दे फेल होने पर निरंतर आरआरटी डायलिसिस के लिए वास्क्यूलर एक्सस उपभोज्य वस्तुएं (एवी ग्राफ्ट, स्थायी कैथेटर्स सहित कैथेटर्स) गुर्दा प्रतिरोपण- सीजीएचएस दरों के अनुसार अधिकतम सीमा निर्धारित की जा सकती है यूसीजी निर्देशित पीसीएनएल तथा यूएसजी निर्देशित एसपीसी टीयूआर बीटी के साथ सीपीई, एंडोस्कोपिक कैथेराईजेशन के साथ सीपीई क्लॉट इवेक्येशन के साथ सीपीई सहित मूत्र विज्ञान में एंडोस्कोपिक शल्य चिकित्सीय क्रियाविधियां जीआई शल्य क्रिया में एंडोस्कोपिक/शल्य चिकित्सीय क्रियाविधियां तीव्र जीआई आपातिक स्थितियां जैसै कि तीव्र पैनक्रियाटाइटिस, जीआई रक्त-स्राव, कोलेनजाइटिस, पेरीटोनाइटिस, इन्टेस्टाइनल ऑब्सटक्शन, बाइलियरी स्ट्रक्चर, एक्यूट फुलमिनेन्ट हिपेटाइटिस, हिपेरिन एन्सीफेलोपैथी, हिपरिन एब्सेस आदि पोर्टल हाइपरटेंशन हेतु यकृत प्रत्यारोपण एवं शल्य-किया अधिकतम लागत सीजीएचएस दरों तक हो सकती है अस्थि रोग विज्ञान: अभिघातज एव रोगात्मक फ्रैंक्चर* का उपचार। जोड़ों के विस्थापन हेतु आरोपण। स्पाइनल फिक्सेशन इम्पलाट** *स्कीम के तहत फ्रैंक्चर एवं पॉली ट्रॉमा में प्रयोग होने वाले केवल स्वदेशी प्रत्यारोपणों की अनुमति होगी। **उपचार करने वाले चिकित्सक अब गैर-स्वदेशी प्रत्यारोपण के लिए औचित्य देना होगा। तंत्रिका शल्य क्रिया-तंत्रिका विज्ञान मस्तिष्क अर्बुद सिर की चोट इंटरा क्रेनियल एन्युरिज्म व कमजोर नसों का एन्युरिज्म मस्तिष्क और मेरुदंडीय संवहनी विकृतियाँ मेरू अर्बुद मस्तिष्क/मेरूदंड की अपकर्षक/डिमाइलिनेटिंग बीमारियां प्मस्तिष्क, मेरू आघात मिर्गी चलने फिरने में विकार तंत्रिका संबंधी संक्रमण अभिघातजन्य रीढ़ की चोट मस्तिष्क ओक्लूसिव संवहनी रोग गयूल्लेन बेरें सिंड्रोम संकटकालीन स्थिति में मिस्थेनिया ग्रेविस (मेडिकल व सर्जिकल) वेंटीरेटरी खराबी सहित गंभीर पॉलीमायोसिटिस गंभीर अथवा असाध्य ऑटोइम्यून रोग अंतस्राव विज्ञान जटिल मधुमेह के मामले जिसमें एक बार के उपचार की जरूरत होती है। जीएच कमी जैसे अंग विच्छेदन अथवा वृक प्रत्यारोपण अथवा रेसिल डिटेचमेंट आदि। अधिवृक्क अपर्याप्तता क्युसिंग सिंड्रोम एक वर्ष के लिए पोस्ट सर्जिकल उपचार के साथ अंतःस्रावी शल्य क्रिया उपापचयी अस्थि रोग/ रेनल प्यूबुलर एसिडोसिस मानसिक रोग मानसिक विकृतियों हेतु एक बार अनुदान वाला अपेक्षित कोई भी उपचार जिसमें निम्रलिखित शामिल है:- आंगिक मनोविश्रेषण (तीव्र व पुराना) सिजोफ्रेनिया, बाई-पोलर विकार, भ्रम विकार और अन्य तीव्र बहुरूपी भ्रम सहित कार्यात्मक मनोविश्लेषण गंभीर ओसीडी, सोमाटोफार्म विकार शैशव काल में स्वलीनता प्रतिबिम्ब विकार और गंभीर व्यवहार विकार सहित विकासात्मक विकार मनोवैज्ञानिक निदान, न्यूरो साइकोलॉजिकल आकलन, बुद्धि आकलन, रक्त परिक्षण जैसे सिरम लिथियम और काबर्गमजेपीन, वालपोरेट, फेनाइटोइन और अन्य कोई समान औषधि का औषध स्तर पदार्थ और दुरुपयोग / टोकसीकोलोजी के लिए सीएसएफ़ अध्ययन जांच। स्त्री रोग विज्ञान प्रसवोत्तर रक्तस्राव हेतु यूटेराइन आर्टी एम्बोलाइजेशन विविध चिकित्सा अधीक्षक/डॉक्टरों की समिति द्वारा वित्तीय सहायता के लिए उपयुक्त समझी गई अन्य बड़ी बीमारियों/उपचार/नैदानिक कार्यकलाप हेतु अनुदान के लिए विचार किया जा सकता है। राष्ट्रीय आरोग्य निधि (आरएनएन) के अंतर्गत वित्तीय सहायता पाने के लिए आवेदन कैसे करें आरएएन के अंतर्गत वित्तीय सहायता के लिए अनुरोध पर कार्रवाई करने के लिए इस मंत्रालय को निम्नलिखित जानकारी/दस्तावेजों की मूल प्रतियां भेजी जानी अपेक्षित हैं। मेडिकल रिपोर्ट, जहां आपका इलाज चल रहा है उस सरकारी अस्पताल के उपचार करने वाले चिकित्सक/विभागाध्यक्ष द्वारा विधिवत हस्ताक्षर/मुहर लगाई गई हो और जिसे चिकित्सा अधीक्षक द्वारा प्रति हस्ताक्षरित किया गया हो, के साथ संलग्र प्रपत्र में एक आवेदन पत्र भेजा जाए और सभी कालम पूर्णत: भरे गए होने चाहिए। रोगी/माता-पिता/परिवार के अन्य प्रमुख उपार्जक सदस्य का मासिक आय प्रमाण पत्र, जो ब्लाक/मंडल विकास अधिकार/तहसीलदार/एसडीएम/प्रशासक/नगरपालिका बोर्ड का विशेष अधिकारी/जिला अधिकारी द्वारा प्रमाणित किया गया हो तथा जिसमें यह उल्लिखित हो कि लाभार्थी उनके अधिकारिता वाले क्षेत्र में गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी में आता है और आय स्रोत भी बताया जाए। पूरे राशन कार्ड की प्रति जिसके साथ उसका कवर-पृष्ठ, परिवार के सभी सदस्यों को शामिल किया गया विवरण हो और जो राज्य सरकार के खाद्य और आपूर्ति विभाग द्वारा जारी किया गया होना चाहिए तथा किसी राजपत्रित अधिकारी द्वारा, अपनी मुहर, जिसमें अधिकारी का पदनाम और जहां वह कार्यरत है उस विभाग का नाम अंकित होना चाहिए, विधिवत सत्यापित होना चाहिए। यह उल्लेख किया जाता है कि दिशानिर्देश के पैरा (iv) की सीमा के अंतर्गत आने वाले मामले के सिवाय, जिन मामलों पर उपचार/आपरेशन पर पहले ही खर्च किया जा चुका है, वे मामले राष्ट्रीय आरोग्य निधि के अंतर्गत प्रतिपूर्ति के लिए ग्राह्य नहीं हैं। निजी अस्पतालों में इलाज के मामलों पर विचार नहीं किया जाता है। आवेदन पत्र के सभी कालम समुचित रूप से भरे जाने चाहिए। उपर्युक्त जानकारी/कागजात के तत्काल मूल रूप में प्राप्त होने पर वित्तीय सहायता के अनुरोध पर तुरंत विचार किया जाएगा। दिनांक 1.7.2016 से आरएएन/एचएमसीपीएफ/एचएमसीपीएफ - सीएसआर के तहत सहायता के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों हेतु आरंभिक स्तर पर प्रतिमाह प्रति व्यक्ति औसत आय राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का नाम आरएएन/एचएमसीपीएफ/एमएमसीपीएफ-सीएसआर के तहत सहायता के लिए आरंभिक स्तर पर प्रति व्यक्ति औसत आय ग्रामीण शहरी आंध्र प्रदेश 1085 1249 अरुणाचल प्रदेश 1201 1369 असम 1017 1220 बिहार 987 1124 छत्तीसगढ़ 963 1025 दिल्ली 1379 1386 गोवा 1415 1358 गुजरात 1155 1377 हरियाणा 1233 1392 हिमाचल प्रदेश 1143 1253 जम्मू-कश्मीर 1102 1192 झारखण्ड 934 1172 कर्णाटक 1146 1384 केरल 1266 1232 मध्य प्रदेश 950 1095 महाराष्ट्र 1200 1341 मणिपुर 1280 1396 मेघालय 1185 1382 मिजोरम 1375 1383 नागालैंड 1664 1581 ओडिशा 884 1045 पुदुच्चेरी 1772 1655 पंजाब 1275 1393 राजस्थान 1137 1218 सिक्किम 1112 1525 तमिलनाडु 1091 11676 तेलंगाना 1051 1228 त्रिपुरा 1033 1203 उत्तर प्रदेश 942 1147 उत्तराखंड 1062 1257 पश्चिम बंगाल 960 1193 पूरे भारत में 1014 1217 स्त्रोत: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार