परिचय राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम एक केंद्र प्रयोजित कार्यक्रम है| कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के संचालन एवं क्रियान्वयन हेतु एन. एच. आर. एम. के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्राप्त होती है| कुष्ठ मरीजों के लिए बहु चिकित्सा प्रणाली की दवा विश्व स्वास्थय संगठन द्वारा भारत सरकार के माध्यम से मुफ्त प्राप्त होती है| कुष्ठ रोग एक अल्पसंख्यक रोग है जो माइक्रो बैक्टीरिया लैप्री नामक जीवाणु से होता है| 1980 के पूर्व कुष्ठ रोग का इलाज हेतु मात्र एक दवा ड्रॉप्सन था लेकिन वर्ष 1980 के दशक के बहु चिकित्सा प्रणाली के प्रारंभ होने से कुष्ठ रोग के निदान में क्रांति सा आ गई है| इस प्रणाली के अंतर्गत कुष्ठ रोगियों को छ: माह से एक साल तक चिकित्सा उपलब्ध करा देने पर कुष्ठ रोग पूर्णत: ठीक हो कर रोगमुक्त हो जाते हैं| शीघ्र रोगी की पहचान कर दवा खिला देने पर विकलांगत नहीं होती है| बिहार राज्य के बहुचिकित्सा प्रणाली वर्ष 1996-97 से लागू की गई| उस समय से अभी तक राज्य में करीब 1.36 लाख से ज्यादा में करीब 15.36 लाख से ज्यादा कुष्ठ रोगियों को रोगमुक्त किया जा चुका है| कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम का लक्ष्य कुष्ठ के रोगियों का प्रसार दर एक या एक से कम प्रति 10.000 जनसंख्या पर लाना है| माह जनवरी 2011 में बिहार राज्य का प्रसार दर 1.14 प्रति 10,000 जनसंख्या है| जबकि पिछले वर्ष 2010 में रोग प्रसार दर 1.21 प्रति 10,000 जनसंख्या थी| वैसे रोगी जो ससमय चिकित्सा नहीं लेते है उनमें विकलांगता का भय रहता है| विकलांग कुष्ठ रोगियों की विकलांगता को ठीक करने के लिए पुर्नशल्य चिकित्सा की व्यवस्था है जो दी लेप्रोसो मिशन अस्पताल मुजफ्फरपुर, पटना मेडिकल अस्पताल एवं दरभंगा कॉलेज अस्पताल में मुफ्त उपलब्ध है| रोगियों की पहचान, जाँच एवं निदान वर्ष 2000 के पूर्व कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम अलग से चलाया जा रहा था लेकिन वर्ष 2000 से कुष्ठ उन्मूलन अलग से चलाया जा रहा था लेकिन वर्ष 2000 में कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम का समेकीकरण सामान्य स्वास्थय सेवा संरचना में कर दिया गया है| वर्तमान में राज्य के सभी जिला अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों, रेफरल अस्पतालों, प्राथमिक/अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थय केन्द्रों एवं राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में कुष्ठ रोग की जाँच निदान एवं चिकित्सा की सुविधा प्रत्येक कार्य दिवस में उपलब्ध है तथा कुष्ठ से प्रभावित रोगियों को एम्.डी.टी. की दवा मुफ्त में बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध कराया जा रहा है| दवा की उपलब्धता राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों एवं जिला अस्पतालों से लेकर स्वास्थ्य उपकेंद्रों, सरकारी एवं गैर सरकारी स्वास्थय इकाईयों में पर्याप्त मात्रा में एम. डी. टी. दवा उपलब्ध है, जो कुष्ठ रोगियों को मुफ्त दी जाती है| वर्ष 2010-11 (जनवरी 11) तक कार्यक्रम की उपलब्धियाँ वर्ष 2011-11 (अप्रैल 10 से जनवरी 11) में कुल 16582 नये कुष्ठ रोगियों की जाँच कर चिकित्सा हेतु निबंधित किया गया तथा एम.डी.टी. चिकित्सा प्रारंभ किया गया है| वर्ष 2010-11 (अप्रैल 10 – जनवरी 11) में कुल 15957 रोगियों की चिकित्सा उपलब्ध करवाकर रोग मुक्त रोग गया| वर्ष 2010-11 (जनवरी 11 में) मात्र 11846 कुष्ठ रोगी निबंधित/ चिन्हित हैं जिन्हें एम. डी. टी. चिकित्सा प्रदान कराई जा रही है| वर्ष 2010-11 (जनवरी 2011 में) कुष्ठ रोग प्रसार दर 1.14 प्रति दस हजार है जो पिछले वर्ष की तुलना में कम है (गत वर्ष 2010 में रोग प्रसार दर 1.21 प्रति दस हजार था)| वर्ष 2010-11 (जनवरी 2011 तक) 53 कुष्ठ प्रभावित रोगमुक्त रोगियों की पुर्नशल्य चिकित्सा उपलब्ध की गई तथा शारीरिक एवं सामाजिक रूप से सक्षम बनाया गया| आशा कार्यकर्त्ताओं का कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम में सहभागिता राज्य के 19 जिलों में आशा कार्यकर्त्ताओं का कुष्ठ रोगियों की पहचान तथा प्रेषण हेतु उन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया गया तथा कूल 38295 आशा कार्यकर्त्ता को प्रशिक्षित किया गया| आशा कार्यकर्त्ताओं को संदिग्ध कुष्ठ प्रभावित व्यक्तियों को जाँच एवं प्रेषण हेतु सहयोग लिया जा रहा है जिसके अंतर्गत रोगी सम्पुष्ट होने पर निम्न मानदेय राशि के भुगतान का प्रावधान है – पी.बी. रोगी – 300/- रू. (100/- रू. रोग की पुष्टि होने पर तथा 200/- रू. चिकित्सा पूर्ण होने पर) एम. बी. रोगी – 500/- रू. (100/- रू. रोग की पुष्टि होने पर तथा 400/- रू. चिकित्सा पूर्ण होने पर) कुष्ठ रोग प्रभावित विकलांग व्यक्तियों के लिए सहायता एम.डी.टी. चिकित्सा से रोग प्रसार दर लगातार घट रही है| बिलंब से कुष्ठ रोगीयों के स्वास्थय केंद्र पर आकर चिकित्सा प्रारंभ कराने पर विकलांगता होने की संभावना होती है| कुष्ठ रोग के संबंध मेंजन समूदाय में प्रचार-प्रसार के माध्यम से जागरूकता पैदा की जा रही है तथा सभी रोगियों की शीघ्र चिकित्सा हेतु प्रेरित किया जा रहा है| यदि किसी रोगी में विकलांगता आ जाती है तो उन्हें शल्य चिकित्सकीय उपचार का परामर्श दिया जाता है तथा रोगमुक्त कुष्ठ रोगियों को पुर्नशल्य चिकित्सा द्वारा विकलांगता से मुक्त किया जाता है| कुष्ठ रोगियों के पैर के बचाव के लिए माईक्रोसेल्यूलर रबड़ चप्पले मुफ्त उपलब्ध कराई जाती है| बी.पी.एल परिवार के लोगों में विकलांगता आने पर उनकी पुर्नशल्य चिकित्सा के दौरान अस्पताल में रहने पर मजदूरी की हानि होने के एवज में 5000/- की सहायता राशिक प्रदान की जा रही है| कुष्ठ कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की देखभाल की व्यवस्था राज्य के 11 जिलों में 28 कुष्ठ कॉलोनियों में रहने वाले कुष्ठ रोगियों एवं उनके आश्रितों के देखभाल के लिए जिला में उपलब्ध किसी कर्मी को उत्तरदायी बनाया गया है जो हमेशा इन कॉलोनियों में रहनेवाले रोगियों एवं आश्रितों की जाँच एवं चिकित्सा की व्यवस्था देखेंगे| इन कॉलोनियों के सदस्यों से सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाई गई है| इन कॉलोनी में रहने वाले कुष्ठ रोग से मुक्त व्यक्तियों को वृद्धा पेंशन एवं बी.पी.एल को इंदिरा आवास उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है| स्वास्थय शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का क्रियान्वयन सभी सामान्य स्वास्थ्य सेवा संरचना से संबंधित इकाईयों के पदाधिकारियों एवं कर्मियों को लगातर कुष्ठ रोग की जाँच निदान एवं चिकित्सा की दक्षता बनाये रखने के लिए उन्मुखी कार्यक्रम चलाया जा रहा है तथा सभी स्वास्थय कर्मियों के द्वारा लोगों के स्वास्थय शिक्षण कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता, अंधविश्वास मिथ्या भ्रांतियां के निदान हेतु अभियान चलाया जा रहा है ताकि कुष्ठ रोग की शंका होने पर स्वास्थय संस्थानों/अस्पतालों में जाकर जाँच कराकर शंका मिटा सके तथा कुष्ठ रोग से ग्रसित होने पर स्वत: तत्पर होकर एम.डी.डी. दवा का कोर्स पूरा करें| महादलित बस्तियां में सर्वेक्षण सभी जिलों के प्रखंडो में चिन्हित महादलित बस्तियों में कुष्ठ से प्रभावित व्यक्तियों की जाँच हेतु कर्मियों को प्राधिकृत कर दिया गया है तो नियमित भ्रमण कार्यक्रम का संचार कर रहे हैं| स्रोत : स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार