विकासशील देश एशिया, अफ्रीक और मध्य अमेरिका में अरबी का प्रमुख उपयोग भोजन के रूप में लाखों लोगों द्वारा किया जाता है। अरबी के पौधे (कोलोकैसिया एस्कुलेंटा) की पत्तियां दिल के आकार की होती हैं। इसको आमतौर पर उपोष्णकटिबंधीय और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाया जाता है। ये हरी पत्तियां, आकार में बड़ी होती हैं और अक्सर इन्हें हाथी के कान के रूप में वर्णित किया जाता है। यह एक जड़ी-बूटी वाला पौधा है, जो 1-2 मीटर की ऊंचाई तक बढ़ता है। पत्ते और कंद खाने योग्य हिस्सा हैं, जिन्हें आसानी से पचाया जा सकता है। इसके कंद स्टार्च के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। ताजे अरबी के पत्तों (हरी किस्म) में नमी 82.7 ग्राम, प्रोटीन 3.9 ग्राम, वसा 1.5 ग्राम, खनिज 2.2 ग्राम, क्रूड फाइबर 2.9 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट 6.8 ग्राम, ऊर्जा 56 किलो कैलोरी, कैल्शियम 227 मि.ग्रा., फॉस्फोरस 82 मि.ग्रा., आयरन 10 मि.ग्रा., विटामिन 'सी' 12 मि.ग्रा., तांबा 0.18 मि.ग्रा. की उपलब्धता होती है। अरबी, अलग-अलग शाब्दिक नाम अंग्रेजी में टैरो, हिंदी में अरबी, संस्कृत में अलुपम, गुजराती में अलवी, मराठी में अलु और तमिल में सेमपु के रूप में प्रचलित है। प्राचीन समय से इसे गुणकारी जड़ी-बूटी के रूप में जाना जाता है। इसका उपयोग विभिन्न रोगों जैसे-अस्थमा, गठिया, दस्त, तंत्रिका संबंधी विकार व त्वचा विकारों के उपचार में किया जाता है। अरबी की पत्तियों और कंद का कच्चा सेवन स्वास्थ्य के लिए जहरीले पाए गए हैं। इसमें तीखा कैल्शियम आॅक्सालेट मौजूद होता है, जिसे पहले गर्म करने की विधि द्वारा नष्ट किया जा सकता है। पत्ती के डंठल और परिपक्व पत्तियों को सब्जी के रूप में भी खाया जाता है। अरबी का पोषण महत्व अरबी के कंद में प्रोटीन (1.5 प्रतिशत) और वसा (0.2 प्रतिशत) अपेक्षाकृत कम होते हैं और यह कई अन्य कंदीय फसलों के समान है। यह स्टार्च (70 से 80 ग्राम/100 ग्राम सूखी अरबी), फाइबर (0.8 प्रतिशत) और राख (1.2 प्रतिशत) का एक अच्छा स्रोत है। अरबी में थायमीन, राइबोफ्रलेविन, लोहा, फॉस्फोरस और जस्ता भी मिलता है। यह विटामिन बी6 , सी, नियासिन, पोटेशियम, तांबा और मैंगनीज का भी उत्तम स्त्रोत है। उदाहरण के लिए, एशिया/प्रशांत क्षेत्रों में, पत्तियों को आमतौर पर अन्य सुगंधित जड़ी-बूटियों के साथ मिश्रित तरीके से तैयार किया जाता है। इसे नगदी पफसल के रूप में विदेशी मुद्रा अर्जित करने और एक आय माध्यम के रूप में भी ग्रामीण विकास के लिए उपयोग किया जा सकता है। पोषण गुणवत्ता और रासायनिक संरचना अरबी सुपाच्य कार्बाेहाइड्रेट और सूक्ष्म पोषक तत्वों व खनिजों का एक अच्छा स्रोत माना जाता है। विशेष रूप से पोटेशियम और विटामिन (बी-कॉम्प्लेक्स)। इसकी पत्तियां प्रोटीन (23 प्रतिशत) से भरपूर होती हैं। सूखे वजन के आधार पर अरबी में लगभग 11 प्रतिशत प्रोटीन होता है। आवश्यक अमीनो अम्ल मेथीयोनीन, लाइसिन, सिस्टीन, फेनिलएलनिन और ल्यूसीन कंद की तुलना में पत्ती में अपेक्षाकृत प्रचुर मात्रा में होते हैं। पोषक तत्वों में, जड़ों और कंद में कार्बोहाइड्रेट के रूप में, आहार ऊर्जा के किफायती स्रोत प्रदान करने की एक बड़ी क्षमता है। उच्च कार्बोहाइड्रेट (87 प्रतिशत) के साथ पूरक हो सकती है। यह मानव भोजन के स्रोत के रूप में पौधे के कंद भाग में पाई जाती है। कंद में उच्च नमी की मात्रा के कारण इसमें ऊर्जा लगभग एक-तिहाई चावल या गेहूं के बराबर होती है। अरबी कंद अपनी उच्च नमी के परिणामस्वरूप तेजी से खराब होता है, लेकिन इसे एक छायादार क्षेत्रा में संग्रहित किया गया हो तो एक महीने का शेल्पफ जीवन हो सकता है। फेनोलिक एसिड अरबी के कंद स्टार्च से भरपूर होते हैं और इनमें एंथोसायनिन एवं सायनाइडिन 3-ग्लूकोसाइड होते हैं। इसे लेवोनोइड के साथ आमतौर पर, संबंधित एंथोसायनिन को दृष्टि में सुधार करने के लिए कोशिका की नाजुकता को कम करके रक्त परिसंचरण में सुधार करने, शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करने और मानव कैंसर कोशिका विकास को बाधित करने के लिए प्रयोग जाना जाता है। मूल्यवर्धित उत्पादों का विकास भोजन के पूरक के रूप में अरबी को उबला, बेक किया, भुना या तला हुआ सेवन किया जा सकता है। इसका आटा, पेस्टरी भरने, सॉसेज में बाइंडर और फूड सिस्टम में पायसीकारी के रूप में काम में आता है। संग्रह राजस्थान के अजमेर जिले में तोड़े गए ताजे हरे पत्ते व सब्जी विक्रेता से खरीदी हुए अरबी संग्रहित कर विभिन्न प्रकार के मूल्यवर्धित स्वादिष्ट खाद्य उत्पाद जैसे-अरबी चिप्स, स्टीम अरबी रोल्स, प्रफाइड चिप्स या रेडी-टू-ईट इंस्टेंट प्रफाइड अरबी तैयार किए जा रहे हैं। कुपोषण दूर करने में मददगार अधिकांश ग्रामीण लोग गंभीर रूप से कुपोषित होते हैं, आर्थिक स्थिति के कारण नहीं, बल्कि उपलब्ध पोषक तत्वों के उपयोग में असमथ र्ता के कारण भी। आजकल, जस्ता की कमी व्यापक है और दुनियाभर की आबादी के स्वास्थ्य और कल्याण को प्रभावित करती है। अरबी में जस्ता, पोषण के रूप में अच्छी मात्राा में पाया जाता है। यह कुछ गैर-पशु स्रोतों में से एक है, इसलिए स्वास्थ्य लाभ में जस्ता की कमी को दूर करने के लिए इसका सेवन किया जाना चाहिए, जो कि स्टंटिंग से संबंध रखता है। अनाज से एलर्जी वाले व्यक्तियों के लिए अरबी से बने खाद्य पदार्थ उपयोगी होते हैं। दूध के प्रति संवेदनशील शिशुओं द्वारा इसका सेवन लाभदायक है। यह फसल स्वास्थ्य एवं खाद्य असुरक्षा, गरीबी तथा बेरोजगारी की सामाजिक-आथि र्क समस्या का समाधान कर सकती है। अरबी प्रसंस्करण अरबी पकाने के पारंपरिक तरीकों में पत्थरों पर भूनना या ग्राउंड ओवन में सेंकना आदि। आधुनिक तरीके में ओवन में उबालना और भाप में पकाना है। अरबी को छिलके सहित पकाया जाता है, तो इसका पोषण मूल्य बरकरार रहता है। मुंह और गले की खुजली को रोकने के लिए इसे अच्छी तरह से पकाया जाना चाहिए। विभिन्न तरीके जैसे-उबालना, ब्लैंचिंग, स्टीमिंग, स्टूइंग, प्रफाइंग और प्रेशर कुकिंग, पाचन क्षमता में सुधार, पोषक तत्वों की जैव उपलब्धता को बढ़ाने और पोषण संबंधी कारकों तथा खाद्यजनित रोगों को कम करने में प्रभावी हैं। स्त्राेत : खेती पत्रिका(आईसीएआर), अर्चना करेल, प्राेजेक्ट फेलाे, क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, अजमेर, राजस्थान।