परिचय किसी मकसद को अंजाम देने के लिए किसी का मुंह ताकने से बेहतर है खुद हिम्मत कर आगे बढ़ना। कुछ ऐसी ही मिसाल पेश की है बिहार के रोहतास जिले के विक्रमगंज अनुमंडल के संझौली प्रखंड ने। संझोली प्रखंड 55 दिनों मे खुले में शौच से मुक्त ( ओपन डिफ्रीकेश्न फ्री) होने वाला बिहार का पहला प्रखंड बन गया है। अब तक बिहार में संझोली व पश्चिमी चंपारण का पिपरासी प्रखंड पूरी तरह से शौच मुक्त हो चुके हैं। सबके लिए इस सम्मान घर (यहां शौचालय का नया नाम) खुला हुआ था। यानी जिले का सबसे गंदा गांव आज स्वच्छता का मानक गांव बन चुका था। यानी वर्षों से चली आ रही खुले में शौच की परंपरा से यह गांव अब मुक्त है। जानें कैसे मिली यह उपलब्धि छह पंचायत और 64 गांवों वाले संझौली ब्लॉक ने जन-भागीदारी, प्रशासन और यूनिसेफ के सहयोग से बहुत ही कम समय में स्वच्छता की ओर कदम बढ़ाया है। 55 दिनों मे इस प्रखंड ने सात हजार शौचालय बनाए गए हैं। बिहार में शौचालय बनाने के लिए ग्राम विकास विभाग को नोडल विभाग बनाए जाने के बाद यह खुले में शौच मुक्त होने वाला पहला प्रखंड है। यह वही प्रखंड है जो कि बाराखाना की मिड-डे मिल की रसोइया फूल कुमारी द्वारा अपने शादी का मंगलसूत्र गिरवी रखकर शौचालय बनाने के लिए बिहार में काफी चर्चित रहा था। स्वच्छता मिशन की शुरुआत और उसकी उपलब्धियां एक नजर में स्वच्छता अभियान व उसकी उपलिब्धयों को प्रधानमंत्री श्री नरेंद मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छता मिशन की शुरूआत की थी। बिहार में खुले में शौच से मुक्त कराना बिहार की प्राथमिकता में भी शामिल किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन में केंद्र सरकार 60 फीसदी राशी उपलब्ध करा रही है जब कि राज्य सरकार की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है। बिहार राज्य में बडे पैमाने पर शौचालय निर्माण के लिए ग्राम विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। जनगणना 2011 के अनुसार बिहार में कुल 75.8 लाख घरों में शौचालय नहीं है। साल 2001 की जनगणना के आंकड़ों की तुलना में ऐसे घरों की संख्या मे 3.9 प्रतिशत की कमी आयी है, जिनमें शौचालय नहीं था। शैचालय की उपलब्धता के बारे में 35 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 32 वें स्थान पर है। बिहार को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए 1.5 करोड शौचालयों का निर्माण कराया जाना है। मिशन प्रतिष्ठा -समुदाय और प्रशासन के सहयोग से हासिल किया मुकाम रोहतास के जिलाधिकारी का कहना है कि खुले में शौच से मुक्ति के संकल्प 2 जून 2016 यहां मिशन ‘प्रतिष्ठा’ की शुरूआत की थी। इस प्रतिष्ठा मिशान का उद्देश्य शौचालय को बहू-बेटी के मान- सम्मान से जोड़कर लोगों को इसका महत्व समझाना था। संझोली के एडीएम राजीव कुमार बताते हैं कि इससे पहले के कैम्पों के दौरान सारा ध्यान शौचालय बनाने पर होता था। उनके वास्तविक इस्तेमाल की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता था। पुरानी कमियों से सीख लेते हुए इस बार प्रशासन का पूरा फोकस लोगों के व्यवहार में बदलाव लाकर लागों में शौचालय प्रयोग की आदत विकिसत करने में लगाया गया । उदयपुर पंचायत के उप मुखिया वशिष्ट पासवान का कहना था कि यूनिसेफ, प्रशासन के अधिकारी लोग आते रहते थे (फीडबैक फाउडेशन को यूनिसेफ ने इस जिले में अपना सहयोग प्रदान करने के लिए नियुक्त किया ) और इतना ही नहीं और पूरे गांव का चित्र बनवाते थे और फिर अपने तरीके से समझाते थे। इन्होंने लोगों को समझाया कि घर से बाहर शौच के लिए जाना हमारे लिए और हमारे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए कितना हानिकारक है। प्रशासन का सहयोग रहा सफल संझौली की उदयपुर पंचायत की निगरानी के लिए समिति के सदस्य सुबह चार बजे से प्रशासन के अधिकारीगण व गांव के प्रेरक सुबह-सुबह खुले में शौच जाने वाले लागों पर नजर रखा करते थे और उन्हें खुले में शौच जाने से रोक कर शौचालय का उपयोग करने को प्रेरित करते थे। शुभ -शुभारंभ और सम्मान घर जैसे प्रयासों से मिली मनचाही सफलता । संझौली के प्रशासिनक अधिकारी का कहना था कि लागों को जागरूक करने के बाद यह तय किया गया कि एक नियमित समय पर शौचालय निर्माण का कार्य शुरू कराया गया। ऐसे में यह भी तय किया गया कि हर महीने की 11 तारीख को गांव में 11 गडढों की खुदाई करके शौचालय का निर्माण कार्य शुरू करवाया गया। समुदाय के बीच से शौचालय की मांग को बढ़ाने के लिए प्रशासन की ओर से एक नया नाम दिया ‘सम्मान घर’। जिले के कई लोगों की रही भूमिका गंदगी के खिलाफ इस जंग की कहानी फूल कुमारी, सराज कुमारी, अवशेष और विभेद पासवान जैसे जिले के लोगों के बिनाअधूरी है। इसी जिले के फूल कुमारी ने जहां शौचालय बनवाने के लिए अपने मंगलसूत्र को गिरवी रखा और नयी मिसाल पेश की थी । बाद में उन्हें रोतास के जिलाधिकारी ने उसी स्वच्छता अभियान का ब्रांड एम्बेसडर बनाया। उदयपुर पंचायत की सरोज कुमारी ने बाहर शौच करने के दौरान सांप कांटने से अपने पति की मुत्यु के बाद शौचालय निर्माण के लिए लागों को प्रेरित करने को अपना जीवन का ध्येय बना लिया । वो कहानी बता कर लोगों से शौचालय बनवाने का आग्रह करती और उन्हें समझाती की अगर वो अपनी पति और बच्चों की सलामती चाहती हैं तो अपने घरों में शौचालय बनवाएं । इन नायकों के अतिरिक्त विभेद पासवान जैसे लोक गायक इस मुहिम को जब आंदोलन का रूप देने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। वहीं पासवान ने शौचालय निर्माण के तहत गीत लिख कर और उसे लोगों के बीच गाते रहे हैं और गीत व संगीत के माध्यम से प्रेरित करते रहे हैं। लेखक: सुधांशु कुमार कार्यक्रम अधिशासी, आकाशावाणी पटना