कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की जरुरतों और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य देने के प्रयास जारी हैं औरसीएसआईआर और इसकी 30 से अधिक प्रयोगशालाओं, आईआईटी जैसे संस्थानों और निजी क्षेत्र और सामाजिक संगठनों के अनेक संस्थानों सहित पूरा वैज्ञानिक समुदाय विभिन्न समाधानों के साथ सामने आया है, जिनमें से प्रत्येक ने महामारी के खिलाफ हमारी लड़ाई में कुछ न कुछ योगदान दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, कोरोना वायरस से संक्रमित होने वालों में लगभग 80 प्रतिशत केवल मामूली रूप से बीमार होते हैं, लगभग 15 प्रतिशत को ऑक्सीजन की आवश्यकता होती और शेष 5 प्रतिशत जिनकी हालत गंभीर या नाजुक होगी, उन्हें वेंटिलेटर की आवश्यकता होगी। इस प्रकार वेंटिलेटर संक्रमित रोगियों के इलाज के लिए आवश्यक चिकित्सा अवसंरचना का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो गंभीर रूप से बीमार पड़ने वालों को श्वास लेने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करते हैं। आईआईटी बॉम्बे एनआईटी श्रीनगर और इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईयूएसटी), अवंतीपोरा, पुलवामा, जम्मू और कश्मीर के इंजीनियरिंग छात्रों की एक टीम रचनात्मक व्यक्तियों का एक ऐसा समूह है जो वेंटिलेटर की आवश्यकता संबंधी समस्या को हल करने के लिए सामने आया। इस टीम ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों का उपयोग करते हुए कम लागत वाला वेंटिलेटर बनाया। संयुक्त टीम ने इसको रूहदार वेंटिलेटर नाम दिया गया है। टीम के द्वारा सूचित किया गया है कि इस प्रोटोटाइप की लागत लगभग 10,000 रुपये रही और बड़े पैमाने पर उत्पादन होने से इसकी लागत बहुत कम होगी। जैसा कि हम जानते हैं जहां एक ओर अस्पतालों में उपयोग किए जाने वाले कीमती वेंटिलेटरों का दाम लाखों रुपये होता है, वहीं रूहदार आवश्यक कार्यात्मकता प्रदान करते हैं जो गंभीर रूप से बीमार कोविड-19 रोगी के जीवन को बचाने के लिए आवश्यक पर्याप्त श्वसन सहायता प्रदान कर सकते हैं। प्रोटोटाइप का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा और स्वीकृति मिलते ही इसका बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाएगा। इसे लघु उद्योग द्वारा निर्माण किए जाने के लिए उत्तरदायी बनाए जाने का प्रयास है। स्त्रोत: पत्र सूचना कार्यालय,भारत सरकार।