परिचय भले ही भारत में गर्भपात सन 1971 से कानूनन वैध है, लेकिन सुरक्षित और कानूनी रूप से मान्य गर्भपात की सुविधाएँ अब भी उपलब्ध नहीं हैं। आज भी बिहार की गरीब ग्रामीण महिलाओं में असुरक्षित गर्भपात के कारण बीमारी व मृत्यु होना एक बड़ी समस्या है। बिहार का मातृ मृत्यु दर 312 है, जो कि राष्ट्रीय दर 254 से कहीं ज्यादा है। बिहार में हर साल लगभग 5.8 लाख गर्भपात किए जाते हैं जिनमें से अधिकांश गर्भपात सरकारी मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य केन्द्रों से बाहर, अप्रशिक्षित प्रदाताओं द्वारा, अस्वास्थ्यकर परस्थितियों में किए जाते हैं। असुरक्षित गर्भपात की संख्या में कमी आने से राज्य के मातृ मृत्यु दर में भी कमी आ सकेगी। निम्न दो अवरोधों को दूर करने से असुरक्षित गर्भपात को रोकने में काफी मदद मिल सकती है: सही कीमत पर गुणवत्तापूर्ण व सुरक्षित गर्भपात सुविधाओं की कमी महिलाओं व समाज में गर्भपात के कानूनी होने व समय रहते गर्भपात के निर्णय लेने संबंधी जानकारी की कमी राज्य होने वाले गर्भपात में से काफी संख्या में निजी स्वास्थ्य केन्द्रों द्वारा किए जाते हैं। बहरहाल, यह क्षेत्र ज्यादातर विभक्त है और निर्धारित नियमों के अनुसार कम नहीं करता हैं: ग्रामीण क्षेत्रों में कानूनी/सुरक्षित/प्रशिक्षित सेवा प्रदाताओं की कमी सेवाओं के अधिक मूल्य प्रदाताओं द्वारा एमटीपी अधिनियम 1971 का पालन न करना गलत और अनुपयूक्त इलाज बिहार सरकार, प्रशिक्षित एवं उपयुक्त निजी स्वास्थ्य केन्द्रों को, यदि उनकी रुचि हो तो, व्यापक गर्भपात सेवाएँ प्रदान करने के लिए अधिकृत करना चाहती है। इसके अंतर्गत प्रथम तिमाही तक की गर्भपात सेवाएँ, गर्भपात की जटिलताओं का इलाज, स्वत: (अपने आप) होने वाले गर्भपात का इलाज तथा दूसरी तिमाही के गर्भपात केसों व उनकी जटिलताओं संबंधी इलाज के लिए हालत को स्थिर करके रेफर करना तथा सरकार से निर्धारित सेवा दर के अनुसार राशि/शुल्क प्राप्त करना आता है। बिहार सरकार ने निजी स्वास्थ्य प्रदाताओं से पारदर्शी रूप में उनकी सेवाएँ खरीदकर इन सेवाओं के इच्छुक लोगों तक ये सेवाएँ पहूँचाने के लिए अधिकृत योजना बनाई है। एमटीपी प्रामाणित निजी अलाभकारी गैर सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों तथा वे परिवार कल्याण सेवा केंद्र, जो कि एमटीपी प्रमाणित हैं, वे युक्ति योजना के अंतर्गत अधिकृति के लिए योग्य है। इन केन्द्रों पर मुफ्त में प्रथम तिमाही तक के गर्भपात, सेवाएँ, व गर्भपात के बाद की जटिलताओं संबंधी इलाज के लिए रेफरेल सुविधा प्रदान करेगा। महिलाओं में समय रहते गर्भपात संबंधी निर्णय लेने तथा यदि आवश्यकता है तो फिर तिमाही में ही गर्भपात कराने पर जोर देने के लिए इन अधिकृत केन्द्रों को केवल प्रथम तिमाही तक के गर्भpatपात के लिए ही अधिकृत किया जाएगा। बिहार सरकार इन अधिकृत स्वास्थ्य केन्द्रों द्वारा अपेक्षित दस्तावेज व केस का विवरण जमा करने पर हर केस के आधार पर शुल्क प्रदान करेगी। इस शुल्क की दर में दवाईयों का मूल्य, अन्य वस्तुएं का मूल्य, अन्य लागत व सेवा प्रदाता का शुल्क शामिल होगा। जहाँ भी संभव होगा, निजी स्वास्थ्य केंद्र, महिला के साथ आने वाली सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता (आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता) को आवागमन का खर्चा भी देंगे। वह सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जहाँ गर्भपात के लिए प्रशिक्षित डॉक्टर उपलब्ध हैं, सुरक्षित गर्भपात सेवाएँ प्रदान करते रहेंगे। सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों में उपलब्ध मुफ्त गर्भपात सेवाओं की जानकारी समुदाय में बढ़ाने के लिए सभी केन्द्रों पर साईनेज व अन्य आइइसी सामग्री प्रदर्शित की जाएगी। इन सभी केन्द्रों में युक्ति योजना के अंतर्गत समुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा/एएनएम/आंगनबाड़ी कार्यकर्ता/ स्वास्थ्य कार्यकर्ता) को आवागमन सब्सिडी मिलेगी परंतु इन सेवाओं के एवज में सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों को सरकार द्वारा कोई अन्य राशि नहीं दी जाएगी। सुरक्षित गर्भपात सेवाओं के लिए अधिकृति योजना: युक्ति योजना वर्तमान परिप्रेक्ष्य में, अधिकृति का अर्थ है वह प्रक्रिया जिसके अंतर्गत इस अधिकृति योजना में सम्मिलित होने के इच्छुक निजी स्वास्थ्य केन्द्रों का निर्धारित मानकों पर आकलन किया जाएगा तथा उपयुक्त स्वास्थ्य केन्द्रों को निम्नलिखित सेवाएँ प्रदान करने के लिए मान्यता दी जाएगी और अधिकृति दिशा निर्देश के अनुसार शुल्क प्रदान किया जाएगा। इस योजना को युक्ति योजना का नाम दिया गया है इसमें निम्न सेवाओं के प्रावधान हैं: प्रथम तिमाही तक की गर्भपात सेवाएँ अपूर्ण गर्भपात के केसों का इलाज करना गर्भपात की जटिलताओं का इलाज व आवश्यकता पड़ने पर रेफरल प्रदान (महिला की हालत को स्थिर करने के बाद) दूसरी तिमाही के गर्भपात के लिए रेफर करना वे महिलाओं जो उपर्युक्त सेवाएँ चाहती हैं, उन्हें अधिकृत निजी स्वास्थ्य केंद्र द्वारा गर्भपात के विषय में परामर्श व गर्भपात के पश्चात उचित गर्भ निरोध के साधनों के बारे में सलाह दी जाएगी। युक्ति योजना बिहार सरकार की निजी स्वास्थ्य केन्द्रों को अधिकृत करने की योजना है, जिसमें सुरक्षित गर्भपात की सेवाओं की उपलब्धि बढ़ाना व गर्भपात की जटिलताओं का इलाज करना शामिल हैं। इस योजना के अंतर्गत अधिकृति निजी सेवा प्रदाता, बिहार की अन्य प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं का हिस्सा भी बन सकते हैं। युक्ति योजना के प्रमुख घटक निम्न प्रमुख घटक हैं जिनमें अनुसार युक्ति योजना लागू की जाएगी: जिला अधिकृति कमेटी (डीएसी) का गठन करना जिला अधिकृति कमेटी में निम्न सदस्य शामिल होंगे. : जिला मजिस्ट्रेट इसके अध्यक्ष होंगे। जिला स्तरीय समिति (एमटीपी कानून के प्रावधान के अंतर्गत गठित) के सदस्य जिले का परिवार कल्याण नोडल अधिकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी डीएसी में न्यूनतम छ: व अधिकतम आठ सदस्य होंगे। इसके प्रमुख होंगे जिला मजिस्ट्रेट। मुख्य चिकित्सा अधिकारी/जिले के सिविल सर्जन, इसके कार्यकारी सदस्य सचिव रहेंगे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी/सिविल सर्जन, जिला परिवार कल्याण नोडल अधिकारी, डीएलसी का एक सदस्य (प्रमुख रूप से स्त्री रोग विशेषज्ञ) और डीपीएस मिलकर डीएसी की संरचना करेंगे। प्रत्येक डीएसी बैठक में कोर समूह के सदस्यों का होना आवश्यक है। क) डीएसी की भूमिका पर उत्तरदायित्व यह सुनिश्चित करना कि अधिकृति योजना का जिले में सही प्रचार किया जा रहा है व उपयुक्त निजी स्वास्थ्य केन्द्रों व सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं तक इसकी सूचना पहुँच रही हैं। अधिकृति होने की पूरी प्रक्रिया के लिए उत्तरदायी रहना, इनमें शामिल है आवेदन प्राप्त करना, केंद्र का मूल्यांकन, प्रमाणीकरण, संचालन, प्रगति का आकलन, संबंधित शिकायत निदान करना, दी गई सेवाओं के लिए निर्धारित राशि दिलवाना और बिहार के राज्य स्वास्थ्य समिति को रिपोर्ट करना। जिला स्वास्थ्य संघ व निजी स्वास्थ्य केंद्र के बीच मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग करना। यदि निजी स्वास्थ्य केंद्र द्वारा सेवाएँ सही तरीके से नहीं दी जा रही है अथवा अनैतिक कार्यों की शिकायतें आती हैं, तब उस केंद्र की अधिकृति को रद्द करना। पहले ये तय दरों पर निजी स्वास्थ्य केन्द्रों को उनके द्वारा दी जाने वाली सेवाओं के लिए निर्धारित समयावधि पर शुल्क प्रदान करना । पहले से तय दरों में निजी स्वास्थ्य केन्द्रों को उनके द्वारा दी जाने वाली सेवाओं के लिए निर्धारित समयावधि पर शुल्क प्रदना करना। त्रैमासिक बैठक के दौरान अधिकृति योजना की प्रगति का संचालन करना व समीक्षा करना। अधिकृति निजी स्वास्थ्य केंद्र का समय समय पर जाँच करने हेतु दौरा करना। ख) सदस्य सचिव के उत्तरदायित्व सदस्य सचिव बैठकों के दौरान डीएसी के रेकार्ड की देख रेख का जिम्मेदार होता है और वह फाइल्स रखने, नोट्स आदि बनाने के लिए उत्तरदायी रहेगा। सदस्य सचिव की ये भी जिम्मेदारी रहेगी कि वह डी एच एस व निजी स्वास्थ्य केंद्र के मध्य मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग को कार्यान्वित करें। अन्य सदस्यों द्वारा, इस प्रक्रिया को समय पर पूरा करने के लिए सहयोग दिया जा सकेगा। सदस्य सचिव द्वारा युक्ति योजना के अंतर्गत हर महीना भौतिक व वित्तीय रिपोर्ट एक्जीक्यूटिव (परिशिष्ठ 1) डायरेक्टर एसएचएसबी को भेजी जाएगी। सदस्य सचिव द्वारा परिशिष्ठ 2 में वर्णित प्रारूप में, एसएचएसबी को युक्ति योजना के अंतर्गत शामिल सभी अधिकृत केन्द्रों की सूची सौंपी जाएगी। इस सूची को समय समय पर अध्ययन किया जाएगा व पहले दो वर्षो तक त्रैमासिक रूप से व उसके बाद छमाही रूप में भेजी जाएगी। ग) अध्यक्ष के उत्तरदायित्व किसी भी केंद्र को अधिकृत करने या न करने का अंतिम निर्णायक अध्यक्ष होगा। निजी स्वास्थ्य केंद्र या डीएचस द्वारा किसी केंद्र की अधिकृति रद्द करने की अर्जी का अंतिम निर्णायक, अध्यक्ष होगा। अध्यक्ष प्रथम व्यक्ति होगा जिसे निजी स्वास्थ्य केंद्र शिकायतों के लिए संपर्क करेंग। डीएसी सदस्यों का उन्मुखीकरण सभी जिला मजिस्ट्रेट, मुख्य चिकित्सा अधिकारी/ सिविल सर्जन के लिए युक्ति योजना के बारे में उ नकी डिविजन स्तरीय बैठकों के दौरान का उन्मुखीकरण होगा तथा डीपीएम तथा परिवार कल्याण नोडल अधिकारीयों का लिए 1 दिन का उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें उनकी भूमिका व उत्तरदायित्व, रिकॉर्ड, रिपोर्टिंग व सत्यापन, शुल्क निर्धारण आदि शामिल होगा। प्रत्येक प्रतिभागी को एक सूचना किट दी जाएगी जिसमें सभी आवश्यक जानकारी व संदर्भित व सारे प्रारूप भी शामिल होंगे। इसके बाद वे डीएसी सदस्यों को उनके जिलें में प्रशिक्षण देंगे, जो कि युक्ति योजना की प्रक्रिया व डीएसी की भूमिका से संबंधित होगा। योजना का प्रसार एसएचएसबी तथा डीएसी, उपयुक्त निजी स्वास्थ्य केन्द्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं तथा समुदाय जिले के समस्त निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, के सदस्यों तथा अन्य स्त्री रोग विशेषज्ञों का जिला स्तरीय उन्मुखीकरण आयोजित किया जा सकता है। इस कार्यक्रम में जिले एमओआईसी, आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम अधिकारी व बाल विकास परियोजना अधिकारी को भी आमंत्रित किया जाएगा एवं योजना की जानकारी दी जाएगी। ये अधिकारी आगे चलकर सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सुरक्षित गर्भपात सेवाएँ व इस योजना के विषय में जानकारी देंगे। इस योजना के संबंध में जानकारी को सम्पूर्ण मीडिया में प्रसारित किया जाएगा जैसे अखबार, रेडियो, पोस्टर, एफओजीएसआई, आइएमए की बैठकों में घोषणा आदि। मुख्य चिकित्सा अधिकारी/सिविल सर्जन अथवा डीएचएस एवं एसएचएसवी के कार्यालय में इस योजना के विषय में सही जानकारी जैसे कि: योजना में शामिल सेवाएँ, अधिकृति लेने के लिए न्यूनतम योग्यता आदि प्राप्त की जा सकती है। इस योजना के विषय जानकारी एवं आवेदन पत्र राज्य डीएसी को निजी स्वास्थ्य समिति (एसएचएसबी), बिहार की वेबसाइट पर भी उपलब्ध होंगे। एसएचएसबी द्वारा सही मात्रा में ब्रोशर्स छापे जाएंगे हिंमें योजना, प्रक्रिया, शुल्क की दर, निजी स्वास्थ्य केंद्र के लिए स्वयं मूल्यांकन चेकलिस्ट, एमटीपी एक्ट की प्रति, गर्भपात सेवा प्रदान करने संबंधी दिशानिर्देश, निजी स्वास्थ्य केंद्र व डीएसी के उत्तरदायित्व आदि होंगे। इन ब्रोशार्ष को सभी डीएसी को निजी स्वास्थ्य केंद्र को योजना के अंतर्गत उपलब्ध पोस्टर, लीफलेट व अन्य आईईसी का सामान उचित मात्रा में रखना होगा। एएनएम एवं आशा का उन्मुखीकरण संबंधित एमओआईसी द्वारा किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता का उन्मुखीकरण संबंधित ए एन एम द्वारा किया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया वे निजी स्वास्थ्य केंद्र जो इस योजना में रुचि रखते हो, उन्हें ब्रोशर्ष दिए जा सकेंगे जिनमें आवेदन फार्म होगा व स्वयं मूल्यांकन सूची (परिशिष्ठ 4) शामिल होगी। ये मुख्य चिकित्सा अधिकारी/ सिविल सर्जन, डीएचएस या एसएचएसबी के कार्यालयों में तथा एसएचएसबी की वेबासाइट पर भी उपलब्ध होगी। निजी स्वास्थ्य केंद्र अपनी चेकलिस्ट को भरकर सिविल सर्जन/मुख्य चिकित्सा अधिकारी/ डीएचएस के कार्यालय में जमा करेंगे और जमा करने की रसीद भी ले सकेगें। अधिकृति करने की प्रक्रिया के दौरान ही कोई भी ऐसा केंद्र, जो एमटीपी के लिए अधिकृति के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए एमटीपी अधिकृति के लिए आवश्यक फॉर्म ए जमा करना पड़ेगा (देखिए नियम 5 का नियम 5 जा उप नियम 2, एमटीपी नियम 2003)। अधिकृत करने की प्रक्रिया के लिए निजी स्वास्थ्य केंद्र का मूल्यांकन सदस्य सचिव व/अथवा डीपीएम द्वारा प्रत्येक आवेदन को देखा जाएगा व स्वास्थ्य केन्द्रों के निरीक्षण के लिए, आवेदनों की संख्या के आधार पर योजना बनाई जाएगी। सदस्य सचिव द्वारा निरीक्षण के लिए चयनित केन्द्रों की सूची बनाई जाएगी व केन्द्रों को सूचित किया जाएगे। केंद्र का निरीक्षण डीएसी के कम से कम दो सदस्यों द्वारा किया जेग्फा- डीपीएम् और मुख्य चिकित्सा अधिकारी या सिविल सर्जन अथवा परिवार कल्याण नोडल अधिकारी। यदि परिवार कल्याण नोडल अधिकारी उपलब्ध नहीं है तो सदस्य सचिव किसी अन्य डीएसी सदस्य को इस कार्य के लिए नियुक्त कर सकते हैं। निजी स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर होना चाहिए। निजी स्वास्थ्य केंद्र का मूल्यांकन करते समय, जमा की गई स्वयं जाँच चेकलिस्ट का सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए बुनियादी व्यवस्थाएं, मानव संसाधन, सेवा देने का तरीका आदि का मूल्यांकन संपन्न हुआ है। यदि निजी स्वास्थ्य केंद्र, युक्ति योजना के लिए सही पाया जाता है, तब मूल्यांकन समूह द्वारा उनके अनुमोदन की एक प्रति (परिशिष्ठ 4) उस केंद्र के मालिक को दी जाएगी। इस प्रति को उस निजी स्वास्थ्य केंद्र के आवेदक द्वारा भी हस्ताक्षर करना चाहिए जिसके सामने ये मूल्यांकन संपन्न हुआ है। यदि निजी स्वास्थ्य केंद्र पर किसी प्रकार की कमी पाई जाती है जिससे अधिकृत होना संभव न हो, इस तथ्य को केंद्र के प्रतिनिधि को उसी समय या तीन दिनों के भीतर बता दिया जाना चाहिए (परिशिष्ठ 4) परिशिष्ठ 4 पर उस केंद्र के प्रतिनिधि द्वारा भी हस्ताक्षर किये जाने चाहिए जिनके समक्ष या मूल्यांकन किया गया। वह केंद्र कमियां सुधार लेने के बाद फिर से आवेदन कर सकता है। निजी स्वास्थ्य केंद्र की सीएसी सेवा हेतु पात्रता कसौटी निजी स्वास्थ्य केंद्र को सेवा हेतु अनुमोदन निम्नलिखित शर्तों पर दिया जा सकेगा:- डीएलसी द्वारा एमटीपी के लिए अनुमोदित स्वास्थ्य केंद्र की तैयारी संबंधी चेकलिस्ट का पूरा होना (परिशिष्ठ 4) निजी स्वास्थ्य केंद्र तय शुदा चिकित्सकीय प्रोटोकोल का पालन किया जाना चाहिए, जो कि एमटीपी के लिए सीएससी सेवा हेतु तय किए गए हैं। कम से कम एक स्त्री रोग विशेषज्ञ होना चाहिए (एमडी/डीजीओ) अथवा एमटीपी प्रमाणित सेवा प्रदाता, जो एमटीपी लिए सीएससी सेवा हेतु तय किए गए हैं। कम से कम एक स्त्री रोग विशेषज्ञ होना चाहिए (एमडी/डीजीओ) अथवा एमटीपी की सेवाएँ दे सके। द्वितीय तिमाही में गर्भपात करवाने के लिए सही रेफरेल सुविधा प्रमाणीकरण व एमओयू पर हस्ताक्षर केंद्र मूल्यांकन टीम (एस ए टी) द्वारा अपनी रिपोर्ट सदस्य सचिव, डीएससी को मूल्यंकन के 7 दिनों के भीतर सौंपी जाएगी, जिसमें उन कारणों की जानकारी होगी जिसके चलते किसी केंद्र को अधिकृत करने या न करने की सिफारिश की गई है। सभी निजी स्वास्थ्य केन्द्रों की रिपोर्ट तथा एस ए टी की अनुमोदन के आधार पर सदस्य सचिव केन्द्रों को अधिकृति देने के विषय में अपनी राय बनाएंगे तथा और यह अनुमोदन एक साथ कोर समूह व डीएससी के सदस्यों के समक्ष रखा जाएगा। किसी केंद्र को गर्भपात व संबंधित सेवाओं के लिए अधिकृत किया जाना है या नहीं, यह निर्णय कोर समूह का रहेगा। अध्यक्ष व सदस्य सचिव को युक्ति योजना के अंतर्गत निजी स्वास्थ्य केद्र को अधिकृत करने का अधिकार है। निजी स्वास्थ्य केंद्र को उसकी स्वीकृति की स्थिति के संबंध में सदस्य सचिव डीएससी द्वारा, मूल्यांकन दौरे के बाद, 14 कार्य दिवसों के भीतर सूचित किया जाएगा। सदस्य सचिव द्वारा निजी स्वास्थ्य केंद्र के मालिक को डीएचएस के साथ एमओयू (परिशिष्ठ 5) पर हस्ताक्षर के लिए तथा सीएमओ/सीएस के कार्यालय की ओर से, केंद्र के अधिकृत होने का प्रमाण पत्र (परिशिष्ठ 6) लेने के लिए बुलाया जाएगा। इसी के साथ संबद्ध राशि भी निजी स्वास्थ्य केंद्र को प्रदान की जाएगी (विस्तृत जानकारी वित्तीय में) ये संपुर्ण प्रक्रिया स्वास्थ्य केंद्र पर निरीक्षण के 30 दिनों के भीतर संपन्न होने चाहिए। युक्ति योजना के अंतर्गत निजी अधिकृत स्वास्थ्य केन्द्रों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएँ। सभी निजी स्वास्थ्य केंद्र जिन्हें युक्ति योजना के अंतर्गत अधिकृत किया गया है, उन्हें निम्न सुनिश्चित करना आवश्यक है: प्रथम तिमाही के के गर्भपात, अपूर्ण गर्भपात व गर्भपात जटिलताओं, स्टेबिलायजेशन और रेफरल के लिए गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ तथा दूसरी तिमाही गर्भपात के लिए अपेक्षानुसार रेफरल सेवाएँ। गर्भपात के पश्चात् गर्भ निरोध संबंधी परामर्श एमटीपी एक्ट के नियमानुसार एमटीपी सेवाएँ । साईनेज तथा पोस्टर्स द्वारा सही तरीके से समुदाय में योजना का प्रसार योजना के लिए तैयार किए गए लिफलेस्ट्स व पोस्टर्स का सही मात्रा में उपलब्ध होना। निजी स्वास्थ्य केंद्र इस प्रकार के सामान के लिए इंडेंट फॉर्म (परिशिष्ठ 7) के द्वारा मांग कर सकते हैं। यूकित योजना के संबंध में जानकारी व विकासात्मक कार्यों का विविरण, केंद्र पर लगाना। इसमें (परिशिष्ठ 8) में दी गई जानकारी होनी चाहिए। महिला के साथ आने वाले समुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रर्ता को आवागमन सब्सिडी दी जाएगी (एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी, कार्यकर्ता, स्वास्थ्य कार्यकर्ता) सेवाओं के रिकार्ड को सही प्रकार से रखा जाए व सही प्रारूप से भर कर सही समय पर जमा किए जाए। गर्भपात सेवाएँ व उपकरणों की देखरेख भारत सरकार द्वारा निर्धारित नियमाकों के अनुसार होनी चाहिए (फुट नोट 3 देखें) सेवा राशि की दर निजी स्वास्थ्य केंद्र जो युक्ति योजना के अंतर्गत अधिकृति हैं, उन्हें गर्भपात सुविधा पानी की इच्छुक महिलाओं के लिए निम्न सुनिश्चित करना होगा सेवाएँ एमटीपी एक्ट व गर्भपात सेवाओं के लिए दिशानिर्देशों के अनुरूप सेवा प्रदाता अपनी सेवा प्रदान करने का कोई शुल्क नहीं लेंगे। किसी भी प्रकार का शुल्क चाहे प्रयोगशाला की जाँच हो या दवाइयां या ड्रेसिंग आदि से संबंधित हो, नहीं लिया जाएगा। युक्ति योजना के अंतर्गत, प्रत्येक निजी अधिकृत स्वास्थ्य केंद्र को निम्न दरों पर सेवा शुल्क दिया जा सकेगा : प्रदान की गई सेवाएँ प्रति केस दर (रू.) क. प्रथम तिमाही की गर्भपात सेवा संपन्न की गई (इवीए, एमबीए या एमएमए) 500/- ख. प्रथम तिमाही के अपूर्ण गर्भपात का इलाज 750/- ग. गर्भपात की जटिलता का इलाज 750/- घ. जटिलता की स्थिति में महिला की हालत को स्थिर करना व रेफर करना 300/- ऐसी स्थिति में जहाँ पर महिला को गर्भपात सेवा लेने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता (आशा/एएनएम/आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्य कार्यकर्ता) द्वारा लाया गया है उन्हें निजी स्वास्थ्य केंद्र तक आने जाने के लिए 150 रूपये का आवागमन शुल्क का भुगतान किया जाएगा। इसे उपरोक्त दरों का अलावा लिया जाएगा। अधिकृत राशि प्रदान करना अधिकृत राशि एसएचएसबी द्वारा जिला स्वास्थ्य समिति को प्रदान की जाएगी जिसे जिला स्वास्थ्य समिति निजी स्वास्थ्य केंद्र को देगी। निजी स्वास्थ्य केंद्र को योजना के अनुसार सुनिश्चित दरों पर भुगतान किया जाएगा। निजी स्वास्थ्य केंद्र द्वारा निम्न विकल्पों में से किसी एक को चुना जा सकता है: 1. इन्वोइस के साथ मासिक मुआवजा 2. एक बैंक गारंटी के एवज में दिया जाने वाला अग्रिम धन, ये गारंटी यदि संभव हो तो राष्ट्रीयकृत बैंक से हो। क) सेवाएँ प्रदान करने के एवज में इन्वोइस के द्वारा मासिक प्राप्ति निजी स्वास्थ्य केंद्र को उनके द्वारा हर माह दी गई सेवाओं के एवज में इन्वोइस बनानी होगी (परिशिष्ठ 9 में प्रारूप) जिसे हर महीने की 7 तारीख तक उसे मुख्य चिकित्सा अधिकारी/ सिविल सर्जन सदस्य के पास जमा करवाना होगा। सदस्य सचिव, डीएसी द्वारा इस संबंध में धन प्रदाय को लेकर कार्य करते हुए, 75 प्रतिशत राशि इन्वोइस के प्राप्त होते ही दे देंगे और बाकी 25 प्रतिशत राशि इन्वोइस के सत्यापन के पश्चात् दी जाएगी। बची हुई 25 प्रतिशत की राशि को इन्वोइस प्राप्ति के 6 सप्ताह के भीतर दे दी जाएगी। ख) दी गई सेवाओं के एवज में जमा किए गए इन्वोइस के आधार पर अग्रिम राशि की पुन: पूर्ति के लिए मांग कोई भी अधिकृत निजी स्वास्थ्य केंद्र, किसी राष्ट्रीयकृत बैंक से डीएचएस को गारंटी देकर 50,000 रूपये की अग्रिम राशि मांग सकता है। निजी स्वास्थ्य केंद्र उसमें से 80 प्रतिशत राशि को खर्च करने के पश्चात्, दी गई सेवाओं के एवज में एक इन्वोइस बनाकर (परिशिष्ट 9 में प्रारूप है) मुख्य चिकित्सा अधिअकरी/सिविल सर्जन को भेजेगा। मुख्य चिकित्सा अह्दिकारी/सिविल सर्जन इन्वोइस मिलते ही 75 प्रतिशत राशि दे देंगे व बाकी के 25 प्रतिशत, इन्वोइस से प्रमाणीकरण के बाद दी जाएगी, बाकी की 25 प्रतिशत राशि इन्वोइस मिलने के छ: हफ्ते के अदंर दी जाएगी। यदि किसी निजी स्वास्थ्य केंद्र की मान्यता को समाप्त किया जाता है या एमओयू को रद्द कर दिया जाता हैं, तब उस स्वास्थ्य केंद्र द्वारा द्वारा डीएचएस को जमा किए गए अंतिम इन्वोइस को डीएचएस द्वारा अनुमोदन किए जाने के बाद प्रदान किया जाएगा। बाकी अग्रिम राशि वह केंद्र डीएचएस को वापिस दे देगा। बैंक गारंटी का पत्र निजी स्वास्थ्य केंद्र को अग्रिम व अन्य खर्चों के भुगतान के चार हफ्तों के बाद वापिस दे दिया जाएगा। रिपोर्टिंग निजी स्वास्थ्य केंद्र को योजना के अंतर्गत अधिकृत होने के चलते गर्भपात, गर्भपात जटिलता व रेफरल संबंधी केस का रिकार्ड पंजीकरण रजिस्टर में करना आवश्यक है (परिशिष्ट 10) अपेक्षित जानकारी को सही प्रारूप व इन्वोइस के साथ डीएसी के पास जमा किया जाएगा। जिला अधिकृत कमेटी/जिला स्वास्थ्य समिति अधिकृत स्वास्थ्य केन्द्रों से मिली जानकारी को एकत्र करने के बाद हर महीने राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार को विशेष प्रारूप (परिशिष्ट 1) में भेजेगा। प्रमाण – पत्र की वैधता अधिकृत निजी स्वास्थ्य केंद्र के लिए जारी किया गया प्रमाण पत्र, एक बार जारी किए जाने के बाद तीन वर्ष के लिए वैध रहता है वह इसका आवश्यकनुसार प्रत्येक वर्ष नवीनीकरण करवाया जा सकता है। प्रणाम पत्र की समाप्ति के पश्चात्, निजी स्वास्थ्य केंद्र को परिशिष्ट 4 के अनुसार इसके नवीनीकरण के लिए आवेदन देना होगा। निरंतर अधिकृति स्थिति बनाए रखने के लिए निजी स्वास्थ्य केंद्र को, उनकी प्रमाण पत्र की अवधि समाप्त होने से तीन माह पहले ही नवीनीकरण के लिए आवेदन देना होगा। बहरहाल, देरी के कारण नवीनीकरण न किए जा सकने की स्थिति में, ये सुविधा अंतरिम तक बढ़ाई जा सकती है। (अधिकतम 3 माह) निगरानी व मूल्यांकन क) प्रथम तिमाही के गर्भपात के लिए अधिकृत निजी स्वास्थ्य केन्द्रों में सेवाओं, रिकार्ड व रिपोर्ट की गुनवत्ता की जाँच के लिए किसी भी समय डीएएस अथवा उनके प्रतिनिधि अथवा एसएचएसवी द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि किसी भी 10% अधिकृत निजी स्वास्थ्य केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर सकते हैं। जब भी किसी निजी स्वास्थ्य केंद्र द्वारा रिपोर्ट जमा की जाती है, और डीएसी को ये अनुभव होता है कि एमटीपी की संख्या अनपेक्षित रूप से बढ़ रही है, तब वे अपनी ओर से इस केंद्र के निरीक्षण व सही स्थिति की जाँच के लिए किसी प्रतिनिधि की नियुक्ति कर सकते हाँ। इस व्यवस्था को सदस्य सचिव, डीएसी द्वारा दी गई अवधि तक जारी रखा जा सकता हैं। इसके अलावा मुख्य चिकित्सा अधिकारी अथवा सिविल सर्जन एमटीपी एक्ट एनटीपी नियम के अनुसार किसी भी निजी स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण कर सकते हैं। डीएसी के अध्यक्ष के पास ये अधिकार है कि वे एमटीपी नियम 6 के अनुसार एमटीपी के केस संबंधी विस्तृत जानकारी का परिक्षण कर सकते हैं जिसमें महिला का नाम भी शामिल होता है। ख) अपूर्ण व जटिल गर्भपात के लिए डीएसी द्वारा या उनके प्रतिनिधि अथवा एचएचएसवी के प्रतिनिधी किसी भी 10 प्रतिशत केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर सकते हैं, इसमें वह इस केंद्र के रिकार्ड रखे जाने को विधि, जाँच सूची व रिपोर्टिंग की समीक्षा कर सकते हैं। जब भी किसी निजी स्वास्थ्य केंद्र द्वारा रिपोर्ट जमा की जाती है, और डीएससी को ये अनुभव होता है कि एमटीपी के संख्या अनपेक्षित रूप से बढ़ रही है, तब वे अपनी ओर से इस केंद्र के द्वारा जमा की गई रिपोर्ट के सत्यापन के लिए लाभार्थी के स्तर पर जाँच कर सकते है। ग)राज्य स्तरीय निगरानी एचएचएसबी, जिलों द्वारा स्वीकृत बिलों में से 1 प्रतिशत बिलों को जांचेगी। युक्त योजना के समुचित क्रियान्वयन की निगरानी के इए राज्य स्वास्थ्य समिति को यह अधिकार है कि वह पूरी प्रक्रिया का किसी अन्य व्यक्ति/संस्था द्वारा मूल्यांकन करा सकती है जिसमें ऑडिट एवं एमटीपी अधिनियम के अनुसार व प्रचलित सामाजिक/संस्कृतिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए लाभार्थी के स्तर पर सत्यापन भी शामिल है। अधिकृति को समाप्त करना किसी भी समय यदि ऐसा अनुभव आता है कि निजी स्वास्थ्य केंद्र प्रमाण पत्र पर वर्णित नियमों व प्रावधानों का पालन नहीं कर रहा है अथवा ये देखा जाता रहा है कि यहाँ पर गुणवत्ता या सेवाओं के साथ समझौता किया जा रहा है साथ ही रेकार्ड रखने व रिपोर्टिंग करने में भी समझौता हो रहा है, तब ये प्रमाण पत्र रद्द किया जा सकता है। इसके लिए सदस्य सचिव डीएसी द्वारा निजी स्वास्थ्य केंद्र को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा है। इसकी एक प्रति अध्यक्ष डीएसी व एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर एसएचएसबी को भेजी जाएगी। यदि निजी स्वास्थ्य केंद्र को धन दिए जाने के तीन माह की भीतर सुरक्षित गर्भpatपात सेवाएँ प्रदान करना शुरू नहीं किया जाता है, तब डीएसी के पास धन वापस लेने का अधिकार है व वे अधिकृति स्थिति पर पुनर्विचार कर सकते हैं। यदि कोई निजी स्वास्थ्य केंद्र अपनी अधिकृति स्थिति को रद्द करवाना चाहता है, तब उन्हें अपनी ओर से एक आवेदन पत्र लिखित में देना होगा जिसमें इसका कारण दिया जाना चाहिए। इसे सदस्य सचिव डीएसी को भेजा जाना चाहिए जिसकी एक प्रति अध्यक्ष डीएसी व एसएचएसबी को भेजी जाएगी। किसी भी निजी स्वास्थ्य केंद्र की अधिकृति को समाप्त करने की प्रक्रिया अध्यक्ष के अनुमोदन के उपरांत ही पूरी होगी। शिकायतों का निराकरण यदि निजी स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण के बाद अधिकृति प्रमाण पत्र देने में 45 दिनों से ज्यादा की डेरी होती है, या अधिकृति प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता है, तब निजी स्वास्थ्य केंद्र डीएसी के अध्यक्ष को शिकायत कर सकता है। यदि निजी स्वास्थ्य केंद्र संतुष्ट न हो, तो वह डिविजनल कमिश्नर के पास जा सकता है। डिविजनल कमिश्नर, क्षेत्रीय डिप्टी डायरेक्टर के साथ मिलकर याचिका की समीक्षा करेगा व विवाद का समाधान करेगा। डिविजनल कमिश्नर का निर्णय ही इस संदर्भ में अंतिम निर्णय होगा। निजी प्रदाता को एक लिंक/इमेल पता दिया जाएगा वे इस युक्ति योजना से संबंधित शिकायतों को सीधे एसएचएसबी को भेज सकें। गर्भावस्था से जुड़े कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य स्रोत : बिहार सरकार का स्वास्थ्य विभाग।