<p style="text-align: justify;">प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा अपनी बैठक में संशोधित समग्र शिक्षा योजना को 2021-22 से 2025-26 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए जारी रखने को अपनी मंजूरी दे दी है। इसका कुल वित्तीय परिव्यय 2,94,283.04 करोड़ रूपये है जिसमें 1,85,398.32 करोड़ रुपये का केंद्रीय हिस्सा शामिल भी है।</p> <p style="text-align: justify;">इस योजना में 11 लाख 60 हजार विद्यालय, 15 करोड़60लाख से अधिक छात्र और सरकार एवं सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालयों के 57 लाख शिक्षक (पूर्व-प्राथमिक से वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक) शामिल हैं।</p> <p style="text-align: justify;">समग्र शिक्षा योजना स्कूली शिक्षा के लिए एक एकीकृत योजना है, जिसमें पूर्व-विद्यालय से लेकर बारहवीं कक्षा तक के सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। यह योजना स्कूली शिक्षा को एक निरंतरता मानती है और यह शिक्षा के लिए सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी -4) के अनुसार है। यह योजना न केवल शिक्षा के अधिकार (आरटीई)अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए सहायता प्रदान करती है, बल्कि इसको यह सुनिश्चित करने के लिए भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की सिफारिशों के साथजोड़ा गया है कि सभी बच्चों की एक समान और समावेशी कक्षा के माहौल के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच हो और जिसमें उनकी विविध पृष्ठभूमि, बहुभाषी आवश्यकताओं, विभिन्न शैक्षणिक योग्यताओं का भी ध्यान रखा गया हो और जो उन्हें सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार भी बनाएं।</p> <p style="text-align: justify;">इस योजना में गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और समान शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शिक्षकों, टीचर एजुकेटर्स, विद्यार्थियों, अभिभावकों, समुदाय, स्कूल प्रबंधन समितियों, एससीईआरडी, डाइट, बाइट, ब्लॉक रिसोर्स पर्सन, क्लस्टर रिसोर्स पर्सन, स्वयंसेवकों जैसे स्कूलपरिवेश से जुड़े सभी हितधारकों को जोड़कर 11 लाख 60 हजार स्कूलों,15 करोड़ 60 लाखविद्यार्थियों और सरकारी व सहायता प्राप्त स्कूलों (प्री-प्राइमरी से उत्तर माध्यमिक स्तर तक) के 57 लाख शिक्षकों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, इस योजना में केन्द्र और राज्य सरकारों के विभिन्न मंत्रालयों/विकास एजेंसियों के बीच एक प्रभावी तालमेल होगा। एनईपी 2020 में जैसा उल्लेख किया गया था, इसमें विद्यार्थियों के बीच कौशल प्रदान करने पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय व अन्य मंत्रालयों द्वारा कौशल प्रदान करने के लिए उपलब्ध कराई जा रही फंडिंग के साथ व्यावसायिक शिक्षा का विस्तार किया जाएगा। न सिर्फ स्कूली बच्चों, बल्कि स्कूलों से बाहर के बच्चों के लिए सुविधाओं का अधिकतम इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों और आईआईटी व पॉलीटेक्निक के मौजूदा ढांचे का उपयोग किया जाएगा।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार । </p>