भूमिका कोयला भारत में सबसे महत्वपूर्ण तथा प्रचुर मात्रा में जीवाश्य ईंधन है। यह देश की ऊर्जा मांग का 55% है। देश की औद्योगिक विरासत स्वदेशी कोयले पर विकसित हुई थी। पिछले चार दशकों में भारत में वाणिज्यिक प्राथमिक ऊर्जा खपत में लगभग 700% वृद्धि हुई है। भारत में इस समय वाणिज्यिक प्राथमिक ऊर्जा प्रति व्यक्ति खपत लगभग 350 किलो ओई/प्रति वर्ष है जो विकसित देशों की अपेक्षा काफी कम है। बढ़ती हुई जनसंख्या, अर्थव्यवस्था के विस्तार और जीवन की बेहतर गुणवत्ता के प्रयासों से प्रेरित भारत में ऊर्जा का उपयोग बढ़ने की संभावना है। पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस की सीमित भंडार क्षमता, जल विद्युत परियोजना पर पारिस्थितिकीय संरक्षण प्रतिबंध और परमाणु ऊर्जा के भौगोलिक राजनैतिक दृष्टिकोण पर विचार करते हुए कोयला भारत के ऊर्जा परिदृश्य का केन्द्र बिन्दु बना रहेगा। भारतीय कोयला अगली शताब्दी और उसके बाद भी घरेलू ऊर्जा बाजार के लिए अद्वितीय पारिस्थितिकीय दृष्टि से अनुकूल ईंधन स्रोत बना रहेगा। 27 प्रमुख कोलफील्डों में उपलब्ध हार्ड कोयला भंडार मुख्यत: देश के पूर्वी तथा दक्षिण मध्य भागों तक सीमित हैं (देखें कोयला भंडार) लिग्नाइट भंडार लगभग 36 बिलियन टन है जिसमें से 90% तमिलनाडु दक्षिण राज्य में है। कोयला उत्पादन 01 जनवरी, 2013 से 31 मार्च, 2013 की अवधि के दौरान पूरे भारत में कोयला उत्पादन 173.225 मि.टन था । 01 अप्रैल, 2013 से 31 मार्च, 2014 तक की अवधि के दौरान 604.55 मि0टन के लक्ष्य की तुलना में 564.76 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया गया जो कि लक्ष्य का 93.4% है। सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लि0 (एससीसीएल) ने 01 जनवरी, 2013 से 31 मार्च, 2013 की अवधि के दौरान 16.01 मि.ट. कोयले का उत्पादन किया था । 01 अप्रैल, 2013 से 31 मार्च, 2014 तक के दौरान 54.30 मिलियन टन लक्ष्य की तुलना में 50.47 मि0टन कोयले का उत्पादन किया गया जो कि लक्ष्य का 92.9% है । कोयले का वितरण और विपणन सीआईएल का विपणन प्रभाग इसकी सभी सहायक कोयला उत्पादक कंपनियों के विपणन कार्यकलापों की आयोजना, समन्वय एवं मानीटरिंग करता है । विभिन्न क्षेत्रों में उपभोक्ता क्षेत्रों के आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सीआईएल का राज्य के राजधानियों में क्षेत्रीय बिक्री कार्यालयों का नेटवर्क है । कोयले का आयात सीआईएल का विपणन प्रभाग इसकी सभी सहायक कोयला उत्पादक कंपनियों के विपणन कार्यकलापों की आयोजना, समन्वय एवं मानीटरिंग करता है । विभिन्न क्षेत्रों में उपभोक्ता क्षेत्रों के आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सीआईएल का राज्य के राजधानियों में क्षेत्रीय बिक्री कार्यालयों का नेटवर्क है । भारतीय इस्पात प्राधिकरण लि0 (सेल) तथा दूसरे इस्पात क्षेत्र के विनिर्माताओं द्वारा कोकिंग कोयले का आयात किया जा रहा है । यह मुख्यत: आवश्यकता तथा घरेलू उपलब्धता के मध्य अंतर को दूर करने तथा क्वालिटी को सुधारने के लिए किया जाता है । कोयला आधारित बिजली संयंत्र, सीमेंट, संयंत्र, केप्टिव बिजली संयंत्र, स्पांज आयरन संयंत्र, औद्योगिक उपभोक्ता तथा कोयला व्यापारी नान कोकिंग कोयले का आयात कर रहे हैं । कोक का आयात मुख्यत: कच्चा कोयला विनिर्माताओं तथा मिनी ब्लास्ट फरनेस का उपयोग करने वाले लोहा तथा इस्पात क्षेत्र के उपभोक्ताओं द्वारा किया जाता है । कोयला और उत्पादों के आयात का ब्यौरा आई. ई. पिछले पांच वर्षों के दौरान कोक निम्नानुसार है (मिलियन टन में) कोयला 2005-06 2006-07 2007-08 2008-09 2009-10 2010-11 2011-12 2012-13 कोकिंग कोयला 16.89 17.88 22.03 21.08 24.69 19.48 31.80 32.56 नान कोकिंग कोयला 21.7 25.2 27.76 37.92 48.57 49.43 71.05 105.00 कोक 2.62 4.69 4.25 1.88 2.36 1.49 2.36 3.01 कोयला खदानों में सुरक्षा कोयला खान सुरक्षा के लिए सांविधिक प्रावधान। कोयला खनन पूरे विश्व में अनेक अंतर्निहित प्रचालनगत तथा पेशागत जोखिमों की मौजूदगी के कारण अत्यधिक विनियमित उद्योग है। कोयला खान सुरक्षा विधान भारत में पेशागत स्वास्थ्य एवं सुरक्षा (ओएचएस) सुनिश्चित करने के लिए सबसे अधिक व्यापक सांविधिक ढाचाओं में से एक है। इन सुरक्षा सांविधियोंका अनुपालन अनिवार्य है। भारत में कोयला खानों में प्रचालनों को खान अधिनियम, 1952 खान नियमावली, 1955 कोयला खान विनियमन – 1957 तथा उनके अंतर्गत बनाए गए अन्य संविधियों द्वारा विनियमित होता है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) करे इन संविधियों को प्रशासित करने का कार्य सौंपा गया है। भारत में कोयला खनन का इतिहास भारत में वाणिज्यिक कोयला खनन का इतिहास लगभग 220 वर्ष पुराना है जिसकी शुरूआत दामोदर नदी के पश्चिमी तट पर स्थित रानीगंज कोलफील्ड में ईस्ट इंडिया कंपनी के मैसर्स सुमनेर और हीटली द्वारा 1774 को की गयी थी। तथापि, एक शताब्दी तक भारतीय कोयला खनन का विकास मांग की कमी के कारण मंदा रहा, लेकिन 1853 में वाष्पचालित रेलगाड़ी के आने से इसे बढ़ावा मिला। थोड़े ही समय में औसतन उत्पादन बढ़कर 1 मि.ट. (एम.टी.) वार्षिक हो गया और भारत वर्ष 1900 तक 6.12 मि.ट. प्रतिवर्ष और वर्ष 1920 तक 18 मि.ट. प्रतिवर्ष उत्पादन करने लगा। प्रथम विश्व युध्द के समय उत्पादन में अचानक तेजी आई, लेकिन तीस के दशक के शुरू में इसमें मंदी आ गई। वर्ष 1942 में उत्पादन 29 मि.ट. और वर्ष 1946 में 30 मि.ट. के स्तर तक पहुंच गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ-साथ देश में 5 वर्षीय विकास योजनाएं प्रारंभ की गई। पहली योजना के प्रारंभ में वार्षिक उत्पादन 33 मि.ट. तक बढ़ गया। पहली योजनावधि के दौरान ही कोयला उद्योग के क्रमिक और वैज्ञानिक विकास से कोयला उत्पादन को कुशलता पूर्वक बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जाने लगी। अपने एक केन्द्र के रूप में रेलवे के स्वामित्व वाली कोलियरियों सहित वर्ष 1956 में भारत सरकार के उपक्रम राष्ट्रीय कोयला विकास निगम (एन.सी.डी.सी.) की स्थापना भारतीय कोयला उद्योग के सुनियोजित विकास की ओर पहला बड़ा कदम है। सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लि. जो वर्ष 1945 से कार्यरत थी और जो वर्ष 1956 में आंध्र प्रदेश सरकार के नियंत्रणाधीन एक सरकारी कंपनी बनी, इस प्रकार पचास के दशक में भारत में दो सरकारी कोयला कंपनियां थीं। सिं.को.कं.लि. अब आंध्र प्रदेश सरकार और भारत सरकार का संयुक्त उपक्रम है, जिसमें उनकी इक्विटी भागीदारी 51 : 49 के अनुपात में है। कोयला खानों का राष्ट्रीयकरण भारत में आधुनिक समय में कोयले का वाणिज्यिक खनन अपने उद्भव काल से ही घरेलू खपत की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाता रहा है। इस्पात उद्योग की बढ़ती आवश्यकताओं के कारण झरिया कोलफील्ड में कोककर कोयला भंडारों के व्यवस्थित दोहन पर बल देना पड़ा। देश की बढ़ती हुई ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए निजी कोयला खान मालिक पर्याप्त पूंजी निवेश नहीं कर रहे थे। उनमें से कुछ मालिकों द्वारा अपनाए गए अवैज्ञानिक खनन तरीकों और कुछ निजी कोयला खानों में मजदूरों की खराब कार्य-स्थिति सरकार के लिए चिंता के विषय बन गए। केन्द्र सरकार ने इन्हीं कारणों से निजी कोयला खानों के राष्ट्रीयकरण का निर्णय लिया। राष्ट्रीयकरण दो चरणों में किया गया-पहले कोककर कोयला खानों का 1971-72 में और तब 1973 में अकोककर कोयला खानों का। अक्तूबर, 1971 में कोककर कोयला खान (आपात प्रावधान) अधिनियम, 1971 में, राष्ट्रीयकरण किए जाने तक लोक हित में कोककर खानों और कोक ओवन संयंत्रों के प्रबंधन को अपने अधिकार में लेने का प्रावधान था। इसके बाद कोककर कोयला खान (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 बनाया गया जिसके अंतर्गत टाटा आयरन एण्ड स्टील कंपनी लि. और इंडियन आयरन एण्ड स्टील कंपनी लि. के नियंत्रण से भिन्न कोककर कोयला खानों और कोक ओवन संयंत्रों का 1.5.1972 का राष्ट्रीयकरण किया गया और इनको केन्द्र सरकार के नये उपक्रम भारत कोकिंग कोल लि. के अधीन कर दिया गया। कोयला खान (प्रबंध को अधिकार में लेना) अधिनियम, 1973 नामक एक अन्य अधिनियम ने भारत सरकार को 1971 में अपने अधिकार में लिए गए कोककर कोयला खानों सहित सात राज्यों में स्थित कोककर और अकोककर कोयला खानों के प्रबंधन को अपने अधीन लेने का अधिकार प्रदान किया। इसके बाद कोयला खान (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1973 के बनने से 1.5.1973 को इन सभी खानों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। कोयला भंडार जीएसआई,सीएमपीडीआई, एससीसीएल और एमईसीएल आदि द्वारा किए गए अन्वेषण के परिणामस्वरूंप 1.4.2014 की स्थिति के अनुसार 1200 मीटर की अधिकतम गहराई तक देश में कोयले का कुल संचित भूवैज्ञानिक संसाधनों का 301.56 बिलियन टन का अनुमान लगाया गया है। कोयले के भू वैज्ञानिक संसाधनों के राज्यवार ब्यौरे निम्नवत हैं : (मिलियन टन में) राज्य प्रमाणित निर्दिष्ट अनुमानित कुल कुल 125909 142506 33149 301564 प.बंगाल 13403 13022 4893 31318 झारखंड 41377 32780 6559 80716 बिहार 0 0 160 160 मध्य प्रदेश 10411 12382 2879 25673 छत्तीसगढ 16052 33253 3228 52533 उत्तर प्रदेश 884 178 0 1062 महाराष्ट्र 5667 3186 2110 10964 ओड़िशा 27791 37873 9408 75073 आंध्र प्रदेश 9729 9670 3068 22468 असम 465 47 3 515 सिक्किम 0 58 43 101 अरूंणाचल प्रदेश 31 40 19 90 मेघालय 89 17 471 576 नागालैंड 9 0 307 315 (स्रोत : जियोलाजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया ) संसाधनों का वर्गीकरण प्रायद्वीपीय भारत पुराने गोंडवाना शैल समूह तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र के नए टर्शियरी शैल समूह में कोयला संसाधन उपलब्ध हैं । क्षेत्रीय/ प्रोन्नत अन्वेषण के परिणामों के आधार पर जहां आमतौर पर बोरहोल 1 2 कि0मी0 की दूरी पर किए जाते हैं , संसाधनों को "निर्दिष्ट " अथवा "अनुमानित " की श्रेणी में वर्गीकृत किया जाता है । जहां बोरहोल 400 मीटर से कम की दूरी पर किए जाते हैं वहां चुनिंदा ब्लॉकों में तदनन्तर विस्तृत अन्वेषण संसाधनों को अधिक भरोसेमंद "प्रमाणित " श्रेणी में उन्नत करता है । 1.4.2014 की स्थिति के अनुसार भारत के कोयला संसाधन संगठनवार तथा श्रेणीवार नीचे दिए गए तालिका के अनुसार है : (मिलियन टन में) गठन प्रमाणित निर्दिष्ट अनुमानित कुल कुल 125909 142506 33149 301564 गोंडवाना कोयला 125315 142407 32350 300072 टर्शियरी कोयला 594 99 799 1493 भारत कोयला संसाधनों के प्रकार और श्रेणी वार 1.4.2014 की स्थिति के अनुसार भारत के किस्मवार तथा श्रेणीवार कोयला संसाधन निम्न तालिका के अनुसार हैं : (मिलियन टन में ) कोयले के प्रकार प्रमाणित निर्दिष्ट अनुमानित कुल कुल जोड़ 125909 142506 33149 301564 (क) कोकिंग :- प्राइम कोकिंग 4614 699 0 5313 मीडियम कोकिंग 13303 11867 1879 27049 सेमी कोकिंग 482 1004 222 1708 उपजोड़ कोकिंग 18400 13569 2101 34070 नान कोकिंग 106916 128838 30249 266002 टर्शियरी कोकिंग 594 99 799 1493 पिछले पांच वर्षों के दौरान भारत में कोयला संसाधनों की स्थिति जीएसआई, सीएमपीडीआई, एससीसीएल, एमईसीएल, राज्य सरकारों आदि द्वारा किए गए क्षेत्रीय, प्रोन्नत तथा विस्तृत अन्वेषण के परिणामों के आधार पर भारत में अनुमानित कोयला संसाधन 301.56 बिलियन टन तक पहुंच गया है । पिछले पांच वर्षों के दौरान देश में कोयले के कुल संसाधनों में वृद्धि / उन्नयन के ब्यौरे नीचे तालिका में दिए गए हैं : (मिलियन टन में ) कोयले का भू वैज्ञानिक संसाधन प्रमाणित निर्दिष्ट अनुमानित कुल 1.4.2009 105820 123470 37920 267210 1.4.2010 109798 130654 36358 276810 1.4.2011 114002 137471 34390 285862 1.4.2012 118145 142169 33183 293497 1.4.2013 123182 142632 33101 298914 1.4.2014 125909 142506 33149 301564 स्रोत: कोयला मंत्रालय, भारत सरकार | क्या है खनिज उर्जा संसाधन? जानिए इस रोचक विडियो में