घर में और सभी व्यापार के संचालन में ऊर्जा दक्षता अत्यंत महत्व है। कई कुशल ऊर्जा उपकरणों का व्यापक रूप से उपयोग हाशिए के समुदायों को उन्नत करने के किया जा रहा है। ऊर्जा कुशल उपकरणों में से कुछ नीचे का वर्णन कर रहे हैं: बायोमास चारकोल की ब्रिकेटिंग गाँवों में फसल की कटाई के बाद कृषि कार्यों से बड़ी मात्रा में अपशिष्ट पदार्थ प्राप्त होता है। उनमें से अधिकाँश को खेत में जला दिया जाता है। जबकि बायोमास काष्ठ (चारकोल) इष्टिका प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर उस अपशिष्ट पदार्थ का उपयोग वैकल्पिक ईंधन उत्पन्न करने में किया जा सकता है। जो किफायती होने के साथ-साथ पर्यावरण उन्मुखी भी हो सकता है। ब्रिकेटिंग ब्रिकेटिंग उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें कम घनत्व वाले बायोमास को उच्च घनत्व एवं ऊर्जा केन्दित ईंधन ब्रिकेट के रूप में बदला जाता है। क्रिया विधि चारकोल बनाने की दो पद्धतियाँ प्रचलित है -1. प्रत्यक्ष पद्धति - प्रत्यक्ष पद्धति में कार्बनिक पदार्थ को गर्म कर उसमें अपूर्ण दहन उत्पन्न किया जाता है और उसके परिणामस्वरूप चारकोल का निर्माण होता है।2. अप्रत्यक्ष पद्धति - इस पद्धति के अंतर्गत कार्बनिक पदार्थ को जलाने में बाह्य ऊर्जा स्रोत का उपयोग किया जाता है। इसके लिए कार्बनिक पदार्थ को वायु रहित खुले चैम्बर में रखा जाता है। इस पद्धति से कम धुँआ और प्रदूषण वाला उच्च गुणवत्ता युक्त चारकोल का उत्पादन होता है। चारकोल ब्रिकेटिंग की एम.सी.आर.सी पद्धति आवश्यकताएँ 1. स्थानीय स्तर पर उपलब्ध बायोमास (उदाहरण के लिए गन्ना से प्राप्त अपशिष्ट, चावल की भूसी, जूट से निकले अपशिष्ट, मूँगफली का छिलका इत्यादि)।2. कार्बनीकृत चैम्बर (हीटर या बॉयलर)3. बाइंडर (स्टार्च या कसावा आटा)4. लघु ब्रिकेटिंग मशीन (10 कि. ग्राम/प्रति घंटे) चारकोल निर्माण की चरणवार पद्धति 1. बायोमास का संग्रह - स्थानीय स्तर पर उपलब्ध बायोमास को जमा करें। उसकी छँटनी कर बड़े आकार वाले कच्ची सामग्री को छोटे टुकड़ों में काट कर धूप में सूखा लें।2. कार्बनीकरण(क) भट्ठी का निर्माण बाहरी डिब्बा - 200 लीटर आकार का धातु निर्मित तेल का डिब्बा लें जिसका ऊपरी और निचला हिस्सा कटा हुआ हो। वह डिब्बा 12 इंच चौड़ाई X 10 इंच ऊँचाई के आकार की होनी चाहिए। डिब्बे के निचले हिस्से पर लोहे की दो छड़ को समानांतर रूप से टिकाएँ जो स्टील के आंतरिक डिब्बे का आधार के रूप में कार्य करें। भीतरी डिब्बा - 100 लीटर वाले ढक्कन सहित स्टील का डिब्बा लें जिसके निचले हिस्से में 3/8 इंच आकार का छह छेद किया गया हो। आंतरिक डिब्बे को धातु निर्मित डिब्बे के भीतर रख दें। (ख) बायोमास को कार्बनीकृत करना आंतरिक डिब्बे में बायोमास को ठूँसकर रख दें एवं उसकी ऊपरी ढक्कन बंद कर दें। बंद करने के बाद बायोमास का उपयोग करते हुए उसे 45 मिनट से लेकर 1 घंटे तक जलाएँ। जलने के बाद आंतरिक डिब्बे से कार्बनीकृत बायोमास को इकट्ठा करें और फिर उसका वजन किया जाए। इस पद्धति से 30 प्रतिशत तक कार्बनीकृत चारकोल प्राप्त होता है। 3. बाइंडर का निर्माण - ब्रिकेट्स को मजबूत करने के लिए बाइंडर सामग्री का उपयोग किया जाता है। प्रत्येक 100 किलो ग्राम वजन के कार्बनीकृत चारकोल पाउडर के लिए 60-100 लीटर पानी में 5 से 6 किलो ग्राम स्टार्च या कासावा आटा को मिलाकर बाइंडर तैयार करें। 4. मिश्रण - इसे इस प्रकार मिलाएँ कि कार्बनीकृत चारकोल का प्रत्येक कण बाइंडर से ढक जाएँ। यह चारकोल के संयुक्तीकरण कार्य या ढेला बनने की मात्रा में वृद्धि करेगा और समान प्रकार के ब्रिकेट्स उत्पन्न करेगा। 5. ब्रिकेटिंग - ब्रिकेट के भीतर चारकोल मिश्रण का निर्माण मानवीय रूप से या मशीन का उपयोग कर किया जाता है। समान आकार वाले ब्रिकेट निर्माण के लिए मिश्रण को सीधे ब्रिकेटिंग माऊल्ड या मशीन में मिलाएँ।6. सूखाना और पैकेट बनाना - ब्रिकेट को ट्रे या किसी बड़े बर्तन में इकट्ठा कर धूप में सूखाएँ और प्लास्टिक बैग में रखकर उसका पैकेट बना लें। ब्रिकेट्स की सामान्य विशेषताएँ नमी - 07.1 से 07.8 प्रतिशतवाष्पशील/उष्ण पदार्थ - 13.0 से 13.5 प्रतिशतस्थिर कार्बन - 81.0 से 83.0 प्रतिशतराख - 03.7 से 07.7 प्रतिशतसल्फर - 00.0 प्रतिशतउष्मीय मूल्य - 7100 से 7300 किलो कैलोरी/कि.ग्रामघनत्व - 970 कि. ग्राम/क्यूबिक मीटर प्रौद्योगिकी के लाभ 1. धुँआ रहित - चारकोल ब्रिकेट जलने और फटने के समय बिना किसी धुँआ के जलता है।2. न्यूनतम राख - न्यूनतम अवशेष राख प्राप्त होता (चारकोल के वास्तविक वजन के 5 प्रतिशत से भी कम)3. उच्च स्थिर कार्बन एवं कैलोरिफिक मूल्य - सामान्य रूप से स्थिर कार्बन का संकेद्रण लगभग 82 प्रतिशत होगा। चारकोल ब्रिकेट का कैलोरिफिक मूल्य 7500 किलो कैलोरी/किलो ग्राम होता है।4. गंधहीन - बायोमास चारकोल ब्रिकेट में न्यूनतम वाष्पशील पदार्थ होते हैं, इस तरह यह गंध की संभावना को दूर कर देता है।5. लम्बे समय तक दहन - सामान्य लकड़ी की तुलना यह दो गुणा लम्बे समय तक जलता है।6. चिनगारी रहित - सामान्य लकड़ी की तुलना में चारकोल ब्रिकेट्स अधिक चिनगारी उत्पन्न नहीं करते।7. कम दरारें और बेहतर मजबूती - कम दरारें और बेहतर मजबूती चारकोल को लम्बे समय तक जलने में सक्षम बनाता है। इस संबंध में और अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें -निदेशक,श्री ए.एम.एम. मुरुगप्पा चेट्टीयार शोध केन्द्र,तारामणि, चेन्नई - 600113 (तमिलनाडु)फोन नं- 044 22438937044 22434268044 22434268 स्रोत: www.amm-mcrc.org