पुआल बक्साः ईंधन बचत करने वाली सस्ती तकनीक पुआल बक्सा एक साधारण और सस्ता उपकरण है, जिसका विकास गृह विज्ञान विस्तार विभाग, गृह विज्ञान महाविद्यालय और टीएनएयू, मदुरै ने किया है। यह वाष्पीय रूप से इंसुलेटेड बक्सा है, जो भीतर के ताप को बाहर जाने से रोकता है और इस तरह खाना पकाने या सामग्री को गर्म करने के लिए वाष्पीय ऊर्जा की बचत और उसका भंडारण करता है। पुआल बक्सा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि कचरे, जैसे पुआल और भूसी का उपयोग करता है। पुआल बक्सा का निर्माण आवश्यक सामग्री निम्नलिखित आकार का बक्सा लंबाई- 45 सेंमी, चौड़ाई - 45 सेंमी, गहराई - 45 सेंमी (बक्सा लकड़ी, गत्ते का बक्स, बाँस की टोकरी या सीमेंट की छोटी टंकी हो सकती है) इंसुलेटिंग सामग्री पुआल / धान की भूसी / लकड़ी का रेशा / लकड़ी का बुरादा जूट का थैला निर्माण गत्ते के बक्से को तैयार रखा जाता है बक्से को पुआल से भर दें बक्से के बराबर का जूट का तकिया बना कर पुआल से भर दिया जाता है खाना पकाने की विधि (उदाहरण के लिए - चावल) धोये हुए चावल को एक बर्तन में लें चावल की दोगुनी मात्रा में बर्तन में पानी डालें इसे 10 मिनट तक आग पर पकायें पुआल बक्से के बीच में बर्तन के लिए जगह बनायें पुआल से भरे जूट के तकिये को इसके ऊपर रखें चावल 45 मिनट के बाद अपने ही ताप से पक जाता है (5-6 घंटे तक गरम भी रहता है) लागत लाभ विश्लेषण विवरण गैस स्टोव पुआल बक्सा पकने का समय दो घंटे प्रति दिन एक घंटा प्रति दिन ईंधन का खर्च पाँच रु पये प्रति दिन ढाई रुपये प्रति दिन इस तरह ईंधन और उसके खर्च में 50 प्रतिशत तक की बचत की जा सकती है। रख-रखाव पुआल बक्से की देखभाल में अधिक खर्च नहीं आता है। इनमें सावधानी बरतें - पुआल को साफ-सुथरा रखें और पके हुए भोजन या फफूंद से उसे भींगने न दें हर पखवाड़े में एक या दो घंटे के लिए पुआल को धूप में सुखायें लाभ सुरक्षित और सामान्य उपयोग लागत प्रभावी और आसान रख-रखाव पकाने में न्यूनतम समय - खाना पकाने की यह विधि खाना को उबालने और पकाने के लिए न्यूनतम समय लेती है। तापमान को बनाये रखना- पुआल बक्से में खाना पकाने के लिए जरू री तापमान को छह घंटे तक बचा कर रखा जा सकता है। इसमें पकाये गये चावल को पांच घंटे तक इसका तापमान 61 डिग्री सेंटी ग्रेड बना रहा, जबकि बाहर रखे गये चावल का तापमान मात्र 35 डिग्री सेंटी ग्रेड था। उत्तम गुणवत्ता का भोजन- इस उपकरण में पकाया गया भोजन सुगंध, स्वाद, रंग और रूप में अन्य विधियों द्वारा पकाये गये भोजन से अच्छा होगा। पौष्टिकता का न्यूनतम ह्रास- चूंकि पकाने का माध्यम भोजन सामग्री द्वारा पूरी तरह सोख लिया जाता है, इसमें पौष्टिकता का न्यूनतम ह्रास होता है। संसाधन बचाता है- यह तकनीक ईंधन, पैसा, श्रम और समय की बचत करती है और स्वास्थ्य के खतरों को भी रोकती है। खाना पकाने का 58 प्रतिशत समय और ईंधन पर होनेवाले खर्च का 44 प्रतिशत बचत का पता लगाया गया है। स्रोत - गृह विज्ञान, प्रसार विभाग गृह विज्ञान कॉलेज व अनुसंधान संस्थान, टीएनएयू, मदुरई- 625104