बायोगैस के लाभार्थी से अक्सर पूछे गये प्रश्न क्रम.सं. प्रश्न लाभार्थी का उत्तर वैज्ञानिक की राय 1. क्या आपको कभी पचित घोल के आस – पास मक्खी या मच्छर नजर आते हैं? नहीं पिछले चार वर्षों में कभी भी मक्खी, मच्छर या कोई भी जीवाणु पचित घोल के आसपास नहीं दिखे है। वैज्ञानिकों की नजर में ऐसा क्यों? मक्खी एवं मच्छर अक्सर ऐसे स्थानों पर पाए जाते हैं जहाँ कुछ ऊर्जा खाद्य सामग्री उपलब्ध हो। पूर्ण पचित घोल में ऐसी कोई उर्जा खाद्य सामग्री नहीं पायी जाती जिसकी वजह से मक्खी या मच्छर उसके आस – पास पहुंचे। 2. बायोगैस संयंत्र को चलाने के लिए क्या किसी तरह के रख – रखाव की जरूरत पड़ती है? पिछले चार सालों में यह पाया गया है कि बायोगैस संयंत्र के सड़ान कक्ष (डायजेस्टर) के रख – रखाव की कोई जरूरत नहीं पड़ती। साप्ताहिक गैस पाईप की जाँच करनी पड़ती है ताकि उससे यह निश्चित हो जाये कि इसमें कोई गैस रिसाव तो नहीं। डोमनुमा बायोगैस संयंत्र ईंट – सीमेंट से बना होता है जिसमें सामान्यता किसी प्रकार के रख – रखाव की आवश्यकता नहीं होती है। ड्रम नुमा बायोगैस संयंत्र में समय – समय पर लोहे के ड्रम को जंग से बचाने के लिए बहरी सतह पर रंग किया जाना चाहिए। 3. बायोगैस संयंत्र की अवायविय प्रक्रिया की शुरूआत करते हुए आपको किसी चुनौती का सामना करना पड़ा ? नहीं, वैज्ञानिक द्वारा बताये गये मापक निशान तक पानी एवं गोबर के घोल को एक साथ भर दिया तत्पश्चात गैस सुचारू रूप से उत्पन्न हो रही है। इसके लिए हमें किसी भी प्रकार की मशीन, बिजली इत्यादि की आवश्यकता नहीं हुई। अवायवीय प्रक्रिया एक तरह से प्राकृतिक एवं सामान्य प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया से किसी भी प्रकार के कार्बनिक पदार्थ से बायोगैस बनायी जा सकत है। अगर कभी इस प्रक्रिया से गैस का उत्पादन बहुत देरी से हो तो ऐसी स्थिति में पास के किसी पुराने संयंत्र से किण्वित स्लरी लाकर डाल देनी चाहिए ताकि मीथेन उत्पन्न करने वाले जीवाणुओं की मात्रा में वृद्धि हो जाये। 4. प्रतिदिन गोबर एवं पानी के घोल करने में कोई परेशानी ? नहीं, प्रतिदिन के गोबर को पशुशाला से उठाकर रोड़ी में डालने के बजाय गोबर संयंत्र के मिक्सिंग टैंक में डाल दिया जाता है। मिश्रित (मिक्सिंग टैंक) में लगाये हुए झरने की मदद से घोल आसानी से तैयार हो जाता है। घोल तैयार करने के लिए कोई अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता नहीं पड़ती। 5. बायोगैस को उपयोग लेने में कोई परेशानी हुई? शुरुआती दिनों में बायोगैस कम जलती थी परन्तु बायोगैस पूर्ण रूप से अपनी दक्षता के साथ जलती है। शुरूआती दिनों में बायोगैस के गैस मिश्रण में कार्बन – डाई – ऑक्साइड ज्यादा होती है एवं मीथेन कम। इस बजह से शुरूआती में बायोगैस के जलने में दिक्कत आती है परंतु 7 – 8 दिनों बाद जब मीथेन की मात्रा कार्बन – डाई – ऑक्साइड से ज्यादा हो जाती है तब यह पुर्ण रूप से अपनी दक्षता के साथ ज्वलित होती है। बायोगैस का उपयोग चुल्हे द्वारा खाना पकाने में लेते समय किन – किन बातों का ध्यान रखना पड़ता है। पहली ध्यान रखने योग्य बात यह है कि बायोगैस हल्की नीली लौ के साथ जलनी चाहिए एवं दूसरी, लौ की उंचाई चुल्हे से 2.5 से 3.0 से. मी. होनी चाहिए। बायोगैस संयंत्र लैब लाभ – हानि का लेखा - जोखा दो घनमीटर के बायोगैस संयंत्र के लिए प्रतिदिन 50 किग्रा. गोबर तथा बराबर मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। प्रतिवर्ष गोबर की आवश्यकता 365 x 50 = 18250 कि. ग्रा. प्रतिवर्ष पानी की आवश्यकता 365 x 50 = 18250 कि. ग्रा. कुल मात्रा (गोबर + पानी) = 36500 कि. ग्रा. एक 2 घनमीटर के बायोगैस संयंत्र को लगातार एक महीने तक काम में लें तो 26.5 कि. ग्रा. द्रवीभूत पेट्रोलियम गैस (एल. पी. जी.) की बचत होती है यानि लगभग दो गैस सिलेण्डर की बचत। दो गैस सिलेण्डर की लागत 2 x 380 = 760 रू. (प्रति सिलेण्डर कीमत वर्तमान दर लगभग 380 रू.) प्रति वर्ष बचत 760 x 12 = 9120 रू. संयंत्र में डाली बायोगैस स्लरी का लगभग 25 प्रतिशत भाग गैस में परिवर्तित हो जाता है एवं लगभग 75 प्रतिशत भाग बायोगैस स्लरी (बायोखाद) के रूप में प्राप्त होता है यानी 9 टन मात्रा गैस में परवर्तित हो जाती है तथा 27 टन गीली स्लरी के रूप में प्राप्त होती है। बायोगैस स्लरी को हवा में 25 – 30 प्रतिशत नमी तक सुखाने पर प्राप्त खाद की मात्रा 10800 कि. ग्रा. या 10.8 टन होती है। कुल व्यय (प्रथम वर्ष) दो घनमीटर बायोगैस संयंत्र निर्माण खर्च रू. 27860.00 यदि गोबर 1 रू. प्रति कि. ग्रा. की दर से ख़रीदा जाए रू. 18250.00 कुल खर्च = रू. 46110.00 प्राप्तियाँ (प्रथम वर्ष) अनुदान रू. 9000.00 गैस (ईंधन के रूप में) रू. 9120.00 बायोगैस स्लरी (10.8 टन) को रू. 32400.00 3 रूप प्रति कि. ग्रा. की दर से बेचा जाए कुल प्राप्तियाँ = रू. 50520.00 इस आधार पर हम मानकर चल सकते हैं कि प्रथम वर्ष में लाभ नहीं होता है। आने वाले वर्षों में लाभ, हानि की मात्रा इस प्रकार रहेगी – वर्ष व्यय (रू. प्राप्ति (रू.) शुद्ध लाभ (रू.) द्वितीय 18250.00 41520 23270.00 तृतीय 18250.00 41520 23270.00 चतुर्थ 18250.00 41520 23270.00 पंचम 18250.00 41520 23270.00 कुल 23270.00 इस अधर पर 2 घनमीटर बायोगैस संयंत्र प्रतिवर्ष लगभग 23000/- की शूद बचत करा वित्तीय लाभ प्रदान करता है। दीनबंधु बायोगैस संयंत्र को बनवाने हेतु आवश्यक सामग्री की मात्रा सामग्री संयंत्र की क्षमता (घन मीटर में) एक दो तीन चार छ: ईंट (पक्की, स्टैंडर्ड साइज) 800 1100 1500 1900 2500 सीमेंट (50 किलो बैग) 9 15 19 25 33 गिट्टी (घ. मी.) 1 1.27 1.55 1.98 2.54 रेती (घ. मी,) 2 3.50 4.50 6.0 8.0 पी. वी. सी. पाईप (1” व ¾ “ व्यास) 2 2 2.3 2.6 2.6 बायोगैस चूल्हा व गैस वाल्व सेट (नग) 1 1 1 1 1 इपोक्सी पेंट (लीटर) 1 1.5 1.5 2.5 3 कुल लेबर दिवस 20 24 32 40 60 कुल कारीगरी दिवस 10 12 16 20 30 बायोगैस को रसोई घर तक ले जाने के लिए एच. डी. पी. ई. पाईप का इस्तेमाल करें। कैसे लगवाये बायोगैस संयंत्र राजस्थान राज्य के किसी भी लाभार्थी को बायोगैस संयंत्र बनवाने के लिए सबसे पह्ले बायोगैस विकास एवं प्रशिक्षण केंद्र, उदयपुर पर सम्पर्क करना होता है। लाभार्थी के पास उपलब्ध पशु एवं परिवार में रहने वाले सदस्यों के आधार पर बायोगैस संयंत्र की क्षमता का निर्धारण किया जाता है। बायोगैस संयंत्र के निर्माण के लिए एक प्रशिक्षण कारीगर की जरूरत होती है जिसकी सूची लाभार्थी को बायोगैस विकास एवं प्रशिक्षण केंद्र उदयपुर से मिल सकती है। किसी भी बायोगैस संयंत्र पर केंद्रीय वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए उक्त संयंत्र का बायोगैस विकास एवं प्रशिक्षण केंद्र के कर्मचारियों द्वारा संयंत्र निर्माण के स्थान का एवं संयंत्र बनने के बाद संयंत्र को चालु अवस्था का भौतिक सत्यापन करवाना अनिवार्य है। दोनों सत्यापन के बाद लाभार्थी को केंद्रीय अनुदान राशि चेक द्वारा दी जाएगी। संयंत्र को बनवाने के लिए संयंत्र की कुल लागत का प्रारंभिक भुगतान स्वयं लाभार्थी को करना होगा। दीनबंधु बायोगैस संयंत्र के माप (प्लास्टर के बाद का माप) क्र. सं. 2 घन मीटर 3 घन मीटर 4 घन मीटर 1 1275 मि. मि. (4’ 3”) 1450 मि. मि. (4’9”) 1590 मि. मि. (5’3”) 2 510 मि. मि. (1’8”) 580 मि. मि. (1’10”) 636 मि. मि. (2’2”) 3 75 मि. मि. (0’3”) 75 मि. मि. (0’3”) 100 मि. मि. (0’4”) 4 2550 मि. मि. (8’6”) 29000 मि. मि. (9’6”) 3180 मि. मि. (10’6”) 5 245 मि. मि. (0’3”) 350 मि. मि. (1’2”) 420 मि. मि. (1’5”) 6 175 मि. मि. (0’7”) 200 मि. मि. (0’8”) 240 मि. मि. (0’10”) 7 75 मि. मि. (0’3”) 100 मि. मि. (0’4”) 115 मि. मि. (0’5”) 8 470 मि. मि. (1’7”) 575 मि. मि. (1’11”) 645 मि. मि. (2’2”) 9 597 मि. मि. (2’0”) 667 मि. मि. (2’2.3) 748 मि. मि. (2’2.3) 10 660 मि. मि. (2’2”) 790 मि. मि. (2’7”) 890 मि. मि. (2’11”) 11 400 मि. मि. (1’4”) 430 मि. मि. (1’5”) 460 मि. मि. (1’7”) 12 262 मि. मि. (0’10.3”) 277 मि. मि. (0’11”) 317 मि. मि. (1’0”) 13 1000 मि. मि. (3’3”) 1000 मि. मि. (3’3”) 1000 मि. मि. (3’3”) 14 1650 मि. मि. (5’5”) 2325 मि. मि. (7’8”) 2890 मि. मि. (9’6”) 15 155 मि. मि. (0’6”) 175 मि. मि. (0’7”) 194 मि. मि. (0’8”) 16 75 मि. मि. (0’3”) 75 मि. मि. (0’3’’) 75 मि. मि. (0’4.5’’) बारहवीं पंचवर्षीय योजना के तहत बायोगैस विकास एवं प्रशिक्षण की भारत सरकार के द्वारा मान्यता प्राप्त केन्द्रों की सूची केंद्र के नाम कार्यक्रम समन्वयक के नाम पता केंद्र में आने वाले राज्य बी. डी. टी. सी., उदयपुर डॉ. दीपक शर्मा डिपार्टमेंट ऑफ़ रिन्यूबल एनर्जी इंजीनियरिंग सी. टी. ए. ई. उदयपुर संपर्क - 0294 –2471068 (ऑ) मो. - 9414160221 राजस्थान गुजरात एवं दिव – दमन बी. डी. टी. सी., आई. आई. टी. दिल्ली डॉ. वी. के. विजय सेंटर फॉर रूरल डेवलपमेंट एंड टेक्नोलॉजी आईआईटी दिल्ली फोन – 011 – 26596351 हरियाणा उत्तरप्रदेश एवं एन.सी.आर. दिल्ली बी. डी. टी. सी., टी. एन. ए. यू कोयम्बटूर डॉ. एस. कामराज डिपार्टमेंट ऑफ बायोएनर्जी, एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, तमिलनाडु एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, कोयम्बटूर फोन – 0422 – 6611526, 527 तमिलनाडु पांडिचेरी केरेला अंडमान निकोबार एवं लक्ष्यद्वीप बी. डी. टी. सी., आई. आई. टी. गुवाहाटी डॉ. पिनकेशर महंता डिपार्टमेंट ऑफ़ मैकेनिकल इंजीनियरिंग आईआईटी, गुवाहाटी, असम फोन न.- 0361 – 2582651/ 2662 सभी उत्तरी पूर्वी राज्य सिक्किम एवं पश्चिम बंगाल के साथ बी. डी. टी. सी., इंदौर डॉ. एस. पी. सिंह सेंटर ऑफ़ एनर्जी स्टडीज एंड रिसर्च देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर फोन न. – 0731 – 2460309 छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र बी. डी. टी. सी., पी. ए. यू. लुधियाना डॉ. सरबजीत सिंह सूच डिपार्टमेंट ऑफ़ सिविलइंजीनियरिंग पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लुधियाना मो. 09872084513 पंजाब हिमाचल प्रदेश, उत्तरखंड एवं जम्मू कश्मीर बी. डी. टी. सी., आई. आई. टी.के भुनेश्वर डॉ. स्नेहाशिष मिश्रा कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी भुनेश्वर मो. – 9437110305 आंध्रप्रदेश, उड़ीसा, बिहार एवं झारखण्ड बी. डी. टी. सी., बैंगलोर डॉ. वी. कुमार गौड़ा डिपार्टमेंट ऑफ़ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चर साइंस जी. के. वी. के. बैंगलोर मो. 9901069131 गोवा एवं कर्नाटका स्त्रोत: नवीन एवं नवीकरण ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार