प्रस्तावना बायोगैस से मिलने वाले स्वच्छ एवं सुविधाजनक ईंधन, प्रकाश की व्यस्था एवं बायो खाद की उपलब्धता के महत्व को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2013 – 14 के माध्यम से राज्य में 25 हजार बायोगैस प्लांट्स लगाने की घोषणा की है। बायोगैस प्लांट की स्थापना हेतु कम से कम 50 मीटर का स्थान, कम से कम 5 जानवर यथा गाय व भैंस, 50 लिटर पानी प्रतिदिन एवं बायोगैस प्लांट निर्माण के लिए 5 से 10 हजार रूपये की राशि की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त लाभार्थी को बायोगैस के इस्तेमाल में उसकी रुचि होना आवश्यक है। अत: बायोगैस के इस्तेमाल में उसकी रुचि होना आवश्यक है अत: बायोगैस प्लांट्स गरीब परिवारों के साथ अन्य सभी ग्रामीणजनों को उपलब्ध कराया जाए। बायोगैस की महत्वत्ता स्पष्ट है, लेकिन इसको स्थापित करने, सामान्यजन को प्रोत्साहित करने तथा इसकी उपयोगिता के बारे जनसामान्य को जानकारी देने हेतु प्रत्येक स्तर पर प्रोत्साहन एवं समन्वय की आवश्यकता है जिसमें सरकारी मशीनरी के साथ – साथ गैर सरकारी संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है। योजना के उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ता, सुलभ व स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना। कृषि के लिए बायो खाद उपलब्ध कराना। लकड़ी हेतु जगंलों के कटाई को कम करना। ग्रामीण क्षेत्रों में रौशनी की वैकल्पिक सुविधा उपलब्ध कराना। पर्यावरण संरक्षण। योजना की विशेषताएं यह शतप्रतिशत राज्य वित्त पोषित योजना है। यह राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ व सुविधाजनक ईंधन, रौशनी, बायो खाद उपलब्ध होगी। योजनान्तर्गत उपलब्ध राशि के लिए बायोगैस प्लांट की स्वीकृति जिला परिषद् द्वारा योजना के देशा निर्देशानुसार जारी की जाएगी। योजना के तहत संयंत्र निर्माण में दीनबंधु मॉडल को प्राथमिकता दी जाएगी। सुविधानुसार अन्य मॉडलों के बायोगैस संयंत्र लगाये जा सकेंगे लेकिन अनुदान राशि के अधिकतम सीमा लागू रहेगी। बायोगैस संयंत्र के साथ एक चुल्हा एवं दो गैस लालटेन उपलब्ध करायी जाएगी। पात्रता लाभार्थी व्यक्ति ग्रामीण क्षेत्र का निवासी हों। लाभार्थी की वरीयता निर्धारित करते समय बीपीएल परिवार, अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति परिवार, एकल महिला परिवार, सीमांत कृषकों को प्राथमिकता दी जाएगी। लाभार्थी के पास कम से कम 50 वर्गमीटर का स्थान, 5 या 5 से अधिक जानवर (यथा गाय व भैंस) हों, 50 लिटर प्रतिदिन पानी की उपलब्धता तथा लाभार्थी 5 से 10 हजार निवेश करने की आर्थिक क्षमता रखता हों। अनुदान योजना के तहत संयंत्र लागत का 60 प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में दी जायेगी तथा 40 प्रतिशत राशि लाभार्थी द्वारा स्वयं वहन की जाएगी। अनुदान की राशि 2 घनमीटर क्षमता वाले संयंत्र के लिए 16 हजार रूपये एवं 3 घनमीटर के लिए 20 हजार रूपये अधिकतम देय होगी। अनुदान की राशि 2 किस्तों में लाभार्थी सीधे उपलब्ध करायी जाएगी जो कि चैक द्वारा या ईसीएस के माध्यम से दी जाएगी। अनुदान राशि की प्रथम किश्त कुल अनुदान की 60 प्रथिष्ट होगी जो कि संयंत्र में डोम निर्माण उपरांत दी जाएगी तथा शेष 40 प्रतिशत राशि संयंत्र के कमिशन होने देय होगी। बायोगैस प्लांट की स्वीकृति एवं क्रियान्वयन बायोगैस प्लांट की स्वीकृति व क्रियान्वयन हेतु नोडल एजेंसी जिला स्तर पर जिला परिषद् (ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ) होगी। योजना का क्रियान्वयन जिले को इकाई मानकर किया जाएगा। जिला परिषद् के स्तर पर प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बायोगैस प्लांट लगाने हेतु आवेदन – पत्र आमंत्रित किया जायेंगे। इसके अलावे आरएसडीसी, गैर सरकारी संघठन तथा अन्य संस्थाएं भी लोगों को प्रोत्साहित कर आवेदन करा सकेगी। आवेदन – पत्रों की छटनी निर्धारित मापदंडों के आधार पर जिला परिषद् एवं गैर सरकारी संगठन के माध्यम से की जाएगी तथा गैर सरकारी संगठन द्वारा इसका फिल्ड सत्यापन उपरांत लाभार्थियों की अंतिम सूची तैयार की जाएगी। लाभार्थियों के लिए एक दिन की कार्यशाला आयोजित की जाएगी जिसमें उन्हें बायोगैस प्लांट के निर्माण, उपयोग व रख – रखाव के बारे में विस्तृत जानकारी दी जायेगा। साथ ही एक दिवस की एक्सपोजर विजिट, निकटतम क्षेत्र में कराया जायेगा। लाभार्थी को कार्यशाला एवं एक्सपोजर विजिट में भाग लेना अनिवार्य होगा। एक्सपोजर विजिट की व्यवस्था सम्बन्धित गैर सरकार संगठन द्वारा की जाएगी। गैर सरकारी संगठन के माध्यम से बायोगैस प्लांट के निर्माण हेतु पर्याप्त संख्या में राज मिस्त्रियों को प्रशिक्षण दिलाया जायेगा तथा वास्तविक कार्य के दौरान 6 माह तक राजमिस्त्री द्वारा किये जाने वाले निर्माण कार्य के निरिक्षण किया जाना अनिवार्य होगा। राजमिस्त्रियों को उपलब्ध कराए जाने वाले प्रशिक्षण का शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन किया जायेगा। योजना के अंतर्गत स्वीकृत की गई राशि का उपयोग होने के पश्चात् उपयोगिता प्रमाण – पत्र संबंधित गैर सरकारी संगठन द्वारा लाभार्थियों से प्राप्त कर जिला परिषद् को प्रस्तुत किया जायेगा। बायोगैस प्लांट के लाभार्थियों की एक यूजर कमेटी बनाई जाएगी। इस कमेटी को तकनीकी ज्ञान व सहायता, संबंधित गैर सरकारी संगठन द्वारा उपलब्ध कराया जायेगा। इस समिति का मुख्य कार्य बायोगैस प्लांट की स्थापना व उसके उपयोग को सुनिश्चित करना होगा। इस कमेटी में बायोगैस प्लांट धारकों के अलावा गैर सरकारी संगठन का एक प्रतिनिधि अनिवार्य रूप से सम्मिलित होगा। यूजर कमेटी एक ग्राम पंचायत पर एक अनिवार्य रूप से होगी। यदि एक ग्राम में 10 या अधिक बायोगैस प्लांट है तो ग्राम स्तर पर यूजर कमेटी बनाई जा सकेगी। बायोगैस प्लांट लगाने व उसके लम्बे समय तक उपयोग के लिए आवश्यक निर्देश सरल हिंदी भाषा में लिखकर लाभार्थी को उपलब्ध कराये जायेंगे। गैर सरकारी संगठन का चयन व उसकी भूमिका गैर सरकारी संगठन का चयन जिला स्तर पर किया जायेगा। चयन प्रक्रिया एवं उनके दायित्व व अन्य कार्यों के संबंध में दिशा निर्देश अलग से जारी किये जायेंगे। गैर सरकारी संगठन को बायोगैस प्लांट लगाने व उनके संचालन करने का अनुभव आवश्यक होगा। गैर सरकारी संगठन द्वारा जिस क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है, उस क्षेत्र हेतु उसे प्राथमिकता दी जायेगी। गैर सरकारी संगठन को कार्य करने के लिए निर्धारित प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करायी जायेगी जो प्रति बायोगैस संयंत्र 4500/- रूपये होगी। रूपये 2000/- संयंत्र की स्वीकृति पर तथा 2000/- रूपये कमिशन होने पर तथा शेष 500/- रूपये संयंत्र के 2 वर्ष तक कार्यरत रहने पर दी जाएगी। इस राशि का उपयोग गैर सरकारी संगठन द्वारा प्रशासनिक व्यय एवं बायोगैस संयंत्र लगाने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक कार्यकर्ता की नियुक्ति करने में किया जायेगा। गैर सरकारी संगठनों द्वारा प्रत्येक बायोगैस प्लांट के स्थापित होने के उपरांत कम से कम 2 वर्ष तक कार्यशील रखने का दायित्व होगा। गैर सरकारी संगठनों द्वारा लाभार्थियों को एक दिवस की कार्यशाला व एक्सपोजर विजिट करायी जायेगी इसका व्यय उक्त प्रोत्साहन राशि में से किया जायेगा। रूपये 500/- प्रति संयंत्र के आधार पर प्रशासनिक व्यय करने का प्रावधान होगा। इसमें से रूपये 400/- जिला परिषद् को तथा रूपये 100/- मुख्यालय पर उपलब्ध कराए जायेंगे। इस राशि का उपयोग स्टेशनरी, प्रचार – प्रसार, वाहन (किराया अनुबंध ईंधन व्यय) तकनीकी सहायता एवं वेबासाइट संचालन व्यय, कम्प्युटर ऑपरेटर मशीन, कार्यशाला आयोजन, संयंत्र के फोटो का व्यय तथा ऐसे समस्त व्यय जो योजना को प्रभावी रूप से लागू करने में आवश्यक हों, पर किया जा सकेगा। राशि का हस्तांतरण योजना के तहत राज्य स्तर से मांग के अनुरूप राशि जिला परिषद् को हस्तांतरित की जायेगा। जिला परिषद् द्वारा अनुदान राशि का हस्तान्तरण सीधे ही लाभार्थी को एकमुश्त बायोगैस संयंत्र के गैस उत्पादन प्रारंभ करने पर दिया जायेगा। बायोगैस संयंत्र स्थापित होने के सम्बंध में निर्धरित प्रारूप में उपयोगिता प्रमाण – पत्र गैर सरकारी संगठन द्वारा तैयार कर जिला परिषद् में प्रस्तुत किउअ जायेगा जिसको मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद् के प्रतिनिधि द्वारा भौतिक सत्यापन कर अंतिम रूप से सी. सी. जारी की जाएगी। यह निरिक्षण बायोगैस संयंत्र के गैस उत्पादन प्रांरभ करने के पश्चात् किया जाएगा। जिला परिषद् स्तर पर खातों का संधारण व अंकेक्षण कराया जाएगा। गैर सरकारी संगठन को योजना के तहत प्राप्त राशि का चार्टड अकाउंटेंट से अंकेक्षण कराना होगा। कार्य का मॉनिटरिंग इंटीग्रेटेड वर्कस मॉनिटरिंग सिस्टम का माध्यम से कार्यों की स्वीकृति, प्रगति, राशि हस्तांतरित एवं यू. सी. व सी. सी का रिकार्ड संधारण किया जायेगा। कार्य की प्रगति के संबंध में कम से कम दो फोटो अपलोड की जायेंगी। प्रथम प्रथम फोटो कार्य प्रारंभ होने एवं दूसरा फोटो कार्य पूर्ण होने पर अपलोड किया जायेगा। फोटो जी. पी.एस. सिस्टम के माध्यम से लिए जायेंगे जिससे एक संयंत्र का दो जगह फोटो न हो सके। राज्य स्तर पर ग्रामीण विकास विभाग उक्त योजना का प्रशासिनक विभाग होगा तथा जिला स्तर पर जिला परिषद् (ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ) नोडल संस्था होगी। स्त्रोत: ग्रामीण विकास मंत्रालय , भारत सरकार