परिचय बायोगैस एक ज्वलनशील गैसीय मिश्रण है जिसे मुख्यतः घरेलु ईंधन के रूप में उपयोग में लिया जाता है। बायोगैस संयंत्र लगाकर घर में ही एक अतिरिक्त उर्जा का भंडार स्थापित किया जा सकता है। यह एक बहुत ही साधारण संयंत्र है जिसमें गोबर व अन्य वानस्पतिक पदार्थों को वायु की अनुपस्थिति में सड़ाकर गैस बनाई जाती है। बायोगैस संयंत्र पशुपालक खेतिहर परिवारों के लिए बहुउद्देश्य महत्व रखता है। यह अच्छी खाद एवं स्वच्छ ईंधन के साथ ही वातावरण को प्रदूषित होने से भी रोकता है। गावों में गोबर को प्राय: सड़ने के लिए सड़क के किनारे पर डाल दिया जाता है। जिससे वातावरण प्रदूषित होता है और कई प्रकार कि बीमारियाँ भी फैलती है। अत: संयंत्र स्थापित करने से गाँवों का वातावरण स्वच्छ रहता है साथ ही गैस को ईंधन के रूप में उपयोग लेकर वनों के कटाव को रोका जा सकता है। बायोगैस संयंत्र निर्माण से स्थानीय कारीगरों को रोजगार उपलब्ध होता है। बायोगैस विकास एवं प्रशिक्षण केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में बायोगैस संयंत्र निर्माण सम्बन्धी प्रशिक्षण व पुराने बायोगैस संयंत्रों की मरम्मत एवं रखरखाव के लिए बायोगैस विकास एवं प्रशिक्षण केंद्र, उदयपुर राजस्थान, गुजरात एवं दिव – दमन राज्य के विभिन्न जिलों में जिला परिषद् एवं स्वयं सेवी संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में ग्रामीण कारीगरों को प्रशिक्षित किया जाता है ताकि उन्हें अपने ही निकटवर्ती गावों में स्वरोजगार मिल सके। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में एक दिवसीय बायोगैस उपभोक्ता शिविर लगाकर ग्रामीण को बायोगैस संयंत्र, इसकी उपयोगिता एवं प्रतिदिन होने वाले फायदों से भी अवगत कराया जाता है। राष्ट्रीय बायोगैस एवं खाद प्रबंधन कार्यक्रम नवीन नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारतसरकार द्वारा संचालित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छोटे आकर के घरेलू बायोगैस संयंत्रों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को खाना पकाने के लिए ईंधन एवं खेती के लिए जैव खाद उपलब्धता करवाना है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों एवं क्षेत्रों के लाभार्थियों को बायोगैस संयंत्र की स्थापना के लिए केन्द्रीय अनुदान दिया जाता है। योजना के उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में सस्ता, सुलभ व स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना। कृषि के लिए बायोखाद उपलब्ध कराना। लकड़ी हेतु जंगल की कटाई को कम करना। ग्रामीण क्षेत्रों में रोशनी एवं पंपिंग के लिए वैकल्पिक सुविधा उपलब्ध कराना। पर्यावरण संरक्षण। स्त्रोत: नवीन एवं नवीकरण ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार