ग्रीन हाउस इफेक्ट (Greenhouse effect) कैसे काम करता है? ग्रीन हाउस गैसेस (greenhouse gases) पृथ्वी के सबसे ऊपरी परत में होते हैं। जब सूर्य की किरणें या फिर सूर्य की ऊर्जा पृथ्वी की तरफ आती है तो सूर्य की ऊर्जा ग्रीनहाउस गैसेस (greenhouse gases)में से गुजर कर पृथ्वी पर आती है। जब सूर्य की ऊर्जा पृथ्वी पर आती है तब पृथ्वी उस उर्जा को वापस सौरमंडल में इंफ्रारेड किरणों के रूप में भेजती है। तब इन इंफ्रारेड किरने ग्रीनहाउस गैसेस के जाकर टकराते हैं। तब उनमें से कुछ ऊर्जा का सभी ओर विकिरण होता है। और उसमें से कुछ ऊर्जा सौरमंडल में वापस भेजी जाती है और कुछ ऊर्जा पृथ्वी पर वापस आती है। इसकी वजह से पृथ्वी और ज्यादा गर्म हो जाती है अब पृथ्वी का तापमान जीवन के पनपने के अनुकूल बन जाता है। इसी को ग्रीन हाउस गैसेस इफेक्ट (greenhouse effect) कहा जाता है। पृथ्वी पर अब ग्रीनहाउस गैसेस इफेक्ट (greenhouse effect) का बुरा असर क्यों हो रहा है? मानव अपनी जिंदगी को समृद्ध बनाने के लिए रोज नहीं औद्योगिक उपकरणों का इजाद कर रहा है इसी बढ़ती औद्योगिकरण से मानव के ऊपर बुरा असर हो रहा है। औद्योगिकरण से वातावरण में ग्रीनहाउस गैसेस (greenhouse gases) का प्रमाण बढ़ रहा है। कोयले का जलना, स्वयं चलित वाहनों का इस्तेमाल ज्यादा होना, मशीनों का ज्यादा इस्तेमाल करना और अन्य कुछ उद्योगों में से ग्रीनहाउस गैसेस का उत्सर्जन बहुत बड़ी मात्रा में हो रहा है। यह गैसेस वातावरण में जाकर पृथ्वी की चारों और एक चादर की तरह अपनी परत बना रही है। सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा जब पृथ्वी पर आती है तो पृथ्वी उसे वापस सौरमंडल में भी भेजती है लेकिन ग्रीनहाउस गैसेस का प्रमाण बढ़ने से पृथ्वी से बाहर भेजे जाने वाली ऊर्जा अब पृथ्वी के सौरमंडल में से बाहर नहीं जा रही है। उसको ग्रीनहाउस गैसेस के द्वारा वापस ज्यादा प्रमा IIण में पृथ्वी पर भेजा जा रहा है इसीलिए पृथ्वी का तापमान बढ़ गया है। जितना ग्रीन हाउस गैसेस (greenhouse gases) का प्रमाण बढ़ेगा उतना ही पृथ्वी का तापमान भी बढ़ेगा।