भूमिका भारत में बाढ़ बार-बार आने वाली आपदा है। प्रायः हर साल देश का कोई नकोई हिस्सा अलग-अलग मात्रा की बाढ़ की चपेट में आ जाता है। देश के विभिन्न भागों की जलवायु और वर्षा पद्धतियां अलग-अलग तरह की हैं और इस कारण यह भी महसूस किया जाता है कि जहां कुछ भाग गंभीर बाढ़ के चपेट में होते हैं वहां दूसरा भाग सूखे से प्रभावित रहता है। जनसंख्यास और विकास क्रियाकलापों में बढ़ोतरी के कारण कछारों को घेरने की प्रवृत्ति बनी हुई है जिसके फलस्वरूप पिछले वर्षों के दौरान और अधिक गंभीर प्रकृति की क्षतियां देखने में आई है। भारत में हिमपात सहित वार्षिक वर्षा अनुमानत 4000 बिलियन घनमीटर (बीसीएम) होती है। इसमें से मानसून के दौरान मौसमी हिमपात 3000 बीसीएम होता है। भारत में दक्षिण पश्चिम मानसून के प्रभाव के अधीन अधिकांश वर्षा (75%) जून से सितंबर (चार महीने) माह के दौरान होती है। सामान्य वार्षिक वर्षा राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में लगभग 100 मिलीमीटर से लेकर मेघालय में पूर्वोत्तर हिस्से में 10,000 मिलीमीटर तक भिन्न भिन्न मात्राओं में होती है। कोई भी ऐसा क्षेत्र, जो किसी समय बाढ़ से प्रभावित रहा है, यदि प्रभावी रूप से उसका संरक्षण न किया गया हो तो उसे बाढ़ प्रवण क्षेत्र के रूप में समझा जाता है। राष्ट्रीय बाढ़ आयोग द्वारा अपनी 1980 की रिपोर्ट में 329 मिलियन हैक्टेयर के कुल भौगोलिक क्षेत्र में से अनुपातन 40 मिलियन हैक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ प्रवण क्षेत्र माना गया है। कुछ ही समय पहले योजना आयोग द्वारा 10वीं पंचवर्षीय योजना के लिए गठित बाढ़ नियंत्रण कार्यक्रम विषयक कार्यकारी दल के अनुमानों के अनुसार बाढ़ प्रवण क्षेत्र 45.64 मिलियन हैक्टेयर है जिसमें से अनुमानतः 16.457 मिलियन हैक्टेयर क्षेत्र मार्च, 2004 के अंत तक संरक्षित था। बाढ़ की समस्या के अध्ययन बाढ़ की समस्या के अध्ययन के लिए भारत में नदियों को निम्न चार क्षेत्रों में बांटा जा सकता है - ब्रह्मपुत्र क्षेत्र गंगा क्षेत्र उत्तर पश्चिम क्षेत्र केंद्रीय भारत और डेक्कदन क्षेत्र इन क्षेत्रों की विशिष्ट समस्याएं है जिन पर सामान्य पक्षों सहित स्थानीय स्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए ध्यान दिया जाना है। देश को गंभीर बाढ़ के कारण बार - बार जान माल की भारी क्षति उठानी पड़ती है। देश के भीतर 1955, 1971, 1973, 1977, 1978, 1980, 1984, 1988, 1998, 2001 तथा 2004 के मानसून में बाढ़ के कारण गंभीर नुकसान हुआ था। केंद्रीय जल आयोग ने 1953 से 2004 तक आई बाढ़ के कारण हुई क्षति के आंकड़ों का संकलन किया है जिसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि जन-जीवन की औसत क्षति 1590 के बराबर तथा सार्वजनिक उपयोगिताओं की क्षति 806.89 करोड़ रु0 की रही है। उपर्युक्त के अलावा खड़ी फसलों, घरों, पशुओं आदि का भी नुकसान हुआ है। अदृश्य नुकसान भी हुआ है। बाढ़ की समस्या की देखभाल करने के लिए संरचनात्मक और साथ ही गैर संरचनात्मक दोनों प्रकार की स्कीमों का प्रयोग किया जाता है। संरचनात्मक उपायों मे ये शामिल हैं, जलाशय निर्माण, वाहिका सुधार, सीमांत तदबंध निर्माण, उभरे चबूतरों का निर्माण, गांवों को ऊँचा उठाना आदि। गैरसंरचनात्मक उपायों में ये शामिल हैं : बाढ़कृत मैदान क्षेत्रण, बाढ़ पूर्वानुमान और चेतावनी आदि। बाढ़ पूर्वानुमान नेटवर्क बाढ़ के कारण होने वाली क्षतियों को कम करने के उद्देश्य से केंद्रीय जल आयोग द्वारा एक गैरसंरचनात्मक उपाय के रूप में एक राष्ट्र-व्यापी बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली की स्थापना की गई है जोकि देश में 173 केंद्रों से बाढ़ पूर्वानुमान जारी करती है जिनमें से 145 केंद्र नदी चरण पूर्वानुमान के लिए हैं और 27 अंतर्वाह पूर्वानुमानों के लिए हैं। उपर्युक्त बाढ़ पूर्वानुमान नेटवर्क में शामिल 62 नदियां नीचे दी गई प्रमुख नदी प्रणालियों और राज्यों में स्थित है - नदी बेसिनवार वितरण क्र0सं0 नई प्रणाली एफएफ केंद्रो की संख्या 1 गंगा तथा इसकी वितरिकाएं 86 2 ब्रह्मपुत्र तथ इसकी वितरिकाएं 32 3 पूर्वी नदियां 10 4 महानदी बेसन 4 5 गोदावरी बेसिन 18 6 कृष्णा बेसिन 8 7 पश्चिम प्रवाही नदियां 15 योग 173 भारत में राज्यनुसार बाढ़ पूर्वानुमान केंद्रो की संख्या क्र.सं. राज्यों का नाम बाढ़ पूर्वानुमान स्टेशनों की संख्या स्त़र पूर्वानुमान स्टेशनों की संख्या अंर्तवाह पूर्वानुमान स्टेशनों की संख्या कुल 1. आंध्र प्रदेश 9 7 16 2. असम 24 0 24 3. बिहार 32 0 32 4. छत्तीसगढ़ 1 0 1 5. गुजरात 6 5 11 6. हरियाणा 0 1 1 7. झारखंड 1 4 5 8. कर्नाटक 1 3 4 9. मध्यप्रदेश 2 1 3 10. महाराष्ट्र 7 2 9 11. ओडिशा 11 1 12 12. त्रिपुरा 2 0 2 13. उत्तरप्रदेश 34 1 35 14. उत्तराखंड 3 0 3 15. पश्चिम बंगाल 11 3 14 16. दादरा और नगर हवेली 1 0 1 17. एनसीटी दिल्ली 2 0 2 जोड़ 147 28 175 बाढ़ प्रबंधन / नियंत्रण मूलत: राज्य सरकरों के अधिकार क्षेत्र में आता है जोकि आपातिक स्थिति के अनुसार बाढ़ प्रबंध संबंधी स्कीमें बनाते हैं। तथापि, केंद्र सरकार विभिन्न केंद्र प्रायोजित स्कीमों के माध्यम से राज्य सरकारों को सहायता और सहयोग प्रदान करती रही है। फोटो स्रोत: इंडिया वाटर पोर्टल स्रोत: नदी विकास और गंगा संरक्षण, जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार