व्यक्तिगत और सामुदायिक सोक पिट्स रसोईघरों और स्नानघरों से निकलने वाला गंदा पानी जो या तो ओवरफ्लो होता है या फिर कहीं किसी जगह ठहर जाता है, पर्यावरण के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बनता है। तमिलनाडु में कांचीपुरम जिले के श्रीपेरुंबुदूर ब्लॉक में पप्पनकुझी ग्राम पंचायत ने ग्रे-वॉटर के इस मुद्दे को संबोधित करने के लिए व्यक्तिगत और सामुदायिक सोक पिट्स यानी पानी सोखने वाले गड्ढों का निर्माण किया है। पूर्व स्थिति पप्पनकुझी ग्राम पंचायत में 254 घरों में 1016 लोगों की आबादी थी। इसमें लगभग 900 मीटर की 13 सड़कें थीं और दो ओवरहेड टैंक थे, जिनमें से प्रत्येक में 30,000 लीटर की क्षमता थी। पहले, किसी भी वॉटर ट्रीटमेंट प्रोसेस के अभाव में, ग्रामीण घरों से निकलने वाले पानी को खुले नाले, गलियों, खाली भूमि या जल निकायों में छोड़ा जाता था, जिसके परिणामस्वरूप सतही जल संदूषण, भूमि संदूषण और गंभीर जल जनित रोग फैलते थे। नये प्रयास जिला प्रशासन के सहयोग से 254 में से 93 घरों को मनरेगा के तहत व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा तैयार किया गया और 161 घरों को मनरेगा के तहत निर्मित जल निकासी चैनल से जोड़ा गया। सोख्ता गड्ढा, जिसे लीच पिट के रूप में भी जाना जाता है, एक ढका हुआ, झरझरा-दीवार वाला चैंबर है जो पानी को धीरे-धीरे जमीन में सोखने देता है और भूजल तालिका को रिचार्ज करने में मदद करता है। जल निकासी प्रणालियों के डिस्पोजल पॉइंट इसके अलावा, डिस्पोजल पॉइंट पर 18 और 16 घन मीटर के साथ दो क्षैतिज सोख्तों का निर्माण किया गया था और फ़िल्टर किए गए पानी को पेरिया एरी और राजनथंगल एरी के जल निकायों में छोड़ दिया गया। जल निकासी प्रणालियों के डिस्पोजल पॉइंट पर निर्मित, क्षैतिज सोख गड्ढे उच्च भूजल स्तर वाले समूहों के लिए उपयुक्त हैं। इसके बाद उपचारित ग्रे वॉटर का उपयोग कृषि कार्यों के लिए किया जा सकता है। ओडीएफ प्लस इन पहलों ने पंचायत को ओडीएफ प्लस के रास्ते पर लाकर पंचायत की स्वच्छता में बहुत योगदान दिया है। स्त्राेत: पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार।