भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली इसरो ने अपने 35वें पोलर सैटेलाइट लांच वेहिकल (पीएसएलवी-सी 33) को लांच किया। भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली का सातवां एवं अंतिम 1,425 किलोग्राम वाला आईआरएनएसएस को 28 अप्रैल 2016 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र शार, श्रीहरिकोटा से लांच किया गया। यह पीएसएलवी का 34वां और अपने 'एक्स्ट्रा लार्ज' विन्यास में तेरहवीं लगातार सफल मिशन था। माननीय प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली को समर्पित किया। 2016 की शुरुआत में पीएसएलवी ने सफलतापूर्वक आईआरएनएसएस-1एफ को लांच किया। यह आईआरएनएसएस का छठवां सैटेलाइट है जिसे 10 मार्च 2016 को लांच किया गया। आईआरएनएसएस-1ई को 20 जनवरी 2016 को लांच किया गया। इस श्रृंखला के चौथे सैटेलाइट आईआरएनएसएस-1डी को पीएसएलवी-वी27 के जरिये 28 मार्च 2015 को सफलापूर्वक लांच किया गया था और तीसरे भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली के आईआरएनएसएस-1सी को पीएसएलवी-सी26 को 16 अक्टूबर 2014 को लांच किया गया था। इससे पहले भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली की श्रृंखला की दो सैटेलाइटों आईआरएनएसएस-1ए एवं आईआरएनएसएस-1बी को पीएसएलवी के जरिये क्रमशः 1 जुलाई 2013 और 4 अप्रैल 2014 को सफलतापूर्वक लांच किया गया था। 20 मीटर की तुलना में बेहतर दृश्यता और सैटेलाइट आधारित नेविगेशन सेवा के लिए भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली का डिजाइन तैयार किया गया है। भारतीय हवाई क्षेत्र में जीपीएस सेवाओं को बेहतर बनाने एवं एकीकृत करने के लिए इसरो और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) की साझेदारी में एक उपग्रह आधारित विस्तार प्रणाली जीपीएस एडेड जियो संवर्धित नेविगेशन (जीएजीएएन) को तैयार किया गया। उपग्रहों के तीन जीसैट श्रृंखला- जीसैट-8, जीसैट-10, जीसैट-15 पहले से ही कक्षा में स्थापित हैं जो जीपीएस एडेड जियो संवर्धित नेविगेशन से लैस हैं। इस प्रणाली को हवा मार्ग संचालन के लिए 2013 प्रमाणित किया गया था। 2015 में इसे सटीक दृष्टिकोण के लिए 2015 में प्रमाणित किया गया था। 10 वीं एसपीआईई एशिया प्रशांत रिमोट सेंसिंग संगोष्ठी(4-7 अप्रैल, 2016) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय एवं एसपीआईई (प्रकाशिकी और फोटोनिक्स के लिए इंटरनेशनल सोसायटी) के तत्वाधान में चार दिवसीय एशिया प्रशांत रिमोट सेंसिंग संगोष्ठी 2016 का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का मकसद आपदा शमन और वैश्विक जलवायु परिवर्तन की बेहतर निगरानी के लिए रिमोट सेंसिंग प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करना था। संगोष्ठी का आयोजन नई पहल और सहयोगी अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को खड़ा करने को लेकर विचार-विमर्श के इरादे से की गई। नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन(नासा) के अधिकारी एवं फ्रेंच नेशनल स्पेस एजेंसी के अध्यक्ष सहित कई अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुख संगोष्ठी में शामिल हुए। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी आधारित उपकरण और शासन पर राष्ट्रीय बैठक दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में 7 सितंबर 2015 को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी आधारित उपकरण का विकास एवं शासन के मुद्दे पर एक दिवसीय बैठक का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों / विभागों की कार्य योजना पर विचार विमर्श करना था। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम को लेकर बेहद उत्साहजनक प्रतिक्रिया देखने को मिली। इसमें 60 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, 28 राज्यों एवं पांच केंद्र शासित राज्यों के 1200 से ज्यादा प्रतिभागियों ने शिरकत की। भारत सरकार के प्रधान सचिवों, अपर सचिव, संयुक्त सचिवों, राज्यों के मुख्य सचिवों, प्रधानमंत्री कार्यालय और कैबिनेट सचिवालय से वरिष्ठ अधिकारियों, केन्द्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ पदाधिकारियों, युवा प्रशासकों (2013 आईएएस अधिकारियों का ताजा बैच) शिक्षा एवं विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने इस बैठक में सक्रिय रूप से भाग लिया। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोगी की उपस्थिति में एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग कर शासन के सभी पक्षों में सुधार लाने के लिए नई पहल की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग सबसे शक्तिशाली माध्यम है। राष्ट्रीय बैठक के बाद, 125 परियोजनाओं को लेकर कार्यों की शुरुआत हो गई है। 17 दिसंबर 2015 तक 28 पायलट परियोजनाओं का क्रियान्वयन पूरा कर लिया गया जबकि 11 योजनाओं का काम प्रगति पर है। 17 पायलट परियोजनाओं में से कुछ को लेकर काम पूरा हो चुका है जबकि 14 परियोजनाओं में आगे विस्तार किया गया है। 56 परियोजनाओं में महत्वपूर्ण प्रगति की गई है और 52 के सिलसिले में परियोजना प्रस्ताव तैयार करने, कार्यप्रणाली और प्रदर्शन परियोजनाओं को लेकर चर्चा चल रही है।मंत्रालयों/विभागों के अनुरोध पर क्षमता निर्माण के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग के वास्ते चिह्नित किए अफसरों को इसरो/डीआरडीओ प्रशिक्षण मुहैया करा रहा है। अब तक, लगभग 2000 अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। मार्स ऑर्बिटर मिशन भारत के मार्स ऑर्बिटर मिशन को सफलतापूर्वक 24 सितंबर 2015 को पूरा कर लिया गया। इसका उद्देश्य मंगल ग्रह के लिए एक साल तक काम करना था। इसे सफलतापूर्वक 24 सितंबर, 2014 को मंगल ग्रह के एक दीर्घवृत्ताकार कक्षा में स्थापित किया गया था। बाद में, मार्स ऑर्बिटर यान सौर संयोजन के दौरान खुद को जुलाई 2015 में सफलतापूर्वक स्थापित करने में कामयाब रहा। यह अंतरिक्ष यान अभी अच्छी स्थिति में है। यह मंगल ग्रह की सतह और वहां के माहौल के बारे में महत्वपूर्ण सूचनाएं भेज रहा है। स्वदेशी क्रायोजेनिक जीएसएलवी का सफल प्रक्षेपण स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज(सीयूएस) से लैस भारत के भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान(जीएसएलवी-डी5) यानी जीसैट-6 का 27 अगस्त 2015 को सफल प्रक्षेपण किया गया। भू-तुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा में देश का उन्नत संचार सैटेलाइट है। इसरो का इस तरह का यह लगातार दूसर सफल प्रक्षेपण है। अगली पीढ़ी के जीएसएलवी का विकास जीएसएलवी-एमके III-जीएसएलवी-एमके III के प्रथम प्रायोगिक सब-ऑर्बिटल सैटेलाइट (एलवीएम3-एक्स/केयर मिशन) का श्रीहरिको से 18 दिसंबर 2014 को सफल प्रक्षेपण किया गया। इस यान में जटिल वायुमंडलीय परिस्थिति में काम करने की क्षमता है जिसमें 3775 किलोग्राम का क्रू मॉड्यूल एटमॉस्फूयिरक री-एंट्री एक्सपेरिमेंट(केयर) पैबस्त है। यह बंगाल की खाड़ी को कवर करेगा। क्रायोजेनिक इंजन सीई 20 के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं। समुद्र के स्तर की स्थिति को लेकर 12 परीक्षणों के सफल एकीकृत इंजन के विकास परीक्षण को पूरा किया गया, जो इंजन प्रणाली के संरचनात्मक अखंडता मान्य है और इंजन के प्रदर्शन को दर्शाता है। इस किस्म के 635 सेकंड में दो परीक्षण किए गए। इसके इंजन में पावर युक्त सी-25 क्रायोजेनिक जीएसएलवी-एमके III इस्तेमाल किया गया। इसका दिसबंर 2016 तक परीक्षण होना है जो अपने साथ एक संचार उपग्रह लेकर जाएगा। उपग्रह संचार के बुनियादी ढांचे का विस्तार तीन टन के जीसैट-15 का 15 नवंबर 2015 को प्रक्षेपण किया गया। यह एक तरह का संचार उपग्रह है जिसमें उपग्रह आधारित विस्तार प्रणाली जीपीएस एडेड जियो संवर्धित नेविगेशन(जीएजीएएन) लगा हुआ है। जीसैट-15 इसैट/जीसैट प्रणाली का विस्तार है जिससे डीटीएच, टीवी प्रसारण, डिजिटल सैटेलाइट न्यूज गेदरिंग व वीसैट सेवाओं में सुधार होगा एवं लाभ लिए जा सकेंगे। इसके अलावा देश के उन्नत संचार सैटेलाइट जीसैट- 6 का 27 अगस्त 2015 को सफलतापूर्वण प्रक्षेपण किया गया। इसमें भू-समकालिक स्थानांतरण ऑर्बिट लगे हुए हैं। इस उपग्रह के 6 मीटर एस-बैंड एंटीना को सफलतापूर्वक 30 अगस्त, 2015 को तैनात किया गया था। जीसैट-6 का इस्तेमाल उपग्रह आधारित मोबाइल संचार प्रणाली के लिए किया जाएगा। अंतरिक्ष में भारत का पहला मल्टी-तरंग दैर्ध्य वेधशाला अंतरिक्ष में भारत के पहले मल्टी-तरंग दैर्ध्य वेधशाला एस्ट्रोसैट को पीएसएलवी-सी 30 के जरिये 28 सितंबर 2015 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। एस्ट्रोसैट से सितारों और आकाशगंगाओं का अध्ययन संभव हो सका है। इस प्रक्षेपण के बाद एस्ट्रोसैट अपनी कक्षा में सक्रिय हो गया है। वैज्ञानिक समुदाय को अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने का मौका मुहैया करा रहा है। पीएसएलवी का व्यावसायिक प्रक्षेपण भारत के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान(पीएसएलवी) ने 2015 के दौरान सात देशों के 17 विदेशी उपग्रहों कक्षा में स्थापित किया है। ये निम्नलिखित हैं (ए) पीएसएलवी-सी28 के जरिये ब्रिटेने से 10 जुलाई 2015 को पांच विदेशी उपग्रहों को प्रक्षेपित किया गया जिसमें डीएमसी3-2, सीएमसी3-2, सीबीएनटी-1 और डी-ऑर्बिटसैल शामिल हैं। (बी) 28 सितंबर 2015 को एस्ट्रोसैट के साथ पीएसएलवी-सी30 के जरिये छह सहायक उपग्रहों 4एलईएमयूआर उपग्रह(अमेरिका), लापान-ए2(इंडोनेशिया), एनएलएस-14(कनाडा) का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया। (स) पीएसएलवी-सी29 के जरिये सिंगापुर के छह उपग्रहों का प्रक्षेपण किया गया जिसमें टेलिओज-2, प्राथमिक उपग्रह है। इसमें पांच सहायक उपग्रह है जिनमें दो छोटे उपग्रम (वीईएलओएक्स-सीएल, केंट रिज-1) और तीन नैनो सैटेलाइट (वीईएलओएक्स-II, एथनोजैट-1,गैलेसिया) शामिल हैं। 2015 में पीएसएलवी के जरिये 17 विदेशी सैटेलाइट लांच किए गए। अब तक भारत द्वारा प्रक्षेपित विदेशी उपग्रहों को संख्या 57 हो चुकी है। सार्क क्षेत्र के लिए सैटेलाइट पर पहल विदेश मंत्रालय के सहयोग से इसरो और डीओएस ने नई दिल्ली में 22 जून 2015 को ‘सार्क क्षेत्र के लिए उपग्रह एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी’ विषय पर एक सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन में प्रस्तावित ‘सार्क क्षेत्र के लिए सैटेलाइट’ के क्रियान्वयन के को लेकर विचार विमर्श किया गया। इसमें सभी सार्क देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। आपदा प्रबंधन सहायता देश में हाल में आए आपदाओं जैसे कि जम्मू कश्मीर में भूकंप, हुदहुद चक्रवात, जम्मू कश्मीर में भूस्खलन से निपटने में भारतीय रिमोट सेंसिंग,मौसम एवं संचार उपग्रहों से काफी मदद मिली। इन उपग्रहों के जरिये संभावित आपदाओं को लेकर समय पूर्व सूचना हासिल करने, आपदाओं में हुए नुकसान का अनुमान लगाने में मदद मिली। वर्ष 2014 में उत्तर नेपाल के सून कोशी नदी में भूस्खलन के कारण हुई ब्लॉकिंग औऱ मार्च 2015 के दौरान जम्मू कश्मीर के जंकसार क्षेत्र में पुक्तल नदी में भूस्खलन की भारतीय रिमोट सेंसिंग के जरिये लगातार निगरानी की जाती रही। इससे संबंधित एजेंसिया बाढ के हालात को लेकर रोज-ब-रोज सूचनाए मुहैया कराती रहीं। नेपाल में हाल में आए भूकंप को लेकर भारतीय रिमोट सेंसिंग उपग्रहों के जरिये ही सूचानाएं वक्त से एकत्रित की गईं। जल क्षेत्र की निगरानी और विकासात्मक गतिविधियों का मूल्यांकन भूमि संसाधन विभाग ने प्राकृतिक संसाधनों को बहाल करने और पारिस्थितिक संतुलन स्थापित करने के लिए एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम (आईडब्ल्यूएमपी) की शुरुआत की है। इसरो ने 10 राज्यों के 52,000 छोटे जल क्षेत्रों और 50 जिलों की पहचान की है जिसके लिए वह ऑनलाइन आंकड़े व सूचनाएं मुहैया करा रहा है। विकेंद्रीकृत योजनाओं के लिए अंतरिक्ष आधारित सूचना सहायता भुवन पंचायत पोर्टल जमीनी स्तर पर विकेन्द्रीकृत नियोजन प्रक्रिया के लिए सुविधाएं मुहैया करा रहा है। त्रिस्तीय पंचायती राज व्यवस्था (ग्राम पंचायत, खंड पंचायत एवं जिला पंचायत) के सदस्य इस पोर्टल का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे उन्हें विभिन्न योजनाओं की जानकारी मिल जा रही है। मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर स्वचालित चेतावनी मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर स्वत: चेतावनी के लिए गगन, रेलवे नेविगेटर उपकरण, एमएसएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम और भुवन का उपयोग कर पायलट योजना के तौर पर अध्ययन किया गया है। इससे मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग को लेकर ट्रेन इंजन को सटीक सूचनाएं मिल जाती हैं। भुवन जियोपोर्टल यह उच्च स्तरीय सूचनाएं मुहैया कराने वाला रिमोट सेंसिंग उपकरण है। इससे मौसम, आपदा, समुद्री क्षेत्रों में सूचनाएं हासिल करने में काफी मदद मिली है। इसके लिए 51,000 पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं। 12 अगस्त, 2015 को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ जितेंद्र सिंह ने भुवन की नई सेवाओं का विमोचन किया। पुरस्कार अमेरिका के नेशनल स्पेस सोसायटी (एनएसएस) द्वारा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए इसरो को स्पेस पायोनियर अवार्ड प्रदान किया गया। यह पुरस्कर कनाडा के टोरंटो में 20-24 मई 2015 को आयोजित 34 वें वार्षिक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष विकास सम्मेलन में प्रदान किया गया। इसरो को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के माध्यम से देश के विकास में योगदान के लिए वर्ष 2014 का गांधी शांति पुरस्कार प्रदान किया गया जो सामाजिक, आर्थिक और अहिंसा के माध्यम से राजनीतिक परिवर्तन के लिए प्रेरित करता है। इसरो 21 मई 2015 को मौसम विज्ञान उपग्रहों पर समन्वय समूह(सीजीएमएस) का सदस्य बन गया। ग्लोबल ऑबजर्विंग सिस्टम ऑफ द वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएमओ)में योगदान के मद्देनजर इसरो इसका सदस्य बना। स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय