नीलामी के जरिए कोयला खानों का आवंटन और विशिष्ट अंतिम उपयोग के लिए आवंटन उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद मजबूत और पारदर्शी प्रणाली स्थापित करने के लिए सरकार द्वारा एक अध्यादेश जारी किया गया था, ताकि अदालत द्वारा निरस्त की गई 204 कोयला खानों का आवंटन फिर से किया जा सके। इसका उद्देश्य खान की भूमि और अन्य संबंधित खनन बुनियादी ढांचे के साथ-साथ खान में अधिकार, हक और हितों का निर्बाध हस्तांतरण नीलामी के जरिए चयनित किए जाने वाले नए आवंटियों को सुनिश्चित करना है अथवा सरकारी कंपनियों को आवंटन किया जाना है, जैसी भी स्थिति हो। इसके बाद कोयला खान (विशेष प्रावधान) विधेयक 2015 संसद द्वारा पारित कर दिया गया था, जिसे 30 मार्च 2015 को एक अधिनियम के रूप में अधिसूचित किया गया था। उक्त अधिनियम में नीलामी के जरिए किसी कंपनी या उसके संयुक्त उद्यम को कोयला खानों का आवंटन करने और नीलामी के बिना ही किसी सरकारी कंपनी या उसके संयुक्त उद्यम को आवंटन करने का उल्लेख किया गया है। खनिजों के आवंटन के लिए ई-नीलामी का कोई वैश्विक दृष्टांत नहीं था। अत: वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए कोई स्थापित मॉडल नहीं था। इसके अलावा, इस बारे में सरकार को या उससे बाहर कुछ भी जानकारी उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में नीलामी मॉडल और कार्यप्रणाली को बिल्कुल शून्य से आगे विकसित किया जाना था। एक पारदर्शी व्यवस्था के जरिए एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर नीलामी आयोजित की गई थी। फॉरवर्ड ई-नीलामी को गैर विनियमित क्षेत्र के लिए अपनाया गया था और रिवर्स-सह-फॉरवर्ड ई-नीलामी को विनियमित क्षेत्र के लिए अपनाया गया था। बोली लगाने की ऑनलाइन प्रक्रिया में दो चरण शामिल थे – चरण I में ई-टेंडरिंग व्यवस्था थी और चरण II में ई-नीलामी की व्यवस्था थी। अब तक 74 कोयला खानों का आवंटन किया गया है। इन 74 कोयला खानों को सफलतापूर्वक सरकार और निजी क्षेत्र दोनों में ही विनियमित क्षेत्र अर्थात विद्युत (48) और गैर विनियमित क्षेत्र अर्थात लोहा एवं इस्पात, सीमेंट और कैप्टिव पावर (26) को आवंटित किया गया है। कोयला धारक संबंधित राज्य सरकार को जो राजस्व प्राप्त होगा उसमें निविदा दस्तावेज में निर्धारित अग्रिम भुगतान, नीलामी/आवंटन राशिऔर प्रति टन कोयला उत्पादन पर रॉयल्टी शामिल हैं। 73 कोयला खानों (नीलामी के जरिए31 कोयला ब्लॉक और आवंटन के जरिए 42 कोयला ब्लॉक) से खान के जीवन काल/पट्टे की अवधि के दौरान 3.44 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक की नीलामी एवं आवंटन राशिप्राप्त होने का अनुमान लगाया गया है, जो पूरी तरह से कोयला धारक राज्यों को हस्तांतरित की जाएगी। इसमें से अनुमानित राजस्व जो 31 कोयला खानों की नीलामी से खान के जीवन काल/पट्टे की अवधि के दौरान कोयला धारक राज्य को प्राप्त होगा वह 1,96,698 करोड़ रुपये बैठेगा। इसके अलावा, केंद्रीय और राज्य स्तरीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को 42 कोयला खानों के आवंटन से कोयला धारक राज्यों को 1,48,275 करोड़ रुपये की अनुमानित राशि प्राप्त होगी। इसके अलावा, 'विद्युत' क्षेत्र को 9 कोयला ब्लॉकों की नीलामी से बिजली दरों में कमी के लिहाज से उपभोक्ताओं को तकरीबन 69,310.97 करोड़ रुपये का लाभ होने की संभावना है। * एनएलसी को तालाबीरा द्वितीय एवं तृतीय कोयला खान के आवंटन से अनुमानित राजस्व की गणना नहीं की गई है। अग्रिम और मासिक भुगतान के मद में प्राप्त 1667 करोड़ रुपये की राशि 31 मार्च, 2016 तक संबंधित कोयला धारक राज्यों को पहले ही हस्तांतरित कर दी गई है। इसके अलावा, कोयला खानों के आवंटियों को अपना मासिक भुगतान संबंधित कोयला धारक राज्य को सीधे जमा करने का निर्देश दिया गया है। कोयले की बिक्री के लिए राज्य स्तरीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को कोयला खानों का आवंटन सरकार ने अब कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों और उनके अंतर्गत बनाए गए नियमों के तहत कोयले की बिक्री के लिए राज्य स्तरीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को कोयला खानों का आवंटन करने का प्रस्ताव किया है। 16 कोयला खानों की पहचान राज्य स्तरीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को आवंटन के लिए की गई है और आवंटन प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। गैर-विनियमित क्षेत्र के लिंकेज की नीलामी गैर-विनियमित क्षेत्र अर्थात सीमेंट, स्टील/स्पांज आयरन, अल्यूमिनियम और अन्य [उर्वरक (यूरिया) क्षेत्र को छोड़कर] के साथ-साथ उनके सीपीपी के लिए लिंकेज/एलओए के सभी आवंटन अब से नीलामी के आधार पर किए जाएंगे। कोल लिंकेज अथवा कोयले की आपूर्ति की प्रस्तावित नीलामी पारदर्शी है और इससे समान अवसरों का माहौल बनता है। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि सभी बाजार सहभागियों को कोयला लिंकेज सुरक्षित करने के लिए उचित मौका मिले, चाहे उनका आकार कुछ भी क्यों न हो। नीलामी की प्रणाली से बाजार तंत्र के जरिए कीमत सुनिश्चित होती है और इसके तहत राजस्व को अधिकतम करने का प्रयास नहीं किया जाता है। गैर-विनियमित क्षेत्र के लिंकेज की नीलामी संबंधी नीति को सीसीईए द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है और इसे 15 फरवरी 2016 को लागू करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को संचारित कर दिया गया है। इस योजना की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं: गैर-विनियमित क्षेत्र के एफएसए को समय से पहले समाप्त नहीं किया जाएगा, जैसा कि अब तक होता रहा है। गैर-विनियमित क्षेत्रों [सीपीएसई और उर्वरक (यूरिया) के एफएसए को छोड़कर] के वर्तमान समझौते की अवधिपूरी होने के बाद इनके उन मौजूदा एफएसए का कोई नवीकरण नहीं किया जाएगा जो 2015-16 से ही परिपक्व हो रहे हैं। सीपीएसई के साथ मौजूदा एफएसए की अवधिसमाप्त हो जाने पर भी इनका नवीकरण जारी रहेगा;अतिरिक्त लिंकेज के लिए सीपीएसई नीलामी में भाग ले सकते हैं। इसके तहत शुरुआत करते हुए प्रथम चरण में 2015-16 से ही परिपक्व हो रहे गैर-विनियमित क्षेत्र [सीपीएसई और उर्वरक (यूरिया) को छोड़कर] के एफएसए से जुड़ी मात्रा और वर्ष 2014-15 मुकाबले वर्ष 2015-16 के दौरान सीआईएल/एससीसीएल के वृद्धिशील उत्पादन के 25 प्रतिशत को नीलामी के लिए रखा जाएगा। गैर-विनियमित क्षेत्र के उप-क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मात्रा तय की जाएगी। सीआईएल/एससीसीएल द्वारा नीलामी आयोजित की जाएगी। प्राप्त अनुभव के आधार पर परिचालन संबंधी मुद्दों जैसे कि मात्रा, क्षेत्रवार आवंटन और उप-क्षेत्रीय निर्धारण, नीलामी पद्धति और अन्य परिचालन विवरण की समीक्षा की जा सकती है। कोल लिंकेज को तर्कसंगत बनाना मौजूदा कोयला स्रोतों की व्यापक समीक्षा के साथ-साथ परिवहन लागत को अनुकूलतम बनाने के मद्देनजर इन स्रोतों को युक्तिसंगत बनाने की संभाव्यता के अध्ययन के लिए अंतर मंत्रालय कार्य दल जून, 2014 में गठित किया गया था और इसने कोयला, बिजली, रेल, स्टील, शिपिंग मंत्रालय, डीआईपीपी, सीईए, एनटीपीसी, सीआईएल एससीसीएल, सहायक कोयला कंपनियों एवं केपीएमजी के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बैठकें की थीं। आईएमटीएफ की सिफारिशों पर तीन चरणों में इसे युक्तिसंगत बनाने का कार्य शुरू किया गया। प्रथम चरण में 17 ताप विद्युत संयंत्रों के लिए सुव्यवस्थीकरण पर अमल किया गया है, जिसके लिए संशोधित ईंधन आपूर्ति समझौतों (एफएसए) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इससे 21.79 मिलियन टन कोयले की आवाजाही को तर्कसंगत बनाना संभव हो पाया है और आवर्ती परिवहन लागत के मद में 912.71 करोड़ रुपये की वार्षिक बचत हुई है। स्वदेशी कोयले की उपलब्धता के बदले हुए परिदृश्य में आयातित कोयले की अदला-बदली के साथ द्वितीय चरण के कार्यान्वयन को बिजली कम्पनियों ने सुसंगत नहीं पाया है । दूसरे चरण में, अदला-बदली के एक सेट को लागू किया गया है जिससे 1.3 मिलियन टन कोयले की आवाजाही को तर्कसंगत बनाना संभव हो पाया है और परिवहन लागत के मद में 458 करोड़ रुपये की संभावित वार्षिक बचत हुई है। कुल मिलाकर, 23.0 मिलियन टन कोयले की आवाजाही को तर्कसंगत बनाना संभव हो पाया है और 1,371 करोड़ रुपये की संभावित वार्षिक बचत हुई है। सही दर के निर्धारण और कोयले की चोरी में कमी के लिए सकल कैलोरी मूल्य (जीसीवी) पर आधारित युक्तिकरण को मंत्रालय द्वारा अपनाया गया है। ब्रिज लिंकेज पर नीति केन्द्र और राज्य स्तरीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (विद्युत और गैर विद्युत दोनों ही क्षेत्रों में), जिन्हें कोयला खान/ब्लॉक आवंटित किए गए हैं, के विशिष्ट अंतिम उपयोग वाले संयंत्रों को ब्रिज लिंकेज को मंजूरी के लिए नीतिगत दिशा-निर्देश 8 फरवरी, 2016 को जारी किए गए हैं। ‘ब्रिज लिंकेज’ केन्द्र और राज्य स्तरीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के अंतिम उपयोग वाले एक संयंत्र की कोयला संबंधी जरूरत और संबंधित कोयला खान/ब्लॉक से उत्पादन की शुरुआत के बीच की खाई को पाटने के लिए एक अल्पकालिक लिंकेज की तरह कार्य करेगा। एमएमडीआर अधिनियम के तहत आवंटित अनुसूची-III की कोयला खानों और कोयला ब्लॉकों पर विचार किया जाएगा। पुराने संयंत्रों को हटाने एवं उनके स्थान पर नए संयंत्रों की स्थापना करने के समय पुराने संयंत्रों के लिए मंजूर कोयला लिंकेज/एलओए का स्वत: हस्तांतरण पुराने संयंत्रों को हटाने एवं उनके स्थान पर नए संयंत्रों की स्थापना करने के समय पुराने संयंत्रों के लिए मंजूर कोयला लिंकेज/एलओए के स्वत: हस्तांतरण के बारे में नीतिगत दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इन दिशा-निर्देशों के तहत पुराने संयंत्र के लिए मंजूर एलओए/लिंकेज स्वत: ही सुपर क्रिटिकल क्षमता वाले नए संयंत्र को हस्तांतरित हो जाएगा। यदि नए सुपर क्रिटिकल संयंत्र की क्षमता पुराने संयंत्र की तुलना में अधिक है, तो अतिरिक्त कोयले को प्राथमिकता दी जा सकती है, जो कोयले की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। यह नीति केवल सार्वजनिक क्षेत्र के एनसीडीपी-पूर्व संयंत्रों पर ही लागू होगी जिनके लिए दीर्घकालिक लिंकेज/एलओए को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। लिंकेज/एलओए के स्वत: हस्तांतरण, जैसा कि ऊपर बताया गया है, की अनुमति केवल तभी दी जाएगी जब नया संयंत्र उसी राज्य में स्थापित किया जाएगा जहां पुराना संयंत्र अवस्थित था। पुरानी इकाई जिसने अपना उपयोगी जीवन पूरा कर लिया है और जिसे प्रतिस्थापित किया जा रहा है उसे चरणबद्ध तरीके से हटाने की जरूरत है। कोयले की अदला-बदली अकुशल संयंत्रों से हटाकर कुशल संयंत्रों में और खानों से दूर अवस्थित संयंत्रों से हटाकर खान के अग्रभाग पर अवस्थित संयंत्रों में होनी चाहिए। विशेष रूप से विद्युत क्षेत्र के लिए दो अलग-अलग ई-नीलामी खिड़कियां खोलना विशेष रूप से विद्युत क्षेत्र के लिए दो अलग-अलग ई-नीलामी खिड़कियां खोली गई थीं। इन्हें उन संयंत्रों के लिए बनाया गया जो भारी दबाव महसूस कर रहे हैं या जिन्हें कोयले की कम आपूर्ति हो रही है। 5 एमटी की एक ई-नीलामी खिड़की लंबी और मध्यम अवधि वाले पीपीए धारकों के लिए खोली गई थी। फ्लोर प्राइस इस संदर्भ में सीआईएल अधिसूचित कीमत प्लस 20 प्रतिशत प्रीमियम तय की गई। 5 एमटी की एक अन्य ई-नीलामी खिड़की छोटी अवधि वाले पीपीए धारकों अथवा ‘बगैर पीपीए’ वाले धारकों के लिए खोली गई थी। फ्लोर प्राइस इस संदर्भ में सीआईएल अधिसूचित कीमत प्लस 40 प्रतिशत प्रीमियम तय की गई। बाद में दोनों खिड़कियों को संयुक्त कर दिया गया था। विद्युत क्षेत्र के लिए उपर्युक्त विशेष फॉरवर्ड नीलामियों के जरिए ई-नीलामी के पांच दौर में 13.8 एमटी कोयला बुक किया गया था। 4 एमटी की मात्रा के लिए विशेष रूप से गैर-विद्युत क्षेत्र हेतु एक अलग ई-नीलामी खिड़की खोलना 4 एमटी की मात्रा के लिए विशेष रूप से गैर-विद्युत क्षेत्र हेतु एक अलग ई-नीलामी खिड़की सीआईएल द्वारा सभी गैर-विद्युत उपभोक्ताओं के लिए खोली गई थी। चूंकि यह खिड़की गैर-विद्युत क्षेत्र के केवल अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए ही उपलब्ध थी, इसलिए व्यापारियों को इसमें भाग लेने की अनुमति नहीं थी। गैर-विद्युत क्षेत्र के लिए विशेष खिड़कियों के जरिए ई-नीलामी के दो दौर में 1.52 एमटी कोयला बुक किया गया था। लघु और मझोले क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए वेब पोर्टल कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के लघु और मझोले क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए कोयला आवंटन की निगरानी प्रणाली (सीएएमएस) से संबंधित एक नया वेब पोर्टल माननीय कोयला, विद्युत, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) द्वारा 17 मार्च, 2016 को नई दिल्ली में शुरू किया गया था। कारोबार में सुगमता सुनिश्चित करने और एसएमई क्षेत्रों को कोयला वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए वेब पोर्टल शुरू किया गया है। लघु और मझोले क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए कोयला मंत्रालय द्वारा लगभग आठ मिलियन टन कोयला अलग से रखा जाता है, जिनकी आवश्यकता प्रति वर्ष 4200 टन से कम है। ईंधन आपूर्ति समझौते (एफएसए) के जरिए सीआईएल से राज्य नामित एजेंसियों (एसएनए) द्वारा कोयला खरीदा जाता है और फिर उनके राज्य के लघु एवं मझोले क्षेत्र के उपभोक्ताओं को वितरित किया जाता है। सीआईएल की सहायक कोयला कंपनियों द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले कोयले की मात्रा/ग्रेड और एसएनए से कोयला प्राप्त करने वाले उपभोक्ताओं का विवरण, कोयले की मात्रा/ग्रेड एवं कीमत इत्यादि से संबंधित समस्त जानकारियां सार्वजनिक की जाएंगी। गुणवत्ता और तृतीय पक्ष द्वारा नमूना चयन कोयला कंपनियों एवं बिजली कंपनियों/डेवलपर्स के बीच उठने वाले विवादों को सुलझाने और आपूर्ति किए जाने वाले कोयले की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए तृतीय पक्ष द्वारा नमूना चयन किए जाने की प्रणाली को और भी बेहतर किया गया है। कोयला मंत्रालय द्वारा 26 नवंबर 2015 को तृतीय पक्ष के नमूना चयन पर जारी किए गए संशोधित निर्देशों के अनुसार विद्युत संयंत्र (उपभोक्ता) और कोयला कंपनियों (आपूर्तिकर्ता) दोनों की ओर से लोडिंग छोर पर एक स्वतंत्र तृतीय पक्ष एजेंसी को केन्द्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान (सीआईएमएफआर) द्वारा पैनल में शामिल किया जाना है। यह एक पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए तृतीय पक्ष एजेंसियों को सूचीबद्ध करेगा। यह नई प्रणाली 1 जनवरी, 2016 को एनसीएल में लागू कर दी गई है और धीरे-धीरे इसे अन्य सहायक कंपनियों में भी लागू किया जा रहा है। सीआईएमएफआर को चरणबद्ध तरीके से एक पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए तृतीय पक्ष एजेंसियों को सूचीबद्ध करने के लिए अधिकृत किया गया है। स्वतंत्र तृतीय पक्ष एजेंसियां लोडिंग छोर पर कोयले के नमूने एकत्रित करेंगी और नमूनों को चार भागों में विभाजित करेंगी – विद्युत केंद्रों के लिए एक, कोयला कंपनी के लिए एक, एजेंसी द्वारा विश्लेषण के लिए एक और न्याय करने संबंधी उद्देश्य के लिए चौथा। सीआईएमएफआर ने एजेंसियों को सूचीबद्ध करने के लिए वैश्विक एनआईटी जारी किया है। इस बीच, सीआईएमएफआर ने एनसीएल, डब्ल्यूसीएल, एमसीएल और एसईसीएल में सीधे नमूना लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उपयुक्त तौर-तरीकों की सिफारिश करने और लदान छोर पर तृतीय पक्ष द्वारा नमूने लेने से संबंधित मुद्दों को सुलझाने के लिए सीआईएल के निदेशक (विपणन) और एनटीपीसी के निदेशक (परिचालन) की सह-अध्यक्षता में एक समिति भी गठित की गई है जिसमें बिजली उत्पादकों, राज्य स्तरीय और केंद्रीय उत्पादक कंपनियों के संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। देश में कोयला उत्पादन वर्ष 2015-16 के दौरान कच्चे कोयले का उत्पादन पिछले वर्ष की इसी अवधि के 609.18 मिलियन टन की तुलना में638.18 मिलियन टन (अनंतिम) आंका गया था। वर्ष 2015-16 के दौरान कोयला उत्पादन में कुल वृद्धि 4.8 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इसके परिणामस्वरूप 2014-16 के दौरान कोल इंडिया के दो साल की अवधिके मुकाबले कोयला उत्पादन में 7.4 करोड़ टन की सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई है। आज किसी भी बिजली संयंत्र का स्टॉक संकटमय नहीं है। इसके बजाय औसत स्टॉक 25 दिनों से भी ज्यादा अवधिके लिए है। मंत्रालय कीमतों को कम करने और कोयला माफिया का मुकाबला करने के लिए घरेलू कोयले की आपूर्ति बढ़ाने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है। सीआईएल ने उत्पादन और उठाव में मात्रा की दृष्टिसे वृद्धि दर्ज की (2015-16 के दौरान) सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला खनन कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के कोयला उत्पादन और कोयला उठाव/प्रेषण में अप्रैल-मार्च 2015-16 के दौरान वार्षिक आधार पर क्रमश: 8.6 प्रतिशत और 8.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कोल इंडिया के दो साल की अवधिके मुकाबले कोयला उत्पादन में 7.4 करोड़ टन की सर्वाधिक वृद्धि 2014-16 में दर्ज की गई है। सीआईएल ने अप्रैल-मार्च 2015-16 के दौरान पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधिकी तुलना में अपने उत्पादन में लगभग42.28 मिलियन टन की वृद्धि दर्ज की है। इस तरह सीआईएल अपने उत्पादन में बढ़ोतरी का क्रम जारी रखने में सफल रही है। उठाव पर विशेष जोर के भी अच्छे नतीजे सामने आए हैं क्योंकि इस अवधि के दौरान कोयले के उठाव/प्रेषण में मात्रा की दृष्टिसे 43.21 मिलियन टन की वृद्धि आंकी गई है। सीआईएल ने कुल मिलाकर अप्रैल-मार्च 2015-16 के दौरान 536.51 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में उत्पादित 494.23 मिलियन टन के मुकाबले 8.6 प्रतिशत ज्यादा है। सीआईएल की लगभग सभी कोयला उत्पादक सहायक कंपनियों ने अपने उत्पादन में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है। कोयले का उठाव/प्रेषण अप्रैल-मार्च 2015-16 की अवधि के दौरान 532.07 मिलियन टन था, जो पिछले वर्ष की समान अवधिके 488.86 मिलियन टन की तुलना में 8.8 प्रतिशत अधिक है। अप्रैल-मार्च 2015-16 के दौरान कोयला उठाव/प्रेषण में 43.21 मिलियन टन की वृद्धि आंकी गई, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में दर्ज 17.94 मिलियन टन की बढ़ोतरी की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। 2010-11 से लेकर 2015-16 तक कोयला उत्पादन और कोयला उठाव के आंकड़े अवधि/ साल कोयला उत्पादन मिलियन टन में समग्र रूप से वृद्धि (मिलियन टन में ) वृद्धि कोयले का उठाव मिलियन टन में समग्र रूप से वृद्धि (मिलियन टन में ) वृद्धि 2010-11 431.32 0.06 0.01% 424.50 8.62 2.07% 2011-12 435.84 4.52 1.04% 433.08 8.58 2.02% 2012-13 452.21 16.37 3.75% 465.18 32.10 7.41% 2013-14 462.42 10.21 2.25% 471.58 6.40 1.37% 2014-15 494.23 31.82 6.88% 488.86 17.8 3.77% 2015-16 536.51 42.28 8.6% 532.07 43.21 8.8% सीआईएल एक अरब टन कोयला उत्पादन के निशान को छूने की तैयारी में कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने वर्ष 2019-20 तक एक अरब टन (बीटी) कोयला उत्पादन के निशान को छूने के लिए अपना रोड मैप पेश किया था जिसमें अपनाई जाने वाली रणनीतियों का उल्लेख था। 7 फीसदी की परिकल्पित वृद्धि दर के साथ देश में कोयले की मांग के वर्ष 2019-20 तक लगभग 1,200 मिलियन टन (एमटी) के स्तर पर पहुंचने के अनुमान के मद्देनजर सीआईएल द्वारा एक बीटी के स्तर को छू लेने की उम्मीद है जिसमें 908 मिलियन टन का योगदान निर्धारित परियोजनाओं की ओर से होने की आशा है। शेष मात्रा को साझा करने के लिए परियोजनाओं की पहचान करने की प्रक्रिया भी जारी है, ताकि एक बीटी के निशान को पार किया जा सके। सीआईएल की दो सहायक कंपनियों संबलपुर स्थित महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड और बिलासपुर स्थित साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड द्वारा क्रमश: 250 मिलियन टन और 240 मिलियन टन के योगदान के साथ एक बीटी के उत्पादन स्तर को छूने संबंधी सीआईएल की इच्छा की पूर्ति में निर्णायक भूमिका निभाए जाने की उम्मीद है। कोयले का खनन करने वाली कंपनी मूल रूप से जिन अहम अनुमानों पर भरोसा कर रही है वे हैं तीन महत्वपूर्ण रेलवे लाइनों का समय पर पूरा होना एवं समय पर भूमि अधिग्रहण और हरित मंजूरी। सीआईएल ने वर्ष 2019-20 तक 1 बीटी कोयले के उत्पादन संबंधी रोड मैप के हिस्से के रूप में अपने कोयला उत्पादन को 2014-15 के 494.80 मिलियन टन के उत्पादन स्तर से बढ़ाकर 908.1 मिलियन टन के स्तर पर पहुंचाने के लिए अगले पांच वर्षों के दौरान 57,000 करोड़ रुपये के संभावित पूंजी निवेश का आकलन किया है। डब्ल्यूसीएल 36 महीनों में 36 खानों को खोलेगी; उत्पादन लक्ष्यों को वर्ष 2020 तक बढ़ाकर 100 मिलियन टन के स्तर पर पहुंचाएगी। वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड पिछले 10 महीनों में 10 खानों को पहले ही खोल चुकी है और वह अगले 26 महीनों में 26 खानों को खोलेगी। कोयला आयात में कमी ज्यादा कोयला उत्पादन से कोयला आयात में कमी हुई है। कोयला आयात में 3.4 करोड़ टन की कमी आई है जिसके परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान विदेशी मुद्रा में 24,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है। मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष के दौरान विदेशी मुद्रा में 40,000 करोड़ रुपये की बचत करने का लक्ष्य रखा है। वर्ष 2015-16 के दौरान कोयले का माहवार आयात (मात्रा मिलियन टन में और मूल्य मिलियन रुपये में) 2015-2016(अनंतिम) 2014-2015 मात्रा में वृद्धि प्रतिशत में माह मात्रा मूल्य मात्रा मूल्य अप्रैल 15.84 77517 16.14 84584 -1.88 मई 21.35 95348 15.86 79765 34.62 जून 17.26 77393 16.89 86576 2.20 जुलाई 12.82 58284 17.88 89693 -28.30 अगस्त 13.93 62763 14.17 74945 -1.69 सितंबर 12.64 60277 17.30 85989 -26.94 अक्टूबर 14.52 65180 15.30 78080 -5.10 नवंबर 11.59 49310 22.60 108590 -48.72 दिसंबर 12.35 56430 18.81 91840 -34.34 जनवरी 16.11 65820 22.56 110690 -28.59 फरवरी 17.51 67863 16.79 83997 4.29 मार्च 15.54 58145 21.42 99727 -27.45 अप्रैल-मार्च 181.46 794329 215.73 1074476 -15.88 स्रोत: डीजीसीआईएंडएस अनंतिम और परिवर्तन संभव टीपीपी पर कोयले का स्टॉक देश के कोयला आधारित विद्युत केंद्रों पर कोयला स्टॉक इन्वेंटरी भी संतोषजनक स्तर पर है। 31 मार्च, 2016 को देश में किसी भी विद्युत केंद्र पर कोयले का स्टॉक संकटमय अथवा बेहद संकटमय नहीं है और ताप विद्युत केंद्रों (टीपीपी) पर कुल कोयला स्टॉक लगभग 39 मिलियन टन के संतोषजनक स्तर पर है, जो 28 दिनों तक कोयले की जरूरत को पूरा करने में समर्थ है। पिछले साल इसी समय यानी 31 मार्च, 2015 को विद्युत केंद्रों पर कुल कोयला स्टॉक लगभग 26.10 मिलियन टन का था, जो केवल 18 दिनों तक ही कोयले की जरूरत को पूरा करने में समर्थ था। उस समय 12 विद्युत केंद्रों पर कोयले का स्टॉक संकटमय था जिनमें से 6 विद्युत केंद्रों पर इसकी स्थिति बेहद संकटमय थी। इस लिहाज से भारी संकट का सामना कर रहे 66 प्रतिशत विद्युत संयंत्रों का आंकड़ा मार्च, 2016 तक घटकर शून्य के स्तर पर आ गया। एनएलसी लिमिटेड प्रगति की राह पर नेवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन (एनएलसी) ने 31 मार्च 2016 को 30.60 एमटीपीए की लिग्नाइट खनन क्षमता हासिल कर ली है। इसने अपनी बिजली उत्पादन क्षमता को 2740 मेगावाट (मार्च 2015 में) से बढ़ाकर 4275.5 मेगावाट के स्तर पर पहुंचा दिया है, जिसमें 10 मेगावाट सौर ऊर्जा और 25.5 मेगावाट पवन ऊर्जा भी शामिल है। एनएलसी ने अपनी ईंधन सुरक्षा के साथ वर्ष 2025 तक 19,831 मेगावाट की बिजली कंपनी बनने का उच्च विकास लक्ष्य रखा है, जो लिग्नाइट खनन क्षमता में 26.30 मिलियन टन प्रति वर्ष की प्रस्तावित वृद्धि (30.60 एमटीपीए से बढ़कर 56.90 एमटीपीए) और कोयला खनन क्षमता में 31.5 एमटीपीए की प्रस्तावित वृद्धि की बदौलत संभव होगा। कोल वाशरीज यह निर्णय लिया गया है कि कोयला कंपनियां विद्युत क्षेत्र को (-) 100 मिमी आकार के भुरभुरे कोयले की शत-प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी। इसके लिए कोयले को भुरभुरा करने वाले मौजूदा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ आउटसोर्सिंग के जरिए मोबाइल क्रशरों का इस्तेमाल किया जायेगा। यह भी निर्णय लिया गया है कि कोयला कंपनियां क्रमश: 1 जनवरी, 2015 और 5 जून, 2016 से पिटहेड से 750 किलोमीटर दूर स्थित ताप विद्युत संयंत्रों और पिटहेड से 500 किलोमीटर दूर स्थित ताप विद्युत संयंत्रों को कवर करने वाले विद्युत क्षेत्र को 34 प्रतिशत से कम राख की मात्रा वाले कोयले (तिमाही औसत आधार पर) की आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी। नई वाशरीज की स्थापना करने के साथ-साथ लिंकेज को तर्कसंगत बनाकर और उपभोक्ताओं के साथ सलाह-मशविरा कर निजी क्षेत्र में उपलब्धि वाशरी क्षमता का पारदर्शी ढंग से इस्तेमाल करते हुए इस काम को पूरा किया जाएगा। सरकार ने 1 अक्टूबर 2017 से धुलाई के बाद केवल जी 10 स्त्र से ऊपर के कोयले की ढुलाई करने का भी निर्णय लिया है। उत्पादित कोयले की गुणवत्ता से जुड़े मसले को सुलझाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सीआईएल 112.6 मिलियन टन की कुल वार्षिक क्षमता वाली 15 नई वाशरीज स्थापित कर रही है। इन वाशरीज में से 6 कोकिंग कोल वाशरीज हैं जिनकी कुल क्षमता 18.6 मिलियन टन वार्षिक (एमटीवाई) है, जबकि 9 गैर-कोकिंग कोल वाशरीज हैं, जिनकी कुल क्षमता 94.0 मिलियन टन वार्षिक है। इन सभी वाशरीज के 1 अक्टूबर, 2017 से कार्यरत होने की परिकल्पना की गई है। अपने सतत प्रयासों की बदौलत मंत्रालय ने वर्ष 2017-18 तक वाशरीज क्षमता को 3.7 करोड़ टन से चौगुना कर 15 करोड़ टन के स्तर पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। रॉयल्टी के लिए अध्ययन समूह गठित कोयला समेत खनिजों पर रॉयल्टी किसी भी खनन पट्टे के धारक द्वारा खान एवं खनिज (विकास व नियमन) अधिनियम, 1956 के तहत देय है। कोयले पर रॉयल्टी की दरों में संशोधन पर विचार करने के लिए कोयला मंत्रालय के विशेष सचिव की अध्यक्षता में एक अध्ययन समूह गठित किया गया है, जिसमें विद्युत, खान मंत्रालय, सीआईएल, फिक्की,फिम्मी और सीएमपीडीआईएल का प्रतिनिधित्व सदस्य के रूप में है। एक प्रश्नावली सभी हितधारकों को संचारित की गई थी, जिसमें उनसे टिप्पणियां देने को कहा गया था। इसके तहत प्राप्त टिप्पणियां अध्ययन समूह के विचाराधीन हैं। रेलवे और राज्य सरकारों के साथ एमओयू कोयले के उत्पादन एवं निकासी में योजनाबद्ध वृद्धि को बरकरार रखने के लिए रेल मंत्रालय (एमओआर), कोयला मंत्रालय (एमओसी) और ओडिशा, झारखंड एवं छत्तीसगढ़ की सरकारों के बीच सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, ताकि संयुक्त उद्यमों (जेवी) के गठन के जरिये रेल से जुड़े बुनियादी ढांचे को विकसित किया जा सके। कोयला परियोजना निगरानी पोर्टल (ई-सीपीएमपी) मंत्रालय में कोयला परियोजना निगरानी पोर्टल (ई-सीपीएमपी) बनाया गया है, ताकि राज्य सरकार के साथ-साथ केन्द्रीय मंत्रालयों के स्तर पर कोयला परियोजनाओं के लम्बित मसलों को जल्दी सुलझाने के साथ-साथ शीघ्र मंजूरी सुनिश्चित की जा सके। अनुबंधित श्रम भुगतान प्रबंधन प्रणाली अनुबंधित श्रम (नियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम, 1970 के तहत अनुबंध पर काम करने वाले कामगारों को श्रम भुगतान के साथ-साथ उन्हें मिलने वाले अन्यं लाभों पर नजर रखने के लिए ‘अनुबंधित श्रम भुगतान प्रबंधन प्रणाली’नामक वेब पोर्टल बनाया गया है। यह सीआईएल की सभी सहयोगी इकाइयों के लिए एक एकीकृत प्रणाली है। आतंरिक तौर पर विकसित एप्लीकेशन सीआईएल और इसकी समस्त सहयोगी इकाइयों में विभिन्न ठेकेदारों द्वारा अनुबंध पर रखे जाने वाले कामगारों से जुड़े व्यापक डेटाबेस का रख-रखाव करेगा। कोल इंडिया लिमिटेड की रांची स्थित सहयोगी सलाहकार इकाई केन्द्रीय खान नियोजन एवं विकास संस्थान (सीएमपीडीआई) इस पोर्टल का रख-रखाव करेगा। इस प्रणाली में भुगतान किये गये न्यूनतम पारिश्रमिक की पुष्टि करने और अधिनियम के तहत आवश्यक अनुबंधित कामगारों की पारिश्रमिक पर्चियां एवं रोजगार कार्ड इत्यादि तैयार करने की अंतर्निहित व्यवस्था है। इस पोर्टल में दी गई विशेष सुविधा के तहत सभी अनुबंधित कामगार अपने व्यक्तिगत विवरण एवं भुगतान संबंधी ताजा स्थिति से कामगार पहचान संख्या (विन) के जरिये अवगत हो सकते हैं। अनुबंधित कामगार इस पोर्टल के जरिये अपनी शिकायतें भी दर्ज करा सकते हैं। इस प्रणाली में देश के सभी नागरिकों को दी गई विशेष सुविधा के जरिये वे सीआईएल एवं उसकी सहायक इकाइयों में अनुबंध पर कार्यरत कामगारों के साथ-साथ अनुबंध पर रखे गये कामगारों की कुल संख्या, भुगतान की ताजा स्थिति,भुगतान किये गये न्यूनतम पारिश्रमिक इत्यादि से अवगत हो सकते हैं। विभिन्न स्थानों पर कार्यरत कंपनी के मुख्यज अधिकारी इस प्रक्रिया पर नजर रखेंगे और सभी ठेकेदारों द्वारा इसका अनुपालन सुनिश्चित करेंगे। इस पर विचार किया जा रहा है कि ठेकेदारों को भुगतान केवल तभी किया जाये, जब वे अनुपालन के बारे में प्रणाली द्वारा सृजित ब्यौरा पेश कर देंगे। स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय