भूमिका परमाणु ऊर्जा विभाग (डी.ए.ई.) ने ऊर्जा सुरक्षा और समाज के लाभ और इसके द्वारा राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए विविध कदम उठाए हैं। विभाग की प्रमुख उपलब्धियां निम्निलिखित हैं असैन्य परमाणु सहयोग प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2015 में असैन्य परमाणु सहयोग के क्षेत्र में कई बड़ी उपलब्धियां प्राप्त की गई हैं। प्रधानमंत्री द्वारा 25-27 जनवरी, 2015 को, नई दिल्ली में राष्ट्रपति ओबामा की मेजबानी के दौरान अमरीका के साथ असैन्य परमाणु सहयोग करार के कार्यान्वयन को पुन- पटरी पर लाया गया। उसके बाद से, करार को कार्यान्वित करने हेतु प्रशासनिक व्यवस्था पर हस्ताक्षर किए गए हैं। जून 2015 में मैसर्स जनरल इंश्योरेंस कार्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा 1500 करोड़ रुपये की क्षमता वाले इंडिया न्यूक्लियर इंश्योरेंस पूल की स्थापना की गई, ताकि असैन्य दायित्व अधिनियम 2010 में नियत असैन्य परमाणु दायित्व को बीमा कवर उपलब्ध कराया जा सके। मीठी विर्दी, गुजरात में ए.पी.1000 रिएक्टर की 6 यूनिटों के निर्माण हेतु एनपीसीआईएल एवं वेस्टिंगहाउस के बीच वाणिज्यिक वार्ताएं 2016 में पूरी होने की दिशा में अग्रसर हैं। वर्ष 2015 के दौरान रूस और फ्रांस के साथ भी असैन्य परमाणु सहयोग आगे बढ़ा है। प्रधानमंत्री की अप्रैल 2015 की फ्रांस यात्रा के दौरान महाराष्ट्र की जैतापुर परियोजना के स्थानीयकरण की वृद्धि द्वारा लागत में कमी के उद्देश्य से मेसर्स लार्सन एंड टूब्रो तथा मेसर्स अरेवा के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। 22 दिसंबर 2015 को प्रधानमंत्री की रूस यात्रा रूस के दौरान डिजाइनीकृत परमाणु बिजली संयंत्रों हेतु भारत में विनिर्माण के स्थानीयकरण हेतु कार्रवाई के संयुक्त कार्यक्रम पर हस्ताक्षर किए गए। रूसी सहयोग से कम से कम 12 रिएक्टर स्थापित किए जाएंगे। अप्रैल 2015 में प्रधानमंत्री की कनाडा यात्रा के दौरान यूरेनियम की दीर्घावधि आपूर्ति हेतु संविदा पर हस्ताक्षर के बाद यूरेनियम की पहली खेप दिसंबर 2015 में भारत पहुंची। इसी तरह जुलाई 2015 में प्रधानमंत्री की कजाकिस्तान यात्रा के दौरान यूरेनियम की खरीद हेतु एक दीर्घावधि संविदा पर हस्ताक्षर किए गए। एक महत्वपूर्ण प्रगति यह हुई है कि ऑस्ट्रेलिया के साथ एक असैन्य परमाणु सहयोग करार और इसके साथ ही करार को कार्यान्वित करने हेतु प्रशासनिक व्यवस्था 13 नंवबर 2015 को लागू हुई। कनाडा, कजाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के साथ की गई ईंधन आपूर्ति व्यवस्थाओं से भारत में परमाणु बिजली के विस्तार को समर्थन मिलने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। जापान के प्रधानमंत्री श्री आबे की 12 दिसंबर 2015 की भारत यात्रा के दौरान एक द्विपक्षीय असैन्य परमाणु सहयोग करार पर सहमति होने से इस मुद्दे पर 05 वर्षों से चली आ रही बातचीत पूरी हो गई। यह महत्वपूर्ण कार्य दोनों नेताओं के स्तर पर मजबूत इरादों से पूर्ण हो सका। फरवरी 2015 में परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग के लिए श्रीलंका के साथ अंतर-सरकारी समझौता किया गया। भारत और ब्रिटेन के बीच अक्टूबर 2015 में परमाणु सहयोग समझौते (एनसीए) पर हस्ताक्षर हुए। भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग और ब्रिटेन एवं उत्तरी आयरलैंड के ऊर्जा एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के बीच इंडियन ग्लोबल सेंटर फॉर न्यूक्लियर एनर्जी पार्टनरशिप (जीसीएनईपी) के साथ सहयोग के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए। स्वदेश में उठाए गए कदमों, विशेषकर एनपीसीआईएल को अन्य पीएसयू के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित करने में समर्थ बनाने हेतु परमाणु ऊर्जा अधिनियम में संशोधन के संसद में पारित होने के साथ, उपरोक्त करारों ने भारत में परमाणु ऊर्जा के विस्तार हेतु एक ठोस आधार बना दिया है। अंतत- एक संभावना युक्त क्षेत्र कार्यान्वित होने हेतु उत्प्रेरित हो गया है। परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन, 2016 प्रधानमंत्री ने अप्रैल 2016 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जिसने नेताओं को एक दूसरे से संवाद कायम करने और परमाणु सामग्री की सुरक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता शीर्ष स्तर पर सुदृढ़ बनाने का एक मंच प्रदान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन दुनिया को सुरक्षित बनाने और भावी पीढ़ियों के लिए बेहतर कल बनाने की प्रतिबद्धता से संबंधित है और भारत मजबूत संस्थागत ढांचे, स्वतंत्र नियामक एजेंसी और प्रशिक्षित एवं विशेषज्ञता संपन्न कर्मियों के माध्यम से परमाणु सुरक्षा को सदैव उच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता देता रहेगा। भारत और अमरीका ने, भारत में लेज़र इंफेरोमीटर ग्रेविटेशनल- वेव ऑब्जर्वेटरी (एल.आई.जी.ओ.) की स्थापना के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो ग्रेविटेशनल वेव एस्ट्रोनॉमी के विभिन्न पहलुओं से संबंधित प्रमुख अनुसंधान को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। लम्बे अर्से से प्रतीक्षित एल.आई.जी.ओ. इंफेरोमीटर का निर्माण 2023 तक कार्यात्मक हो जाने की संभावना है, इससे गुरुत्वाकर्षी तरंगों के स्रोतों को इंगित करने और संकेतों का विश्लेषण करने संबंधी वैज्ञानिकों की योग्यता में सुधार होगा। यह समझौता परमाणु ऊर्जा शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अमरीका यात्रा के दौरान किया गया था। स्वच्छ भारत अभियान में परमाणु ऊर्जा विभाग का योगदान परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों से पर्यावरण सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी, और बदले में, स्वच्छ भारत अभियान में सहायता मिलेगी। वर्ष 2015 में ऊर्जा या रसोई गैस के उत्पादन के लिए जैव अपशिष्ट की प्रॉसेसिंग के लिए चौदह बी.ए.आर.सी. बायोगैस संयंत्र, निसारग्रुना स्थापित किए गए। इस तरह इन संयंत्रों की संख्या 207 हो गयी है।बी.ए.आर.सी. ने शहरी सीवेज अपशिष्ट पदार्थों का सुरक्षित निपटान करने और इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न होने दूसरे पदार्थों का जैविक खाद के रूप में उपयोग करने की संभावनाओं के लिए रेडिएशन हाइजीनाइजेशन का प्रदर्शन किया है। सूखे अपशिष्ट पदार्थों को अधिक कुशलता से स्वच्छ बनाने के लिए अहमदाबाद में एक संयंत्र स्थापित करने की योजना है। इस तरह के संयंत्र की स्थापना के लिए सूरत नगर निगम से एक अनुरोध प्राप्त हुआ है।परमाणु ऊर्जा विभाग भी प्रौद्योगिकी प्रदाता-सह सलाहकार के रूप में स्वच्छ गंगा परियोजना में पानी की गुणवत्ता जांचने से संबंधित पहलुओं में भाग ले रहा है। सामाजिक लाभ के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग की प्रौद्योगिकियां मई 2015 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंगोलिया यात्रा के दौरान टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) और मंगोलिया के राष्ट्रीय कैंसर सेंटर के बीच हस्ताक्षरित समझौते के अंतर्गत नवंबर 2015 में मंगोलिया में एक भाभाट्रॉन यूनिट एक समझौते की स्थापना की गयी। बी.ए.आर.सी. ने उच्च स्तरीय अपशिष्ट से रिकवरी के माध्यम से विटरीफाइड सेसिज्म– 137 पेन्सिल, की तकनीक विकसित की है, जो दुनिया में अपने किस्म की पहली है। बीआरआईटी-डीएई द्वारा निर्मित ब्लड इरेडिएटर इकाइयों में इस्तेमाल के लिए पचास ऐसी 50 पेंसिल उपलब्ध करायी गयी हैं। बिजली उत्पादन एन.पी.सी.आई.एल. ने वर्ष 2015-16 के दौरान 37,456 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त किया| परमाणु ऊर्जा विभाग उत्तरोत्तर स्वदेशी त्रि-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम जारी रखे हुए है और इस प्रकार वह डॉ. होमी भाभा की परिकल्पना के अनुसार और साथ ही अंतरराष्ट्रीय असैन्य परमाणु सहयोग पर आधारित अतिरिक्त सुविधाओं के आधार पर भारत के ऊर्जा-मिश्रण विकल्पों में योगदान दे रहा है। 5680 मेगावॉट बिजली के उत्पादन की कुल स्थापित क्षमता वाले 21 परमाणु ऊर्जा रिएक्टर हैं। न्यूक्लियर पॉवर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) ने 01-04-2015 से 31-03-2016 तक, इसी अवधि के दौरान 75 प्रतिशत समग्र क्षमता और 77 प्रतिशत उपलब्धता सहित 37,456 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया। वर्तमान में 10 और रिएक्टर निर्माणाधीन है, जिनके परिणामस्वरूप 7,700 मेगावॉट अतिरिक्त क्षमता आएगी और इस प्रकार इनके बनकर तैयार हो जाने पर कुल स्थापित क्षमता 13,380 मेगावॉट तक पहुंच जाएगी। मध्य प्रदेश के चुटका में दो स्थानों पर और राजस्थान के माही बांसवाड़ा में भूमि अधिग्रहण का कार्य प्रगति पर है। दिल्ली में ‘हॉल ऑफ न्यूक्लियर पॉवर’ राष्ट्रीय राजधानी में उत्तर भारत की पहली स्थायी प्रदर्शनी ‘हॉल ऑफ न्यूक्लियर पॉवर’ का उद्घाटन केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने 16 जनवरी, 2016 को किया। इस प्रदर्शनी में परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सुरक्षा और मानव कल्याण के अनुप्रयोगों पर प्रमुख रूप से ध्यान केंद्रित करते हुए परमाणु ऊर्जा के विभिन्न पहलुओं को कवर करने वाली 60 स्थायी वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय