बिजली बचत की तकनीक वाला पंप सेट यह एक किलोवाट और तीन किलोवाट में तीन प्रकार के मॉडल्स में उपलब्ध है: जल धारा, कृषि जल धारा और पवन जल धारा । यह पंप कुएं, तालाब, नहर आदि से विभिन्न प्रकार की ऊर्जा का उपयोग कर पानी खींच सकता है। बिजली के मामले में यह 60 प्रतिशत बचत ,ईंधन इंजन में 60 प्रतिशत की बचत और मवेशियों के संदर्भ में 100 प्रतिशत और सौर ऊर्जा के मामले में 60 से 70 प्रतिशत की बचत करता है। ईंधन और ऊर्जा की कम खपत के बावजूद पंप के कार्यक्षमता कम नहीं होती है। इसका संचालन सरल और टिकाऊ है। यह पंप उच्च मूल्य वाली खेती की किस्मों की सिंचाई के उपयोग में भी लाया जा सकता है। रोडन्ट प्रबन्ध कुतरने वाले जीवों (रोडन्ट) के प्रकोप का सामना करने का एक नया अभिनव तरीका चूहे कृषि के लिए एक बड़ी चुनौती प्रस्तुत करते हैं, विशेष रूप से मानसून के मौसम के बाद। रोडन्ट प्रबन्ध के लिए किसानों द्वारा आज़माए गए अन्य विकल्प किसान रोडन्ट नाशक और बाजरे के आटे को एक प्लास्टिक के आवरण में मिलाकर पेड़ के ऊपर फेंक देते हैं। इस मिश्रण को खाने के बाद चूहे मर जाते हैं। लेकिन मानसून के दौरान यह ज़हरीला चारा कारगर साबित नहीं होता है। किसान तली हुई मूंगफली, तिल, धनिये के बीज के पाउडर का एक मिश्रण कपड़े के एक बंडल में तैयार करते हैं और उसे पेड़ पर सबसे ऊपर रख देते हैं। लेकिन यह विधि खतरनाक साबित हुई क्योंकि ज़हर खा चुके चूहों को खाने वाले पक्षी भी मर गए। किसान चूहे पकड़ने वाले पेशेवरों की सेवा लेते हैं, लेकिन वे महंगे होते हैं, क्योंकि कुतरने वाले एक जीव को पकड़ने के लिए वे 25-30 रुपए लेते हैं। अभिनव जाल के बारे में तुमकुर जिला, कर्नाटक के श्री अरूण कुमार ने कीट के लिए पारिस्थितिकी के अनुकूल एक जाल तैयार किया है। जाल में एक बन्धनकारी तार होता है जो पुराने बाँस की टोकरी के चारों कोनों से जुड़ा होता है और प्लास्टिक के केवल एक धागे से जुड़ा होता है। प्लास्टिक का धागा नारियल के एक लम्बे पत्ते से जोड़ा जाता है जिसे कि ऊपर या नीचे खींचा जा सकता है। बांस की टोकरी के अन्दर एक स्नैप जाल लगाया जाता है और नारियल की गिरी का एक कटा हुआ टुकड़ा उससे जोड़ा जाता है।चूहे नारियल के टुकड़े की ओर आकर्षित होते हैं और जाल के अंदर मर जाते हैं। मृत चूहों को हाथों से निकालकर मिट्टी में दफन कर दिया जाता है। इस विधि से लगभग 3-4 चूहे फ़ंसाए और मारे जा सकते हैं। लेकिन यह एक स्थायी समाधान प्रदान नहीं करता, क्योंकि मृत चूहे शरीर से कुछ फ़ेरोमोन निकालते हैं जो अन्यों को उसी जगह पर फिर से प्रवेश करने से रोकने और दूसरे क्षेत्रों को जाने के लिए चेतावनी का काम करते हैं। श्री कुमार द्वारा विकसित जाल की कीमत रु. 30-35 प्रति जाल आती है। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें श्री एस.आर. अरुण कुमार शेट्टिकेरे, चिक्कनाइकनाहल्ली, तुमकुर ज़िला – 572226, फ़ोन: 08133-269564, मोबाइल: 09900824420 नारियल कटाई मशीन श्री पी. कुरूपैय्या, शहर - विरुद्ध नगर, राज्य - तमिलनाडु श्री कुरूपैय्या अपने गाँव वटरप (जिला- विरुद्ध नगर) में लेथ कारखाना चलाते हैं। अपने इस कारखाना में वे कृषि औजारों एवं अन्य उपकरणों का मरम्मत कार्य करते हैं। नारियल कटाई मशीन पके हुए सुपारी पेड़ से 50 फीट की ऊँचाई से काटने के लिए इस मशीन को विकसित किया। इस मशीन को संचालित करने के लिए दो व्यक्तियों की जरूरत होती ( एक व्यक्ति ट्रैक्टर चलाने के लिए और दूसरा व्यक्ति सुपारी की कटाई के लिए) इस मशीन को बरसात के मौसम सहित सालों भर उपयोग में लाया जा सकता है। इस मशीन की सहायता से 10 एकड़ नारियल की खेत से नारियल की कटाई की जा सकती है। इस प्रकार, इससे समय की और 800 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी की बचत की जा सकती है। संबंधित स्त्रोत 1. SRISTI