उद्देश्य पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग द्वारा डेयरी क्षेत्र में स्वरोजगार के अवसर पैदा करने, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, खरीद, संरक्षण, परिवहन, प्रसंस्करण और दूध के विपणन जैसी गतिविधियों की बैंक द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं को पूंजीगत सब्सिडी की सहायता प्रदान करने के लिए डेयरी उद्यमिता विकास योजना (डीईडीएस) को लागू किया जा रहा है। यह योजना राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा कार्यान्वित की जा रही है। मिलने वाले लाभ यह योजना डेयरी क्षेत्र में संरचनात्मक परिवर्तन लाने के लिए छोटे डेयरी फार्म और अन्य सहायक की स्थापना के लिए सहायता का विस्तार करना चाहती है। योजना के तहत सहायता चयनित सहायकों घटकों के लिए व्यक्तियों, स्वयं सहायता समूहों, गैर-सरकारी संगठनों, सहकारी समितियों को ब्याज मुक्त ऋण (IFL) के रूप में दी जाती है। किसान, व्यक्तिगत उद्यमी, गैर सरकारी संगठन ,कंपनियां, असंगठित और संगठित क्षेत्र के समूह इत्यादि। संगठित क्षेत्र के समूह में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), डेयरी सहकारी समितियां , दूध संगठन, दूध महासंघ आदि शामिल हैं। एक व्यक्ति इस योजना के तहत सभी घटकों के लिए सहायता ले सकता है लेकिन प्रत्येक घटक के लिए केवल एक बार ही पात्र होगा। योजना के तहत एक ही परिवार के एक से अधिक सदस्य को सहायता प्रदान की जा सकती है, बशर्ते कि इस योजना के अंतर्गत वे अलग-अलग स्थानों पर अलग बुनियादी सुविधाओं के साथ अलग इकाइयां स्थापित करें। इस तरह की दो परियोजनाओं की चहारदीवारी के बीच की दूरी कम से कम 500 मीटर होनी चाहिए। कैसे आवेदन करें उद्यमियों को परियोजना की मंजूरी के लिए अपने बैंकों में आवेदन करना होगा। उपयुक्त मानदंडों के आधाऱ पर बैंक परियोजना की अनुशंसा करेंगे और यदि वे उपयुक्त या पात्रधारी पाए जाते हैं तो बैंक मार्जिन को छोड़कर कुल परिव्यय व्यय को मंजूरी दे दी जाएगी। परियोजना की प्रगति के आधार पर उपयुक्त किश्तों में ऋण राशि प्रदान की जाती है। संपर्क करें भारत सरकार के कृषि मंत्रालय का पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग (DAHD & F) द्वारा इस योजना का संचालन किया जा रहा है। समय-समय पर राशि की उपलब्धता एवं डीएएचडी एंड एफ, भारत सरकार एवं नाबार्ड द्वारा जारी निर्देशों के आधार पर ही सब्सिडी की मंजूरी और निर्वाह किया जाता है। योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें