केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 जुलाई 2025 को छह वर्ष की अवधि के लिए "प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना" को स्वीकृति दे दी। यह योजना 2025-26 से 100 ज़िलों में लागू होगी। नीति आयोग के आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम से प्रेरित प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों पर केंद्रित पहली विशिष्ट योजना है। उद्देश्य पीएमडीडीकेवाई का उद्देश्य बहुआयामी ग्रामीण विकास के रूप में कार्य करना है। इसके पांच मुख्य उद्देश्य हैं: कृषि उत्पादकता में वृद्धि। फसल विविधीकरण और सतत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना। पंचायत और ब्लॉक स्तर पर कटाई के बाद भंडारण क्षमता में वृद्धि। विश्वसनीय जल सुविधा के लिए सिंचाई के बुनियादी ढांचे में सुधार। किसानों के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक कृषि ऋण तक बेहतर सुविधा को सक्षम बनाना। इन प्रयासों का उद्देश्य न केवल कृषि आय में सुधार करना है, बल्कि जलवायु-प्रतिरोधी और बाज़ार-उन्मुख कृषि प्रणालियों को भी सुनिश्चित करना है। योजना अवलोकन लक्षित जिले: मानदंड और चयन योजना में 100 जिलों की पहचान के आधार इस प्रकार हैं: निम्न उत्पादकता कम फसल सघनता कम ऋण भुगतान प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में जिलों की संख्या शुद्ध फसल क्षेत्र और परिचालन जोत के हिस्से पर आधारित होगी। हालांकि संतुलित भौगोलिक समावेशन सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक राज्य से कम से कम एक जिले का चयन किया जाना है। ये जिले परिवर्तन-संचालित कृषि सुधार के केंद्र बिंदु होंगे, जो उनकी कृषि-जलवायु परिस्थितियों और फसल पैटर्न के अनुरूप होंगे। संरचनात्मक डिज़ाइन और संस्थागत तंत्र पीएमडीडीकेवाई के तहत प्रत्येक चयनित जिले में जिला अधिकारी या ग्राम पंचायत की अध्यक्षता में एक जिला धन-धान्य कृषि योजना (डीडीकेवाई) समिति स्थापित की जाएगी। इस समिति में प्रगतिशील किसानों और विभागीय अधिकारियों को शामिल किया जाएगा ताकि व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके। डीडीकेवाई समिति निम्नलिखित के माध्यम से एक जिला कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों की योजना तैयार करेगी: व्यापक हितधारक परामर्श फसल पैटर्न और संबद्ध गतिविधियों को समझना स्थानीय कृषि-पारिस्थितिक स्थितियों का विश्लेषण राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ संरेखण, जैसे: फसल विविधीकरण मृदा एवं जल संरक्षण प्राकृतिक एवं जैविक खेती का विस्तार कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता ये योजनाएं जिले में सभी परिवर्तन योजनाओं के समन्वित कार्यान्वयन का मार्गदर्शन करेंगी। प्रत्येक धन-धान्य जिले की प्रगति को एक केंद्रीय निगरानी डैशबोर्ड पर 117 प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (केपीआई) का उपयोग करके ट्रैक किया जाएगा। इसकी मासिक समीक्षा, प्रदर्शन का आकलन करने, कमियों को उजागर करने और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए की जाएगी। बहु-स्तरीय शासन योजना का संचालन त्रि-स्तरीय कार्यान्वयन संरचना के माध्यम से किया जाएगा: जिला-स्तरीय समितियां राज्य-स्तरीय संचालन समूह राष्ट्रीय-स्तरीय निरीक्षण निकाय जिला स्तर पर गठित टीमों के समान राज्य स्तर पर भी टीमें गठित की जाएंगी। इनकी जिम्मेदारी जिलों में योजनाओं के प्रभावी परिवर्तन को सुनिश्चित करना होगा। केंद्रीय स्तर पर दो टीमें गठित की जाएंगी: एक टीम केंद्रीय मंत्रियों के अधीन और दूसरी सचिवों एवं विभागीय अधिकारियों के अधीन। प्रत्येक स्तर पर रणनीतिक योजना, कार्यान्वयन और समस्या समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। जमीनी स्तर पर निगरानी को मज़बूत करने के लिए, प्रत्येक ज़िले में केंद्रीय नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। ये अधिकारी नियमित रूप से क्षेत्र भ्रमण करेंगे, प्रगति की निगरानी करेंगे और स्थानीय टीमों के साथ समन्वय करेंगे। अपेक्षित परिणाम ध्यान देने योग्य प्रमुख बात यह है कि यह योजना केवल फसल कृषि पर ही नहीं, बल्कि फल, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, पशुपालन और कृषि वानिकी पर भी केंद्रित होगी। पैमाने, प्रौद्योगिकी और संस्थागत शक्ति का लाभ उठाकर, यह योजना ग्रामीण परिवर्तन में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए तैयार है। इस योजना के परिणामस्वरूप होने वाले लाभ: उत्पादकता में वृद्धि, कृषि और संबद्ध क्षेत्र में मूल्यवर्धन, स्थानीय आजीविका सृजन, घरेलू उत्पादन में वृद्धि, और आत्मनिर्भरता (यानी आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य) की प्राप्ति। स्रोत: पीआईबी