<h3 style="text-align: justify;">परिचय</h3> <p style="text-align: justify;">निःशक्त जन को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए वर्ष 1981-82 में हरियाणा निःशक्त जन पेंशन योजना आरम्भ की गई थी । इस योजना का उद्देश्य ऐसे निःशक्त जन, जो अपने साधनों से आजीविका कमाने में असमर्थ हों और जिन्हें सरकार से वित्तीय सहायता की आवश्यकता हो, को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। पेंशन की दरें, जो योजना के प्रारम्भ में 50/-रूपये मासिक थी, में 1-11-1999 से बढ़ाेतरी करते हुए 300/-रु. प्रतिमास की गई । सरकार द्वारा 100 प्रतिशत निःशक्त की पेंशन 1-1-2006 से बढ़ाकर 300/-रु. से 600/-रु. प्रतिमास की गई तथा इसमें और बढ़ोतरी करते हुए 60 प्रतिशत निःशक्त की पेंशन 500/-रु. एवं 100 प्रतिशत निःशक्त की पैंशन 750/-रू0 प्रतिमास की गई है । पेंशन की दर में 1-1-2014 से और वृद्धि करते हुए सभी दोनों श्रेणियों की पेंशन बढ़ाकर 1000/-रु. प्रतिमास कर दी गई । सरकार द्वारा इस योजना के अन्तर्गत 1-1-2015 से पेंशन की दर को बढ़ाकर 1200/-रु. प्रतिमास किया गया था। दिनांक 01.01.2016 से इस योजना के अन्तर्गत सरकार द्वारा दरों को बढ़ाते हुए पेंशन 1400/-रु. प्रतिमास प्रति लाभपात्र कर दी गई थी। अब दिनांक 01.11.2016 से इस योजना के अन्तर्गत सरकार द्वारा दरों को बढ़ाते हुए पेंशन 1600/- तथा दिनांक 01.11.2017 से पेंशन 1800/- रु.प्रतिमास प्रति लाभपात्र कर दी गई है तथा दिनांक 01.01.2020 से 2250/-रु. प्रतिमास प्रति लाभपात्र की गई है।</p> <h3 style="text-align: justify;">पात्रता मानदण्ड </h3> <p style="text-align: justify;">i)आयु 18 वर्ष या इससे अधिक<br />ii) हरियाणा का अधिवासी एवं आवेदन फार्म प्रस्तुत करने के 3 वर्ष पूर्व से हरियाणा राज्य में रह रहा हो<br />iii) उसकी स्वयं की सभी साधनों से मासिक आय श्रम विभाग द्वारा निर्धारित अकुशल मजदूर की न्यूनतम मजदूरी से अधिक न हो, और<br />iv)60-100 प्रतिशत निःशक्त हो ।</p> <p style="text-align: justify;">क) नेत्रहीन हो।<br />ख) कम दृष्टि<br />ग) कुष्ठ ठीक<br />घ) सुनने में परेशानी<br />ड) लोकोमोटर विकलांगता<br />च) मानसिक मंदता<br />झ) मानसिक बीमारी</p> <p style="text-align: justify;">ख) सामाजिक सुरक्षा लाभ देने हेतू सरकारी अधिसूचना में ‘‘पैंशन‘‘ से अभिप्राय आय की प्राप्ति अथवा अन्य स्त्रोत से आय व जिसमें योजनाएं शामिल है।<br />*प्रोविडेंट फण्ड, अथवा<br />किसी भी स्त्रोत से आय में व्यवसायिक बैंक, वितीय संस्थान अथवा बीमा आदि शामिल हैं।</p> <p style="text-align: justify;">ग)योग्य लाभपात्रों को सूचि में प्रतिमास जोड़ा जाता है ।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, हरियाणा सरकार, हरियाणा। </p>