01 जून,2020 को आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा पीएम पथ विक्रेता आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना की शुरुआत की गई । इस योजना का उद्देश्य कोविड-19 लॉकडाउन के कारण पथ विक्रेताओं के प्रभावित हुए व्यापार को फिर से शुरू करने के लिए किफायती कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना है। इस याेजना की अवधि मार्च 2022 तक था। इस योजना की शुरुआत से ही यह रेहड़ी-पटरी वालों के लिए वित्तीय सहायता से कहीं अधिक साबित हुई है और इसने उन्हें अर्थव्यवस्था में उनके योगदान के लिए एक पहचान और औपचारिक मान्यता प्रदान की है। यह ऋण अवधि अब 31 मार्च, 2030 तक बढ़ा दी गई है। इस योजना का कुल परिव्यय 7,332 करोड़ रुपए है। पुनर्गठित योजना का लक्ष्य 50 लाख नए लाभार्थियों सहित 1.15 करोड़ लाभार्थियों को लाभ देना है। लक्षित लाभार्थी योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, एक विक्रेता कोई भी व्यक्ति किसी सड़क, फुटपाथ, फुटपाथ आदि पर सामग्री, सामान, माल, खाद्य पदार्थ या दैनिक उपयोग के सामान की बिक्री या एक अस्थायी निर्मित ढ़ांचों से या एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर जनता को विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराते हैं उनके द्वारा उपलब्ध कराये गये सामान जिनमें सब्जियां, फल, रेडी-टू-ईट स्ट्रीट फूड, चाय, पकौड़े, ब्रेड, अंडे, कपड़ा, परिधान, कारीगर उत्पाद, किताबें / स्टेशनरी आदि शामिल हैं और अन्य सेवाओं में नाई की दुकान, चर्मकार, पान की दुकान, कपड़े धोने की सेवाएँ आदि शामिल हैं। ऋण लेने के लिए, एक विक्रेता के पास ऐसे पथ विक्रेता जिनके पास शहरी स्थानीय निकायों द्वारा जारी किया गया सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग/पहचान पत्र है। ऐसे विक्रेता जिन्हें पथ विक्रेता सर्वेक्षण में चिह्नित किया गया लेकिन वेडिंग का सर्टिफिकेट /पहचान जारी नहीं किया गया है। ऐसे पथ विक्रेता जो स्थानीय शहरी निकाय आधारित पहचान सर्वेक्षण में छूट गए थे अथवा जिन्होंने सर्वेक्षण पूरा होने के पश्चात बिक्री का कार्य शुरू कर दिया है एवं जिन्हें शहरी स्थानीय निकाय/टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) द्वारा इस आशय का सिफारिश पत्र (लेटर ऑफ रिकमेन्डेशन) जारी कर दिया गया है । वेंडिंग के उद्देश्य से बैंक/एनबीएफसी/एमएफआइ से लिए गए पिछले ऋण के दस्तावेज; या सड़क विक्रेताओं के संगठन जैसे एनएएसवीआइ,एनएचएफ, सेवा आदि की सदस्यता की स्थिति में सदस्यता विवरण, या कोई अन्य दस्तावेज जिससे साबित होता है कि वह एक विक्रेता है; विक्रेता एक साधारण पृष्ठ पर आवेदन के माध्यम से स्थानीय शहरी निकाय(यूएलबी) से स्थानीय पूछताछ से उसके उचित दावे की पुष्टि करने का अनुरोध कर सकता है। आवश्यक केवाईसी दस्तावेज :आधार कार्ड/ मतदाता पहचान पत्र/ ड्राइविंग लाइसेंस/ मनरेगा कार्ड/पैन कार्ड। अपना नाम स्ट्रीट वेंडर्स के सर्वेक्षण जांचने के लिए यहाँ क्लिक करें। योजना का लाभ उन्नत ऋण संरचना में प्रथम किश्त के ऋण को 15,000 रुपए (10,000 रुपए से) तक बढ़ाया गया है तथा द्वितीय किश्त के ऋण को 25,000 रुपए (20,000 रुपए से) तक बढ़ाया गया है जबकि तृतीय किश्त पहले की तरह 50,000 रुपए पर है। यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड की शुरुआत से स्ट्रीट वेंडरों को किसी भी आकस्मिक व्यावसायिक और व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तत्काल ऋण उपलब्ध हो सकेगा। इसके अलावा, डिजिटल प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए, स्ट्रीट वेंडर खुदरा और थोक लेनदेन करने पर 1,600 रुपए तक के कैशबैक प्रोत्साहन का लाभ उठा सकते हैं। यह योजना उद्यमिता, वित्तीय साक्षरता और डिजिटल कौशल के माध्यम से विपणन पर ध्यान केंद्रित करते हुए रेहड़ी-पटरी वालों की क्षमता निर्माण पर भी ध्यान देती है। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के सहयोग से रेहड़ी-पटरी वालों के लिए मानक स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे। रेहड़ी-पटरी वालों और उनके परिवारों के समग्र कल्याण और विकास को सुनिश्चित करने के लिए, मासिक लोक कल्याण मेलों के माध्यम से 'स्वनिधि से समृद्धि' पहल को और मजबूत किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लाभार्थियों और उनके परिवारों तक पूर्ण रूप से पहुंचे। कार्यान्वयन संस्था इस योजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी, आवास एवं शहरी मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) पर संयुक्त रूप से रहेगी। इसमें डीएफएस की भूमिका, बैंकों/वित्तीय संस्थानों और उनके जमीनी स्तर के अधिकारियों के माध्यम से ऋण/क्रेडिट कार्ड तक पहुंच को सुविधाजनक बनाने की रहेगी। भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक(सिडबी) ऑनलाइन आवेदन ऑनलाइन आवेदन के लिए क्लिक करें। संपर्क करें आपके निकटतम अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी), लघु वित्त बैंक (एसएफबी), सहकारी बैंक, गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियां (एनबीएफसी), सूक्ष्म वित्त संस्थान (एमएफआई) और एसएचजी बैंक। याेजना दिशानिर्देशों काे जानने के लिए यहां क्लिक करें। योजना के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न के लिए यहाँ क्लिक करें। स्रोत: आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय