योजना के उद्देश्य सम्पूर्ण राज्य में लागू इस योजना के तहत प्रदेश में पाई जाने वाली सभी उष्ट्र नस्लों हेतु सहायता देय होगी। योजना का लाभ दिनांक 02.10.2016 को अथवा इसके बाद उत्पन्न नर/मादा बच्चे (टोडिया) पर देय होगा। योजनान्तर्गत लाभार्थी ऊँट पालक का पंजीकरण अनिवार्य है। यह सुविधा राज्य के समस्त पशु चिकित्सालय में उपलब्ध होगी। पात्रता ऊँट पालक द्वारा ऊँटनी के गर्भधारण एवं गर्भकाल के संबंध में सूचना नजदीकी पशु चिकित्सालय को देना। पंजीकृत सभी उष्ट्र वंशीय पशुओं को औषधियां, खनिज लवण एवं कृमी नाशक दवा विभागीय पशुधन निःशुल्क आरोग्य योजना के प्रावधान अनुरुप उपलब्ध करवाना। ऊँटनी के ब्याने पर ऊँट पालक द्वारा एक माह के भीतर नजदीकी पशु चिकित्सालय में चिकित्सक को अनिवार्य रुप से प्रपत्र में सूचित करना। ऊँटनी एवं बच्चे दोंनों की टैगिंग सहित उनके फोटोग्राफ एवं अन्य संबंधित जानकारियों का संधारण अनिवार्य रुप से करना। पंजीकृत सभी उष्ट्र वंशीय पशुओं को राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड द्वारा संचालित भामाशाह पशु बीमा योजना के अन्तर्गत बीमा कराया जाना आवश्यक होगा। देय लाभ उष्ट्र विकास योजनान्तर्गत ऊँटनी के ब्याने पर उत्पन्न नर/मादा बच्चे (टोडिया) का आय अनुरुप कुल राशि रु 10000/-रुपये निम्न विवरण अनुसार स्वीकृत की जावेगी। क्र. सं नर/मादा बच्चे (टोडिया) की आयु आर्थिक सहायता 1 0 से १ माह की आयु पर ३०००/- 2 9 माह की आयु पर ३०००/- 3 १८ माह की आयु पर ४०००/- कुल रु. १००००/- इस बारे में अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें ।