परिचय योजना का उद्देश्य भारत को आपदा प्रतिरोधक बनाना और जन-जीवन की हानि को कम करना है। इसका उद्देश्य भारत को आपदा प्रतिरोधक बनाना और जन-जीवन तथा संपत्ति के नुकसान को कम करना है। यह योजना ‘सेनडाई फ्रेमवर्क’ के चार बिन्दुओं पर आधारित है। इनमें आपदा जोखिम का अध्ययन, आपदा जोखिम प्रबंधन में सुधार करना, ढांचागत और गैर ढांचागत उपायों के जरिये आपदा जोखिम को कम करने के लिए निवेश करना तथा आपदा का सामना करने के लिए तैयारी, पूर्व सूचना एवं आपदा के बाद बेहतर पुनर्निर्माण करना शामिल हैं। योजना के विशेष तत्व योजना के दायरे में आपदा प्रबंधन के सभी चरण शामिल हैं- रोकथाम, जोखिम कम करना, प्रत्युत्तर तथा बहाली। योजना के तहत सरकार के समस्त विभागों और एजेंसियों के बीच हर प्रकार के एकीकरण का प्रावधान किया गया है। योजना में पंचायत और शहरी स्थानीय निकायों सहित प्रत्येक सरकारी स्तर पर भूमिका और दायित्व के विषय में उल्लेख किया गया है। यह योजना क्षेत्रीय आधार को ध्यान में रख कर बनाई गई है जो न सिर्फ आपदा प्रबंधन के लिए बल्कि विकास योजना के लिए भी लाभकारी है। इसका डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि इसे आपदा प्रबंधन के सभी चरणों में समान रूप से लागू किया जा सकता है। इसमें पूर्व सूचना, सूचना का प्रसारण, चिकित्सा सेवा, र्इंधन, यातायात, खोज, बचाव आदि जैसी प्रमुख गतिविधियों को भी शामिल किया गया है ताकि आपदा प्रबंधन में संलग्न एजेंसियों को सुविधा हो सके। योजना के तहत बहाली के लिए एक आम फ्रेम वर्क भी बनाया गया है। इसके अलावा परिस्थितियों का आकलन करने और बेहतर पुनर्निर्माण के उपायों का भी उल्लेख किया गया है। समुदायों को आपदा का मुकाबला करने के सम्बंध में सक्षम बनाने के लिए योजना में सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियों पर अधिक जोर दिया गया है। ज्यादा जानकारी के लिए देखें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण । राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना की मुख्य विशेषताएं एनडीएमपी की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं : एनडीएमपी आपदा जोखिम घटाने के लिए सेंडैई फ्रेमवर्क में तय किए गए लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के साथ मौटे तौर पर तालमेल करेगा। योजना का विजन भारत को आपदा मुक्त बनाना है, आपदा जोखिमों में पर्याप्त रूप से कमी लाना है, जान-माल, आजीविका और संपदाओं - आर्थिक, शारीरिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय - के नुकसान को कम करना है, इसके लिए प्रशासन के सभी स्तरों और साथ ही समुदायों की आपदाओं से निपटने की क्षमता को बढ़ाया जाएगा। प्रत्येक खतरे के लिए, सेंडैई फ्रेमवर्क में घोषित चार प्राथमिकताओं को आपदा जोखिम में कमी करने के फ्रेमवर्क में शामिल किया गया है। इसके लिए पांच कार्यक्षेत्र निम्न हैं : जोखिम को समझना एजेंसियों के बीच सहयोग डीआरआर में सहयोग – संरचनात्मक उपाय डीआरआर में सहयोग – गैर-संरचनात्मक उपाय क्षमता विकास योजना के कार्यकारी हिस्से की पहचान 18 बड़े कार्यों के रूप में की गई है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं : पूर्व चेतावनी, मानचित्र, उपग्रह इनपुट, सूचना प्रसार पशुओं और लोगों को हटाना पशुओं और लोगों को ढूंढना और बचाना स्वास्थ्य सेवाएं पेयजल/निर्जलीकरण पंप/स्वच्छता सुविधाएं/सार्वजनिक स्वास्थ्य खाद्य और आवश्यक आपूर्ति संचार आवास और झोपड़ियों बिजली ईंधन परिवहन राहत रसद और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन पशु के शवों का निपटान प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारा पुनर्वास एवं पशुधन और अन्य जानवरों के लिए पशु चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करना डेटा संग्रह और प्रबंधन राहत रोजगार मीडिया सम्पर्क योजना में आपदा जोखिम की बेहतर शासन प्रणाली के लिए एक अध्याय भी शामिल किया गया है। केंद्र और राज्यों की संबंधित भूमिकाओं वाली विशेष एजेंसियों की सामान्यीकृत जिम्मेदारियां इस खंड में दी गई हैं। छह क्षेत्रों में केन्द्र और राज्य सरकारें आपदा जोखिम शासन प्रणाली को मजबूत करने के लिए कार्रवाईयां करेंगी : मुख्यधारा और एकीकृत डीआरआर और संस्थागत सुदृढ़ीकरण विकास क्षमता भागीदारीपूर्ण नजरिये को बढ़ावा देना चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ काम करना शिकायत निवारण प्रणाली आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए गुणवत्ता वाले मानकों, प्रमाणीकरण, आदि को बढ़ावा देना राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) आपदा प्रबंधन चक्र के सभी चरणों के लिए सरकारी एजेंसियों को रूपरेखा और दिशा प्रदान करता है। स्त्रोत:पत्र सूचना कार्यालय