परिचय रोजगार के लिए सीमित ससांधनों के बीच मत्स्य पालन व्यवसाय बेहतर लाभ वाला है और भारत- सरकार भी इसके प्रोत्साहन हेतु नियमित तौर पर विभिन्न योजनाओं का कार्यान्वयन करती है। मत्स्य पालन व्यवसाय को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार द्वारा संचालित अनेक कार्यक्रमों में मत्स्य शिक्षा यानी फिशरीज एजुकेशन को बढ़ावा देना मुख्य तौर पर शमिल है। इससे एक तो रोजगार की नई संभावनाएं पैदा हो रही है। तथा साथ ही इस क्षेत्र में शोध अध्ययन के लिए भी नए-नए अवसर खुले रहे है। मत्स्य शिक्षा में विदेशी सहयोग सेंट्रल, इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज एजुकेशन, काकोरी कैम्प सेवन बंगलो, वर्सोवा, मुम्बई की स्थापना वर्ष 1958 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के अंतर्गत की गयी थी। मत्स्य शिक्षा के क्षेत्र में इसका स्थान अग्रणी है। वास्तव में आज यह हमारे देश का एकमात्र मत्स्य शिक्षा विश्वविद्यालय है जहाँ मत्स्य जैविकी मत्स्य आर्थिकी, मत्स्य शिल्प इत्यादि विषयों की दो वर्षीय परास्नातक शिक्षा प्रदान की जाती है। आवश्यक योग्यता इसमें प्रवेश पाने के लिए विज्ञान विषय में स्नातक होना आवश्यक होता है। देश में मत्स्य विकास परियोजनाओं के लिए दक्ष मत्स्य विशेषज्ञ तैयार करना इस संस्थान का प्रमुख उद्देश्य है। खास बात यह है की इस संस्थान में केवल तीस छात्रों को प्रत्येक वर्ष प्रवेश दिया जाता है। अत: प्रतियोगता की दृष्टि से ज्ञान होना आवश्यक माना जाता है। मत्स्य शिक्षा के क्षेत्र में प्रमुख संस्थान मत्स्य शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न पाठ्यक्रमों को संचालित करने वाले कुछ प्रमुख संस्थानों, महाविद्यालयों के नाम इस प्रकार हैं। 1. कर्नाटक क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज, सूरखाल – फिस हार्बर इंजीनियरिंग 2. अन्नाकलाई विश्वविद्यालय, पोर्टनोवो (समुदायिक जीव विज्ञान) 3. मद्रास विश्वविद्यालय, चेन्नई (सागर तटीय जल जीव पालन) 4. केरल विश्वविद्यालय, तिरुवनंतपुरम (मत्स्य विज्ञान एवं जलीय जीव विज्ञान) 5. टाटा फंडामेंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट, मुम्बई पारास्नातक (डॉक एवं हार्बर इंजीनियरिंग) 6. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई पारास्नातक (सामुदायिक भु- रसायन) 7. कोचीन विश्वविद्यालय, कोचीन – पारास्नातक (अद्यौगिकी मत्सिकी) 8. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खडगपुर – बी. टेक. (नेवल आर्किटेक्ट एंड मैरिन इंजीनियरिंग) 9. इंजीनियरिंग कॉलेज, बाल्तेयर (फिशरीज इंजीनियरिंग एंड नेवल आर्किटेक्चर) 10. आन्ध्र प्रदेश विश्वविद्यालय बाल्तेयर (सामुदायिक भू- भौतिकी एवं जीव विज्ञान) अन्य संस्थान सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज एजूकेशन मुम्बई के अलावा कई अन्य क्षेत्रीय केन्द्रों से भी मत्स्य शिक्षा प्रदान करता है। संस्थान के आगरा तथा हैदराबाद केन्द्रों में अंत मरूस्थलीय मत्स्यपालन में प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसका एक क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ (चिनहट में स्थित है जहाँ अंतर मरूस्थलीय मत्स्य की सहकारिता विषय में नौ माह का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसी तरह इसका एक क्षेत्रीय केंद्र आंध्रप्रदेश में स्थित है, काकीपाड़ा मत्स्य केंद्र, इस केंद्र द्वारा मत्स्य विज्ञान प्रसार विधि एवं तकनीक की जानकारी दी जाती है। मत्स्य शिक्षा का एक अन्य एक वर्षीय पाठ्यक्रम सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज एजूकेशन की देखरेख मेंबैरकपुर (पश्चिम बंगाल) में संचालित किया जाता है। इस संस्थान द्वारा प्रत्येक वर्ष पचास छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। इसके लिए जीव विज्ञान विषय के साथ बारहवीं उत्तीर्ण होना आवश्यक शर्त माना गया है। देश का प्रथम मत्स्य विज्ञान महविद्यालय सन 1989 में मंगलौर में बंगलोर, कृषि विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित किया गया। इस संस्थान द्वारा फिशरीज एजुकेशन में स्नातकोत्तर की शिक्षा दी जाती है। फिशरीज की शिक्षा हेतु कालीकट विश्वविद्यालय का भी विशेष स्थान है। स्रोत: जेवियर समाज सेवा संस्थान, राँची