निधियों का प्रवाह प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के, खाते के प्रबधन हेतु, राज्य स्तरीय एजेंसी, राज्य मुखयालय में इटरनेंट संपर्कता के साथ किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र बैंक अथवा संस्था आधारित बैंक का चयन करेगा। चुने जाने के पश्चात् खाते को किसी भी अन्य शाखा अथवा बैंक को बदला नहीं जायेगा। बैंक से एक लिखित अन्डरटेकिंग लिया जाएगा कि वह पी एम जी एस वाई निधियों में से भुगतान भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप करेगा। संबंधित शाखा इंटरनेट संपर्कता बरकरार रखेगा और आन लाइन मेनेजमेंट और मानीटरिंग प्रणाली के उपयुक्त माडयूल मे डाटा डालेगा। राज्य स्तरीय एजेंसी एन आर आर डी ए और मंत्रालय को बैंक शाखा का विवरण और खाता संखया के संबंध में सूचना देगी। एन आर आर डी ए पहले यह सुनिश्चित कर लेगा कि दिशा-निर्देशोंकी आवश्यकताओं को पूरा कर लिया गया है और एन आर आर डी ए की सिफारिश पर, ग्रामीण विकास मंत्रालय इसी खाते में निधियों को रिलीज करेगा। राज्य स्तरीय एजेंसी, पी एम जी एस वाई के लिए केवल एक ही खाता रखेगी जिसमें से सारे भुगतान किए जाएँगें। यह खाता सड़क कार्य से संबंधित कार्यक्रम हेतु व्यय से संबंधित होगा। इस खाते का उपयोग किसी भी अन्य प्रद्गाासनिक व्यय (जैसे वाहनों और कार्यालय उपकरणों की खरीद) के लिए उपयोग में नहीं लाया जाएगा। कार्यक्रम के खर्च का विनियमन निम्नानुसार होगा : - कार्यक्रम के खर्च के लिए पी आई यू के अलग बैंक खाते नहीं होंगे। जैसा कि उपर्युक्त पैरा 12.1 में बताया गया है, पी आई यू के कार्यकारी अभियंता / पी आई यू के मुखिया ( जो पी आई यू के आहरण और वितरण अधिकारी हैं) को एजेंसी के पदेन सदस्य घोद्गिात किया जाएगा ताकि वे कार्यक्रम के खाने में से एजेंसी की निधियों का इस्तेमाल कर सकें। वे चैक जारी करने के लिए प्राधिकृत हस्ताक्षरी होंगे। एजेंसी एक अधिकार प्राप्त अधिकारी को नामित करेगा जो वरिश्ठ अधिकारियों में से एक हो, सामान्यतः वित्त नियंत्रक अथवा वह जो मुखय अभियंता के पद से नीचे न हो। अधिकार प्राप्त अधिकारी को ही हक होगा कि वह बैंकों को प्राधिकृत हस्ताक्षारियों के नाम सूचित करें, जो एजेंसी के बैंक खाते पर चैक जारी कर सकेंगे। अधिकार प्राप्त अधिकारी प्राधिकृत हस्ताक्षारियों की (जिलों के कार्यकारी अभियंता / पी आई यू के मुखिया) लिस्ट बैंकों को देंगे और अपने पास भी इस लिस्ट का रिकार्ड रखेंगे। समय पर इस लिस्ट की जांच होगी ताकि उसकी परिद्गाुद्धता सुनिश्चित की जा सके। प्राधिकृत हस्ताक्षरियों को बैंक अलग-अलग चैक बुक जारी करेगा और उनके हस्ताक्षरों का भी रिकार्ड रखा जाएगा। अधिकार-प्राप्त अधिकारी बैंको को प्राधिकृत भुगतान कर्ताओं (ठेकेदार और संभरक जिनके साथ समझौता किया गया हो और सांविधिक अधिकारी जैसे कि आई.टी.ओ.) के नाम और उनके निर्धारित भुगतान, खातों और प्रत्येक ठेकेदार और संभरक को देय राशि के बारे में जानकारी देंगे। यह किये गये कार्य समझौतों के अनुरूप होगा। संबंधित पैकेजों के लिए सहमत कार्य कार्यक्रम के अनुरूप मासिक भुगतानों के लिए उपयुक्त सीमा का निर्धारण अधिकार-प्राप्त अधिकारी कर सकते हैं। इस संबंध में अधिकार-प्राप्त अधिकारी बैंक शाखाओं को स्थायी निर्देश जारी करेंगे। निर्धारित भुगतानकर्ता के खातों को सूचित करते हुए, एकाउन्ट पेयी चैक द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्राधिकृत हस्ताक्षरी भुगतान करेंगे। इसके बाद तुरंत वे ओ.एम.एम.एस. के पेमेंट मोडयूल में चैक और भुगतान का विवरण डाल देंगे। चैक के मिलने पर, बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि पेमेंट मोडयूल में भुगतान के सारे विवरण दे दिये जा चुके हैं और इस बात को भी सुनिश्चित करे कि चैक सभी अन्य आवश्यकताओं पर खरा है जैसे उदाहरण हस्ताक्षर के साथ हस्ताक्षर का मेल खाना, चैक की राशि प्राधिकृत द्रोद्गा राशि के भीतर हो, भुगतानकर्ता प्राधिकृत हो और भुगतानकर्ता के खाते का सारा विवरण पूर्ण रूप से और ठीक से दे दी गई हों। बैंक आज्ञा नहीं देगा कि निधियों को प्राधिकृत हस्ताक्षरियों के अलावा अन्य कोई उपयोग करे और न ही ये निधियां पी एम जी एस वाई के अंतगर्त लिये गये कार्यों के भुगतान के अलावा अन्य किसी बात के लिए उपयोग में ली जाएगी। राज्य स्तरीय एजेंसी को भी छूट नहीं होगी कि वे इन निधियों को किसी अन्य बैंक / शाखा में, चाहे कम अथवा मध्यम समय-सीमा के लिए निवेद्गा करें और न ही वे इसे फिक्स डेपोसिट के अंतर्गत निवेद्गा कर सकते हैं। पी आई यू, राज्य स्तरीय और राष्ट्रीयग्रामीण सड़क विकास एजेंसी को बैंक पी एम जी एस वाई की निधियों के बारे में मासिक ब्यौरा प्रस्तुत करेगा। 9 बैंक, राज्य स्तरीय एजेंसी और ग्रामीण विकास मंत्रालय के बीच एक तीन-सूत्रीय समझौता ज्ञापन बनाया जाएगा जिसके तहत तीनों दिशा-निर्देशोंके प्रावधानों के अनुसार कार्य करने पर सहमत होंगे। विशेष रूप से, खाते के कार्यान्वयन पर बैंक, ग्रामीण विकास मंत्रालय / राष्ट्रीयग्रामीण सड़क विकास एजेंसी (एन आर आर डी ए) द्वारा समय पर जारी निर्देशों का पालन करेगा। निधियों के सुचारू प्रवाह और कार्यक्रम को प्रभावी बनाने हेतु एन आर आर डी ए समय पर आवश्यक निर्देश जारी कर सकता हैं। निर्माण विभाग द्वारा सुस्थापित लेखा प्रणाली के आधार पर एन आर आर डी ए द्वारा निर्धारित लेखा प्रणाली का इस कार्यक्रम के लिए उपयोग किया जाएगा। जो पैसा ब्याज के रूप में मिलता है उसे पी एम जी एस वाई की निधियों में जोड़ दिया जाएगा। जो खर्च इस ब्याज की राशि से होना होगा उसका हिसाब-किताब ग्रामीण विकास मंत्रालय / एन आर आर डी ए द्वारा समय पर जारी किए गए अनुदेद्गाों / मार्गनिर्देशों के अनुसार रखा जाएगा। बैंक राज्य स्तरीय एजेंसी और एन आर आर डी ए को उसके द्वारा समय≤ पर खाते में जमा की गई ब्याज की राशि की जानकारी देगा। राज्य स्तरीय एजेंसी को निधि रिलीज करने की प्रक्रिया चूंकि पी एम जी एस वाई उन सड़कों के मामले में जहां कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाना होता है, परियोजना दृद्गिटकोण अपनाया है इसलिए पी एम जी एस वाई के प्रत्येक चरण के लिए राज्य को मंजूर की गई परियोजना की लाागत राज्य स्तरीय एजेंसी को उचित किस्तों (4 किस्तों तक) उपलब्ध करायी जाएगी। किसी वर्ष विशेष में मंत्रालय द्वारा परियोेजनाओं के मूल्य के 25 प्रतिशत के राशि के बराबर की पहली किस्त मंत्रालय द्वारा परियोेजना को मंजूरी देने के बाद रिलीज की जाएगी और किस्तें कुल उपलब्ध धन का 60 प्रतिशत खर्च हो जाने के बाद और साथ ही चालू वर्ष से पिछले वर्ष तक कम से कम 80 प्रतिशत सड़क कार्य पूरा होने पर तथा ऐसी अन्य निर्धारित शर्तें, यदि कोई हैं, जो पिछले किस्त के रिलीज करने के समय थी, के पूरा होने पर रिलीज की जाएंगी। कुल उपलब्ध निधि (ब्याज सहित) वह उपलब्ध निधि मानी जाएगी जो राज्य स्तर एजेंसी के पास पिछली किस्त रिलीज करने के समय / और पिछली किस्त की राशि को मिलाकर थी। प्रत्येक किस्त की रिलीज के लिए (पहली को छोड़कर) नीचे (क) और (ख) में दी गई द्रार्तों को पूरा करना होगा जबकि (ग) और (घ) में दी गई शर्ताें को एक बार पूरा करना होगा। शर्तेंं निम्नानुसार है :- पहले रिलीज की गई राशि के लिए उपयोग प्रमाण-पत्र। उपयोग प्रमाण-पत्र निर्धारित प्रपत्र में होगा। बैंक मैनेजर का प्रमाण पत्र जिसमें प्रमाण-पत्र जारी करने की तारीख को द्रोद्गा राशि का उल्लेख होगा (यह राशि ऑन लाइन डाटा के बराबर होनी चाहिए)। ऐसा प्रमाण पत्र के जो कार्य दो वर्ष से अधिक समय से पहले मंजूर हुए थे, उन्हें पूरा कर लिया गया है और ऐसे कार्यों के लिए रिलीज की गई राशि का भी पूरी तरह से इस्तेमाल किया गया है। प्रत्येक वर्ष अक्टूबर के बाद की गई सभी रिलीज के लिए पिछले वित्तीय वर्ष के लेखों के लिए लेखा परीक्षित, लेखा विवरण और तुलन पत्र प्रस्तुत करना जिन्हें चार्टर्ड एकाउन्टेट्स ने विधिवत सत्यापित किया हो। फंड रिलीज करने के प्रयोजनार्थ राज्य इकाई होगा। लेखा-परीक्षा राज्य स्तरीय एजेंसी यह सुनिश्चित करेंगे कि लेखों की लेखा-परीक्षा वित्तीय वर्ष बंद होने के छः माह के भीतर किसी चार्टर्ड एकाउंटेंट से करायी जाती है। इस लेखे के समर्थन में पी आई यू के लेखों के साथ मिलान-विवरण और इसकी सत्यता के बारे में चार्टर्ड एकाउंटेंट का प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा लेखा-परीक्षा के अलावा इस कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यों के भारत नियंत्रक और महालेखापरीक्षिक के कार्यालय द्वारा भी लेखा परीक्षा की जाएगी। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक द्वारा लेखा-परीक्षा कार्य में वित्तीय लेखा-परीक्षा के अतिरिक्त गुणत्ता पहलुओं को भी लिया जा सकता है। स्टेट राज्य एजेंसी और पी आई यू दोनों जिला स्तरीय सतर्कता और मॉनीटरिंग समितियों और पंचायती राज संस्थाओं का सभी जानकारी उपलब्ध करायेंगे। विविध राष्ट्रीय ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी (एन आर आर डी ए) आई आई टी जैसी प्रतिद्गिठत तकनीकी और अनुसंधान संस्थाओं को प्रमुख तकनीकी एजेंसियों के रूप में निर्धारित करेगी ताकि तकनीकी सहायता उपलब्ध करायी जा सके और अनुसंधान परियोजना, अध्ययन और विभिन्न प्रौद्यौगिकियों का मूल्यांकन किया जा सके और ग्रामीण सड़कों की गुणत्ता और लागत मानदंड सुधारे जा सके। कार्य आदेश देने की तारीख से 15 दिन के भीतर अथवा सड़क कार्य के लिए नींव रखने के समय (जो भी पहले हो) सड़क कार्य स्थल पर साइनबोर्ड और पी एम जी एस वाई का लोगो लगाया जाना चाहिए। साइनबोर्ड पर कार्यक्रम का नाम (पी एम जी एस वाई), सड़क का नाम, निष्पादन ठेकेदार का नाम और उसका अनुरक्षण करने वाली पंचायती राज संस्था के नाम का उल्लेख होना चाहिए। ये वांछनीय होगा कि यह कार्य सड़क के दोनों सिरों पर स्थायी ईंट-पत्थर के राष्ट्रीय ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी, राज्य स्तर एजेंसी के साथ मिलकर, पी आई यू कार्मिकों के लिए उपयुक्त प्रशिक्षणकार्यक्रम चला सकती है। सड़कों के दोनों ओर फलदार और अन्य उपयुक्त पेड़ों के लगाने का काम राज्य सरकारों / संघ राज्य क्षेत्र के प्रशासनाें द्वारा अपने कोटा से किया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय समय पर ऐसे निर्देश जारी कर सकता है जो कार्यक्रम के अबाध क्रियान्वयन के लिए आवश्यक हो। परिवर्तन ग्रामीण संपर्कता अपने आप में पूरा नहीं है। यह एक साधन है। इस बात की आशा की जाती है कि संपर्कता से शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण आय आदि के सूचकांकों में सुधार होगा बशर्तें अनवर्ती कार्रवाई के रूप में और स्थानीय पंचायती राज संस्थाओं के परामर्द्गा से इन क्षेत्रों में अन्य चल रहे कार्यक्रमों में परिवर्तन लाया जा सके। यह आशा की जाती है कि इन मुद्दों पर जिला पंचायत ध्यान केन्द्रित करेगी। ग्रामीण सड़क कार्य शुरु होने से पहले बैंच मार्क संकेतको का माप लिया जा सकता है और इन्हें विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के साथ संलग्न किया जा सकता है। एन आर आर डी ए समय पर जिले में नये ग्रामीण संपर्क के प्रभाव को निश्चित करने के लिए स्वतंत्र अध्ययन के लिए शत-प्रतिशत प्रदान करेगी। स्त्रोत : ग्रामीण विकास मंत्रालय,भारत सरकार।