योजना एसएसए (सर्व शिक्षा अभियान) उपाय संकेतक :प्राथमिक (कक्षा 5) से उच्च प्राथमिक (कक्षा 6) में जाने की दर सभी विद्यालयों में कक्षा 5 के विद्यार्थियों की संख्या का आंकलन। कक्षा 5 में विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए जिले के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सीटों की उपलब्धता का आंकलन करने हेतु जिला शिक्षा अधिकारी शिक्षकों को निर्देश देंगे। सीटों की उपलब्धता के बारे में माता-पिता को सूचित करें ताकि विद्यार्थी बीच में ही पढ़ाई न छोड़ दें। यदि कोई विद्यार्थी स्कूल छोड़ देता है तो कक्षा 5 के शिक्षक को उनके घर पर जाना चाहिए और उन्हें कक्षा 6 में प्रवेश लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। जिला कलेक्टर द्वारा इस पारगमन (ट्रान्जीशन) की मॉनीटरिंग की जाए और अच्छा कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाए। योजनाएं एसएसए (सर्व शिक्षा अभियान), आरएमएसए (राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान) संकेतक: उच्च प्राथमिक (कक्षा 8) से माध्यमिक (कक्षा 9) में जाने की दर उपाय सीटों की पहचान के लिए उठाए गए कदमों की तरह माध्यमिक विद्यालयों में भी कक्षा 8 और 9 के लिए कार्य करना। विद्यालयों की लेखाजांच करना ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विद्यालयों में विद्यार्थियों की अपेक्षाओं को पूरा करने योग्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, जैसे – विद्यालय जाने वाली बालिकाओं की सुरक्षा, रजोनिवृत्ति संबंधी समुचित सुविधाएं, व्यावसायिक कौशल की शुरुआत आदि । योजनाएं एसएसए (सर्व शिक्षा अभियान) आरएमएसए (राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान) संकेतक : शौचालय सुविधा : सक्रिय कन्या शौचालयों वाले विद्यालयों का प्रतिशत उपाय शौचालयों के निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के लिए पंचायती राज विभाग के तहत सेवाओं और निधियों (फन्ड्स) का समायोजन जिला कलेक्टर करेंगे। इस संबंध में भारत सरकार पहले ही सलाह जारी कर चुकी है। अभिसरण हेतु जिला कलेक्टर (डीसी) स्वच्छ भारत कोष (वित्त मंत्रालय) के तहत शौचालयों के निर्माण के लिए निधि प्राप्त करने हेतु मानव संसाधन विकास मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा और साक्षरता विभाग को प्रस्ताव भेज सकते हैं। रजोनिवृत्ति के दौरान उचित देख रेख हेतु अभिनव तौर-तरीकों का प्रयोग करना। स्थानीय स्तर पर सैनिटरी नैपकिन तैयार करने से जुड़े कई सर्वोत्तम कार्य-व्यवहार प्रचलन में हैं। संकेतक सक्रिय पेयजल सुविधाओं वाले विद्यालयों का प्रतिशत उपाय पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय ने दिनांक 15.03.2018 के अपने पत्र द्वारा सभी आकांक्षी जिलों में पाईपयुक्त जलापूर्ति के प्रावधान को मंजूरी दी है। जिला कलेक्टर को राज्य/जिले के संबंधितअधिकारी से सम्पर्क कर सभी विद्यालयों में पाईपयुक्त पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए। योजनाएं सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) सीएसएसटीई (अध्यापक शिक्षा संबंधी केंद्र प्रायोजित स्कीम) उपाय एनसीईआरटी की वेबसाइट के होमपेज पर नेशनल अचीवमेंट सर्वे-2017, पर क्लिक करके जिले की प्रगति का अध्ययन करना। यहां ज़िले का रिपोर्ट कार्ड प्रदर्शित किया जाता है। शैक्षिक परिणामों की पहचान करना जिसके लिए विशेष हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है। शिक्षक प्रशिक्षण हेतु जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान (डीआईईटी) अथवा जिले में किसी अन्य प्रतिष्ठित गैर-सरकारी संगठन (एन जी ओ) से संपर्क करना। कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त अध्ययन की सुविधा उपलब्ध कराना। यह शिक्षण कार्य विद्यालय समय के पश्चात किया जा सकता है। यह सुनिश्चित करना कि विद्यालय समय पर खुलें, कक्षा अध्यापक मौजूद रहें और पढाएं भी। शिक्षण परिणामों में सुधार हेतु विद्यालय प्रबंधन समिति, महिला स्वयं सहायता समूहों तथा ग्राम पंचायतों का सहयोग प्राप्त करना। विद्यार्थियों के लिए शिक्षा को आनंददायी और आकर्षक बनाने हेतु शिक्षकों को प्रोत्साहित करना. योजना प्रौढ़ शिक्षा योजना संकेतक : महिला साक्षरता (15 वर्ष से अधिक) उपाय शिक्षित लोगों की पहचान करना, जैसे- राष्ट्रीय सेवा योजना और नेहरु युवा केन्द्र के स्वयंसेवी,सेवानिवृत्त सरकारी तथा अन्य व्यक्ति, होम मेकर्स आदि जो पढ़ाने के लिए इच्छुक और स्वप्रेरित हों। प्रत्येक टीम में ऐसे 10 व्यक्तियों को शामिल करना जिनका नेतृत्व ऐसा शिक्षक करे जिसने प्रौढ़ शिक्षण का प्रशिक्षण प्राप्त किया हो। जिला शिक्षा अधिकारी ऐसे शिक्षकों को पहचानने में मदद करेगा। महिला स्वयं सहायता समूहों, ग्राम पंचायत, आईसीडीएस कर्मचारियों, आशा सहयोगिनी या अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग लेना। अध्यापन के लिए अभिनव तौर-तरीकों का विकास करना, जैसे संगीत और नाटक का उपयोग। संकेतक : विद्युत सुविधायुक्त माध्यमिक विद्यालयों का प्रतिशत उपाय : दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 99.8 प्रतिशत गांवों का विद्युतीकरण कर दिया गया है। जिले के विद्युतीकृत गांवों में स्थित समस्त माध्यमिक विद्यालयों में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करना। योजना एसएसए (सर्व शिक्षा अभियान) संकेतक : आरटीई द्वारा दर्शाए गये छात्र-शिक्षक अनुपात वाले प्रारंभिक विद्यालयों का प्रतिशत उपाय जिला कलेक्टर द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया जायेगा के वे ऐसे प्रारंभिक विद्यालयों की सूची तैयार करें जिनमें आरटीई मानदंडों के अनुसार शिक्षकों की संख्या ज्यादा कम है। जिले के भीतर शिक्षकों की पुनतैनाती करें ताकि अधिकतर विद्यालयों में आरटीई मानदंडों के अनुरुपअपेक्षित संख्या में शिक्षक लगाये जा सकें। जिलाधिकारी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शिक्षक विद्यालयों में नियमित रूप से आएं और कोई फर्जी शिक्षक न दिखाया जाए। योजना एसएसए (सर्व शिक्षा अभियान) संकेतक : शिक्षा सत्र शुरु होने के 1 माह के भीतर बच्चों को पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने वाले विद्यालयों का प्रतिशत उपाय विद्यालय सत्र के अंत में, प्रत्येक सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय में बुक बैंक तैयार करने के लिए यथासंभव पाठ्यपुस्तकें वापस एकत्रित की जाएं। यह सुनिश्चित करने का उत्तरदायित्व प्रधानाचार्यों और प्रधानाध्यापकों को सौंपा जाना चाहिए। ये पाठ्यपुस्तकें बच्चों को अगले सत्र में वितरित की जा सकती हैं। जिला कलेक्टर को राज्य सचिव, शिक्षा विभाग से यह सुनिश्चित करने के लिए बात करनी चाहिए कि उनके जिले में सभी प्रारंभिक विद्यालयों में नई पाठ्यपुस्तकें समय पर पहुंच जाएं। स्त्रोत: नीति आयोग,भारत सरकार ।